Saturday, October 11, 2014

Essay on Beauty in Hindi


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सुन्दरता : सुन्दर दिलों का अहसास 

‘सुन्दरता’ एक सुन्दर शब्द...पर सौन्दर्य के सिर्फ कुछ मापदंड तय करके हमने अपनी संकीर्ण बुद्धि से इस शब्द की असीमितता को कितना सीमित कर दिया है. आज सुन्दरता की परिभाषा बस एक आकर्षक देह तक सिमट कर रह गयी है. शरीर के लिए रंग, लम्बाई, वजन, विभिन्न अंगों का आकार ऐसे ही कुछ पैमाने हमने तय कर दिए हैं. पर अधिकाशतः ये चीजे इंसान को प्रकृति प्रदत्त होती है जिसमें उसका स्वयं का हाथ नहीं होता. ऐसे मैं जिन चीजों को पाना इंसान के बस में ना हो उनके आधार पर बेहतरी या सुन्दरता का आंकलन कैसे किया जा सकता है ? 

अब अगर नारी सौन्दर्य की ही बात की जाए तो अधिकांश पुरुषों के लिए नारी उस किताब की तरह है जिसका सिर्फ कवर पेज खूबसूरत होना चाहिए. क्या नारी की सुन्दरता का मापदंड बस उसका बाहरी रंग रूप ही होता है ? क्या दया ममता, त्याग, संवेदनशीलता, सहनशक्ति, सामंजस्य जैसे नारी के मूलभूत गुणों का कोई महत्व नहीं ? 

एक माँ के रूप में अपने बच्चे के लिए ममत्व भाव, एक पत्नी के रूप में अपने पति के लिए प्यार, परवाह और समर्पण, एक बहन के रूप में अपने भाई के लिए किये गए त्याग क्या इनका कोई मोल नहीं ? सच तो यह है कि बाहरी रंग रूप के सामने इन भावों की सुन्दरता अनमोल है. खैर ये तो अपनों की बात है पर सोचिये वे लोग कितने सुन्दर होते होंगे जिन्होंने मानवता की सेवा को ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है. 

मदर टेरेसा एक ऐसी महिला जिन्होंने अपना सारा जीवन दूसरों के नाम कर दिया. जिन्होंने कोढ़ झरते हुए, फुटपाटों पर पड़े मरणासन्न, असहाय, गन्दी से गन्दी बस्ती के लोगों की सेवा की. उनका उपचार कर उन्हें स्वस्थ बनाया. उन्हें उन लोगों की गंदगी नहीं दिखाई दी बल्कि उनकी सेवा से मिलने वाला आत्मिक सुख दिखाई दिया. इस सेवा भाव में है सुन्दरता. इसी तरह महात्मा गाँधी, तिलक, राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद जैसे कई महापुरुष हुए हैं जिन्होंने तत्कालीन समाज की रूढ़िवादिता, कट्टरवादिता, अंधविश्वासों आदि को दूर कर मानवता को एक नयी दिशा दी. उनकी इस सोच और इन कार्यों में है सुन्दरता. 

सुन्दर हैं वे लब जिनसे दूसरों के लिए दुआएं निकलती है, दूसरों को खुश देखकर खिलने वाली मुस्कान भी सुन्दर है, सुन्दर है वह दिल जो दूसरों का दर्द समझे, दूसरों के गम में बहने वाले आंसू भी सुन्दर है, सुन्दर हैं वे हाथ जो दूसरों की मदद के लिए उठते हैं और सोचिये ये सब करने वालों की सोच कितनी सुन्दर होगी. 

हमारे देश की विडंबना है कि करोड़ों रुपये लेकर हमारा मनोरंजन करने वाले सचिन, शाहरुख़, सलमान, कैटरीना, ऐश्वर्या के हम दीवाने हैं जो हर वक्त हमारे दिलोदिमाग पर छाए रहते हैं पर मानवता की सेवा करने वाले असली महानायक हमारी चर्चा का विषय नहीं बनते. मुन्नी बदनाम हुई, शीला की जवानी इन आइटम सोंग के ठुमके हमें पागल कर देते हैं पर कई मुन्नियों और शीलाओं जिनका जीवन दलदल बना हुआ है उनकी मसीहा बनकर आई नारी शक्ति की हम बात नहीं करते. वे हमारी प्रेरणा नहीं बनती. 

आज हर किसी में बस अपने बाहरी रंग रूप को संवारने की होड़ लगी हुई है. सुन्दरता को सफलता का शॉर्टकट माना जा रहा है. विज्ञापनों में भी गोरा रंग पाने की क्रीम, साबुन, रेशमी घने बालों के लिए शैम्पू, कंडीशनर आदि को सफलता पाने के साधनों के रूप में परोसा जा रहा है. और हम इन्हें सहर्ष सुन्दरता वर्धक मानकर ग्रहण भी करते जा रहे हैं. 

पर वास्तविक सुन्दरता का आंकलन व्यक्ति की सोच, उसके व्यवहार और उसके कार्यों के आधार पर ही किया जा सकता है. सच तो यह है कि सुन्दरता एक अहसास है जो देखने से भी ज्यादा महसूस करने की चीज है. और यह बसती है लोगों के दिलों में जिसे महसूस करने के लिए भी एक सुन्दर दिल चाहिए. 

By Monika Jain ‘पंछी’

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