Wednesday, October 8, 2014

Poem on Gender Discrimination in Hindi


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मैं एक लड़की 

एक ज़िन्दगी नहीं, फिर भी ज़िन्दा हूँ मैं.
ख्वामखाह ही खुद से शर्मिंदा हूँ मैं.
अपनी अनकही दास्तां तुमसे कहने जा रही हूँ.
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ.

मैं नैया पार ना कर सकूंगी,
मुझ पर इतना सा ही भरोसा था.
मेरे आने की खबर पर,
मेरी माँ ने खुद को कोसा था.
जब-जब तुम थकते मेरी बाहें आगोश होतीं,
ज़िन्दगी के हर चौराहे भले ही मैं खामोश होती.
जाने कितने घुटन...मैं ज़माने से सहते आ रही हूँ
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ.

कितनी अंधेरी रातों में, दीये सी जलती मैं.
कुछ बेरहम मुट्ठियों से, रेत सी फिसलती मैं.
बेशक मुझ पर तुम एक निगाह ना बख्शो,
साथ तुम्हारे हर घड़ी किसी साये सी चलती मैं.
मैं एक दुआ... जो सुर्ख लबों पे रहते आ रही हूँ.
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ.

तुम्हे रखती ज़माने से महफ़ूज, वो हिज़ाब थी मैं.
सारी कायनात हो बयां जिसमे, वो किताब थी मैं.
जीने की एक तमन्ना लेकर तो चली थी, पर
जो उतर न सका कि नज़र में, वो ख़्वाब थी मैं.
मैं एक नज़र...सब चुपचाप तुमसे कहते आ रही हूँ.
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ.
मैं एक लड़की...जहां में आने से पहले जा रही हूँ...!!

By Malendra Kumar ‘मलेन्द्र कुमार’

Stop #Raping me, #Harassing me, #Hating me, #Torturing me, #Molesting me and above all this #KILLING me.

Thank you Malendra for sharing such a heart touching and thought provoking poem about the crucial issue of gender discrimination and Killing Girl Child.