Saturday, June 11, 2016

Bewafa Ghazal in Hindi

बेवफ़ा हिंदी गज़ल, बेवफ़ाई नज़्म, वफ़ा शेर ओ शायरी, कविता. Bewafa Ghazal in Hindi. Bewafai Gazal, Wafa Sher O Shayari, Disloyalty Poetry, Loyalty Nazm, Poem, Kavita.

आज वह गुमनाम है

पंख सारे कुतर डाले, थम गयी उड़ान है
उस बेवफ़ा की बेवफ़ाई जा चढ़ी परवान है।

फूल से कोमल कभी जिसके सब अहसास थे
अब फूल पे पत्थर गिराना, उस शख्स की पहचान है।

चाँद, तारे, तितलियाँ शब्द मुखरित थे कभी
प्यार की महफ़िल पे अब सज रहा शमशान है।

आँखों में बनकर सितारे टिमटिमाते स्वप्न थे
अब आँसुओं से भीगता दिल का हर अरमान है।

सुर्ख़ियों में थे कभी मोहब्बत के किस्से सभी
अब नफरतों में जल रहा प्यार का पैगाम है।

जिसके सीने से कभी बहते थे झरने प्यार के
अब वहाँ बसने लगी बस सख्त एक चट्टान है।

हर कदम पे साथ चलने की कसम खायी थी जिसने
आज वो उन रास्तों से हो गया अनजान है।

क्या कहूँ, क्या करूँ, क्या मैं अब सोचूँ भला
खिलखिलाती थी जो कल तक, आज वह गुमनाम है।

By Monika Jain ‘पंछी’

Many of us go through the emotional pain of disloyalty or broken heart. It’s one of the greatest suffering we ever experience in our life. The above ghazal ‘Bewafa’ is an effort of reflecting such emotional pain through words.

How is this hindi ghazal ‘Bewafa’?