Saturday, November 15, 2014

Poem on Nari Shakti in Hindi


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हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम

हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम
स्वयं में ही सकल सृष्टि का सार तुम
हे स्त्री! इस जीवन का आधार तुम.

तुम वृहद् हो इस संपन्न धरा-सी
तुम शीतल हो निशा के चंद्रमा-सी
तुम पर्याय समस्त पुष्पित प्रस्फुटन का
तुम चंचल हो शोख नदी की धारा-सी.

हो स्वयं ही किसी भवसागर का पार तुम
हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम.

तुम्हारे ह्रदय में तदर्थ करुणा
निश्चेष्ट है यह सकल तृष्णा
संध्या की पवित्र निस्तब्धता हो तुम
परे है तुमसे क्रोध, ईर्ष्या, घृणा.

निर्मल, निश्छल-सी खुद में एक संसार तुम
हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम.

धरा पर वात्सल्य का व्यक्तित्व तुमसे
मेरा व समग्र विश्व का अस्तित्व तुमसे
तुमसे ही एकाकी अर्धचंद्र की शीतलता
जुड़ा है सृष्टि के वहन का दायित्व तुमसे.

समस्त समर्थ मर्यादा का उद्गार तुम
हे स्त्री ! इस जीवन का आधार तुम.

कम होगा गान तुम्हारा कंपित स्वर से
आपूरित है जग तुमसे ममता के वर से
शारदीय प्रभात, मध्यनिशा, अष्टप्रहर तुमसे
झंकृत है जीवन प्रवाह तुम्हारे सुर से.

दो आज कृतज्ञ होने का अधिकार तुम
स्वयं में ही सकल सृष्टि का सार तुम
हे स्त्री! इस जीवन का आधार तुम. 

By Malendra Kumar ‘मलेन्द्र’

Thank you ‘Malendra’ for sharing such a beautiful poem describing women in a true sense. 


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