Friday, June 26, 2015

Ajnabi Shayari in Hindi


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अजनबी 

(1)

जो तुम अजनबी ही रहते
तो जिंदा होता मुझमें बहुत कुछ,
तुम्हें जानने की कीमत
मैंने खुद को खोकर चुकाई है. 
कैसे माफ़ कर दूँ तुम्हें
कैसे भूल जाऊँ सब कुछ, 
फितरत तो आज भी तेरी 
खुदगर्जी में लिपटी बेवफ़ाई है.

(2)

चलो फिर से अजनबी बन जाएँ हम
गिले शिकवे सारे भूल जाएँ हम
शुरुआत करे एक नयी दोस्ती की
हुई जो गलतियाँ वो फिर ना दोहराएँ हम.

(3)

अजनबी हीं है सब इस दुनिया में मेरे दोस्त! 
किसी को जान पाना उफ! एक उम्र भी काफी नहीं होती. 

(4)

ख़्वाब बुनना कब का भुला चुके हैं 
अपने और अजनबी का भेद हम मिटा चुके हैं 
अब तो हर अपना अजनबी और हर अजनबी है अपना 
किसी को खास बनाने का अब रहा ना कोई सपना.

(5)

अजनबी में अपनापन हम भी तलाशते हैं 
जीने की आरजू को कुछ यूँ तराशते हैं.

(6)

अक्सर ये भरोसे टूट जाते हैं,
जो दिल के हैं करीब
फिर अजनबी बन छूट जाते हैं.

(7)

तुम कहते हो तो कर लेते हैं
उस अजनबी से हम बात, 
पर डरते हैं अब अजनबियों से 
इस मासूम दिल के जज्बात.

(8)

सच! कुछ लोग होते हैं जादूगर,
हर पल को दीवाना बना जाते हैं. 
जाते हैं जब तो ऐसे जाते हैं, 
हमें खुद से भी अनजाना बना जाते हैं.

(9)

अपनों की कमी कुछ यूँ छिपा लेती हूँ 
किसी अजनबी को देखकर मैं मुस्कुरा लेती हूँ.

(10)

तुम जब भी मिलो तो अजनबी बनकर ही मिलो 
ये जान-पहचान मुझसे अब हो ना पाएगी 
टूटे सपनों की किरचे अब तक चुभी हैं आँखों में 
नयी उम्मीदें फिर से, पाली ना जायेगी. 

(11)

चाहे तुम अजनबी बनकर ही रहो
पर तुम्हारा होना तसल्ली देता है.

By Monika Jain ‘पंछी’


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