Thursday, November 24, 2016

Poem on Agni in Hindi

नफरत की आग कविता, अग्नि शायरी, घृणा, प्रेम. Poem on Agni in Hindi. Love and Hate Poetry, Fire of Hatred Rhyme, Flame of Hope Lines, Light Slogans, Bitterness. 
Poem on Agni in Hindi

प्यार की फुहार

कल रात जब पढ़ा मैंने हम सब के मन को
तो एक सिहरन सारे तन में दौड़ गयी
कंपकपाती ठण्ड में भी एक परेशानी
मेरे माथे पर छलकता पसीना छोड़ गयी।

घबराहट और बेचैनी के साथ
न जाने कब तक मैं जागती रही
नफरत की आग से उड़ रहा था जो धुआँ
उसमें सारी रात मैं खांसती रही।

असंख्य विचारों की विरोधाभासी आंधियाँ;
धर्म, संप्रदाय, नीति और मतों के उड़ते पत्ते
नफरत की उस आग को हर एक पत्ता
अपने-अपने तरीके से हवा दे रहा था
मानो दुनिया का हर एक दिल
प्रेम को अलविदा कह रहा था।

‘क्या इसी तरह हो जाएगा
एक दिन इस दुनिया का अंत?’
मेरा मन बस यही सोचकर बैठा जा रहा था
एक अजीब सा खौफ मेरे दिल और दिमाग में
पल-पल पैठा जा रहा था।

मैंने बहुत ढूंढा, हाँ! मैंने बहुत ढूंढा -
मिल जाए कहीं प्यार की एक मीठी बूँद
जो ठंडा करदे इस कड़वाहट की आग को
विचारों में हो चाहे जितनी भी विविधताएँ
पर बस थाम ले इस भीषण विवाद को।

सूरज की किरण ने अचानक मेरा दरवाजा खटखटाया
पर मेरे दिल का खौफ अभी तक भी कहाँ मिट पाया?

बाहर निकलकर देखा -
कबूतरों का एक जोड़ा दुनिया से बेखबर
प्यार में खोया हुआ था
सड़क पर दूसरे शहर को जा रही
एक औरत के आँचल में
उसका नन्हा सा बच्चा चैन से सोया हुआ था।

प्रेम और सुरक्षा के इन भावों ने
दिल को जैसे एक गर्माहट दी
दूर हुआ सारा खौफ और
तन-मन की घबराहट भी।

प्यार की यही फुहार
बस अब हर जगह बरस जाए
नफरत में हर पल जलती ये दुनिया
बस किसी भी तरह से बच जाए।
बस किसी भी तरह से बच जाए।

By Monika Jain ‘पंछी’


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