Wednesday, December 3, 2014

Story on Hard Work in Hindi


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श्रम का महत्व 

एक गाँव में चन्दन नाम का एक व्यापारी था. वह एक पुत्र और एक पुत्री का पिता था. उसका पुत्र बहुत ही गैर जिम्मेदार और आलसी था. वह हमेशा बस दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में लगा रहता था. चन्दन चाहता था कि वह मेहनती बनें पर वह पिता की एक नहीं सुनता. इस वजह से पिता बहुत परेशान रहता था. 

एक दिन चन्दन ने अपने पुत्र को बुलाया और कहा, ‘ आज तुम्हें खाना तभी मिलेगा जब तुम कुछ कमाकर लाओगे, वरना आज तुम्हें भूखा ही रहना होगा.’ पुत्र यह सुनकर माँ के पास जाकर रोने लगा. पुत्र को रोता देखकर माँ का दिल पिघल गया. माँ ने उसे 100 रुपये दिए और कहा कि पिता जब पूछे तो यह दे देना. 

शाम में जब चन्दन ने पुत्र से कमाई के बारे में पूछा तो पुत्र ने वह 100 रुपये का नोट पिता को दे दिया. पिता ने वह नोट पुत्र को कुएँ में डालकर आने के लिए कहा. पुत्र आराम से वह नोट कुएँ में डालकर आ गया. 

चन्दन ने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया और पुत्र को अगले दिन फिर कुछ कमाकर लाने के लिए कहा. इस बार पुत्र अपनी बहन के पास गया और रोते-रोते सारी बात बताई. बहन ने भी उसे 50 रुपये दे दिए. शाम को चन्दन के पूछने पर पुत्र ने 50 रुपये दिखा दिए. चन्दन सब समझ गया. उसने पुत्र को वे 50 रुपये भी कुएँ में डाल आने को कहा और पुत्र ने बिना किसी सवाल के ऐसा ही किया. चन्दन ने अगले दिन बेटी को भी ससुराल भेज दिया और फिर से पुत्र को कुछ कमाकर लाने के लिए कहा. 

पुत्र के पास अब कोई चारा नहीं था. वह बाजार गया और एक जगह जाकर बैठ गया. एक सेठ को कुछ लकड़ियाँ अपने घर पहुँचानी थी. पुत्र के पूछने पर वह सेठ उसे लकड़ियाँ घर पहुँचाने के बदले 10 रुपये देने को तैयार हो गया. पुत्र लकड़ियाँ लेकर चलने लगा. उसके हाथ छिल गए और पैरों में भयंकर दर्द होने लगा. शाम को थका हारा वह घर पहुँचा और पिता को वे 10 रुपये दिए. पिता ने फिर उन रुपयों को कुएँ में डालकर आने के लिए कहा. पुत्र को इस बार गुस्सा आया और उसने कहा, ‘ ये रुपये मैंने इतनी मेहनत से कमायें हैं और आप इन्हें कुएँ में डालकर आने की कह रहें हैं ?’ 

चन्दन ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘ बेटा, मैं यही तो तुम्हें सिखाना चाहता था. तुमने 150 रुपये बड़ी आसानी से कुएँ में फेंक दिए और ये 10 रुपये फेंकने में तुम्हें कष्ट हो रहा है क्योंकि ये तुम्हारी मेहनत की कमाई है. ‘ चन्दन ने अपनी दूकान की चाबी पुत्र के हाथ में दी और कहा, ‘अब तुम दुकान सँभालने लायक हो गए हो क्योंकि अब तुम श्रम का महत्व जान चुके हो.’ बेटे ने पिता के पैर छुए तो पिता ने बेटे को गले से लगा लिया. 

Note : The above hindi story about hard work is not my own creation. I read it somewhere and sharing it here.