Friday, February 28, 2014

Short Stories in Hindi


Short Stories in Hindi Language for Kids, Children, Very Small Inspirational Tales with Moral, Laghu Kahaniyan, Chhoti Kathayen, Story, Tale, Kahani, Katha, लघु कहानियां, कथाएं, छोटी कहानी, कथा 

(1)

बुराई का जड़ से खात्मा 

एक बार चाणक्य अपने शिष्यों के साथ सम्राट चन्द्रगुप्त से राजकाज सम्बन्धी कार्यों के लिए मिलने जा रहे थे. रास्ते में एक मैदान था जिसमें एक विशेष प्रजाति कुश नामक घास उगी हुई थी. चाणक्य जब उस मैदान से गुजर रहे थे तब कुश का तीखा और नुकीला सिरा उनके पांव में चुभ गया. उनके मुंह से आह निकल गयी. 

चाणक्य ने नीचे झुककर उस घास को देखा और फिर अपने शिष्यों से कुदाल मंगवाई और फिर स्वयं अकेले ही अपने हाथों से मैदान की सारी घास को उखाड़ना शुरू कर दिया. जब सारी घास उखड़ गयी तो चाणक्य ने कुश घास की जड़ों को भी निकालकर जला दिया. तत्पश्चात उन्होंने अपने शिष्यों से मठ्ठा ( कच्चा घी जो छाछ बिलो कर निकाला जाता है ) मंगवाया और सारी जमीन को उससे सींच दिया ताकि कुश फिर कभी ना पनप सके और किसी राहगीर को कष्ट ना पहुंचा सके. 

यह सब देखकर एक शिष्य ने जिज्ञासावश चाणक्य से पूछा, ‘ गुरूजी, इस नुकीली घास को निकालने के लिए आपने खुद इतनी मेहनत क्यों की ? आपने हमें आदेश दिया होता, हम शीघ्र ही यह कार्य कर देते. ‘ 
चाणक्य यह सुनकर मुस्कुराये और बोले, ‘ तुम सबको एक शिक्षा देने के लिए ही मैंने यह कार्य स्वयं किया है. यह करके मैं तुम सबको यह सिखाना चाहता हूँ कि बुराई को हमेशा जड़ से खत्म किया जाना चाहिए. जब तक हम ऐसा नहीं करेंगे तो बुराई कभी ना कभी किसी ना किसी को अपनी चपेट में लेती ही रहेगी. इसलिए बुराई को सिर्फ दूर नहीं करना चाहिए बल्कि इसे जड़मूल से समाप्त कर देना चाहिए, ताकि यह वापस कभी ना पनप सके.’ 

(2)

सांसारिक बंधन 

एक बार की बात है. एक व्यक्ति मथुरा से गोकुल जाने को निकला. इसके लिए उसे यमुना नदी को नाव में बैठकर पार करना था. वह व्यक्ति भांग के नशे में था. वह नौका में बैठा और चप्पू चलाने लगा. उसे लगा थोड़ी देर में वह गोकुल पहुँच जाएगा. उस व्यक्ति ने सारी रात नाव चलायी. सुबह उजाला होने पर देखा तो उसे मथुरा जैसा ही शहर दिखाई पड़ा. उसने किसी से पूछा, ‘यह कौनसा शहर है ?’ जवाब मिला , ‘मथुरा.’ 

अब उस व्यक्ति का नशा उतरने लगा और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ. उसने सारी रात नौका तो चलायी लेकिन नौका जो कि घाट के साथ एक रस्सी से बंधी हुई थी उसे तो खोला ही नहीं. इसी तरह सांसारिक बंधन है, जिन्हें खोलकर ही संसार सागर से पार पाया जा सकता है. 

Courtesy : Swadhyay Sandesh 

(3)

निंदक और चापलूस 

एक सभा में राजा ने सभी विद्वानों से प्रश्न किया, ‘ दुनिया में सबसे तेज कौन काटता है ?’ किसी का जवाब था, ‘डांस मच्छर’ , किसी ने कहा, ‘ मधुमक्खी’ , किसी ने ‘बिच्छू’ तो किसी ने ‘सांप’ का नाम लिया. लेकिन राजा किसी भी जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ. उसने अपने मंत्री की ओर संकेत किया तो मंत्री ने कहा, ‘ महाराज, दुनिया में दो तरह के व्यक्ति सबसे तेज काटते हैं. एक निंदक और दूसरा चापलूस. निंदक पीछे से काटता है जिसके काटने से मनुष्य की आत्मा तिलमिला जाती है और चापलूस आगे से काटता है, जिसके काटने से मनुष्य अपने होशो हवास खो बैठता है.

Courtesy : Swadhyay Sandesh 

How are these short stories in hindi ? 

Tuesday, February 25, 2014

Prerak Prasang in Hindi


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(1) 

विश्वास 

अपनी जिज्ञासाओं का समाधान लेने और परामर्श के लिए कई लोग महान संत कन्फ्युशियस के पास आते रहते थे. एक बार राजनीति से सम्बंधित कुछ प्रश्नों पर विचार विमर्श करने के लिए कुछ राजनेता उनके पास आये. एक राजनेता ने पूछा, ‘ सच्चे अर्थों में एक आदर्श शासक कौन हो सकता है ? ‘ प्रश्न के उत्तर में कन्फ्युशियस ने कहा, ‘जिसके पास जनता के पालन-पोषण के लिए पर्याप्त साधन हो, देश की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सेन्य बल और शस्त्र हो और जिस पर जनता का पूरा विश्वास हो वही सबसे अच्छा शासक सिद्ध हो सकता है.’ राजनेताओं ने पूछा, ‘इनमें सबसे महत्वपूर्ण क्या है ?’ संत कन्फ्युशियस बोले, ‘ इनमें सबसे महत्वपूर्ण जनता का विश्वास है. अगर शासक के प्रति जनता का विश्वास डगमगा गया तो उसका पतन निश्चित है.’ शस्त्र आदि साधन तो धन से खरीदे जा सकते हैं लेकिन विश्वास सबकुछ न्यौछावर करने पर भी नहीं खरीदा जा सकता.’ राजनेताओं को कन्फ्युशियस की बात समझ में आ गयी.

(2) 

ख़ास मुसाफिर 

भारत में अंग्रेजों के शासन के समय एक बार एक रेलगाड़ी अधिकांशतः अंग्रेज यात्रियों से भरी हुई थी. एक डिब्बे में एक सांवले रंग और मंझले कद का भारतीय गंभीर मुद्रा में बैठा था. अंग्रेज उसे मुर्ख और अनपढ़ समझकर उसका मजाक उड़ा रहे थे. पर उस व्यक्ति ने किसी पर ध्यान नहीं दिया. 

अचानक उस यात्री ने गाड़ी की जंजीर खींच ली. गाड़ी रुक गयी. सभी उसे भला-बुरा कहने लगे. कुछ देर में गार्ड वहां आ गया और उसने सवाल किया, ‘जंजीर को किसने और क्यों खींचा ?’ वह व्यक्ति बोला, ‘ मैंने खींची है क्योंकि मुझे गाड़ी की स्वाभाविक गति में अंतर महसूस हुआ और मेरा अनुमान है कि यहाँ से लगभग एक फलांग की दूरी पर पटरी उखड़ी हुई है.’ 

गार्ड और वह व्यक्ति जब बाहर निकलकर कुछ दूरी पर पहुंचे तो देखा सच में एक जगह रेल की पटरी के जोड़ खुले हुए थे और सब नट बोल्ट बिखरे पड़े थे. दुसरे यात्री भी वहां आ गये. सभी यह देखकर दांग रह गए. सभी ने उस व्यक्ति की अपनी सूझबूझ से सभी की जान बचाने के लिए प्रशंसा की और अपने दुर्व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी. जब उस व्यकी से गार्ड ने उसका परिचय पूछा तो उसने बताया, ‘मैं एक इंजीनियर हूँ और मेरा नाम डॉ. एम. विश्वेश्वरैया है.

(3) 

अनमोल सिक्का 

चरखा संघ के लिए धन इकट्ठा करने हेतु गांधीजी देश भर में भ्रमण कर रहे थे. इसी सन्दर्भ में वे ओडिशा में एक सभा को संबोधित कर रहे थे. उनके भाषण के खत्म होने पर एक बूढी महिला जिसके कपड़े फटे हुए थे, बाल सफ़ेद थे, कमर झुकी हुई थी भीड़ में से होते हुए गांधीजी की ओर आ रही थी. गाँधीजी के पास पहुँच कर उसने उनके चरण छुए और फिर अपनी साड़ी के पल्लू में बंधा एक ताम्बे का सिक्का निकालकर गांधीजी के चरणों में रख दिया. गांधीजी ने सिक्का अपने पास संभालकर रख लिया. जमनालाल बजाज चरखा संघ के कोष को संभाल रहे थे. उन्होंने गांधीजी से वह सिक्का माँगा पर गांधीजी ने देने से मना कर दिया. जमनालाल जी जो चरखा संघ कोष के लिए हजारों के चेक संभाल रहे थे हँसते हुए बोले, ‘ आप एक सिक्के के लिए मुझ पर यकीन नहीं कर रहे हैं.’ गांधीजी ने कहा, ‘ यह ताम्बे का सिक्का उन हजारों से बहुत कीमती है. लाखों की पूँजी वाले हजार रुपये देदे तो कोई बड़ी बात नहीं है पर यह सिक्का उस औरत की कुल जमा पूँजी थी. जिसे भी उसने दान दे दिया. उसकी उदारता और बलिदान बहुत बड़ा है इसलिए इस ताम्बे के सिक्के का मूल्य मेरे लिए एक करोड़ से भी अधिक है.

How are these hindi prerak prasang ? 

Monday, February 24, 2014

Painful Poem in Hindi


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तुम कहते हो 

तुम कहते हो इंतजार करोगे मेरा सारा जीवन 
पर ये तो मुझसे पहले भी किसी ने कहा था.

तुम कहते हो जी नहीं सकते मेरे बिना 
पर ये भी तो मैंने कई बार सुना था. 

मेरा अहसास ही तुम्हारी धड़कने बढ़ा देता है 
पर ये तो सिर्फ अहसास है जो वक्त कभी भी मिटा देता है.

मुझसे अच्छा तुम्हें कोई मिल नहीं सकता 
कैसे मैं मान लूँ कि तुम्हारा दिल फिसल नहीं सकता. 

तुम्हारी जान ले लेती है मेरी नाराजगी 
पर हो सकता है ये हो बस पल दो पल की दिल्लगी.

मेरी उदासी कर देती है तुम्हें भी उदास 
पर मैं नहीं चाहती फिर से टूट जाये मेरी आस.

तुम कहते हो जिन्दगी है तुम्हारी मेरी मुस्कुराहटे
पर दे जाओगे कभी बस आंसू ही आंसू हो रही मुझे आहटे.

मेरी अच्छाई ने छू लिया है दिल तुम्हारा 
पर अच्छाई को कब मिला है किसी का सहारा.

तुम कहते हो कर दोगे मुझे बुरी यादों से दूर 
पर क्या पता तुम भी उन्हीं का हिस्सा बन चल दोगे कहीं ओर.

तुम कहते हो तुम नहीं हो औरो जैसे 
पर ये मानने की हिम्मत अब लाऊं मैं कैसे ? 

तुम कहते हो सच्चा है तुम्हारा प्यार 
पर मैंने तो इस दुनिया मैं देखा है बस व्यापार. 

हाँ नहीं है मुझे तुम पर भरोसा, किसी पर नहीं मुझे विश्वास 
दिल तोड़ने के लिए ही बस लोग आना चाहते हैं मेरे पास.

प्यार, वफ़ा ये सब गुजरे ज़माने के किस्से हैं 
सिर्फ आंसू और दर्द ही बस आता मेरे हिस्से है. 

इससे कई बेहतर है मैं प्यार करूँ उन सबको 
जिनसे कुछ भी पाने की उम्मीद नहीं है मुझको. 

क्योंकि किसी एक से किया प्यार जिन्दगी भर रुलाता है 
हँसते, गाते इंसान को जिन्दा लाश बना जाता है. 

Monika jain ‘पंछी’


How is this hindi painful poem ?


Poem on City Life in Hindi


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शहर / सड़क 

शहर की सड़कों पर चलना किसी परीक्षा से कम नहीं 
यहाँ हर दो कदम पर कोई खतरा इंतजार कर रहा है.
कहीं गड्डें तो कहीं मवेशियों का ढेरा
हादसा कोई ज़िन्दगी को तार-तार कर रहा है. 

सब अंधाधुंध जा रहे हैं जाने किस तरफ 
कहीं भी कोई ठहरा हुआ ना आदमी खड़ा है.
चढ़ रही है जल्दबाज कार रिक्शे पर 
लहुलुहान आदमी अकेला पड़ा है. 

चमचमाती गाड़ियाँ रफ़्तार में है दौड़ती 
सांस भी ना ले सके ऐसा धुआँ छोड़ती 
ऊपर खुला आकाश सिसकियाँ भर रहा है 
और नीचे जमीं का ह्रदय रो रहा है. 

कोमलता, निश्छलता, उदारता, पवित्रता 
इस शोर-शराबे में कहीं दब गयी है 
इंसान की इंसानीयत भी 
महज किताबों के शब्द बन गयी है.

टूटते सपने, बिखरता भरोसा 
भीड़ में भी खौफ़नाक सन्नाटा पसर रहा है 
समय कहाँ किसी को किसी की सुध लेने का 
कोई मासूम यहाँ हर रोज खो रहा है.

ना उगते सूरज का अता, ना ढलती शाम का पता 
नींद यहाँ किसी को मयस्सर नहीं है
बंद पलकों में भी जागते हैं लोग यहाँ 
चैन होता है क्या, किसी को खबर नहीं है.

चकाचौंध भरी इस जगमगाहट में 
भीतर ही भीतर अँधेरा पल रहा है.
भीड़ से भरे हैं यहाँ के सब रास्ते 
पर हर कोई देखो अकेला चल रहा है.

Monika Jain ‘पंछी’

Life of a city looks attractive and glamorous but it is not peaceful. City life is artificial, costly and unhealthy. We can not enjoy the beauty of nature. There is no fellow feeling. Although there are many advantages but at the cost of mental peace and true happiness. How is this hindi poem on life of a city and its roads ? 

Sunday, February 23, 2014

Poem on Village Life



Touch of a Village 

Many years have been passed 
Since I came from village to city 
But I couldn't find anywhere
The touch of a village and its simplicity.

Affection is scattered in each particle of village 
Loneliness is eating in the crowd of city 
Childhood resides in the soil of village 
But it's lost in the flare of city. 

The sunlight of village is cool 
But the shed of city is making us fool 
The sweat of village smells nice 
Whereas the fragrance of perfumes tell lies.

Sweet song of the birds
Whistle of the squirrels 
Beauty of the rising sun
Gentle breeze and blossoming flowers.

Village life is full of divine beauty
There are no smoke and noise of city
No hustle bustle and no worry
Villages are happy and healthy.

Villagers share joy and sorrow of each other
Guest of one is considered as the guest of another
Inspite of some drawbacks 
Than the city, life of a village is better. 

I wish I could return back to the village
To feel that touch again 
I wish I could sleep in the shed of banyan tree 
To get that peace and happiness again. 

By Monika Jain 'Panchi'

Village life is the most natural life for the human beings. It’s very plain and simple. Cattle lowing, birds singing, the greenery of the fields, the flowing of the rivers all adds charm to the village life. Villages bring a divine touch in the human mind. Villagers have few wants in their life. They are very hardworking. Villagers are very loving, helpful and honest. The entire village appears to be a single well knit unit one family. I love the village life. 

How is this poem on village life ? 

Friday, February 14, 2014

Valentines Day Poem in Hindi


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इश्क का खुमार

आज कल एक सुर्ख मदहोशी सी हवाओं में है
बिन पिये ही झूमते हैं हम, ऐसा नशा उसकी अदाओं में है.

जानते तो पहले से थे उसे, साथ में ही पढ़ती थी
कभी सोचा ना था उसके बारे में, बस हाय-हेल्लो हुआ करती थी.

फिर उस दिन अचानक सब बदल सा गया
उस बरसात में हर मंज़र हर पल थम सा गया.

जब बरसात की धुंधली शाम में देखा था उसे
छाते को संभालती, उलझी बिखरी ज़ुल्फों को सवारती 
बूंदों से ज़्यादा टिप-टिप करती अपनी आँखों से 
आसमां को गुस्से से निहारती.

उस दिन उसकी एक झलक पाने के लिये हम वो आसमां बनने को बेकरार थे
उसके ऊपर बूंदे बरसाने को हम ऊम्र भर रोने को तैयार थे.

उस रात पहली बार चाँद से नज़र नहीं हट रही थी
नीरस बेरंग सी वो कमरे की छत भी अब सुंदर लग लग रही थी
नींद का नामोनिशां नहीं और सोना दुश्वार हो गया
तब हमने जाना कि हमे प्यार हो गया.

हमारी ज़िन्दगी में तो पहले ही हो चुकी थी
सारे जग की सुबह होने का इंतज़ार कर रहे थे
बंद आँखों से तो सारी रात करते रहे
खुली आँखों से हो दीदार यही कामना बार-बार कर रहे थे.

इसे किस्मत का ज़ोर कहो या भगवान का इशारा 
जैसे ही घर से निकले कुछ ही दूर पर पूरा हुआ हर सपना हमारा.

जैसे सही राह को पाकर भटके एक मुसाफिर को होती है
तपती धूप में छाया पाकर जितनी एक कफ़िर को होती है
उतनी ही ख़ुशी हमे हुई जब सड़क किनारे खड़े उसे देखा 
धानी सरसों सी वो खिलखिला रही थी 
सहेली से बातें करती मंद-मंद मुस्कुरा रही थी.

सोचा, जो मन में है  दिल में हैं, वो सारी बातें उससे जाके बोल दूँ
रात बैठ कर जो बुने धागे प्रेम के, सारे जाकर उसके सामने खोल दूँ.

क्या सोचेगी वो, क्या कहेगी ?
हाँ कहकर गले लगाएगी या ना कहकर धमकाएगी?
खुद से ही हज़ार सवाल कर रहे थे
जिसे अभी तक पाया भी ना था, उसे खोने से डर रहे थे.

आज तक दोस्तों के सामने झूठी शान में जीते थे
किसी को कुछ भी कहते, तूफ़ान से उड़ते थे
दिल की धड़कन की रफ़्तार क्या होती है उस दिन हमने जाना
असली डर का एहसास हुआ, जो अब तक था अनजाना.

फिर भी हिम्मत करके उसके पास गए
क्या बोले ? कैसे बोले? सारे अल्फाज़ गले में अटक गए
हमारी ये हालत देखकर वो कुछ घबराई
नज़रे झुका कर मुस्कुराई, पलकें झुका कर शरमाई.

जो अब तक हमने कहा भी ना था 
शायद उसको चल गया था पता
हम परेशां थे, लाखों शब्द कहना चाहते थे 
पर एक अक्षर भी मुंह से निकलने की न कर रहा था खता.

लफ्ज़ो में ना सही, आँखों से सब कुछ कह चुके थे 
आँखों को पढ़ना आता था उसे, ये उसकी आँखों में हम पढ़ चुके थे.

शायद अब इकरार, इज़हार की ज़रूरत ही न थी
अब बस हम थे, वो थी और न कोई कमी थी.

समय का हर कण रुक सा गया
उस लम्हे का हर पल सहसा थम सा गया
ऐसा लगा अब हर लफ्ज़, हर अल्फाज़ झूठा है
इस पल के हर एहसास में ख़ुशी है, बाकी हर जज़्बात रूठा है.

न वो कुछ बोली और न मैं कुछ कह पाया
ये इश्क का खुमार है, बस आँखों ही आँखों में हो गया बयां.

By Rishabh Goel
Kotdwar, Uttarakhand

Thank you Rishabh for sharing such a sweet poem on Valentine's Day.

Tuesday, February 11, 2014

Poem about Happiness



(1)

Happiness is near

The ultimate goal of life is happiness that we all want to achieve 
But for the sake of finding happiness how many people we deceive ? 

Our dreams are very big with a great personality outside 
But its our misfortune that we have a narrow mentality inside. 

Getting pleasure from the self-fulfillment, It's merely an illusion 
As true happiness resides only in renunciation. 

In the search of happiness we are hurting our brothers 
But the real pleasure we can get only by helping others. 

Jealousy, hatred, dishonesty that poisons our life will disappear
When we will involve ourselves in charitable works and welfare.

Forget the past, live in present, think positively for the future
Be kinds to all and love all the creatures.

True happiness is not bought by treasures of gold and silver
Just look inside you, may be happiness is near.

By Monika Jain 'Panchi' 

(2)

Happiness is a choice

Happiness is not materialistic
In order to find happiness me must be optimistic.

Happiness can come and go just like seasons
Let your emotions come out as you have them for a reason.

Everything happened in past has happened for a reason
It happened so that you can become a better person.

So learn from your experiences and take the good from them all
Be able to adapt your surroundings and get the best out of all.

Don't count your troubles, count your joys
With a positive attitude live happily with what you have.

Be grateful towards the good persons and good things in your life
Situations which are not in your control put them aside.

As happiness is not something we can buy or take 
Happiness is a choice we all have the power to make.

By Monika Jain 'Panchi' 

How are these poems on true happiness and joy ?

Friday, February 7, 2014

Poem about Separation of Lovers



One day you will come never to be apart

Do you remember the day 
When we met for the last time 
Don't know what you were feeling 
But for me it was very tough time. 

I was feeling like 
My soul has been separated out from my body 
and my heart was shivering 
Because of this unwanted farewell ceremony. 

I was gripped with an unknown fear 
When you disappeared my eyes filled with tears
I was gazing endlessly upon the way
As it was difficult to accept that you have gone away.

Saying goodbye to you was a heartbreaking moment 
A part of mine was being separated, I felt
I wanted to shout, cry and scream
As I was left with only broken dreams.

Endless days and sleepless nights
Without you in my life nothing is right
The wholeness i felt with you is now incomplete
With your own you took my breath.

Remembering every single moment i spend with you
Deep down in my heart so much I love you 
I am still waiting with a hope in my heart
One day you will come never to be apart.

By Monika Jain 'Panchi'

A feeling of separation is one of the most painful feelings. Coping with it is the hardest experience. Saying goodbye to the one you loved most is the heartbreaking moment. No matter what the cause if your relationship fails you are likely to feel sadness, anger, hurt, fear, loneliness and a sense of failure. The above poem is reflecting this overwhelming, emotionally shattering sense of loss that we experience at the end of a relationship. 

How is this poem on separation of lovers ?

Saturday, February 1, 2014

Poem on India of My Dreams


Let us be the golden bird

Let us rip the darkness
Let us step in shine
Let us depart the night and
Let us bring new dawn.

Let us illuminate every house
Let us remove despair
Let us communicate hopes
and wipes out everyone’s tears.

Let us remove discrimination
Let us shoot the starvation
Let us cut the trap of corruption 
Let us kill the superstitions.

Let us rise above the races
Let us love all human faces
Let us defeat the terrorism
Let us embrace the humanism.

Let us bring happiness to each face 
Educate the entire human race 
Let us cut the snare of unemployment 
Fill every heart with encouragement.

Let us live in harmony with nature
Let us save trees and creatures
Let us bring progress in agriculture
and foster the best in our culture.

Let us put all differences aside
United we stay in time of strife
Let us bring quality in our life
In every field win glory and pride

Let us fly like fearless bird
Let us shine in the whole world
Let us be that golden bird 
by which we were known in the world.

By Monika Jain 'Panchi'

There was a time when India was considered a ‘golden bird’ because of its vast natural resources, rich cultural heritage and vast knowledge in every aspect of life. India gave to the world great saints, scholars, thinkers, artists and soldiers. But today the overall picture of our country is very depressing. Working of democracy is not satisfactory. Poverty, unemployment, corruption, terrorism, racism, inflation etc are the major problems of our country. Let us make India a developed country with no negative system, ideas or beliefs.

How is this poem on India of my dreams ?