Wednesday, December 24, 2014

Love Conversation in Hindi


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Love Conversation

(1)

तुम्हें पता है जब तुम बोलती हो तो हवाओं में रूमानियत की बूंदे तैरने लगती है...जब खिलखिलाकर हँसती हो तो प्यार की ये बूंदे बरसने लगती है...मैं बस खो जाता हूँ तुम्हारी मासूम आँखों की गहराइयों में...जो समेट लेती है इन बारिशों को...और फिर मोती बनकर तुम्हारी आँखों में चमकती इन बूंदों में मुझे सारा जहाँ प्यार में डूबा नज़र आने लगता है…...तुम्हारी आँखें, तुम्हारी बातें और तुम्हारी ये मुस्कुराहटें जीना सिखाती है...तुम प्यार में समायी हो या प्यार तुममें...नहीं पता...पर तुमसे ही जाना है मैंने प्यार को...बस तुमसे ही... ~ तुम्हारा आकाश! 

आकाश! मेरे शब्दों से हवाओं में रूमानियत की रंगत है...क्योंकि ये शब्द बस तुम्हारे लिए हैं...मेरी खिलखिलाहट से भरी हंसी तुम्हें बारिश सी लगती है...पर इस बारिश को बरसाने वाले बादल तुम ही तो हो... मेरी आँखों में तुम्हें जो मासूमियत दिखती है...वह तुम पर मेरा विश्वास है...और तुम्हें सारे जहाँ का प्यार मेरी आँखों में इसलिए नज़र आता है...क्योंकि इन्हें देखने वाली आँखें तुम्हारी है...मेरे पंखों को उड़ान देने वाले आकाश! तुमने भले ही मुझसे प्यार को जाना होगा...पर मैंने तुम्हारे साथ प्यार को जीया है...हर पल...हर लम्हा...मेरी आँखों, मेरी बातों और मेरी मुस्कुराहटों में जीवन भरने वाले सिर्फ तुम हो...सिर्फ तुम...और मैं हूँ…~ तुम्हारी पंछी!

(2) 

आकाश : तुम्हें पता है तुम्हारी सबसे अच्छी बात क्या है? 

पंछी - क्या? 

आकाश : यही कि तुम बहुत-बहुत अच्छी हो.

पंछी : और तुम्हें पता है तुममें सबसे अच्छा क्या है? 

आकाश : क्या? 

पंछी : तुम्हें सिर्फ अच्छाई को सराहना ही नहीं आता. उसे सहेजना और संवारना भी आता है. 

आकाश : वो इंसा ही क्या जो अच्छाई की कद्र ना जाने...तुझसे जुड़े कोई और तुझे ना चाहे...वो प्यार करना भी भला कहाँ जाने?

पंछी : तेरे प्यार की गहराइयों की कायल हूँ मैं...होठ सिल देती है...अक्सर तेरी बातें... खैर! तेरी तो खामोशियों की भी घायल हूँ मैं. 

(3)

पंछी : तुमने सुनी है कभी खामोशियों की आवाज़? 

आकाश : हाँ, बहुत बार... 

पंछी : क्या कहती है खामोशियाँ? 

आकाश : खामोशियाँ अक्सर करती हैं तुम्हारी बातें... पता ही नहीं चलता...कब जागता है दिन और कब सोती हैं रातें...

आकाश : अच्छा! तुमने भी सुना है कभी ख़ामोशी को? 

पंछी : हाँ, सुना है ना! ये शोर भी लगते हैं मुझे अब खामोशियों के हिस्से... इन खामोशियों में सुनती हूँ मैं...हमारी खामोशियों के किस्से…

By Monika Jain ‘पंछी’

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Saturday, December 20, 2014

Ginger Health Benefits in Hindi


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Ginger Health Benefits 
  • अदरक आयुर्वेद में महाऔषधि के रूप में जानी जाती है. यह शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों को समाहित किये हुए है.
  • ताजा अदरक में 81 % पानी, 2.5 % प्रोटीन, 1 % वसा, 2.5 % रेशे और 13 % कार्बोहाइड्रेट उपस्थित रहता है.
  • अदरक में आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लोरीन, विटामिन और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं.
  • सूजन और दर्द वाली जगह अगर ताजे अदरक को पीसकर और इसमें कर्पूर मिलाकर लगाया जाये तो काफी आराम मिलता है. 
  • अदरक हमें कई रोगों से भी दूर रखता है. इसके सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. मौसम बदलने पर होने वाले सर्दी, जुकाम के खतरे को यह कम करती है.
  • शरीर के किसी हिस्से में चोट लग जाने पर वहां अदरक का लेप करना चाहिए. सूख जाने पर इसे उतारकर उस जगह गुनगुने सरसों के तेल से मालिश की जानी चाहिए. एक से दो बार ऐसा करने से मोच का असर ठीक हो जाता है.
  • दांत में दर्द हो तो अदरक के छोटे-छोटे टुकड़े दांतों के बीच दबाकर रखने से दर्द खत्म हो जाता है.
  • दांतों के दर्द में सूखी अदरक (सोंठ का चूर्ण) में लौंग का तेल मिलाकर दांतों पर लगाने से आराम मिलता है.
  • अदरक में पाए जाने वाले जिंक, क्रोमियम और मैग्नीशियम रक्त संचार को सुचारू करते हैं.
  • नित्य अदरक का सेवन शरीर में कोलेस्ट्रोल के स्तर को कम करता है. इससे खून के रूक जाने और दिल का दौरा पड़ने का खतरा कम हो जाता है.
  • रोजाना अदरक को 30 मिनट चबाने से सिरदर्द और जी मिचलना जैसी समस्या से राहत मिलती है. 
  • सुबह अदरक वाली चाय पीने से ब्लड शुगर कण्ट्रोल रहती है.
  • पेट दर्द, एसिडिटी, बवासीर, जी मिचलाने आदि में भी अदरक का सेवन लाभकारी रहता है.
  • 5 ग्राम अदरक और दो चम्मच कच्ची सौंफ को एक गिलास पानी में उबालें. जब पानी 1/4 रह जाए तो इसे दिन में 3-4 बार लेने से दस्त में आराम मिलता है.
  • अदरक के रस में शहद मिलाकर चाटते रहने से दमा में राहत मिलती है और भूख भी बढ़ती है.
  • गैस और कब्ज में भी अदरक के उपयोग से आराम मिलता है. 
  • नींबू-नमक से बना सूखा अदरक हम यात्रा में भी साथ रख सकते हैं. 

Note : Consult your doctor before using any remedy stated here. If you are also aware about any other health benefits of 'Ginger' then feel free to submit here.

Holi Safety Tips in Hindi


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Holi Safety Tips

  • रंग लगाते समय जहाँ तक संभव हो आँखों को बंद रखा जाना चाहिए क्योंकि ज्यादातर रंग एसिटिक होते हैं जो आँखों में जाने पर खुजली और जलन पैदा करते हैं. अगर लगे कि आँखों में रंग चला गया है तो आँखों को ठंडे पानी से धोना चाहिए. 
  • नाखूनों पर रंग चढ़ने से बचाने के लिए हाथ और पैर के नाखूनों पर अच्छे किस्म की नेल पेंट की मोटी परत लगा लेनी चाहिए. अगर नाखून बड़े हैं तो एक हलकी परत अन्दर की तरफ भी लगा लेनी चाहिए और नाखूनों को टूटने से बचाने के लिए उनकी ट्रिमिंग कर लेनी चाहिए.
  • होठों को रंग से बचाने के लिए वैसलीन लगायें और उसके ऊपर अच्छे किस्म की लिपिस्टिक लगा लें.
  • बालों पर होली वाले दिन जैतून या नारियल के तेल से अच्छे से मालिश कर लें और बालों को बांधकर रखें. 
  • होली के 10-12 दिन पहले तक किसी भी तरह का सौन्दर्य उपचार जैसे वैक्सिंग, थ्रेडिंग आदि ना कराएँ क्योंकि इससे त्वचा सेंसिटिव हो जाती है और रंग के संपर्क में आने पर इन्फेक्शन और बर्निंग सेंसेशन का खतरा रहता है. होली वाले दिन पूरे शरीर पर नारियल, जैतून के तेल या किसी अच्छी सी क्रीम की मालिश की जानी चाहिए. इससे हम रंगों के हानिकारक प्रभाव से बचे रहेंगे.
  • सनग्लासेज का उपयोग भी किया जाना चाहिए. ये रंगों के हानिकारक केमिकल्स और रंगों से भरे हुए वाटर जेट्स से आँखों को बचा सकते हैं.
  • सबसे बेहतर है अगर हम होली कृत्रिम रंगों की बजाय प्राकृतिक रंगों से खेलें. प्राकृतिक रंग बनाने की विधि आप यहाँ पढ़ सकते हैं : How to make natural colors for holi
Use these safety tips while playing holi and make it a day full of happiness and enjoyment. Happy Holi :)


Monday, December 15, 2014

Hindi Story on Paropkar


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प्रयास 

राजन रोज समुद्र किनारे जाता और घंटों बैठकर लहरों को देखा करता. थोड़ी-थोड़ी देर में वह उठता, किनारे से कुछ उठाकर समुद्र में फेंक देता और वापस आकर बैठ जाता. वहाँ जो भी लोग आते, उसे पागल समझते और ऐसा करते देख उसकी हंसी उड़ाते. पर राजन इन सबकी परवाह नहीं करता. वह बस चुपचाप अपने काम में लगा रहता. 

एक दिन एक व्यक्ति वहाँ आया और उसने राजन की इस गतिविधि को देखा. पहले तो उसने भी राजन को पागल ही समझा. पर थोड़ी देर बाद ध्यान से देखने के बाद वह राजन के पास गया और पूछा, ‘ भाई! तुम यह क्या कर रहे हो? 

राजन ने कहा, ‘यह समुद्र अपनी लहरों को बार-बार इन शंखों, मछलियों और घोंघो को किनारे जमीन पर छोड़ आने को कहता है ताकि वे मर जाएँ, पर मैं ऐसा नहीं होने देता. इन्हें फिर से समुद्र में फेंक देता हूँ.’ 

व्यक्ति बोला, ‘पर यह तो समुद्र का क्रम है जो हमेशा चलता रहेगा. लहरे उठेंगी, गिरेंगी और ऐसे में कुछ जीव उनके साथ किनारें की जमीन पर आयेंगे और यहीं रह जायेंगे. तुम्हारी इस चिंता से क्या फर्क पड़ जाएगा?’ 

राजन ने तभी मुट्ठी भर मछलियों, शंख आदि को पानी में फेंका और पानी में मिलते ही उनमें मानों जान आ गयी.

तब उसने व्यक्ति से कहा, ‘आपने देखा इस छोटे से कदम से उनके जीवन में कितना बड़ा अंतर आया है.’ यह कहकर राजन फिर अपने काम में लग गया और वह व्यक्ति सर झुकाकर चला गया ~ अज्ञात 

शिक्षा : अच्छे कामों के लिए छोटे-छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण होते हैं. इसलिए रास्तें में आने वाली बाधाओं की चिंता नहीं करनी चाहिए. 

How is this story about efforts for good deeds (paropkar)? Feel free to share your views.

Sunday, December 14, 2014

Poem on Spring Season in Hindi


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मन गाये बसंत का राग

हाँ! 
मैंने उतार दिए हैं परेशानियों के केंचुल 
कर रही हूँ सामना मुश्किलों का हर पल 
चिंताओं के पत्ते झरा दिए हैं 
भय के सब बीज जला दिए हैं.

अब पतझड़ में भी मैं 
आशाओं के गीत गा सकती हूँ 
फूल खिले ना खिले 
बसंत का उत्सव मना सकती हूँ. 

क्योंकि,
बाहर के बसंत से पहले 
भीतर एक बसंत का खिलना जरुरी है 
चाहे पसरा हो कितना भी सन्नाटा 
पर सृजन बिना ये जिंदगी अधूरी है.

चाहे फूल ना खिलें सरसों के मेरे आँगन में 
पर सौन्दर्य को विस्तार तो पाना है 
चाहे सूख चूका हो मेरे लिए हर सरोवर 
पर प्रेम का झरना मुझे बहाना है. 

चाहे कोहरे की धुंध कभी हटे ना हटे 
एक आग को भीतर जलना ही होगा 
ना हो कोयल, तितलियाँ और भौंरे कहीं 
पर ह्रदय के गीतों को मचलना ही होगा.

बेरंग और उदास जीवन में भी 
रंगों का सृजन हो सकता है 
जीवन हो चाहे दोधारी तलवार 
पर सपनों का वरण हो सकता है. 

तो क्यों ना 
भर दें अपने तन और मन को
हम बासंती बहार से 
नफरत और घृणा को जीतें 
प्रेम की फुहार से.

सर्दी की ठिठुरन हो चाहे 
गर्मी की हो भीषण आग 
पतझड़ के मौसम में भी 
मन गाये बसंत का राग. 

लाल, नीले, हरे और पीले 
रंग सब खिलते रहें 
सपनों की बुझी चिताओं में भी 
बीज अंकुरण के मिलते रहें.

By Monika Jain ‘पंछी’

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How to Make Natural Colours for Holi


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How to Make Natural Colours for Holi

होली के अवसर पर बाजार में मिलने वाले कृत्रिम रंगों में काले रंग में लेड ऑक्साइड, लाल रंग में मरकरी सल्फाइड, सिल्वर रंग में एल्युमीनियम ब्रोमाइड, हरे रंग में कॉपर सल्फेट और नीले रंग में प्रुसियन ब्लू आदि पदार्थ पाए जाते हैं. ये पदार्थ चर्म रोगों, एलर्जी और आँखों की रोशनी के लिए भी नुकसानदायक है. अस्थमा के मरीज के लिए या डस्ट एलर्जी से परेशान लोगों के लिए अबीर, गुलाल या सूखे रंग बेहद नुकसानदायक है. इन सभी नुकसानों से बचने के लिए हम घर पर भी हर्बल प्राकृतिक रंग बना सकते हैं, जो त्वचा के लिए फायदेमंद भी होते हैं और आसानी से उतारे भी जा सकते हैं.

लाल रंग : 
  • दो चम्मच लाल चंदन (रक्त चंदन) को एक लीटर पानी में उबालने पर और ठंडा करने पर हमें औषधीय गुणों से युक्त लाल रंग मिलता है. 
  • बुरांश के फूलों को रात भर पानी में भिगोकर सुर्ख लाल रंग बनाया जा सकता है.
  • गुड़हल के फूलों को सुखाकर और पीसकर लाल रंग बनाया जा सकता है.
  • मूली और अनार के मिश्रण से लाल रंग तैयार किया जा सकता है.
  • केसर उबालकर भी लाल रंग बनाया जा सकता है.
  • इसी तरह लाल जवा फूल, टमाटर, पलाश या ढाक के फूल, मांदर और कुमकुम से भी लाल रंग बनाया जा सकता है. 
गुलाबी रंग : 
  • दस-बारह प्याज के छिलकों को आधा लीटर पानी में रात भर के लिए भिगोकर रख दें. सुबह छिलकों को हटा दें. गुलाबी रंग तैयार हो जाएगा.
  • चुकंदर को कद्दूकस कर एक लीटर पानी में उबालें और पूरी रात भीगने के लिए छोड़ दें. गहरा गुलाबी रंग बन जाएगा. 
  • कचनार के फूलों को पानी में रात भर भिगोकर रखने या फिर उबालने से भी गुलाबी रंग बनाया जा सकता है. 
नीला रंग : 
  • केरल में मुख्य रूप से पाए जाने वाले नीले रंग के गुड़हल के फूल को सुखाकर व पीसकर नीला रंग बनाया जा सकता है. 
  • इसी तरह नील, अंगूर, बेरी, जकारंडा से नीला रंग बनाया जा सकता है. 
पीला रंग :
  • अमलतास और गेंदा के फूलों को सुखाकर और पीसकर भी पीला रंग बना सकते हैं. 
  • चार चम्मच बेसन में दो चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर पीला रंग बनाया जा सकता है. 
नारंगी रंग : 
  • नींबू और हल्दी को मिलाकर नारंगी रंग बना सकते हैं. 
हरा रंग :
  • मेहन्दी की पत्तियों को सुखाकर उसका बारीक चूर्ण बनायें. इसमें आवश्यकतानुसार आटा या मैदा मिला लें. हरा रंग बन जाएगा. 
  • गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर, उसका महीन चूर्ण बनाकर, संतुलित मात्रा में मैदा या आटा मिलाकर हरा रंग बनाया जा सकता है.
  • पालक को पीसकर भी हरा रंग बनाया जा सकता है.
भूरा रंग : 
  • चाय की पत्तियों को पानी में उबालकर भूरा रंग बनाया जा सकता है. 
काला रंग :
  • काले अंगूर, आंवला, चारकोल आदि से काला व मटमैला रंग बना सकते हैं. 

Have a safe and happy Holi with these natural, organic, herbal, eco-friendly colours. 


Friday, December 5, 2014

Poem on Poverty in English



A dream of filling the stomach

He leaves the home 
in the hope of filling his stomach, 
weaving the dreams 
in the net of uncertainty.

Sometimes 
his dreams come true,
and he is able to earn 
as much that can win his hunger.
At times his dreams gets sleep 
with his empty venter.

Every time the hopes raised in his heart, 
appears to die in the cycle of 
leader’s speeches, fake promises and victory.
Under the rule of corruption and ambitions, 
his stomach is kicked frequently. 

He can’t understand, 
how the shares fall while the inflation is rising?
When nothing is changed in his life 
then why these leaders keep changing.

By putting eyes on the prices of
flour, lentils, potatoes and onions, 
The son of the soil curses his fate. 
He walks out again on the path of uncertainty, 
carrying the dream of filling his stomach,
When the nervous sun rays enters his closet. 

By Monika Jain ‘Panchi’

Poverty is curse. A section of society in our country is not able to fulfill even their basic needs. The above poem is reflecting the pain of such people, who are even not sure to get the food to fulfill their hunger. Their dreams are confined to just calm their hunger. The worm of corruption eats the share of these poor people while executing the development programs and schemes. Because of the injustice and corruption, economic disparity is increasing day by day, that is a bad sign for our economy. There is a need to eradicate the poverty from the roots. 

How is this poem about poverty ? Feel free to share your views via comments. 

Wednesday, December 3, 2014

Story on Hard Work in Hindi


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श्रम का महत्व 

एक गाँव में चन्दन नाम का एक व्यापारी था. वह एक पुत्र और एक पुत्री का पिता था. उसका पुत्र बहुत ही गैर जिम्मेदार और आलसी था. वह हमेशा बस दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में लगा रहता था. चन्दन चाहता था कि वह मेहनती बनें पर वह पिता की एक नहीं सुनता. इस वजह से पिता बहुत परेशान रहता था. 

एक दिन चन्दन ने अपने पुत्र को बुलाया और कहा, ‘ आज तुम्हें खाना तभी मिलेगा जब तुम कुछ कमाकर लाओगे, वरना आज तुम्हें भूखा ही रहना होगा.’ पुत्र यह सुनकर माँ के पास जाकर रोने लगा. पुत्र को रोता देखकर माँ का दिल पिघल गया. माँ ने उसे 100 रुपये दिए और कहा कि पिता जब पूछे तो यह दे देना. 

शाम में जब चन्दन ने पुत्र से कमाई के बारे में पूछा तो पुत्र ने वह 100 रुपये का नोट पिता को दे दिया. पिता ने वह नोट पुत्र को कुएँ में डालकर आने के लिए कहा. पुत्र आराम से वह नोट कुएँ में डालकर आ गया. 

चन्दन ने अपनी पत्नी को मायके भेज दिया और पुत्र को अगले दिन फिर कुछ कमाकर लाने के लिए कहा. इस बार पुत्र अपनी बहन के पास गया और रोते-रोते सारी बात बताई. बहन ने भी उसे 50 रुपये दे दिए. शाम को चन्दन के पूछने पर पुत्र ने 50 रुपये दिखा दिए. चन्दन सब समझ गया. उसने पुत्र को वे 50 रुपये भी कुएँ में डाल आने को कहा और पुत्र ने बिना किसी सवाल के ऐसा ही किया. चन्दन ने अगले दिन बेटी को भी ससुराल भेज दिया और फिर से पुत्र को कुछ कमाकर लाने के लिए कहा. 

पुत्र के पास अब कोई चारा नहीं था. वह बाजार गया और एक जगह जाकर बैठ गया. एक सेठ को कुछ लकड़ियाँ अपने घर पहुँचानी थी. पुत्र के पूछने पर वह सेठ उसे लकड़ियाँ घर पहुँचाने के बदले 10 रुपये देने को तैयार हो गया. पुत्र लकड़ियाँ लेकर चलने लगा. उसके हाथ छिल गए और पैरों में भयंकर दर्द होने लगा. शाम को थका हारा वह घर पहुँचा और पिता को वे 10 रुपये दिए. पिता ने फिर उन रुपयों को कुएँ में डालकर आने के लिए कहा. पुत्र को इस बार गुस्सा आया और उसने कहा, ‘ ये रुपये मैंने इतनी मेहनत से कमायें हैं और आप इन्हें कुएँ में डालकर आने की कह रहें हैं ?’ 

चन्दन ने मुस्कुराते हुए कहा, ‘ बेटा, मैं यही तो तुम्हें सिखाना चाहता था. तुमने 150 रुपये बड़ी आसानी से कुएँ में फेंक दिए और ये 10 रुपये फेंकने में तुम्हें कष्ट हो रहा है क्योंकि ये तुम्हारी मेहनत की कमाई है. ‘ चन्दन ने अपनी दूकान की चाबी पुत्र के हाथ में दी और कहा, ‘अब तुम दुकान सँभालने लायक हो गए हो क्योंकि अब तुम श्रम का महत्व जान चुके हो.’ बेटे ने पिता के पैर छुए तो पिता ने बेटे को गले से लगा लिया. 

Note : The above hindi story about hard work is not my own creation. I read it somewhere and sharing it here.

Tuesday, December 2, 2014

Poem on Childhood in English


Wish I Could Hold...

Wish I could hold it
I could hold to get old.
Wish I could pinch it
I could pinch my cheeks like my mom did.
Wish I could blow it
I could blow bubbles in the water.
Wish I could skip it
I could skipping the ropes again.
Wish I could flash it
I could flash the lights in the sky at midnight.
Wish I could blame it
I could blame others for breaking lamp in the fight.
Wish I could play it
I could play hide and seek with my friends now.
Wish I could dream it
I could see sweet dreams.
Wish I could hold it
I could hold my childhood memories.

By Chetan K Dheer 

Childhood is full of sweet memories. With the passage of time we feel more attachment with our childhood. How true were those moments without any hypocrisy. How joyous were those days without any stress. Whenever we cried, someone was there to picked us up and wipe our tears. Playing all sorts of games in the street was just amazing. Eating, drinking, playing, studying and sleeping were the only works to do. No tensions, no worries, no responsibilities, no duties. Those were the best days of our life. That was the blissful time of ignorance and innocence. Wandering like a deer and enjoying the natural beauty was pleasant. I miss my childhood like anything. I wish I could hold those days. 

Thank you 'Chetan K Dheer' for sharing such a lovely poem about childhood memories. 

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Monday, December 1, 2014

Essay on Happiness in Hindi


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सच्ची ख़ुशी 

एक दिन सवेरे जब जॉगिंग के लिए घर से बाहर निकली तो कुछ ही दूरी पर नगरपालिका द्वारा रखे गये कचरे के पात्र के पास कुछ छोटे-छोटे ग़रीब बच्चों को इकठ्ठा देखा. वो बच्चे उस कचरे के ढ़ेर में से कुछ प्लास्टिक की थैलियाँ और कुछ दूसरा सामान चुन-चुन कर अपने पास रखे एक बोरी के थैले में इकठ्ठा कर रहे थे. बच्चों को देश का भविष्य कहा जाता है. पर देश के ये भावी कर्णधार जिन्हें विद्यालय की पोशाक पहन अभी अपनी कक्षा में होना चाहिए था, वो नन्हें-मुन्हें कूड़े-कचरे के ढ़ेर में अपना भविष्य तलाश कर रहे थे.

दिल पसीज सा गया और शर्मिंदगी भी महसूस हुई क्योंकि हम सच्चे अर्थों में कुछ भी तो नहीं करते समाज के इस तबके के लिए. शादी, पार्टीस और अन्य समारोह में कितना पैसा बहाते हैं, सिर्फ़ खुशी के कुछ पल पाने के लिए. पर ये खुशी उस खुशी के सामने तुच्छ है, गोण है जो किसी ग़रीब को एक वक्त का खाना खिलाने से मिल सकती है. उसके अधनंगे तन को कुछ कपड़ों से ढकने पर मिल सकती है और सबसे ज़्यादा उसे स्वाभिमान के साथ जीवन जीने का पथ दिखा कर मिल सकती है. ये बाते सिर्फ़ कहने के लिए नहीं कह रही मैं. जीवन में सच में इसे अनुभव भी किया है.

कुछ महीनों पहले की ही बात है, जब मैं घर के कुछ कामों में व्यस्त थी. मुझे देखकर बाहर खड़ी दो ग़रीब लड़कियाँ दीदी-दीदी पुकारने लगी. खाना बना नहीं था अभी, पर नज़रे उनके फटे कपड़ों पे पड़ी. भीतर गयी और उनके आ सकने लायक कुछ कपड़ें निकाल लाई. उन्हें दिए और फिर से अपने काम में लग गयी. कमरे की खिड़की से सहसा उन बच्चियों पर नज़र पड़ी. वे बार बार चहचहाते हुए उन कपड़ों को खुद पे सजाकर देख रही थी. उनकी मुस्कुराहट देखकर मेरे चहरे पर भी मुस्कुराहट आ गयी. कुछ देर बाद बाहर से तेज आवाज़ आई, दीदी ठंकु. वो मुझे थैंक्यू कहना चाहती थी पर उनके इन आभार और खुशी भरे शब्दों में कितनी मासूमियत थी. उनके ये शब्द दिल को छू गये.

मैं तत्काल बाहर गयी. मुझे देख हाथ हिला कर वे मुझे अलविदा कर रही थी. मुस्कुराते हुए मैनें भी अपना हाथ हिला दिया. सोचने लगी कुछ भी तो नहीं किया था मैनें. कुछ ऐसे कपड़े जो शायद किसी के काम के भी नहीं थे, वे ही तो दिए थे उन्हें. पर पता नहीं क्यों उस दिन उन दोनों बच्चियों के चहरे की खुशी पूरे दिन मेरे चहरे पर मुस्कुराती रही. सोचा कि अगर सच्चे अर्थों में किसी के लिए कुछ करूँगी तो कितना सुकून और कितनी खुशी मिलेगी. उस दिन जाना की सच्ची खुशी क्या होती है. अक्सर कोई अच्छा कार्य करना हम अपना दायित्व मानते हैं, पर मुझे लगता है कि ज़रूरतमंद की मदद के लिए किया गया अच्छा कार्य हमारा दायित्व नहीं हमारा अधिकार है. सच्चे अर्थों में ख़ुशी पाने का अधिकार.

By Monika Jain 'पंछी'

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