Thursday, December 17, 2015

Story on Friendship in Hindi

Story on Friendship Day in Hindi for Kids. Dosti ki Kahani, Two Best Mitra, Animals True Friends Tales, Mitrata Diwas Messages, Divide and Rule. मित्रता दिवस, दोस्ती की कहानी, सच्चा मित्र, दोस्त.

बोनी और टोनी की दोस्ती

बोनी बन्दर और टोनी भालू दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे। उनकी मित्रता की चर्चा पूरे सुन्दर वन में थी। दोनों एक दूसरे के लिए जान की बाजी लगाने को तैयार रहते थे। बोनी का अंगूरों का एक बगीचा था, जिसके अंगूर बहुत मीठे और रसीले थे। जबकि टोनी कपड़ों की सिलाई का काम करता था। बोनी हर रोज अपने बगीचे के अंगूर और टोनी के सिले हुए कपड़े बेचने बाजार जाता था। टोनी भी बोनी के बगीचे की देखरेख में उसकी बहुत मदद करता था। टोनी के रहते किसी की हिम्मत न होती कि बगीचे के अंगूर चुरा सके। इस तरह दोनों का काम बहुत अच्छे से चल रहा था।

कुछ ही दिन पहले चंपा लोमड़ी सुंदरवन में रहने आई थी। वह बहुत चालाक थी। जब उसे बोनी के मीठे और रसीले अंगूरों के बगीचे के बारे में पता चला तो उसका मन ललचा गया।

वह सोचती, ‘काश! मुझे हर रोज ये मीठे-मीठे अंगूर खाने को मिल जाए तो रोज-रोज ये भोजन ढूंढने के झंझट से ही छुटकारा मिल जाए।’

उसने एक तरकीब सोची। उसने अपनी मीठी-मीठी बातों से टोनी और बोनी से दोस्ती बढ़ाई और उनका विश्वास जीता।

एक दिन जब बोनी अंगूर और कपड़े बेचने बाजार गया तो चम्पा टोनी के पास आई और बोली, ‘बोनी भाई का जन्मदिन आने वाला है। आपने उनके लिए क्या खास सोचा है?’

‘खास तो कुछ नहीं। बस मैंने बोनी के लिए एक पोशाक सिली है, वही उसे तोहफे में दूंगा।’ टोनी ने कहा।

‘सिर्फ पोशाक से क्या होगा? आपको उनके लिए केक और मिठाई भी लानी चाहिए। आखिर वो आपके सबसे अच्छे दोस्त हैं।’ चंपा ने कहा।

‘तुम बिल्कुल सही कहती हो चंपा बहन! पर ये सब तो शहर में मिलता है और इस तरह बगीचे को छोड़कर मैं शहर में नहीं जा सकता।’ टोनी उदास होकर बोला।

‘आपने मुझे बहन कहा है तो क्या मैं आपके लिए इतना भी नहीं कर सकती। आप बेफिक्र होकर शहर जाइए और केक, मिठाई व सजावट का सामान ले आइये। शाम को बोनी भाई के आने से पहले लौट आइयेगा ताकि उन्हें कुछ पता ना चले और ये टोकरियाँ ले जाइए क्योंकि आपके पास बहुत सारा सामान होगा।’ चंपा ने बोनी के बगीचे से अंगूरों को भरने वाली कुछ खाली टोकरियाँ टोनी को थमाते हुए कहा।

टोनी चंपा की बातों में आ गया और चंपा को धन्यवाद कहकर शहर निकल गया।

टोनी के जाते ही चंपा लोमड़ी अंगूरों पर टूट पड़ी। उसने भरपेट अंगूर खाए और बोली, ‘वाह! मजा आ गया इतने रसीले और मीठे अंगूर खाकर।’

उसने बहुत सारे अंगूर तोड़कर अपने घर में भी छिपा लिए। इसके बाद वह दौड़ी-दौड़ी बाजार पहुँची और बोनी के पास जाकर बोली, ‘बोनी भाई, बोनी भाई! मैंने अभी-अभी टोनी भाई को बहुत सारे अंगूरों की टोकरियाँ भरकर शहर बेचने को ले जाते देखा है।’

‘क्या बोल रही हो चंपा बहन? तुम होश में तो हो? टोनी बिना मुझे बताये ऐसा कोई काम कभी नहीं कर सकता।’ बोनी पूरे विश्वास से बोला।

‘आपको मुझ पर विश्वास नहीं है तो आप खुद चलकर देख लीजिये। टोनी भाई वहाँ नहीं हैं।’ चंपा ने कहा।

चंपा के बार-बार कहने पर बोनी अपना सामान बांधकर बगीचे पर आया। बगीचे पर टोनी नहीं था।

बहुत सारे अंगूर और टोकरियाँ भी गायब थी। यह सब देखकर उसके होश उड़ गए। उसे बहुत दुःख हुआ और गुस्सा भी आया।

‘जिसे मैं अपना सबसे अच्छा दोस्त समझता था, उसी ने मेरे साथ धोखा किया। अब मैं टोनी से कभी बात नहीं करूँगा। तुम टोनी के ये कपड़े उसे लौटा देना और कह देना कि आज से वह मेरे बगीचे की ओर आँख उठाकर भी ना देखे।’ बोनी ने कपड़े चंपा के हाथों में देते हुए कहा।

‘ठीक है बोनी भाई, आप परेशान मत होइये और घर जाकर आराम कीजिये।’ चंपा ने कहा।

‘तुम बहुत अच्छी हो चंपा बहन! अगर तुम ना होती तो मुझे टोनी की सच्चाई का पता कभी ना चल पाता। मैं तुम्हारा यह अहसान कभी नहीं भूलूंगा।’ यह कहकर बोनी घर चला गया।

कुछ देर बाद टोनी शहर से लौटकर बगीचे पर आया। उसके आते ही चंपा लोमड़ी उसके पास आई और बोली, ‘टोनी भाई, आप जब शहर गए थे तब बोनी भाई यहाँ आये थे।’

मैंने पूछा तो वे बोले, ‘कई दिनों से मेरे बगीचे से अंगूर गायब हो रहे हैं। मैं ये देखना चाहता था कि मेरी अनुपस्थिति में टोनी अंगूरों का क्या करता है? आज उसकी चोरी पकड़ी गयी। वह बिना मुझे बताये शहर जाकर अंगूर बेचता है।’

मैंने उन्हें बार-बार समझाया कि आप शहर उनके लिए केक और मिठाई लाने गए हैं पर उन्होंने मेरी एक न सुनी और ये कपड़े लौटा दिए और कहा, ‘टोनी से कह देना आज के बाद मेरे बगीचे की ओर आँख उठाकर भी न देखे।’

टोनी को यह सब जानकार बहुत बुरा लगा। उसने सोचा, ‘जिसे मैं अपना सबसे अच्छा दोस्त समझता हूँ, वही मुझ पर भरोसा नहीं करता।’

गुस्से में टोनी केक और मिठाई वहीँ पटक कर चला गया। चंपा लोमड़ी को मुफ्त का केक और मिठाई भी खाने को मिल गयी।

अगले दिन बोनी पूरे दिन बगीचे पर ही था। चंपा वहाँ आई और बोली, ‘बोनी भाई, आज आप बाजार नहीं गए।’

‘मैं बाजार चला जाऊँगा तो बगीचे की रखवाली कौन करेगा?’ उदास बोनी ने कहा।

‘मेरे रहते आपको चिंता करने की कोई जरुरत नहीं। अगर आप चाहें तो अब से मैं आपके बगीचे की देखरेख कर लूंगी। बस हाँ, भोजन के समय मुझे घर जाना होगा।’ चंपा ने कहा।

‘भोजन के लिए तुम्हें कहीं ओर जाने की क्या जरूरत है? जब भी तुम्हें भूख लगे तुम बगीचे से अंगूर खा लेना। तुम मेरे लिए इतना कुछ कर रही हो तो क्या मैं तुम्हारे लिए इतना भी नहीं कर सकता।’ यह कहकर बोनी बाजार चला गया।

बोनी और टोनी कई बार रास्ते में एक दूसरे को मिलते पर बिना बात किये आगे बढ़ जाते। बचपन के इतने अच्छे दोस्त अब एक दूसरे को फूटी आँख भी ना सुहाते। पर जब से दोनों अलग हुए थे तब से ही उदास रहने लगे थे। दोनों के व्यवसाय में भी घाटा होने लगा था क्योंकि पहले तो टोनी बोनी के बगीचे की बहुत अच्छे से देखभाल करता था पर अब चंपा लोमड़ी इतना ध्यान नहीं देती थी और ढेर सारे अंगूर खा जाती थी। उधर टोनी अब खुद बाजार में कपड़े बेचने जाता था। पर वह बेचने की कला में माहिर नहीं था। इसलिए ज्यादा कपड़े नहीं बेच पाता। इसलिए दोनों बहुत परेशान रहने लगे।

बोनी और टोनी की दोस्ती टूटने की खबर पूरे सुन्दर वन में फ़ैल गयी। सभी को बहुत आश्चर्य हुआ।

जम्बो हाथी और लम्बू जिराफ दोनों सुन्दर वन में सबसे समझदार और वृद्ध थे। दोनों को जब ये खबर मिली तो उन्हें बहुत दुःख हुआ।

‘जब से ये चंपा लोमड़ी आई है तभी से सुंदरवन में सब उल्टा हो रहा है। कई जानवर चंपा की शिकायत लेकर आते हैं। जरुर चंपा ने ही कुछ किया होगा।’ जम्बो हाथी ने कहा।

‘आप बिल्कुल सही कहते हो जम्बो भाई! हमें टोनी और बोनी को वापस मिलाने और चंपा को सबक सिखाने के लिए कुछ सोचना चाहिए।’ लम्बू जिराफ ने कहा।
दोनों ने एक उपाय सोचा। जम्बो हाथी बहुत अच्छा चित्रकार था। उसने बचपन से ही बोनी और टोनी की दोस्ती देखी थी। उसने अपने घर के एक कमरे की दीवारों पर बोनी और टोनी की दोस्ती को दर्शाते, एक दूसरे को गले लगाते और एक दूसरे के साथ खेलते बोनी और टोनी के कई चित्र बनाये और बोनी और टोनी के घर अपने यहाँ दावत का निमंत्रण भेज दिया। जब शाम को बोनी और टोनी जम्बो हाथी के घर आये तो वहाँ कोई नहीं था और चारों तरफ उन दोनों के कई चित्र बने हुए थे। उन चित्रों को देखकर उनकी दोस्ती की यादें ताजा हो गयी और दोनों की आँखों में आंसू आ गए। पर फिर भी उन्होंने एक दूसरे से बात नहीं की और जाने लगे। तभी पीछे से जम्बो हाथी और लम्बू जिराफ आये।

‘बोनी और टोनी तुम दोनों को मैं बचपन से जानता हूँ और तुम्हारी दोस्ती को भी। तुम दोनों सपने में भी एक दूसरे का बुरा नहीं सोच सकते। जरुर तुम लोगों को कोई ग़लतफ़हमी हुई है। किसी दूसरे की बातों में आकर अपनी इतनी अच्छी दोस्ती मत तोड़ो। जो भी गलतफहमी है वह अभी दूर करो। मुझे बताओ क्या हुआ है?’ जम्बो हाथी ने कहा।

जम्बो हाथी की बात सुनकर दोनों ने जो-जो चंपा लोमड़ी ने उनसे कहा था वह सब बताया। सारी बातें सुनकर दोनों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उन्हें समझते देर न लगी कि चंपा लोमड़ी ने उन दोनों को झूठ बोलकर एक दूसरे के खिलाफ भड़काया था। उन्हें अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ। दोनों ने एक दूसरे से माफ़ी मांगी, गले लगाया और कहा, ‘काका अगर आप दोनों ना होते तो हमें कभी सच का पता न चलता। आपका बहुत-बहुत आभार। अब हम उस चंपा लोमड़ी को नहीं छोड़ेंगे।’ यह कहकर दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा और लाठी लेकर चंपा के घर की तरफ गए।

चंपा ने जब दोनों को साथ-साथ लाठी लेकर आते देखा तो वह समझ गयी कि उसकी चोरी पकड़ी गयी है। वह दुम दबाकर भागने लगी। बोनी और टोनी ने तब तक उसका पीछा किया जब तक वह सुन्दर वन की सीमाओं से बहुत दूर नहीं चली गयी।

इसके बाद बोनी और टोनी ने वादा किया कि अब वे किसी और की बातों में आकर अपनी दोस्ती कभी नहीं तोड़ेंगे। बोनी और टोनी फिर से हँसी-ख़ुशी रहने लगे।

By Monika Jain ‘पंछी’


How is this story about friendship?

Tuesday, December 15, 2015

Broken Heart Messages in Hindi

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एक पैगाम टूटे दिल के नाम

कोमल : वह हमेशा खुद को प्यार कहता रहा पर उसने कभी धोखे, नफ़रत, झूठ, अपमान, चालाकी और दर्द के सिवा कुछ भी नहीं दिया.
 
रश्मि : देता भी कैसे? जिसके पास जो होगा वही तो देगा.
 
कोमल : तो वह खुद को प्यार क्यों कहता फिरता है ?
 
रश्मि : तुमने ऐसे लोगों के बारे में जरुर सुना होगा जो अपने पुराने, नकली, सड़े-गले बेकार सामान को बेचने के लिए एक अच्छी सी कंपनी का सुन्दर और आकर्षक लेबल चिपका लेते हैं. बस वह भी यही करता है. अपनी गले तक भर आई नफ़रत, झूठ, चालाकी, फ़रेब आदि को बाहर निकालने के लिए उसने प्यार का चोला ओढ़ रखा है. जिसका शिकार तुम जैसे कई लोग बन जाते हैं.
 
कोमल : लेकिन, मैं ही क्यों ?
 
रश्मि : तुम ही इसलिए क्योंकि तुम्हारी अच्छाई में ऐसे बुरे लोगों से लड़ने की शक्ति है. तुम कभी टूट नहीं सकती...कभी नहीं... और तुम उदास क्यों होती हो...तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हें सच पता चल गया. वैसे भी कोई कितने भी खुशबूदार, सुन्दर और आकर्षक चोले से खुद को ढक ले. ज्यादा देर तक वह अपनी दुर्गन्ध छिपा नहीं सकता.
 
कोमल : पर वह कहता है कि वह कभी गलती नहीं करता. वह तो हमेशा दूसरों को ही दोष देता है. अपनी गलती कभी नहीं मानता.
 
रश्मि : जो ऊपर से नीचे तक कीचड़ से सना हो. उसके पास दूसरों को देने के लिए और क्या होगा? अफ़सोस ! उसने कभी आइना देखा ही नहीं.
 
कोमल : हम्म...प्यार और नफरत कुछ भी नहीं. वह तो बस दया का पात्र है.
 
रश्मि : एकजेक्ट्ली!
 
देखो! बुरा जो छूट रहा है, उसे छूटने दो. बुरे को छोड़ने का गम ना करो. यह समय दु:ख मनाने का है भी नहीं, बल्कि जश्न मनाने का है. जश्न अपनी आज़ादी का. आज़ादी उस घुटन से जो तुमने कई बार उस रिश्ते में महसूस की. आज़ादी उस दर्द से जो तुम्हें हमेशा अपने प्यार के बदले मिलता रहा. आज़ादी उस दुर्गन्ध से जो उसकी घिनौनी सोच से निकल तुम्हारे फूल सरीखे जीवन में पसरती रही. आज़ादी उन आँसुओं से जो तुम्हारी आँखों में इरादतन भरे गए, जिनके लिए तुम कभी बनी ही नहीं थी. आज़ादी उस अपमान से जो वह खुद को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ में वक्त-बेवक्त तुम्हें देता रहा. आज़ादी उस बर्बर, धूर्त और स्वार्थी बंधन से जो तुम्हारी मासूमियत के लिए सजाये मौत था. इतनी आज़ादी और खुशियाँ एक साथ मिलने का भी कोई गम करता है भला?
 
उसका अहम् और दिखावा रिश्ते से ज्यादा जरुरी था, पर तुम्हारे आत्मसम्मान से ज्यादा नहीं. जो रिश्ता सिर्फ नाम का था, सिर्फ स्वार्थ पर टिका, प्यार, विश्वास, परवाह, समझ से पूरी तरह नदारद, और जो भीतर से पूरी तरह खोखला था, उस रिश्ते का बोझ ढ़ोना कहाँ की बुद्धिमानी है? याद रखो, आज़ादी हर हाल में सुकून देने वाली है. जरुरत बस हिम्मत, साहस और अडिग फैंसलों की है.
 
तुम्हारे लिए उसे भूल पाना मुश्किल होगा, लेकिन नामुमकिन नहीं. सुनो, यह मानव का स्वभाव है, वह हमेशा उन चीजों के पीछे भागता है जो उसकी पहुँच से बाहर होती है. तुम अच्छी तरह जानती हो जिस प्यार को सिर्फ तुम उससे पाना चाहती हो, वह तुम्हें कभी मिल नहीं सकता. तो फिर क्यों तुम अपनी ख़ुशी को किसी की कृपा का गुलाम बनाना चाहती हो. याद रखो, यह कतई जरुरी नहीं है कि जो चीजें आसानी से मिल जाए, उनका मोल कम है और जो ना मिले, उनका ज्यादा. जो हमसे सच्चा प्यार करते हैं, जो निस्वार्थ भाव से हमारी मदद करते हैं, जो हमारी मजबूरियों का फायदा नहीं उठाते, जो हमारी समस्याओं को समझते हैं, जिन्हें हमारी परवाह होती है, या यूँ कहूँ कि जो सच्चे अर्थों में हमारे दोस्त होते हैं, कई बार हम उन्हें वह इम्पोर्टेंस नहीं दे पाते जिनके वे हकदार होते हैं. क्योंकि हम तो उन लोगों के पीछे भाग रहे होते हैं, जो हमें आकर्षित करते हैं, जो हमें कभी नहीं समझते, जो हमें धोखा दे रहे होते हैं.
 
तुम समझ रही हो न? इसलिए फिर कहती हूँ, बुरा जो छूट रहा है, उसे छूटने दो. बुरे को छोड़ने का गम ना करो. एडजस्टमेंट करना गलत नहीं, लेकिन यह तुम्हारी मुस्कुराहट की कीमत पर तो नहीं होना चाहिए न? किसी को माफ़ कर देना भी गलत नहीं है. पर कई बार हमारी माफ़ी को हमारी कमजोरी समझ लिया जाता है और सामने वाला इसे अपने उचित-अनुचित हर तरह के व्यवहार पर हमारा समर्थन समझने लगता है. और फिर माफ़ कर देने का मतलब स्वीकार करना तो नहीं होता.
 
जो टूट गया है, वह व्यर्थ नहीं गया. उसने तुम्हें ज़िन्दगी जीने के कई सबक सिखाएँ हैं. तुम बस स्वागत करो उस खुले आकाश का जो तुम्हारे पंखों को उड़ान देने को व्याकुल है. जो तुम्हारी बातों, आँखों और मुस्कुराहटों को जीवन देने वाला है. जो तुम्हें सही मायनों में प्यार करना सिखाने वाला है. पहले खुद से प्यार और फिर सबसे प्यार.

By Monika Jain ‘पंछी’

How is this article about leaving or ending a bad relationship?

Saturday, December 12, 2015

Poem on Makar Sankranti in Hindi

Poem on Makar Sankranti in Hindi. Makarsankranti par Kavita, Happy Uttarayan Festival, Farmer Sankrant Sms, Messages, Wishes, Shayari, Quotes, Slogans, Status, Rhymes. मकर संक्रांति कविता, शायरी.

आई मकर संक्रांति

(1)

हुए सूर्य संक्रमित
आई फिर संक्रान्ति
देने नया उत्साह
भरने नया हर्ष
मन में कृषक के.

उड़ेंगे पतंग
ले जाएंगे अपने साथ
कृषक की तमाम अर्ज़ियाँ
सूर्य के पास
जितना ऊँचा उठेंगे पतंग
उतना ही बढ़ेगा उत्साह कृषक का.

जब कभी हतोत्साहित होगा कृषक
तो पुकारेगी पतंग
ठहरो कृषक!
करो तैयारी आएगा नया वर्ष
जब पुनः करोगे गान
होगा स्वर्ण विहान
करो तैयारी फिर से
नया बीज बोने की.

(2)

आई लेकर नव विहान देखो प्यारी आई संक्रांति
और समेटे जीवन धन की कितनी ही ये निर्मल शांति.

कृषक खिल उठे, महका जीवन, तिल की, गुड़ की ख़ुशबू से
हुआ संचरित नव उत्साह, नवल सूर्य के जादू से.

चले डोर संग व्योम भेदने और सजाने ज्यों विहंग
बच्चे दौड़े लेकर हाथों-हाथों में सुंदर पतंग.

बीजेंगे अब कृषक बीज और लाएंगे फिर जीवन क्रांति
आई लेकर नव विहान देखो प्यारी आई संक्रांति.

(3)

सूर्य जाता है जब दूसरी राशि में
तब क्यों खुश हो जाता है किसान इतना
कि उड़ने लगते हैं पतंग
छाने लगती है खुशबू घी की चारों ओर
रग फैलने लगते हैं इधर उधर...

क्यों किसान सोचता है कि
संक्रमित होना सूर्य का शुभ होगा
उनके लिये उनके बीजे हुए बीजों के लिये...

क्या नहीं जानता किसान कि
नहीं बदलतीं ऋतुएँ किसानों के लिये
सूर्य नहीं होते संक्रमित किसानों के लिये
बल्कि उन्हें जाना होता है सिर्फ मकर राशि में
खत्म होना होता है सर्दियों का
किसानों का कोई हेतु नहीं होता इसमें
लेकिन खुश होेता है किसान…

नदी अपना पानी नहीं पीती
पेड़ अपने फल नहीं खाते
किसान उपजाते हैं अन्न खुद के लिये नहीं
बल्कि इसलिये कि
अगली बार फिर आए संक्रांति
फिर हो सूर्य संक्रमित
जाए दूसरी राशि में
और उड़ें पतंग
महके तिल-मूंगफली की खुशबू चारों ओर…

 
By Aman Tripathi


How are these poems about Makar Sankranti?



Thursday, December 10, 2015

Power of Mind in Hindi

Essay on Power of Mind in Hindi. Positive Attitude Thoughts, Subconscious Thinking Article, Words, Law of Attraction, The Secret Rahasya, Vichar Shakti Ka Vigyan. सकारात्मक विचार शक्ति, आकर्षण का नियम.

विचार वस्तु है ~ समझे अपने विचारों की जिम्मेदारी

कुछ सालों पहले मैंने एक दोस्त से कहा था, 'मैंने अपने जीवन में कभी कोई चमत्कार घटित होते हुए नहीं देखा.' आज भी मैं यही कहती हूँ कि मैंने अपने जीवन में कोई चमत्कार घटित होते हुए नहीं देखा. लेकिन तब से लेकर आज तक के इसी वाक्य में सोच और समझ का एक विस्तृत अंतर आ चुका है. तब मन यह सोचता होगा कि दूसरों के लिए चमत्कार जैसा कुछ होता होगा पर मेरे लिए नहीं हुआ कभी लेकिन आज मन यह जानता है कि चमत्कार जैसा कुछ होता ही नहीं. हर चीज का कोई कारण कोई विज्ञान अवश्य होता है. या फिर यूँ कहूँ कि जो कुछ भी है सब चमत्कार ही है और दोनों बातों के मायने बिल्कुल एक ही हैं.
 
कुछ दिनों से एक लैटर का इंतजार हो रहा था. लैटर को अब तक आ जाना चाहिए था...लेकिन नहीं आया और यह बेहद जरुरी था मेरे लिए. मम्मा से रोज पूछ रही थी कि पोस्टमैन अंकल आये क्या? आज इंतजार की शिद्दत कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी थी. आज फिर पूछा तो मम्मा ने कहा पोस्टमैन को कई दिनों से इधर देखा ही नहीं है. लैटर का न आना बहुत परेशानी में डाल सकता था. इसलिए थोड़ी बेसब्री थी, पर कहीं न कहीं मन में विश्वास भी था कि आएगा जरुर. कुछ देर बाद पोस्टमैन अंकल आ ही गए. माँ ने मुझे बुलाया. माँ को उन्होंने कई सारी पोस्ट्स पकड़ाई पर मेरी नज़र जिस लिफाफे को ढूंढ रही थी वह नहीं दिखा. तो मैंने पोस्टमैन अंकल को उस लैटर के बारे में बताते हुए जब भी वह आये उसे जल्द से जल्द पहुँचाने की कह दिया. मम्मा ने अंदर आते हुए मैगजीन्स के बीच में से एक लिफाफा निकालते हुए मुझसे पूछा और हाँ यही मेरा वह सुकून लौटाने वाला लिफाफा था. इंतजार के खत्म होने से बड़ा सुकून और हो भी क्या सकता है.
 
कुछ देर बाद मैं पोस्टमैन अंकल के बारे में सोच रही थी. यहाँ इस शहर में आने के बाद से कितनी ही बार काँटों से भरे जीवन पथ में वो खुशियों के फूल चुन-चुन कर मेरे लिए लाते रहे हैं, जिनसे स्थायी न सही पर ज़िन्दगी का दर्द कुछ समय के लिए कम तो हो ही जाता है और सबसे बड़ी बात मुश्किलों का सामना करने का हौंसला भी मिल जाता है. मुझे उन्हें कुछ गिफ्ट देना चाहिए. क्या देना चाहिए यह सब सोचते-सोचते मैं कुछ काम निपटाने लगी और कुछ देर बाद फेसबुक पर आई. न्यूज़ फीड देखते हुए नज़र अचानक एक पोस्ट पर पड़ी जो कि एक पोस्टमैन और एक लड़की की संवेदनशील कहानी थी. उसमें उस लड़की ने उस पोस्टमैन को दिवाली के अवसर पर एक दिल छू लेने वाला गिफ्ट दिया था. मैं सोचने लगी देखो! इस लड़की ने तो गिफ्ट कर भी किया और मैं जो अभी तक सोच ही रही हूँ. उस पोस्ट को पढ़कर यह भावना और भी दृढ़ हो गयी कि अब तो कुछ अच्छा सा गिफ्ट करना ही है.
 
पिछले कुछ महीनों में (जब से ध्यान देना शुरू किया है) हजारों ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जिसमें जब भी कोई विचार मन में उठता है उसी से मिला जुला कुछ न कुछ कहीं देखने-पढ़ने को मिल जाता है. कोई पोस्ट लिखना टाल देती हूँ तो कुछ ही घंटों में किसी और की पोस्ट में वही विचार प्रकट हो जाते हैं. किसी बुक को पढ़ते समय कुछ सवाल पैदा होते हैं तो कुछ ही देर में किसी न किसी रूप में कहीं न कहीं उनका जवाब मिल जाता है. कई सवाल बहुत गूढ़ होते हैं पर एक दिन बस यही सोच लिया कि यह रसभरी क्या होती है? (रसमलाई का नाम रसभरी भी होता है यह मुझे नहीं पता था) और कुछ ही देर बाद फेसबुक पर किसी ने रसमलाई की फोटो पोस्ट की और उस पर रसभरी लिखा था. महीनों बाद किसी की पोस्ट दिखती है, उस व्यक्ति या उस पोस्ट के बारे में कुछ सोचने लगती हूँ कि मेरे लाइक या कमेंट कुछ करने से पहले ही उन जनाब का कोई कमेंट या लाइक मेरी पोस्ट पर आ जाता है. कई चीजों का पूर्वानुमान हो जाता है. ये सब तो बहुत छोटी-छोटी सी बातें हैं पर कुछ अनुभव तो इतने अद्भुत हैं कि उन्हें शब्द दे पाना संभव ही नहीं है. इन्हें संयोग कहा जा सकता है लेकिन वास्तव में संयोग जैसा कुछ होता नहीं. यह विचारों और मन पर काम करने वाला विज्ञान है. जिसे आधुनिक युग में आकर्षण का नियम कहा जाता है. लेकिन आध्यात्म में इसका समावेश युगों-युगों से है. कई उदाहरणों के साथ इस रूप में भी कि जब तक हमारी एक भी इच्छा शेष है हमें जन्म लेते ही रहना पड़ेगा.
 
फेसबुक पर आलोचना करती हुई, क्रूर व्यंग्य करती हुई, ख़तरनाक ताने मारती हुई, नकारात्मक, सिर्फ समस्यायों ही समस्यायों से भरी, गालियों और घृणा से सनी पोस्ट्स की अति देखती हूँ तो अच्छा नहीं लगता. विचार स्पंदन होते हैं. अपने ही जैसे विचारों और घटनाओं को आकर्षित करते हैं. विचार कब वस्तु या वास्तविकता बन जाए कहा नहीं जा सकता. हम अपने शब्दों और विचारों की अहमियत नहीं समझते, लेकिन इनके कितने घातक और अच्छे प्रभाव हो सकते हैं यह सोचा जाना बेहद जरुरी है. इसलिए शब्दों और विचारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझिये. ये सिर्फ आपके जीवन को नहीं बल्कि सबके जीवन को प्रभावित करते हैं. इसलिए जितना संभव हो प्रेम और सकारात्मकता को फैलाइये. कुछ पाने के लिए सबसे पहले उसके बारे में सोचना और बात करना ही जरुरी है. सिर्फ समस्यायों की चर्चा से तो समस्याएं ही हासिल होनी है. जरुरी है बातें समाधान की भी हो. प्रेम बोईये ताकि प्रेम पुष्पित और पल्लवित हो. ज़िन्दगी नफ़रत पर बर्बाद कर देने के लिए नहीं है. ज़िन्दगी का हासिल तो सिर्फ प्रेम ही हो सकता है और कुछ भी नहीं क्योंकि यहीं मृत्यु के उस हासिल तक पहुँचा सकता है जिसे मुक्ति कहते हैं.
 
By Monika Jain ‘पंछी’

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Sunday, December 6, 2015

Essay on Books in Hindi

Essay on Books are Our Best Friend in Hindi for Kids. Kitab par Nibandh, Pustak Lekh, Importance of Book Article, Library Speech, Pustakalaya Anuched, Paragraph. पुस्तक का महत्व पर निबंध, किताब लेख.

खुद से बेहतर किताब कौनसी?
 
अगर कोई आज मुझसे पूछे कि दुनिया में करने लायक सबसे अच्छे काम क्या हैं तो उस लिस्ट में एक काम को मैं निश्चित रूप से शामिल करुँगी, वह है किताबें पढ़ना, इसके बावजूद कि आज तक कोर्स बुक से इतर कुल 10-15 किताबें हीं पढ़ी हैं, और इस बात का गहरा अफ़सोस भी है कि मैंने बचपन से कोर्स से इतर किताबें पढ़ने में रूचि क्यों नहीं ली और तब वैसा मार्गदर्शन क्यों नहीं मिला जैसा फेसबुक से जुड़ने के बाद खोज पायी. पर हाँ एक बात यह भी है कि किसी भी अच्छे काम की शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती और जो आत्मा को ही एकमात्र सच मानते हैं उनके लिए तो वाकई में कभी देर नहीं होती क्योंकि उस सच को पाने के लिए अभी क्रमिक विकास के पथ पर चलते हुए जाने कितने जन्मों से गुजरना होगा. और अच्छी किताबों को पढ़ने में रूचि का जाग्रत हो जाना उसी विकास पथ पर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करना है.

अब बात आती है अच्छी किताबों की तो निश्चित रूप से यह व्यक्तिगत रूचि का विषय है कि किसे कौनसी किताब अच्छी लगेगी और कौनसी नहीं. पर मुझे यह लगता है कि हर मनुष्य अपने आप में एक मुक्कमल किताब है जिसे पढ़ लेने के बाद कुछ भी पढ़ना शेष नहीं रह जाता. हमारे अपने मन से बेहतर और कोई किताब नहीं हो सकती. इसलिए सबसे अच्छी किताबों की श्रेणी में मैं उन किताबों को रखती हूँ जो हमारे मन को निष्पक्ष रूप से पढ़ने में सहायक बनती है. क्योंकि स्वयं को पढ़ना ही जिसे हम स्वाध्याय या आध्यात्म भी कहते हैं हमें हमारी एकमात्र मंजिल तक पहुँचाने में सहायता करता है.

कुछ शब्दों, कुछ वाक्यों के गहरे अर्थ बहुत देर से समझ आते हैं. अब तक यह बात हमेशा सिर्फ दूसरों के मुंह से सुनी थी कि किताबें सबसे बेहतर दोस्त होती हैं पर बीतें दिनों कुछ ऐसी किताबें हाथ में आई जो कोरा आईना थी. जिन्हें पढ़ते हुए पता चला कि कोर्स से इतर भी ऐसी किताबें होती हैं जिन्हें घंटों बैठकर पढ़ा जा सकता है. कोर्स बुक्स तो अक्सर मजबूरी में ही पढ़नी होती है पर ये किताबें कुछ ऐसी थीं कि गंभीर विषय होते हुए भी इन्हें पढ़ते समय लगातार मुस्कुराया जा सकता है; जो ठहरकर बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देती है; जो हमारी अच्छाईयों, बुराईयों, कमियों और शक्तियों सभी का परिचय कुछ इस तरह हमसे करवाती हैं कि अपने विचारों और भावनाओं के प्रति एक सजग दृष्टि हममें विकसित हो जाती है; और इन सबसे इतर ऐसे अद्भुत अहसास और अनुभव दे जाती हैं जिन्हें शब्दों में व्यक्त किया ही नहीं जा सकता. इन किताबों ने मन के अध्ययन में बहुत सहायता की इसलिए इनके प्रति कृतज्ञता स्वाभाविक है और इन्हें सच्चा दोस्त समझना भी.

जब से किताबें पढ़ने का स्वाद चढ़ा है तो लिखना बस एक औपचारिकता भर रह गया है. पाठकों के सन्देश, उनके ईमेल्स, उन्हें ब्लॉग से मिली सहायता, प्रेरणा और मार्गदर्शन यही बस कुछ कारण रह गए हैं जिनकी वजह से लिखना जारी है. बाकी आज मुझे बाल गंगाधर तिलक का यह कथन बिल्कुल सार्थक लगता है, ‘मैं नरक में भी उत्तम पुस्तकों का स्वागत करूँगा, क्योंकि इनमें यह शक्ति है कि जहाँ ये होंगी, वहां अपने आप ही स्वर्ग बन जायेगा.’
 
By Monika Jain ‘पंछी’

How is this essay about books?


Saturday, November 21, 2015

Vinoba Bhave Quotes in Hindi

Acharya Vinoba Bhave Quotes in Hindi, Quotations, Slogans, Message, Sayings, Suvichar, Vichar, Teachings, Statements, Shiksha, Updesh. आचार्य विनोबा भावे के विचार, सुविचार, शिक्षाएं, उपदेश.
 
Vinoba Bhave Quotes

  • तगड़े और स्वस्थ व्यक्ति को भीख देना, दान करना अन्याय है. कर्महीन मनुष्य भिक्षा के दान का अधिकारी नहीं हो सकता. 
  • संघर्ष और उथल पुथल के बिना जीवन बिल्कुल नीरस बन कर रह जाता है. इसलिए जीवन में आने वाली विषमताओं को सह लेना ही समझदारी है.
  • ज्ञानी वह है जो वर्तमान को ठीक प्रकार समझे और परिस्थति के अनुसार आचरण करे.
  • कलियुग में रहना है या सतयुग में, यह तुम स्वयं चुनो, तुम्हारा युग तुम्हारे पास है.
  • निष्काम कर्मयोग तभी सिद्ध होता है जब हमारे बाह्य कर्म के साथ अन्दर से चित्त शुद्धि रुपी कर्म का भी संयोग होता है.
  • भविष्य में स्त्रियों के हाथ में समाज का अंकुश आने वाला है. उसके लिए स्त्रियों को तैयार होना पड़ेगा. स्त्रियों का उद्धार तभी होगा, जब स्त्रियाँ जागेंगी और स्त्रियों में शंकराचार्य जैसी कोई निष्ठावान स्त्री होगी.
  • खुदा से डरने वाले को और किसी का क्या डर.
  • महान विचार ही कार्य रूप में परिणित होकर महान कार्य बनते हैं.
  • यदि किसी को भी भूख-प्यास नहीं लगती तो अतिथि सत्कार का अवसर कैसे मिलता.
  • अभिमान कई तरह के होते हैं, पर मुझे अभिमान नहीं है, ऐसा भास होने जैसा भयानक अभिमान दूसरा नहीं है.
  • बुद्धि का पहला लक्षण है काम आरम्भ न करो और अगर शुरू कर दिया है तो उसे पूरा करके ही छोड़ो.
  • जिस राष्ट्र में चरित्रशीलता नहीं है, उसमें कोई योजना काम नहीं कर सकती.
  • यदि आप किसी चीज का सपना देखने का साहस कर सकते हैं तो उसे प्राप्त भी कर सकते हैं.
  • जब हम किसी नयी परियोजना पर विचार करते हैं तो हम बड़े गौर से उसका अध्ययन करते हैं. केवल सतह मात्र का नहीं, बल्कि उसके हर एक पहलू का.
  • ऐसा व्यक्ति जो एक घंटे का समय बर्बाद करता है, उसने जीवन के मूल्य को समझा ही नहीं है.
  • हम आगे बढ़ते हैं, नए रास्ते बनाते हैं और नयी परियोजनाएं बनाते हैं क्योंकि हम जिज्ञासु हैं और जिज्ञासा हमें नयी राहों की ओर ले जाती है.
  • प्रेरणा कार्य आरम्भ करने में सहायता करती है और आदत कार्य को जारी रखने में सहायता करती है.
  • अनुशासन, लक्ष्यों और उपलब्धि के बीच का सेतु है. यकीन मानिए ज्ञान की अपेक्षा अज्ञान ज्यादा आत्मविश्वास पैदा करता है.
  • औपचारिक शिक्षा आपको जीविकोपार्जन के लिए उपयुक्त अवसर देती है, जबकि अनुभव आपका भाग्य बनाते हैं.
  • जो सब की प्रशंसा करता है वह किसी की प्रशंसा नहीं करता.
  • परस्पर आदान-प्रदान के बिना समाज में जीवन का निर्वाह संभव नहीं है. 
  • जब तक कष्ट सहने की तैयारी नहीं होती तब तक लाभ दिखाई नहीं देता. लाभ की इमारत कष्ट की धूप में ही बनती है.
  • गरीब वह नहीं जिसके पास कम है, बल्कि धनवान होते हुए भी जिसकी इच्छा कम नहीं हुई है, वह सबसे अधिक गरीब है.
  • मौन और एकांत आत्मा के सर्वोत्तम मित्र है. 
  • द्वेष को हम द्वेष से नहीं मिटा सकते. प्रेम की शक्ति ही उसे मिटा सकती है.
  • प्रतिभा का अर्थ है बुद्धि में नयी कोंपलें फूटते रहना. नयी कल्पना, नया उत्साह, नयी खोज और नयी स्फूर्ति प्रतिभा के लक्षण हैं. 
  • मनुष्य जितना ज्ञान में घुल गया हो उतना ही कर्म के रंग में रंग जाता है
 
विनोबा भावे / Vinoba Bhave

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Character Quotes in Hindi

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Character Quotes

  • मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा नहीं वरन चरित्र है और यही उसका सबसे बड़ा रक्षक है. ~ अज्ञात / Unknown 
  • यदि नेता चरित्रवान नहीं है तो अनुयायियों में उसके प्रति श्रद्धा टिकना संभव नहीं. पूर्णतया शुद्ध चरित्र के आधार पर ही विश्वास टिक सकता है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • चरित्र बनाये रखना आसान है, लेकिन उसके भ्रष्ट हो जाने के बाद उसे सुधारना कठिन है. ~ थॉमस पेन / Thomas Paine 
  • परिस्थितियां मानव के नियंत्रण से बाहर हैं लेकिन हमारा आचरण हमारे नियंत्रण में हैं. ~ बेंजामिन डिजायरली / Benjamin Disraeli 
  • नीति परायण बनो, साहसी बनो, धुन के पक्के बनो. तुम्हारे नैतिक चरित्र में कहीं एक धब्बा तक न हो, मृत्यु से भी मुठभेड़ लेने की हिम्मत रखो. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • हमारा व्यक्तित्व जैसा होगा, वैसा ही दुनिया का नक्शा हम बनायेंगे. इसे चारित्र्य कहते हैं. ~ दादा धर्माधिकारी / Dada Dharmadhikari 
  • याद रखो कि न धन का मूल्य है, न नाम का, न यश का, न विद्या का, केवल चरित्र ही कठिनाई रुपी पत्थर की दीवारों में छेद कर सकता है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • इंसान का मन अक्सर चेहरे पर झलकने लगता है. बस पढ़ने का हुनर चाहिए. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • सम्मान की बजाय अपने चरित्र के प्रति अधिक गंभीर रहें. चरित्र ही यह बताता है कि आप वास्तव में क्या हैं. ~ जॉन वुडन / John Wooden
  • बिना आचरण के कोरा बौद्धिक ज्ञान वैसा ही है जैसे खुशबूदार लेप किया हुआ शव. ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi
  • आचरण बिना और अनुभव बिना केवल श्रवण से आत्मज्ञान की माधुरी का पता कैसे चले? ~ संत ज्ञानेश्वर / Saint Gyaneshwar
  • जिस राष्ट्र में चरित्रशीलता नहीं है उसमें कोई योजना काम नहीं कर सकती. ~ विनोबा भावे / Vinoba Bhave
 
How are these quotes about character?

Tuesday, November 17, 2015

Childhood Memories Essay in Hindi

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काश! वह प्रेम पत्र रहा होता

कागज पर लिखे प्रेम पत्र का अपना एक अलग ही आकर्षण है. कितना रोमांचक समय होगा वह जब एक दूसरे को प्यार करने वाले डर-डर के छुप-छुप के एक दूसरे को लैटर लिखा करते होंगे. फूल, गिफ्ट्स, चॉकलेट्स, मेसेजेज, ईमेल्स, फोन, व्हाट्स एप और डेटिंग के इस दौर में वह खतों वाला प्यार जाने किसे नसीब होता होगा. 

हमेशा स्कूल/डिस्ट्रिक्ट टॉप करने के लिए किताबों में खोयी रहने वाली, अव्वल दर्जे की अंतर्मुखी और सिंसियर यह लड़की, जिसे हमेशा बस एक-दो की ही कंपनी चाहिए होती थी, जिसे ग्रुप्स में रहना ज्यादा पसंद नहीं था...क्या किसी ने कभी मुझे भी वो कागज़ वाला प्रेम पत्र लिखा होगा यही याद करते-करते बचपन के समय में चली गयी. 

तब पाँचवी क्लास में पढ़ती थी. इनोसेंट का टैग तो आज तक नहीं उतर पाया है तो उस वक्त क्या रही होऊँगी, पता नहीं. पर हाँ, सही शब्द, गलत शब्द इतना तो पहचानती थी. भावनाओं को तो नवजात शिशु भी पहचान लेता है तो फिर मैं तो 10-11 साल की लड़की थी. कहते हैं इंटेलीजेंट और सिंसियर लड़कियों से लड़के थोड़ा डरते हैं. और खुद यह लड़की भी अपने में ही खोयी रहने वाली किसी की ओर नजर उठाकर भी नहीं देखने वाली, जिसे यह भी न मालूम होता था कि क्लास में पढ़ता कौन-कौन है, पर हाँ तब क्लास के कुछ लड़के होमवर्क के लिए कॉपी मांगने के लिए जरुर अक्सर घर आते थे. पाँचवी क्लास तक आते-आते लड़के और लड़कियों के बैठने की जगह अलग-अलग हो गयी थी. इसलिए शायद मन ने भी लड़के और लड़की के भेद को कुछ-कुछ स्वीकार कर लिया होगा. 

एक दिन प्रेयर के बाद क्लास में आकर बैठी थी. कॉपी-किताब निकालने के लिए बैग खोला तो देखा उसमें कागज का बॉल बनाकर डाला हुआ था. मैंने और मेरे पास बैठी मेरी सहेली दोनों ने उसे देखा. फिर मैंने उसे खोला तो उसमें एक लड़के ने अपने नाम के साथ कुछ मेसेज लिखा था. एक पार्क में मिलने के लिए बुलाया था. और जिन शब्दों का प्रयोग करते हुए यह लिखा था वह बिल्कुल अच्छे नहीं थे. सहेली तो हंसने लगी थी और मैंने झट से उसे वापस फोल्ड करके बैग में रख दिया. घर आकर चुपके से छत पर गयी और रोते-रोते उस लैटर के जितने बारीक टुकड़े कर सकती थी किये और उसे एक बारिश का पानी जाने वाले पाइप में डाल दिया. अब तो समझती हूँ कि ये गलत किया था, पर तब शायद मन में जाने क्या डर रहा हो.

कुछ दिन बाद वापस वैसा ही लैटर घर पे बैग खोलते वक्त मिला. भैया पास में ही बैठा था. मैंने फिर रोने लगी और रोते-रोते वह ख़त भैया को पकड़ा दिया. घर पे सबको पता चला. पापा ने प्रिंसिपल मैम से बात की. उस नाम के दो लड़के पढ़ते थे स्कूल में. एक सीनियर और एक जूनियर. प्रिसिपल मैम ने लैटर माँगा और कहा हैण्डराइटिंग मिलाकर उसे समझा देंगी और डांट देंगी. खैर! बात आई गयी हो गयी. लड़के का पता चला या नहीं यह सब कुछ पता नहीं. पर हाँ उसके बाद कोई ख़त नहीं आया था. वे दोनों लड़के रास्ते में भी एक-दो बार नजर आये थे. पर कभी पता नहीं चल पाया कि कौन था. इसके बाद स्कूल भी बदल गयी. आज कुछ बच्चे अपने स्कूल में चलने वाले टाइम पास और रोज-रोज बदलने वाले अफेयर्स के बारे में बता रहे थे. अचानक ही वह घटना याद आ गयी. जाने क्यों मन ने कहा कि काश! वह प्रेम पत्र रहा होता.


By Monika Jain ‘पंछी’

Interesting Facts about Books in Hindi

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Interesting Facts about Books

  • सन् 1939 में अर्नेस्ट विंसेट द्वारा लिखी गयी किताब गेड्सबाई में पांच हजार शब्द थे. इस किताब में एक बार भी ई (e) वर्ड का प्रयोग नहीं किया गया. 
  • एक लाख, तीस हजार डॉलर मूल्य की मिचेलेंजेलो-ला दोता दुनिया की सबसे महंगी किताब है. इसे मार्बल से डिजाइन किया गया है और इसका वजन 62 पौंड है. 
  • दुनिया में बेस्ट सेलिंग बुक्स की लिस्ट में सबसे ऊपर ’द बाइबिल’ है. इसके बाद सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों में है : क्वेश्चन फ्रॉम चेयरमैन माओ जेदोंग, कुरान, झिहुआं जिदिऑन, द बुक ऑफ़ मॉरमॉन. 
  • बुकवर्म दो तरह के होते हैं. एक जो किताबें पढ़ने के बहुत ज्यादा शौक़ीन होते हैं जिन्हें किताबी कीड़ा भी कहा जाता है और दूसरे वे कीड़े जिन्हें सच में किताबों के पन्ने खाना बहुत पसंद होता है. 
  • पुस्तकों की संख्या और शेल्फ के आधार पर वाशिंगटन डीसी, यूएसए में स्थित ’द लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस’ दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है. यहाँ बुक शेल्फ के दायरे को कवर करने के लिए वाहनों की सहायता लेनी पड़ती है. बिना रुके इस पूरे क्षेत्र को 8 घंटे में कवर किया जा सकता है. 
  • दुनिया का सबसे बड़ा बुक स्टोर बारनस एंड नोबेल बुक स्टोर है जो न्यूयार्क में स्थित है और 21 किमी क्षेत्र में फैला है.  
  • जनसँख्या बढ़ने से भी ज्यादा तेज गति से दुनिया में किताबें प्रकाशित होती हैं. जनसँख्या जहाँ 1.6 % प्रतिवर्ष की रफ़्तार से बढ़ती है वहीँ किताबें 2.8 % प्रतिवर्ष की रफ्तार से.
How are these facts about books? 
 
 

Sunday, November 15, 2015

Suji Upma Recipe in Hindi

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उपमा 

Suji Upma Recipe in Hindi


सामग्री :

सूजी : 2 कप
घी : ½ कप  
हरी मिर्च बारीक कटी हुई : 1 या सुखी पूरी लाल मिर्च के टुकड़े
8-10 काजू के टुकड़े या मूंगफली के दाने
पानी : 8 कप
राई, जीरा, सौंफ, नमक आदि.

विधि :

एक गैस पर पतीली में पानी लेकर इसे गर्म करने के लिए रख दें. दुसरे गैस पर एक कड़ाई में सूजी लें और इसे धीमी आंच पर 10 मिनट तक भूने. अब इसे एक बर्तन में खाली कर दें. कड़ाई को कपड़े से पौंछकर इसमें घी डालें. घी के गर्म होने पर इसमें काजू या मूंगफली के टुकड़े डालें. इसे 1 मिनट चलायें. अब इसमें राई, जीरा, सौंफ के दाने डालकर उनके तड़कने पर हरी मिर्च या सूखी पूरी लाल मिर्च के टुकड़े डाल दें. मिर्च को 1-2 मिनट पकाने के बाद इसमें भूनी हुई सूजी मिला दें और 1 मिनट चलायें. अब इसमें स्वादानुसार नमक भी मिला दें. अब इसमें दूसरी गैस पर गर्म किया हुआ पानी मिला दें और सूजी के गाढ़ी होने तक हिलाते रहें. अब गैस बंद कर गर्मागर्म सूजी को प्लेट में आम के अचार के साथ परोसें.
 
By Monika Jain ‘पंछी’

How is this recipe of suji upma? 
 
 

Roasted Poha Namkeen Recipe in Hindi

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रोस्टेड पोहा नमकीन

Roasted Poha Namkeen Recipe in Hindi


सामग्री :

पोहा : 4 कप

तेल या देसी घी : 4 टी स्पून

मूंगफली के दाने : 1 कप

काली मिर्च पाउडर, पुदीना पाउडर, सेंधा नमक, पिसी हुई शक्कर, सादा नमक : स्वादानुसार

 
विधि :

सबसे पहले कड़ाई में तेल या घी लें. इसके गर्म होने पर इसमें पोहा डाल दें. अब तेज आंच पर इसे लगातार 2 मिनट तक चलायें. इसके बाद आंच धीमी करके फिर 3-4 मिनट तक हिलाते रहें. पोहे थोड़े फूल जायेंगे और अलग-अलग हो जायेंगे. अब इन्हें एक चौड़े बर्तन में ले लें. अब कड़ाई में मूंगफली के दाने डालकर उन्हें भूने. जब दाने भुन जाएँ तो उन्हें एक अलग प्लेट में ले लें. ठंडा हो जाने पर हाथ से मसलकर इनके छिलके अलग कर दें, और छिले हुए दानों को बीच से दो-दो टुकड़े कर लें. अब इन्हें पोहे में मिला दें. अब इसमें काली मिर्च पाउडर, पुदीना, सेंधा और सादा नमक मिला दें. लीजिये तैयार है कम ऑइल में बनी पोहे की रोस्टेड नमकीन. अगर आप चाहे तो इसमें रोस्टेड चना दाल और रोस्टेड परमल भी मिला सकते हैं.
 
By Monika Jain ‘पंछी

How is this recipe of roasted poha namkeen?


Monday, November 9, 2015

Essay on Social Service in Hindi

Essay on Social Service in Hindi. Samaj Seva par Nibandh. Welfare Work Speech, Workers, Helping Services Write Up, Madad, Sahayta, Responsibility Article, Help Paragraph. समाज सेवा पर निबंध, सहायता.
 
सेवा नहीं है वह जिससे पाना हो मेवा

कोई भी कार्य सौ फीसदी सही या गलत नहीं हो सकता. क्योंकि इस पृथ्वी पर हर प्राणी का जीवन कुछ इस तरह से है कि बिना किसी दूसरे के शोषण और हिंसा के उसका अस्तित्व बच ही नहीं सकता. जब हम एक बिल्ली की जान बचा रहे होते हैं तब भी हम अनजाने में ही सही हजारों चूहों की जान को ख़तरे में डाल रहे होते हैं. इसके साथ ही हमारा हर कार्य चलना-उठना, बैठना, खाना-पीना, यहाँ तक कि सांस लेना भी असंख्य जीवों की मृत्यु पर ही संभव है. यह बात हर कार्य पर लागू है फिर चाहे वह सेवा ही क्यों न हो. ऐसे में जो चीज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है वह है कार्य करने के पीछे के भाव. इसी के चलते कुछ कार्य बंधन बन जाते हैं तो कुछ मुक्ति.

अक्सर लोगों को लगता है कि अनाथाश्रम में जाकर, वृद्धाश्रम में जाकर, गरीब बस्तियों में जाकर या कुछ विशेष लाइमलाइट में आने वाला कार्य करके ही सेवा हो सकती है. पर सेवा का यह कांसेप्ट जो कि पूर्णत: ईसाई धर्म से आयातित है भविष्योन्मुखी है. जब तक सेवा में कुछ पाने का प्रयोजन छिपा हुआ है, कुछ विशिष्ट महसूस करने की भावना का समावेश है तब तक वस्तुत: वह सेवा है नहीं. वह भी शोषण और हिंसा का विस्तार मात्र ही है. क्योंकि एक ओर भविष्य में धन, सुख, वैभव, यश, प्रसिद्धि, स्वर्ग या किसी भी प्रतिफल की चाह लिए कोई सेवा कार्य करता है तो वह भी किसी के दुःख के व्यवसायीकरण पर आधारित प्रतिफल ही हुए. दूसरी ओर पुण्य जो भविष्योन्मुखी होता है वह फिर नए जन्म और कर्मों का बंधन बनता है...तो वस्तुत: वह हिंसा का विस्तार ही है.

ऐसे में एक आध्यात्मिक यात्री के लिए सेवा हेतु अलग से किसी कूच या अभियान की जरूरत नहीं होती. उसका तो पूरा जीवन ही आत्म सुधार की दिशा में होता है. अपने विस्तार, शोषण और हिंसा को कम करने से बेहतर कोई इस दुनिया के लिए और स्वयं के लिए कुछ कर भी नहीं सकता. इसके अलावा अपनी जीवन यात्रा में चलते हुए व्यक्ति को हजारों ऐसे अवसर मिलते हैं जहाँ वह सेवा का उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है. पर वह सेवा निष्प्रयोज्य होनी चाहिए. वह भविष्योन्मुखी नहीं बल्कि अपने ही किसी पुराने पाप कर्म की निर्जरा के रूप में या प्रायश्चित्त के रूप में अतीतोन्मुखी होनी चाहिए. और उसे वहीँ भूलकर आगे बढ़ जाना चाहिए.

यह तो बात हुई आध्यात्मिक यात्री की. लेकिन हम जैसे सामान्य मनुष्य जो न तो पूर्ण रूप से आध्यात्म को चुन सकते हैं और ना ही पूरी तरह से भौतिकवादी होना चाहते हैं ऐसे में हमारा रास्ता क्या हो? बेशक जहाँ तक संभव हो हमारी सेवा निष्काम और निष्प्रयोज्य ही होनी चाहिए. अवसर होते हुए भी जितना संभव हो हमें अपना विस्तार कम ही रखना चाहिए. क्योंकि पहले लाखों जीवों का शोषण करके करोड़पति बनना और फिर लाखों रुपये दान करना अपनी ऊर्जा को व्यर्थ गंवाना है. लेकिन हाँ जब उद्देश्य से बचना संभव न हो हो तब वह निश्चित रूप से नैतिक ही हो, अनैतिक नहीं. भविष्योन्मुखी पाप और पुण्य दोनों में से हम किसी को न चुने वह सबसे आदर्श स्थिति होती है, क्योंकि अंतत: दोनों पाप ही बन जाते हैं, अंतर बस परिमाण का होता है. लेकिन जब दोनों में से किसी एक को चुनना अपरिहार्य हो तो बेशक पुण्य का ही चुनाव होना चाहिए. क्योंकि जब तक दुनिया में रहने की चाह है तब तक हर कोई सुख की मात्रा ही अधिक चाहेगा इसलिए दुनिया को बेहतर बनाने के लिए समाज कल्याण और कुरूतियों के उन्मूलन की दिशा में किये गए कार्य भी बेहद जरुरी है. भले ही सब कुछ आँखों का भ्रम ही क्यों न हो.

इसके अतिरिक्त आत्म सुधार के लिए भी निरंतर प्रयत्नशील रहना चाहिए. हम जो भी कार्य करते हैं हम उसके प्रति कितने ईमानदार हैं...एक शिक्षक के रूप में, एक डॉक्टर के रूप में, एक वकील के रूप में हम अपने प्रोफेशन के प्रति कितने ईमानदार हैं...हमसे मदद मांगने वालों की सक्षम होते हुए हम कितनी मदद कर पाते हैं...रिश्वत, चोरी, भ्रस्टाचार, शोषण, अन्याय, झूठ, छल, धोखा, क्रोध इन सब चीजों से हम अपने आपको कितना दूर रख पाते हैं...हम लोगों की आर्थिक, जातीय, धार्मिक किसी भी स्थिति को नजरंदाज करते हुए उनके साथ किस तरह से व्यवहार करते हैं...आत्म सुधार की दिशा में ऐसी हजारों बातें हैं जो अपनाई जा सकती है. क्योंकि वस्तुत: कर्म से पूर्ण रूप से बचना तो संभव है नहीं इसलिए कर्म के पीछे के भाव बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं.

By Monika Jain ‘पंछी’


Thursday, November 5, 2015

Essay on Children’s Day in Hindi

Essay on Children’s Day in Hindi. 14 November Kids Speech, Jawaharlal Nehru Article, Child Labour Paragraph, Bal Diwas par Nibandh, Bachpan Bachao Bhashan. बाल दिवस पर निबंध, बचपन बचाओ, भाषण, लेख.
 
बचपन कहीं बचा नहीं

Essay on Children’s Day in Hindi

एक औरत ठिठुरती सर्दी में चार-पांच महीने के बच्चे को बिना कोई कपड़ा पहनाये घर-घर भीख मांगने जाती है। एक दूसरी औरत बच्चे को इस हालत में देखकर उसके पहनने के लिए कोई कपड़ा देती है। पहली औरत कपड़ा बच्चे को पहनाकर आगे बढ़ जाती है और दूसरे घर के सामने पहुँचने से पहले बच्चे के शरीर से वह कपड़ा उतार लेती है और भरी सर्दी उसे नंगा कर फिर से भीख मांगने लगती है। पहली औरत बस विस्मय से देखती रह जाती है। जानती हूँ पेट की आग, स्वार्थ और लालच के सामने रिश्ते दम तोड़ देते हैं, बच्चे उस आग से लड़ने के हथियार बन जाते हैं। सवेरा होते ही कूड़ेदान से प्लास्टिक, लोहा आदि बीनने के लिए घर से बाहर निकाल दिए जाते हैं। पर भूख की यह कीमत सच बहुत बड़ी है, बहुत बोझिल। इतनी कि सारी दुनिया के पेट की तृप्ति भी इसे न्यायसंगत नहीं ठहरा सकती।
 
खैर, यह तो बात हुई उन बच्चों की जिनका जन्म ही अभावों में होता है, और अक्सर इन्हीं अभावों में इनका सारा बचपन घुल जाता है। जिसे बचाने के लिए एक व्यक्ति से लेकर पूरे राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक प्रयासों और नीतियों की जरुरत है। पर सुख सुविधा से संपन्न या मध्यमवर्गीय घरों के बच्चे? क्या वे अपना बचपन जी पा रहे हैं? क्या उनकी मासूमियत को हम सहेज पा रहे हैं? शायद नहीं।
 
एक पिता अपनी एक छोटी सी बच्ची के साथ बाहर खड़े हैं। शरीर पर खुजली से त्रस्त एक श्वान सड़क पर इधर-उधर दौड़ रहा है। बच्ची ने जिज्ञासावश पूछा, ‘पापा, इस डॉगी को क्या हुआ’ पापा ने उस जानवर की तरफ नाक-भौंह सिकोड़ते हुए कहा, ‘बेटा, यह बहुत गन्दा डॉगी है। इसके पास बिल्कुल नहीं जाना है और यह कभी पास भी आये तो इसे पत्थर मारकर भगा देना।’
 
पापा चाहते तो यह भी कह सकते थे कि यह कोई गन्दा नहीं बस एक बीमार जानवर है। आप छोटे हो इसलिए आपको उसके पास नहीं जाना है। उसे बेवजह पत्थर नहीं मारना है, बस उससे दूर रहना है और उसके लिए मन में दया के भाव ही रखने हैं। लेकिन हम बच्चों को प्रेम नहीं नफरत करना सिखा रहे हैं।
 
बचपन का वह समय जो खिलखिलाता, मुस्कुराता, हर तरह के तनाव से कौसों दूर और मासूमियत व निर्दोषता से परिपूर्ण होना चाहिए, उसे हम नहीं सहेज पा रहे। क्या थमा रहे हैं हम बच्चों को? जो उम्र दादा, नाना, पापा, मामा और चाचा के कन्धों की सवारी करने की है, उस उम्र में हम बच्चों के कन्धों पर दुनिया-जहाँ का बोझ बस्ते के रूप में लाद रहे हैं। क्लास में अव्वल आने या परीक्षा में ज्यादा से ज्यादा अंक लाने का तनाव समय से पहले उन्हें बहुत गंभीर बना देता है। कई बच्चे तो इन अपेक्षाओं के बोझ को झेल भी नहीं पाते और इतनी छोटी उम्र में आत्महत्या कर इस समूची शिक्षा व्यवस्था पर एक प्रश्न चिह्न छोड़कर चले जाते हैं। जो समय उछलने-कूदने, फुदकने, टहलने और किलकारियों का है उस समय को हम कैद कर रहे हैं खचाखच भरी बसों में। और तो और आजकल बच्चों को यह भी पता नहीं होता कि खेलना क्या और कैसे है? गिल्ली-डंडा, छिपा-छिपी, सितोलिया, लंगड़ी टांग, शतरंज, कैरम, खो-खो, रुमाल झपट्टा ये सब गुजरे जमाने के किस्से हैं। आजकल के बच्चों के पास कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स के अलावा कोई ऑप्शन नहीं। और फिर हम बड़ों के रेस्ट्रिक्शंस भी बड़े गज़ब के होते हैं। मिट्टी में नहीं खेलना है, उन बच्चों के साथ नहीं खेलना है (क्योंकि उन बच्चों के बड़ों से नहीं बनती), ये नहीं खेलना है, ऐसे नहीं खेलना है और भी न जाने क्या-क्या।
 
बच्चों से प्रेम और मैत्री की भावना भी छीन ली हमने और उसकी जगह थमा दिए प्रतिस्पर्धा, तनाव और कुछ भी कर गुजरने की भावना से भरे टैलेंट हंट शोज और कम्पटीशन्स। जाहिर है इन प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए दिन रात एक कर दिए जाते हैं। हर अभिभावक की उम्मीद कि मेरा बच्चा ही जीते, पर सारे बच्चे तो जीत नहीं सकते। ऐसे में जो हारते हैं, उन्हें एक पल को लगता है जैसे उनकी सारी दुनिया ही खत्म हो गयी हो। इतनी सी उम्र में मायूसी और निराशा कौनसे गुल खिलाएगी, यह जरा सोचने वाली बात है। दूसरी ओर सबकी आँखों का तारा बना, जीत का ताज पहनने वाला बच्चा कितनी महत्वकांक्षाओं, अभिमान और अपेक्षाओं से भर सकता है, यह भी विचारणीय है। आगे चलकर यही भावनाएं तो दुनिया जहाँ के संघर्षों और शोषण की जड़े बनती है। जरा सोचकर देखने वाली बात है। क्या इतनी सी उम्र में जीत-हार से इतना फर्क पड़ना चाहिए? बच्चों में कैसी होड़? लेकिन बड़ों की अपेक्षाओं, प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ के इस खेल में कई बच्चों का आत्मविश्वास टूट जाता है और कुछ बच्चे आत्ममुग्धता के शिकार हो जाते हैं। दोनों ही स्थितियां भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं।

इसलिए बहुत जरुरी है हम सब के लिए यह समझना कि अगर बच्चों को हम ऐसी प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनाते भी हैं तो बस उनका प्रतिभागी होना ही महत्वपूर्ण होना चाहिए। जीतने और हारने से कई ज्यादा जरुरी है कुछ बेहतर सीखना और अपने डर को खत्म करना। क्योंकि प्रतियोगिताएं होती ही कुछ बेहतर सीखने-सिखाने, आत्मविश्वास को मजबूत करने, नए-नए लोगों से मिलने और नयी-नयी जानकारियां प्राप्त करने के लिए। और जिसने सीख लिया वह तो हारकर भी जीत गया। इसलिए अगर जीत की ख़ुशी हो तो हार भी सहर्ष स्वीकार होनी चाहिए। बच्चे अभी इतने नाजुक हैं कि मैडल्स, सर्टिफिकेट्स और तमगों का बोझ नहीं उठा सकते। उन्हें फूलों सा खिला रहने दिया जाये, इसी में हमारी समझदारी है।
 
टीवी, इन्टरनेट और मोबाइल संस्कृति ने भी बचपन को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अपनी मासूमियत से सभी के दिलों को जीत लेने वाले बाल कलाकारों के जीवन की सच्चाई इतनी मासूम नहीं। इतनी छोटी उम्र का अभिनय, पॉपुलैरिटी और स्टारडम आने वाले भविष्य के उतार-चढ़ावों को स्वीकार करने में बाधा डालता है और बचपन की सारी बेफिक्री को भी लूटकर ले जाता है। वहीं दूसरी ओर टीवी, मोबाइल और इन्टरनेट के उपयोगकर्ता बच्चे प्रकृति की निकटता से दूर इस आभासी मनोरंजन में डूबे हिंसक और फूहड़ कार्टून सीरियल्स और वीडियो गेम्स की लत के कारण गुस्से, तनाव, चिड़चिड़ाहट, अकेलेपन, हिंसा और अवसाद के शिकार हो रहे हैं। जिसकी वजह से उनका मानसिक और शारीरिक विकास बाधित हो रहा है। एकल परिवारों और जनरेशन गैप के चलते अब वो दादी और नानी की कहानियां भी नहीं रही जो बचपन से बच्चों के चरित्र को वह मजबूती देती थी जो आगे चलकर देश का भविष्य बनता था। अब तो मम्मी और पापा दोनों की जॉब में व्यस्तता की वजह से बाकी रह गए हैं बस टीवी पर आने वाले ऊलजुलूल कार्यक्रम, हिंसक और बेहुदे कार्टून केरैक्टर्स, इन्टरनेट पर पोर्न तक पहुँच, एक्शन मूवीज, फूहड़ और अश्लील गाने, मोबाइल के उत्तेजना और निराशा पैदा करने वाले गेम्स जो नफरत, हिंसा, उन्माद और भटकाव से भरे भविष्य का आईना दिखा रहे हैं।
 
बड़ी ही विडम्बना पूर्ण स्थिति है। एक ओर देश का भविष्य कचरे के ढेर में से प्लास्टिक, पोलीथिन और बेचने लायक चीजें चुन रहा है, ताकि एक वक्त की रोटी का जुगाड़ हो सके। होटल, रेस्तरां और घरों में झूठे बर्तनों को रगड़ रहा है ताकि रात को भूखे पेट न सोना पड़े। स्कूल जाते बच्चों को देखकर इस बचपन की आँखें एक पल को चमकती है लेकिन अगले ही पल मालिक की फटकार पर फिर से बर्तनों के ढेर में जा गढ़ती है। दूसरी ओर कन्धों पर जमाने भर का बोझ लादे ऊपर से नीचे तक बंधा हुआ बचपन है जो सड़कों पर दौड़ते-खेलते पिल्लों को देखकर पल भर ठहरकर मुस्कुरा लेना चाहता है लेकिन अगले ही पल खचाखच भरी बसों का हॉर्न उनकी मुस्कुराहट को लील जाता है। एक बचपन वर्तमान की रोटी के इंतजाम के लिए जूझ रहा है और दूसरा बचपन भविष्य की रोटियों के इंतजाम के लिए। और जिस देश का बचपन ही इतना जूझता नजर आये उस देश के भविष्य की दिशा क्या होगी?
 
Monika Jain ‘पंछी’
 
How is this essay about Children’s Day?

Wednesday, November 4, 2015

Milk Dalia Recipe in Hindi

Doodh Dalia Recipe in Hindi. How to Make Sweet Milk Wheat Healthy Instant Breakfast, Gehun ka Meetha Daliya, Indian Baby Fast Food Recipes, For Kids. दूध गेंहू का दलिया बनाने की विधि, नाश्ता रेसिपी.
  
गेहूं और दूध का मीठा दलिया

Milk Dalia Recipe in Hindi
बेचलर्स, अकेले रहने वाले या बहुत ज्यादा व्यस्त लोगों के लिए खाना बनाना एक भारी काम हो जाता है. इसी तरह बच्चों के लिए भी ऐसा क्या बनाया जाए जो हेल्थी होने के साथ-साथ टेस्टी भी हो, यह प्रश्न हर माँ को परेशान करता है. ऐसे में दूध दलिया एक अच्छा ऑप्शन है जो झटपट तैयार तो होता ही है. इसके साथ-साथ हेल्दी और टेस्टी भी है. बच्चे अगर दूध न पीते हों तो भी एक बहुत अच्छा विकल्प है और सुबह के नाश्ते के लिए सबसे बेहतर भी.
 
सामग्री :
 
गेहूं का दलिया : ½ कप 
दूध : 4 कप या 2 गिलास
इलायची पाउडर : दो चुटकी 
कुटी हुई बादाम, अखरोट व काजू : 2 छोटे चम्मच 
किशमिश : 20-30 दाने या इच्छानुसार 
घी : 1 छोटा चम्मच 
शक्कर : स्वादानुसार
 
विधि :
 
एक प्रेशर कुकर लें. इसमें सबसे पहले दलिया, फिर इलायची पाउडर, कुटी हुई बादाम, अखरोट व काजू , किशमिश सब मिला दें. अब इसमें दूध डालकर गैस पर रखे. 1-2 मिनट्स चम्मच से हिलाकर कुकर बंद कर दें. धीमी आंच पर दो सीटी लें. कुकर के खुलने पर इसे एक कटोरी या थाली में परोसे. इसमें इच्छानुसार घी और शक्कर मिलाएं. किशमिश दलिया को मीठा कर देती है इसलिए शक्कर को अवॉयड किया जा सकता है. इसी तरह जिन्हें घी से परहेज हो वे घी को भी अवॉयड कर सकते हैं. लीजिये तैयार है गरमागरम दलिया सुबह के नाश्ते के लिए.
 
नोट : जब बच्चों के लिए यह दलिया बनाये तो ड्राई फ्रूट्स और किशमिश का इस्तेमाल उनकी आयु अनुसार करें. ड्राई फ्रूट्स का पाउडर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

Tuesday, November 3, 2015

Methi Benefits in Hindi

Methi Dana Health Benefits in Hindi. Khane ke Fayde, Fenugreek Seeds Nutritional Value, Leaves Vegetable Advantages, Nutrition Facts Information, Medicinal Uses, Gun, Labh. मेथी खाने के फायदे, लाभ.
 
Methi Health Benefits
 
  • मेथी दाने में फास्फेट न्युक्लिओ अल्ब्यूमिन, लेसिथिन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, कॉपर, जिंक, सोडियम आदि शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. 
  • मेथी दानों को पीसकर उसका लेप बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं, रूसी और बालों के झड़ने की समस्याएं समाप्त होती है. मेथी दानों को रात भर नारियल के गर्म तेल में भिगोकर रखने और सुबह इस तेल से मसाज करने से भी लाभ मिलता है.
  • जोड़ों के दर्द की स्थिति में सुबह-शाम एक से तीन ग्राम मेथी दाने पानी में भिगोकर व चबाकर खाने से लाभ होता है.
  • मेथी का सेवन मानसिक सक्रियता को भी बढ़ाता है.
  • डायबिटीज में हरी मेथी का सेवन फायदेमंद रहता है. सुबह शाम इसका रस भी पीया जा सकता है. यह रक्त में शक्कर की मात्रा को कम कर देता है. इसके अलावा प्रतिदिन एक चम्मच मेथी दाना पाउडर का पानी के साथ सेवन भी इस रोग में राहत पहुंचाता है.
  • मेथी पाचन क्रिया में सहायक है. इसमें मौजूद पाचक एंजाइम्स अग्नाशय को अधिक क्रियाशील बनाते हैं.
  • हाई बीपी, कब्ज, निम्न रक्तचाप, अपच आदि रोगों में मेथी का सेवन उपयोगी रहता है.
  • मेथी के पत्तों की सब्जी सुबह शाम खाने और 1 चम्मच मेथी के बीज का सुबह शाम गर्म दूध के साथ सेवन करने से सर्दी जुकाम में राहत मिलती है.
  • मेथी दाने के लड्डू बनाकर 3 हफ्ते सुबह शाम सेवन करने से और दर्द वाले अंग पर मेथी के तेल से मालिश करने से कमर दर्द में आराम मिलता है.
  • मेथी के पत्तों को अच्छी तरह पीसकर पानी में घोल कर पीने और शरीर पर लेप करने से शारीरिक जलन में राहत मिलती है.
  • दाना मेथी का एक इंच मोटा तकिया बनायें. इसे सिरहाने लगाकर सोने से गहरी नींद आती है.
  • एक चम्मच मेथी के दानों को एक कप पानी में डालकर उबालें. जब पानी आधा रह जाएँ तो इसे छानकर पी लें. इससे खांसी में राहत मिलती है.
 
If you are also aware about any other health benefits of Methi than feel free to share it here.
 
Note : Consult your doctor before using any remedy stated here. 
 
 

Saturday, October 31, 2015

Religion Quotes in Hindi

Religion Quotes in Hindi. Religious Sms, Spiritual Thoughts, Dharma Slogans, Dharmik Vichar, Suvichar, God Messages, Quotations, Suktiyan, Sayings, Proverbs, Status. धर्म पर विचार, धार्मिक सुविचार.
 
Religion Quotes

  •  किन विषयों पर लिखना पसंद है? निसंदेह 'प्रेम और धर्म'. पर जिस दिन धर्म प्रेम बन जाएगा और प्रेम धर्म, उस दिन लिखने की जरुरत भी ना रहेगी. उस दिन बस इन्हें जी भर के जीया जाएगा. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमने कुछ शब्दों, कुछ प्रतीकों को बहुत गहरे से पकड़ लिया है. तथ्य यह है कि बाहरी किसी भी चीज पर पकड़ जब बहुत गहरी हो जाती है तो वहां धर्म के अलावा सारे काम होने लगते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • धर्म वहां है जहाँ सभी प्राणी निर्भयता पूर्वक विचरण कर सकते हैं. जहाँ किसी की उपस्थिति किसी की उपस्थिति से बाधित नहीं. ~ Monika Jain ‘पंछी
  • 'धर्म' और 'प्रेम' दो ऐसे शब्द हैं जिन पर मानव जाति ने सबसे ज्यादा अत्याचार किया है. ~ Monika Jain ‘पंछी
  • जो सच में धार्मिक होते हैं वे अपना मंदिर-मस्जिद अपने साथ लेकर चलते हैं. उन्हें किसी मंदिर या मस्जिद के बनने और टूटने से फर्क नहीं पड़ता. ~ Monika Jain ‘पंछी
  • धर्म तो स्वभाव में होना चाहिए. आत्मा में झलकता हुआ. कार्यों और व्यवहार से छलकता हुआ. रोम-रोम में बसा हुआ. उसके लिए बाह्य कर्म कांडों की क्या जरूरत? ~ Monika Jain ‘पंछी
  • संसार की समस्त प्रवृत्तियां आत्मा को हानि पहुँचाने वाली है, जबकि धर्म की समस्त प्रवृत्तियां आत्मा को हितकारी है, आत्मा का कल्याण करने वाली है. ~ अज्ञात / Unknown
  • धर्म, मनुष्य को कर्त्तव्य पालन के साथ संयम और सादगी से रहने के लिए प्रेरित और संस्कारित करता है. ~ अज्ञात / Unknown
  • धर्म ही एक ऐसा सच्चा और निष्कपट मित्र है, जो कि मरने पर भी आत्मा के साथ जाता है ~ मनुस्मृति / Manusmriti 
  • जो व्यक्ति धर्म के लिए केवल किताबें पढ़ता है, उसकी हालत तो गल्पवाले उस गधे की है, जो पीठ पर चीनी का भारी बोझ ढोता हुआ भी उसकी मिठास को नहीं जान पाता. ~ अज्ञात / Unknown 
  • रूढ़ियाँ कभी धर्म नहीं होती. वे एक-एक समय की बनी हुयी सामाजिक शृंखलाएँ हैं. वे पहले की शृंखलाएँ जिनसे समाज में साफ़ सुथरापन था, मर्यादा थी, पर अब वह जंजीरें बन गयी हैं. ~ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' / Suryakant Tripathi Nirala
  • राजधर्म, आचार्य धर्म, वीर धर्म सब पर सोने का पानी फिर गया, सब टकाधर्म हो गए. धन की पैठ मनुष्य के सब कार्य क्षेत्रों में करा देने से, उसके प्रभाव को उतना विस्तृत कर देने से, ब्राह्मण धर्म और क्षात्र धर्म का लोप हो गया, केवल वनिग्धर्म रह गया. ~ रामचंद्र शुक्ल / Ramchandra Shukla 
  • भक्ति से बड़ी भारी शर्त है निष्काम की. भक्ति के बदले में उत्तम गति मिलेगी, इस भावना को लेकर भक्ति हो ही नहीं सकती. भक्ति के लिए भक्ति का आनंद ही उसका फल है. ~ रामचंद्र शुक्ल / Ramchandra Shukla  
  • कुछ राम को चुन रहे हैं, कुछ रावण को. कुछ दुर्गा को तो कुछ महिषासुर को. सबको पूजने के लिए कोई ना कोई तो चाहिए ही. ऐसा थोड़े हो सकता है कि जिसकी जो बात उचित लगे उसे चुन लें. ~ Monika Jain ‘पंछी

How are these religion quotes ?



Friday, October 23, 2015

Rabindranath Tagore Quotes in Hindi

Rabindranath Tagore Thakur Quotes in Hindi. Vichar, Shiksha, Gitanjali Thoughts, Quotations, Slogans, Sayings, Dohe, Jayanti Sms, Messages, Lines. रविन्द्र नाथ टैगोर के विचार, रवीन्द्रनाथ ठाकुर.

Rabindranath Tagore Quotes

  • तर्कों की झड़ी, तर्कों की धूलि और अन्धबुद्धि ये सब आकुल व्याकुल होकर लौट जाती है, किन्तु विश्वास तो अपने अन्दर ही निवास करता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं है. 
  • सिर्फ खड़े होकर पानी को ताकते रहने से आप समुंद्र को पार नहीं कर सकते. 
  • स्वर्ण कहता है - मुझे न तो आग में तपाने से दुःख होता है, न काटने पीटने से और न कसौटी पर कसने से. मेरे लिए तो जो महान दुःख का कारण है, वह है घुंघची के साथ मुझे तौलना. 
  • बीज के ह्रदय में प्रतीक्षा करता हुआ विश्वास जीवन में एक महान आश्चर्य का वादा करता है, जिसे वह उसी समय सिद्ध नहीं कर सकता. 
  • हमेशा तर्क करने वाला दिमाग धार वाला वह चाकू है जो प्रयोग करने वाले के हाथ से ही खून निकाल देता है.
  • सच्ची आध्यात्मिकता, जिसकी शिक्षा हमारे पवित्र ग्रंथों में दी हुई है, वह शक्ति है, जो अन्दर और बाहर के पारस्परिक शांतिपूर्ण संतुलन से निर्मित होती है. 
  • मन जहाँ डर से परे है और सिर जहाँ ऊँचा है, ज्ञान जहाँ मुक्त है और जहाँ दुनिया को संकीर्ण घरेलु दीवारों से छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटा नहीं गया है, जहाँ शब्द सच की गहराइयों से निकलते हैं, जहाँ थकी हुई प्रयासरत बाहें त्रुटि हीनता की तलाश में हैं, जहाँ कारण की स्पष्ट धारा है, जो सुनसान रेतीले मृत आदत के वीराने में अपना रास्ता खो नहीं चुकी है, जहाँ मन हमेशा व्यापक होते विचार और सक्रियता में तुम्हारे जरिये आगे चलता है, और आज़ादी के स्वर्ग में पहुँच जाता है. ओ पिता! मेरे देश को जागृत बनाओं. 
  • आश्रय के एवज में आश्रितों से यदि काम ही लिया गया, तो वह नौकरी से भी बदतर है. उससे आश्रयदान का महत्त्व ही जाता रहता है. 
  • जो आत्मा शरीर में रहती है, वही ईश्वर है और चेतना रूप से विवेक के द्वारा सब शरीरों का काम चलाती है. लोग उस अन्तर्देव को भूल जाते हैं और दौड़-दौड़ कर तीर्थों में जाते हैं. 
  • देश का जो आत्माभिमान हमारी शक्ति को आगे बढ़ाता है, वह प्रशंसनीय है. पर जो आत्माभिमान हमें पीछे खींचता है, वह सिर्फ खूंटे से बांधता है, यह धिक्कारनीय है. 
  • विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है. 
  • समय परिवर्तन का धन है. परन्तु घड़ी उसे केवल परिवर्तन के रूप में दिखाती है, धन के रूप में नहीं.
  • मनुष्य जीवन महानदी की भांति है जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओं में राह बना लेती है.
  • जिस तरह घोंसला सोती हुई चिड़ियाँ को आश्रय देता है उसी तरह मौन तुम्हारी वाणी को आश्रय देता है.
  • हमारा मन पोथियों के ढेर में और शरीर असबाब से दब गया है, जिससे हमें आत्मा के दरवाजे-जंगले दिखाई नहीं देते.
  • मैं तुझसे आकाश, प्रकाश, मन, प्राण किसी की भिक्षा नहीं मांगता. केवल यही चाहता हूँ कि मुझे प्रतिदिन लालसाओं से बचने योग्य बना दे, यही मेरे लिए तेरा महादान होगा.

रवीन्द्रनाथ टैगोर / Rabindranath Tagore

How are these quotes of Rabindranath Tagore? 

Wednesday, October 21, 2015

Essay on Indoor and Outdoor Games in Hindi

Essay on Indoor Outdoor Games in Hindi for Kids, Students. Harmful Violence Effects of Cartoons on Children's Behavior and Psychology. Playing Video Games on Mobile, Computer. Television Addiction.
 
माँ की पाती ~ 1
प्यारी पंख,
 
कल तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हारे मामा तुम्हारे लिए वीडियो गेम लेकर आये. कल से तुम उसे देखकर चहक रही हो और अपने सारे दोस्तों से अपनी यह ख़ुशी बाँट रही हो. तुम्हें ख़ुश देखकर मैं भी बहुत ख़ुश हूँ. तुम्हारी यह चहक हमेशा बनी रहे. पर मेरी बच्ची, कुछ जरुरी बातें हैं जो तुम्हारे इन कंप्यूटर और वीडियो गेम्स की दुनिया में दाखिल होने से पहले तुम्हें बताना चाहती हूँ.
 
खेल हमारी ज़िन्दगी का हिस्सा जरुर होते हैं, लेकिन इस बात का हमेशा ख़याल रखना कि वे हमारे जीवन पर नकारात्मक रूप से हावी ना होने पाएँ. और इनमें भी तुम जो रस्सी, बैडमिंटन, रेसिंग, साइकिलिंग जैसे आउटडोर गेम्स खेलती हो न, उन्हें हमेशा इन कंप्यूटर, मोबाइल और वीडियो गेम्स पर प्राथमिकता देना.
 
बेटू, तुम्हें याद है तुम्हारे निशांत भैया? तुम्हारी सुम्मी आंटी और संजय अंकल के बेटे. पिछली बार जब अंकल-आंटी घर आये थे तो कितने परेशान थे. क्या बता रहे थे कि निशांत पूरे दिन बस टीवी, कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स से चिपका रहता है. दोस्त खेलने को बुलाते हैं तब भी उसके थोड़ी देर में आ रहा हूँ...थोड़ी देर में आ रहा हूँ...कहते-कहते रात हो जाती है पर उसके वो ‘एलियन आइसोलेशन’ और ‘ब्लू एस्टेट’ जैसे मार-धाड़ से भरे गेम्स खत्म नहीं होते. ना उसे खाना खाने का होश रहता और ना पानी पीने का.
 
मेरी प्यारी बच्ची, मैं जानती हूँ तुम तो बहुत समझदार हो. फिर भी इस बात का हमेशा ख़याल रखना है तुम्हें कि कोई भी ऐसा गेम बिल्कुल नहीं खेलना है, ना ही ऐसा कोई कार्टून शो देखना है जो हिंसा, खून-खराबे या मारपीट से भरा हो. बेटा, ऐसे गेम्स और कार्टून शो दिमाग पर बहुत बुरा असर डालते हैं. तुम देखती हो ना निशांत को. कितना चिड़चिड़ा हो गया है वह. कई बार स्कूल में मार-पीट तक कर आता है. स्टडी में भी उसकी परफॉरमेंस अच्छी नहीं रही है.
 
तो मेरी बच्ची, तुम्हें हमेशा ऐसे गेम्स खेलने हैं जो तुम्हें सकारात्मक, मजबूत और क्रिएटिव बनाये और तुम्हारी मानसिक और बौद्धिक क्षमता का विकास करे. हम जल्द ही तुम्हारे लिए ऐसे पॉजिटिव गेम्स की लिस्ट बनायेंगे. जिन्हें तुम अपने खाली समय में खेल सको. बाकी अगली बार जब हम निशांत के घर जायेंगे तो उसे भी अच्छे से समझायेंगे कि वह ऐसे वायलेंट गेम्स से दूर रहे और सब बच्चों के साथ मिलजुल कर खेला करे.
 
बेटा, सबके साथ मिलकर खेलने से हम जाने-अनजाने ही बहुत सी अच्छी बातें सीख जाते हैं. एक दूसरे की मदद करना, एकता, अनुशासन, सहनशीलता, आत्मनियंत्रण जैसे कई सारे अच्छे गुण हैं जो हमें आउटडोर गेम्स सिखाते हैं और हमारा शारीरिक-मानसिक विकास भी करते हैं. एक अच्छे स्वास्थ्य के लिए और एक अच्छे व्यक्तित्व के लिए सबके साथ मिलजुल कर खेलना बहुत उपयोगी होता है.
 
मेरे जॉब की वजह से हर रोज तुम्हें कुछ घंटे घर पर अकेले रहना पड़ता है. मुझे हमेशा चिंता लगी रहती है कि कहीं मेरी बच्ची अकेला तो महसूस नहीं कर रही होगी. ऐसे में मैं चाहती हूँ कि तुम एक समझदार बेटी की भूमिका निभाओ और अपने खाली समय का उपयोग अच्छे क्रिएटिव कामों में करो. और मेरी पंख ये करेगी इसका मुझे पूरा विश्वास है.

By Monika Jain 'पंछी'

How is this letter of a mother to her daughter explaining the importance of outdoor games over indoor mobile and computer games?