Sunday, January 4, 2015

Poem on Children Day in Hindi


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एक दौर था...

मायूस जिसके दर से कोई परिंदा नहीं लौटा
ख़ुद में जिंदादिली का वो मकां रखते थे हम
ख़्वाब आँखों में, होठों पे बागबां
एक दौर था मुट्ठी में आसमां रखते थे हम.

चहचहाते परिंदों से याराना था अपना 
मिट्टी के घरोंदों में आशियाना था अपना
होता था बुजुर्गों की बाहों का बिस्तर 
वो भी क्या खूबसूरत फसाना था अपना.

तब ज़िन्दगी कुछ इतनी संजीदा भी नहीं थी
हर कदम पे शौक से इम्तेहां रखते थे हम
किसी गिले का शिकन कभी चेहरे पे न रहा
एक दौर था मुट्ठी में आसमां रखते थे हम.

होता था नशा सा बेखौफ शैतानी में 
था अक्स जिंदगी का दरिया की रवानी में 
छोटी खुशियाँ समेटे वो लम्हें भी खूब थे 
जब डुबाते थे कश्ती को बारिश के पानी में.

तन्हा रात में वो शामें बहुत याद आती हैं
जब साथ हर कदम पे कारवां रखते थे हम
मासूमियत की थी वो कोरी दास्तां 
एक दौर था मुट्ठी में आसमां रखते थे हम.

By Malendra Kumar

Childhood is the blissful time of anyone’s life. Its the most joyful time. A time of no stress and no worries, A time full of innocence, A time without any responsibility and duty. The above poem is reflecting the sweet memories of childhood. On the occasion of childrens day we all wish to live those days again. Thank you ‘Malendra’ for sharing such a nostalgic poem about childhood memories.

How is this hindi poem on childrens day? Feel free to share your views.