Friday, January 23, 2015

Poem on Zoo in Hindi


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चिड़ियाघर की सैर 

सूंड हिलाता हाथी आये 
घोड़ा सरपट दौड़ लगाये 
चिड़ियाघर की सैर कराने 
हमको पापा लाये. 

भूरी-भूरी कोमल काया 
जल से बाहर निकल कर आया 
ऊदबिलाव को देख-देखकर 
हम बच्चों का मन हर्षाया. 

लम्बे-लम्बे काले बाल 
सील मछली थी बड़ी कमाल
नटखट बंदरों की टोली ने 
मचा रखा था बड़ा धमाल. 

खुला मुंह करके लेटा था 
झील किनारे मगरमच्छ. 
भारी-भरकम बॉडी वाला 
गेंडा दिखता था बड़ा गज़ब.

एक ओर बतखें करती थी
पानी में अठखेलियाँ 
दूजी और चहक-चहकती 
रंग-बिरंगी चिड़िया. 

मछलीघर में करती थी चुहुल 
मछलियाँ ढेर सारी 
हम सबने मिलकर की 
हाथी की खूब सवारी. 

उछल-कूद करते लंगूर 
देखो! हल्ला लगे मचाने 
बड़े-बड़े नाखूनों वाला 
भालू बैठा था सुस्ताने. 

बड़ी-बड़ी जादूई आँखों 
वाला वो शर्मीला हिरण
लम्बी-लम्बी गर्दन वाला 
जिराफ बड़ा था विलक्षण.

झुंडों में विचरण करते 
चीतल थे कितने प्यारे 
काली-काली धारियों वाले 
जेब्रा थे सबसे न्यारे. 

हरियल तोते कितने सारे 
उड़ते जाते फुर्र-फुर्र
नीले-नीले पंखों वाला 
मोर बड़ा था सुन्दर. 

पेड़ पे लेटा देखा हमनें 
एक बड़ा सा अजगर 
उसे देख एक पल को हम सब 
काँप गए थे थर-थर. 

बाघ था स्याह धारीदार 
शेर के पाँव थे गद्देदार 
लगी छूटने कंपकंपी हमारी 
सुनकर उसकी तेज दहाड़.

उल्लू, लोमड़ी और कंगारू 
ना जाने क्या-क्या देखा 
सपनों से भी प्यारा ये 
चिड़ियाघर था कितना अनोखा.

By Monika Jain ‘पंछी’

Visiting to a zoo is a pleasing experience for we all. How is this hindi poem on a visit to a zoo? Feel free to share your views.