Wednesday, February 11, 2015

Poem on Zindagi in Hindi


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(1)

चंद उम्र की ज़िन्दगी...

चंद उम्र की ज़िन्दगी हवा सी बेलगाम गुजरी
किसी मोड़ पर जश्न कहीं ये इंतकाम गुजरी.

ज़िंदगी को जीने की फुर्सत ही यहाँ कब मिली
कैसे जीना है सीखने में, उम्र ये तमाम गुजरी.

किसे खबर दिन भर का हासिल भी क्या रहा
फिर एक शब की जुगत में एक और शाम गुजरी.

चार दिन की ज़िंदगी में दो रात अपनी रही
एक उसकी याद में तो एक उसके नाम गुजरी.

एक कतरा ज़िंदगी में क्या पर्दा क्या झरोखा
होंगे तुम्हारे राजदार अपनी तो सरेआम गुजरी.

जिस्मानी घर में रूह की कितनी ही तफ़तीश की
रहकर गयी वो उम्र भर जाते हुए गुमनाम गुजरी.

By Malendra Kumar

(2)

ज़िन्दगी

एक सफ़र है ये, एक डगर है ये
एक मंज़िल है, एक शहर है ये
अलग मायने हैं इसके हर एक के लिये
किसी के लिए अमृत किसी के लिए ज़हर है ये.

कोई हँस कर तो कोई घुट-घुट कर जीता है
कोई सुधा तो कोई विष समझ कर पीता है
इत्मिनान से जीता है कोई ख़ुशनसीब यहाँ 
तो कोई इसके जख्मों को ताउम्र सीता है.

साहिल से टकराकर ना लौटने वाली लहर है ये
किसी के लिए अमृत तो किसी के लिए ज़हर है ये.

किसी के लिये काँटों भरी हर-एक गली है
तो किसी की हर-एक राह मखमली है
कोई समझे है इसे काँटों का एक ताज
तो किसी के लिए यह नाजुक-सी कली है.

किसी के लिए वर तो किसी पे कुदरत का कहर है ये
किसी के लिए अमृत तो किसी के लिए ज़हर है ये.

किसी का वीरान
तो किसी का खुबसूरती से बसा शहर है ये
अलग मायने हैं इसके हर एक के लिये
किसी के लिए अमृत तो किसी के लिए ज़हर है ये.

By Malendra Kumar

Thank you ‘Malendra’ for sharing such a meaningful poems about life/zindagi.