Saturday, March 7, 2015

Love Poetry in Hindi


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एक दिन तुमसे जरुर मिलूँगी 

भोर की पहली किरण बन 
तुम्हारी अलसाई आँखों को सहला 
उनमें चमक जाऊँगी. 
या फिर चाय की प्याली से चुस्कियाँ लेते 
तुम्हारे लबों की रिक्तता से 
हवा बन तुममें घुल जाऊँगी. 

हो सकता है भोर के भ्रमण में
तुम्हारा स्वागत 
एक शीतल झोंका बनकर करूँ. 
या फिर सूरज की गर्मी से सूखे 
तुम्हारे कंठ में घूँट-घूँट बन उतरूँ.

हो तो ये भी सकता है कि 
होली के रंगों में से बनकर एक रंग 
तुम्हारे गालों पर खिल जाऊँ. 
या फिर रिमझिम बारिश की 
एक बूँद बनकर तुम पर बरसूँ 
और फिर हौले से 
तुम्हारे होठों पर लुढ़क आऊँ. 

रात सिरहाने एक मीठी सी धुन बनकर
तुझे सुलाऊँ.
या फिर एक हसीं ख़्वाब बनकर 
नींदों में भी तुझे गुदगुदाऊं.

कोयल की कूंक बनकर 
तुम्हारे कानों में मिश्री सी घुलने को. 
मैं तैयार हूँ एक दिन
भीगी मिट्टी की सौंधी खुशबूं बन 
तेरी साँसों से मिलने को.

नहीं जानती कैसे?
पर एक दिन तुमसे जरुर मिलूँगी. 
बनूँगी एक लम्हा और बस तुम्हें छू लूंगी.

By Monika Jain ‘पंछी’