Saturday, April 2, 2016

Essay on Suicide Prevention in Hindi

Essay on Suicide Prevention in Hindi. Anti Aatmhatya Note, Atma Hatya Counseling Ways, How to Stop Suicidal Thoughts, Ideas, Aatma, Slogans, Tips, Methods, Messages, Tricks, Sms. आत्महत्या पर निबंध, लेख.

आत्महत्या कैंसिल, जीना शुरू

दो-तीन लेखकों की आत्महत्या की ख़बर आई तो खुद ही खुद की काउंसलिंग शुरू कर दी :p. वैसे जीवन जितनी भयंकर मुश्किलों से भरा पड़ा है और फिर बीच-बीच में जख्म पे नमक रगड़ने को नयी-नयी मुसीबतें और आती रहती तो ऐसे में कभी-कभी सच में बहुत टूट जाती हूँ. लगता है इस तरह से कब तक झेल पाऊँगी? दर्द की कोई तो सीमा हो? मुश्किलों का कोई तो अंत हो? दूर-दूर तक जब कोई हल नजर नहीं आता, भविष्य का अँधेरा डराने लगता है, निराशा और अकेलापन हावी होने लगते हैं, अपने परायों से भी ज्यादा पराये लगते हैं तो बहुत संभव है कदम बहक जाए. पर एक चीज जो मेरे साथ हमेशा रहती है वह है सेल्फ मोटिवेशन. जिसका रोल मेरे जीवन में सबसे अहम् है. क्योंकि मैं क्या चीज हूँ ये तो अति निकट प्राणियों को भी नहीं पता. कुछ अपवादों को छोड़कर सबके सामने बहुत समझदार और सहनशील प्राणी वाली छवि रही है हमेशा, जो कि कुछ मामलों में सच है नहीं. ऐसे में खुद ही खुद को संभालना होता है

बाकी जहाँ तक आत्महत्या का सवाल है तो फेसबुक पोस्ट्स और ब्लॉग पढ़ने के बाद सर आँखों पर बैठाने वाले जिस तरह के मेसेज आते हैं, उन्हें पढ़कर यह हक़ तो कभी का खो चुकी हूँ कि कभी इतनी कमजोर बन जाऊं कि ऐसा कोई कदम उठाने का ख़याल भी आये. क्योंकि हम जब लोगों की प्रेरणा बनने लगते हैं, लोग जब हम पर खुद से ज्यादा भरोसा करने लगते हैं तो हमारी जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है...बहुत ज्यादा. ऐसे में विश्वास का टूटना क्या होता है ये बहुत अच्छे से जानती हूँ, सो ऐसा किसी के साथ कर ही नहीं सकती. क्योंकि उम्मीदों और आशाओं के झरने जब अचानक सूखते हैं तो बहुत से लोग प्यासे रह जायेंगे. इसलिए झरने का कर्तव्य है हमेशा बहते रहना

आत्महत्या जैसे खतरनाक इरादों से बचने का जो उपाय मुझे समझ में आता है वह यही है कि जो चीज आपको नहीं मिल रही वह आप बाँटना शुरू कर दो. प्यार नहीं मिल रहा तो प्यार बाँटों, हौंसला देने वाला कोई नहीं तो दूसरों को हौंसला दो. मदद करने वाला कोई नहीं तो मदद करना शुरू कर दो. साथ देने वाला कोई नहीं तो दूसरों का सहारा बन जाओ. किसी रोते हुए को हँसा दो, किसी का दर्द सुन लो, और हो सके तो दवा बन जाओ. अनुभव कहता है ये चीजें मजबूत बनाती हैं...और फिर एक दिन ऐसा आता है कि हमें किसी की जरुरत नहीं रहती, क्योंकि हम सबकी जरुरत बन जाते हैं. 

दूसरा जो उपाय सही लगता है वह है नकारात्मक घटनाओं और नकारात्मक लोगों से दूर रहना. आप अवसाद ग्रस्त हैं तो कुछ दिनों के लिए टीवी और अख़बार को अलविदा कह दीजिये. जो भी पढ़िए, जो भी देखिये वह पाजिटिविटी लाने वाला हो. ईर्ष्या, द्वेष, नफरत, लोभ, लालच, मोह इन सबसे जितना संभव हो दूर रहें. जो परिस्थितियां हमारे हाथ में नहीं है उन्हें सहर्ष स्वीकार करें और जिन्हें ठीक किया जा सकता है उनके लिए निरंतर सकारात्मक रूप से संघर्षरत रहें. 

एक काम जो सबसे अच्छा है वह है अपनी क्रिएटिविटी को बाहर लाना. फिर चाहे यह शब्दों के जरिये हो, रंगों के जरिये, संगीत के रूप में हो या नृत्य के रूप में. क्रिएटिविटी हर हाल में सुकून देने वाली होती है. हमारी दुःख दर्द से भरी रचनाओं को भी जब गुणवत्ता के आधार पर बहुत अच्छी प्रतिक्रियाएं मिलती है तो वह भी हमारे लिए ऊर्जा का स्त्रोत बन जाती है. इसलिए अवसाद के समय में अपने किसी भी शौक को जिन्दा करना या फिर कुछ नया सीखना जरुरी है. 

इसके अलावा एक चीज जो सबसे ज्यादा ऊर्जा देती है वह है हर हाल में मुस्कुराते रहना. मुस्कुराते रहने की आदत आधी परेशानियों को छू कर देती है और जो बाकी बचती है उन्हें सहने का हौंसला भी देती है. इसलिए जो भी हो, चाहे सब कुछ छिन जाए तब भी मुस्कुराहट को बचा कर रखना जरुरी है. सो आत्महत्या कैंसिल, जीना शुरू :) 

By Monika Jain 'पंछी'

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