Monday, May 4, 2015

Poem on Democracy in Hindi


बदलते वक्त ने कई शब्दों की परिभाषा बदल दी है, या बदल गए हैं उनसे जुड़े भाव. लोकतंत्र, जनतंत्र और प्रजातंत्र भी अब ऐसे ही शब्द लगते हैं जिनमें रह गया है तो बस तंत्र और आम जन कहीं नदारद है. पढ़िये इन्हीं भावों को संजोती है यह कविता : 

Hindi Poem / Kavita : Indian Democracy / Loktantra 

कब हम एक गौरवान्वित देश बुनेंगे?

बचपन से कई जगह, कई बार पढ़ रहे हैं -
India is a democratic country.
और इस democracy शब्द की रटी-रटायी परिभाषा ने 
सिखा दिया है गर्व करना अपने देश पर.

I am proud of India भी तो बन चुका है 
बस एक रटा-रटाया वाक्य,
जो चस्पा कर दिया जाता है जब-तब यहाँ-वहाँ 
और बस यह बोलकर ही हम खुद को 
समझ लेते हैं अपने राष्ट्र का एक सच्चा भक्त.

पर दिखावे की इन प्रबल भावनाओं में 
बदल गए हैं अब शब्दों के मायने 
शब्द रह गए हैं महज शब्द ही 
और अर्थ आ रहे हैं नित नये सामने.

लोकतंत्र भी तो रह गया है 
बस कुछ भ्रष्ट शासकों की कठपुतली बन 
जनता द्वारा जनता के लिए शासन में 
अब कहीं भी नहीं दिखता है जन. 

यह तो लगता है बस जैसे हो 
धर्म और सत्ता के बीच की सांठ-गांठ 
एक ओर मानवता का शोषण और 
दूजी ओर शैतानों के हैं ठाठ. 

ऐसे में झूठा गर्व 
नहीं कर सकता कोई समाधान 
गर्व करना हो जो देश पर 
तो लेना होगा अपने भीतर का भी संज्ञान. 

देश हम पर गर्व करे 
अब ऐसे कारण हमें देने होंगे 
हम गर्वित भारतीय बहुत बन चुके 
अब कब हम एक गौरवान्वित देश बुनेंगे. 

By Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this poetry or rhyme about republic status of India? If you also have some quotes or slogans about ‘swarajya’ and ‘prajatantra diwas’ then share them with us. Read some more poems related to Indian Democracy :