Saturday, May 23, 2015

Poem on Maharana Pratap in Hindi


महाराणा प्रताप पर कुछ दोहे पढ़ते हुए प्रेरणा मिली एक कविता लिखने की. महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर प्रस्तुत है यह कविता :

Hindi Poem / Kavita / Kahani : Maharana Pratap Singh Jayanti 

महाराणा प्रताप सिंह : एक नाम तुम्हारा भी है 

वीरता और दृढ़ प्रतिज्ञा के लिए अमर नामों में 
एक नाम तुम्हारा भी है 
मेवाड़ की शौर्य भूमि के मुकुट पर जड़ा 
एक सितारा तुम्हारा भी है. 

धन्य हो तुम वीर! 
जो अधीनता कभी स्वीकार कर ना पाए 
अपने कुल गौरव के संरक्षा पथ पर 
संकट चाहे जितने भी आये.

महाराणा उदयसिंह व 
रानी जीवत कँवर की संतान. 
बाप्पा रावल के वंशज!
स्वाभिमान, बहादुरी, सहजता, सरलता 
बचपन से ही थे तुम्हारी पहचान.

हल्दीघाटी सरीखा 
क्या होगा कोई बलिदान स्थल 
तेजस्विता और पराक्रम के इतिहास से 
परिपूर्ण है जिसका हर एक पल. 

स्वतंत्रता के लिए तुम्हारा संघर्ष 
हम जैसों के लिए कल्पनीय भी नहीं 
विषम परिस्थितियों में भी तुम्हारा धैर्य 
शब्दों की सीमा में वर्णनीय ही नहीं. 

जंगल-जंगल भटके तुम 
तृण-मूल की रोटियों पे की गुजर बसर 
अकबर भी अछूता ना रहा इस प्रभाव से 
कुछ ऐसा था तुम्हारे धैर्य और साहस का असर. 

घोड़ा चेतक, रामप्रसाद हाथी 
और झाला, भामाशाह जैसे साथी 
तुम्हारे मनोबल को बढ़ाती 
पृथ्वीराज चौहान की पाती.

थोड़े से राजपूत और वीर भीलों के बल पर 
समर्थ अकबर से तुमने लोहा लिया 
शत्रु की स्त्रियों को भी ससम्मान भिजवाकर 
अपने विशाल ह्रदय का परिचय दिया. 

तुम्हारे प्राणों के उत्सर्ग पर
अकबर महान भी रोया था 
अपने त्याग और पराक्रम का सबके दिल में 
कुछ ऐसा बीज तुमने बोया था. 

मेवाड़ की मिट्टी-मिट्टी, जर्रा-जर्रा 
तुम्हारे शौर्य की गाथा कहती है 
तुम्हारे रण कौशल और स्वाभिमान से तो 
विदेशी आवाम भी प्रेरणा लेती है.

By Monika Jain ‘पंछी’

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