Friday, July 10, 2015

Poem on World Population Day in Hindi


Poem on World Population Day in Hindi. Vishwa Jansankhya Diwas par Kavita, Divas. Rising Overpopulation, Increasing Explosion Slogans, Growth Quotes. विश्व जनसंख्या दिवस पर कविता, वृद्धि, विस्फोट. 

जनसँख्या सिर्फ संख्या तो नहीं 

कौन कहता है दुनिया की जनसंख्या सात अरब है 
मुझे तो लगती यह सात सौ अरब है. 

हर आदमी के होते हैं कई चेहरे, कई रूप 
छाँव के रंग बदल जाते हैं जब आती है कड़ी धूप. 

एक संत के चेहरे में छिपा रहता है शैतान 
त्यागी जिसे कहता है जग, आसमां छूता है उसका गुमान.

बिजली से कड़कते हैं जो बन शब्दों के जाल 
हकीकत में खामोश कर देता है उन्हें, किसी का डर तो किसी का माल.

जिसके चेहरे पर मुस्कुराहट, सौम्यता और विनम्रता का निर्झर बहता है 
उसके हाथों में कहीं छिपा एक खूनी खंजर रहता है.

सच के साथ खड़े होकर, करते हैं जो संपादक झूठ का पर्दाफाश 
उनकी नजरों से सुरक्षित है एक औरत, नहीं कर सकते इसका भी विश्वास.

मंदिर में जाकर चन्दन का जिसने टीका लगाया होगा 
नहीं जान सकता कोई उसके मन में कितना मैल समाया होगा. 

सत्य, अहिंसा, मुक्ति पर जो देता है हर रोज गुरु ज्ञान 
कितने अपराधों में होगा संलग्न, नहीं लगा सकते इसका भी अनुमान. 

समाज सेवा की आड़ में सेक्स स्कैंडल जैसे घृणित कार्यों को अंजाम 
अहिंसा का मुखौटा लगाकर भी होता है यहाँ कत्ले आम. 

छद्म नारीवादियों के रूप में जन्मे हैं नारी के नए शोषक 
लिखते हैं जो प्रेम शास्त्र, उनमें से कई मिलेंगे नफरत के पोषक. 

कायरों ने ओढ़ी शेरों की खाल, सन्यासी हो रहे मालामाल हैं 
सच्चा आदमी पहचानना है मुश्किल, हर ओर मकड़ी का जाल है.

चिंता जनसंख्या से ज्यादा मुझे एक आदमी में छिपे सौ चेहरों की है 
किसी मासूम को अपना निशाना बनाये खौफ़नाक पहरों की है.

देर सबेर बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लग भी जायेगी 
पर मुखौटे बदलने की यह प्रवृत्ति तो दिनों-दिन बढ़ती ही जायेगी. 

जनसँख्या नियंत्रण के साथ ही हो नियंत्रण एक जन में छिपे दुर्जन इरादों पर भी
प्यार की झूठी कसमों पर और नेता के झूठे वादों पर भी. 

क्योंकि समस्या मात्रात्मक से ज्यादा अब गुणात्मक हो रही है 
दिखते हैं यहाँ शरीर ही शरीर, आत्माएं सबकी कहीं खो रही है. 

By Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this hindi poem on World Population Day?