Thursday, August 13, 2015

Prem Kahani in Hindi


Adhuri Prem Kahani in Hindi. One Sided Real True Love Story. Broken Heart, Emotional Stories, Touching, Sad Tales, Dard Bhari Kahaniya, Mohabbat, Ishq, Pyar. अधूरी प्रेम कहानी, इश्क, प्यार, मोहब्बत.

Prem Kahani in Hindi
और मैंने मांग लिया तारों से उनका न टूटना

तो आखिर आज आ ही गया तुम्हारा जन्मदिन! हर साल कितनी बेसब्री से इंतजार रहता है इस दिन का। और हर बार लगता है जैसे हर साल आने वाला यह दिन जाने कितने सालों बाद आया है। तुम्हें तो पता भी नहीं सालों पहले तुम्हारा जन्मदिन जानने के लिए घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर कितनी मशक्कत की थी मैंने। तुमने तो सारी दुनिया से इसे छिपाने के प्रबंध कर रखे थे। पर मैं भी हार कहाँ मानने वाली थी। तुमसे और तुम्हारे दोस्तों से बिना कुछ पूछे तुम्हारा जन्मदिन जो जानना था। और आखिरकार तीन-चार घंटों की मेहनत रंग ले ही आई। बस तब से यह दिन मेरे जीवन का सबसे खास दिन बन गया है। कभी-कभी इस जुनून और दीवानगी के बारे में सोचती हूँ तो बरबस हँसी छूट जाती है और साथ ही हो जाती है ये आँखें भी नम। सोचती हूँ इतनी शिद्दत से ईश्वर को ढूंढा होता तो शायद वे भी मिल जाते। पर देखो न तुम ना मिले।

कितने पागल से दिन थे वे। तुम तो मुझसे कोसों दूर थे पर सिर्फ तुम्हारी एक झलक पाने के लिए दिन में बीसों बार अपना फेसबुक अकाउंट लॉग इन करती और तुम्हारे स्टेटस! वो तो मेरे लिए जैसे रोज की गीता बाँचना था। कभी कई दिनों तक तुम्हारी कोई हलचल ना दिखाई देती तो मैं परेशान हो उठती। इंतजार के वे पल बड़े भारी लगते। रह-रहकर ख़याल आ जाता सब ठीक तो है न? पर तुमसे पूछने की हिम्मत कभी न जुटा पाती।

फिर एक दिन तुमने ही बात करना शुरू किया और मैं पगली, ख़ुशी के मारे हूँ-हाँ से ज्यादा कुछ बोल ही न पायी। धीरे-धीरे हम दोस्त बने और फिर दोस्ती से प्यार का सफ़र...उस वक्त ऐसा लगता था जैसे सारी दुनिया की खुशियाँ मेरे दामन में आकर सिमट गयी हो।

फिर एक दिन जाने क्या हुआ। अचानक तुमने कहा कि यह रिश्ता तोड़ना होगा हमें। कोई वजह भी कहाँ बताई तुमने और बिना कुछ कहे चले गए हमेशा के लिए। पर मैंने कहा था न टूटा हुआ कुछ भी अच्छा नहीं लगता मुझे। बस इसलिए ही मैंने नहीं तोड़ा यह रिश्ता आज तक। प्यार के उस अंकुरित बीज को देती रही अपनी वफ़ा का खाद और पानी...और कब यह एक विशाल वृक्ष बन गया पता भी न चला। तुम्हारी अनुपस्थिति में भी तुम्हारा अस्तित्व मेरे जीवन में इतना गहरा होता चला गया कि अब कोई मुझमें मुझे तलाशेगा तब भी सिर्फ तुम्हें ही पायेगा।

लड्डू बहुत पसंद हैं न तुम्हें? हर साल की तरह इस साल भी वही बनाये हैं। तुम्हें याद है? पहली बार जब तुमने मेरे हाथों से बने लड्डू खाए थे तो मेरा नाम ही लड्डू रख दिया था। अब तो सालों गुजर गए इन कानों ने अपने लिए यह नाम नहीं सुना। वैसे भी तुम्हारे सिवा कोई लड्डू कहता भी तो अच्छा कहाँ लगता।

तुम कहाँ हो, कैसे हो, क्या कर रहे हो कुछ भी नहीं पता। मैं तुम्हारी स्मृतियों में हूँ या नहीं यह भी नहीं जानती। तुम तक कुछ पहुँचाऊ तो भी कैसे? यूँ तो कभी मंदिर नहीं जाती पर यह तुम्हारा ही विश्वास था न कि दुआएँ और प्रार्थनाएँ दुनिया के किसी भी कोने में पहुँच जाती है। बस इसलिए हर साल इस दिन लड्डू लेकर पहुँच जाती हूँ मंदिर और मांग लेती हूँ ईश्वर से तुम्हारे जीवन में लड्डुओं की सी मिठास।

अक्सर सखियाँ हँसती है मुझ पर। कहती हैं, ‘कंगना! पागल लड़की! कब तक उसके लिए दुआएँ मांगती रहेगी जिसे तेरी जरा भी फिक्र नहीं। जिसने इतने सालों में एक बार भी तेरी खोज-खबर लेने की कोशिश नहीं की कि तू कैसी है, किस हाल में है। कभी भगवान से अपने लिए भी कुछ मांग लिया कर।’ मैं बस मुस्कुरा कर रह जाती हूँ। अब उन्हें कैसे बताऊँ कि मेरे भीतर मेरा कुछ रह ही कहाँ गया है।

अक्सर तारों से भरी रातों में चाँद को निहारते हुए जब अचानक कोई तारा टूट जाता था तो तुम आँखें बंद कर मांग लेते थे हमेशा के लिए मुझे और मैं बस अपलक तुम्हें देखती रह जाती थी। आज भी तारों से भरी वैसी ही रात है। सखियों की बात याद है कि कभी कुछ मांग लिया कर अपने भी लिए। सोच रही हूँ जैसे ही कोई तारा टूटेगा मांग लूँगी मैं भी तुम्हें। पर यह क्या? तारा टूटा और मैंने मांग लिया तारों से उनका ना टूटना। टूटा हुआ कुछ भी अच्छा नहीं लगता न।


By Monika Jain ‘पंछी’