Friday, September 18, 2015

Essay on Mahaveer Swami in Hindi


Essay on Lord Mahaveer Swami in Hindi. Review of Mahavir Vani by Osho, Bhagwan Vardhamana Jayanti, Jainism Life History, God Mahavira Biography, About Jain Dharma, Paragraph. महावीर स्वामी जयंती पर निबंध.
 
पुस्तक परिचय : महावीर वाणी ~ ओशो

कुछ किताबें आईना होती है...कोरा आईना. ओशो की ‘महावीर वाणी’ भी मेरे लिए एक किताब नहीं बल्कि एक आईना ही है. एक ऐसा आईना जिसमें खुद को अपनी सारी अच्छाईयों और बुराईयों...सारी शक्तियों और कमजोरियों के साथ देखा जा सकता है. इस किताब को पढ़ने के साथ कई बार यह ख़याल मन में आया कि यह किताब तो मुझे बहुत-बहुत पहले पढ़नी थी. पर शायद नियति इतनी उदार नहीं होती, या यूँ कहूँ कि हम खुद ही अपने लिए इतने उदार नहीं होते, तभी तो मनुष्य द्वारा निर्मित इस कृत्रिम दुनिया के जाल में उलझकर रह जाते हैं. खैर! देर से ही सही सत्य को दिखाने वाला आईना कभी भी, कहीं भी दिखे, उसे देख ही लेना चाहिए. और जितना संभव हो सके सत्य को आत्मसात कर लेना चाहिए. क्योंकि यही हमारे लिए अपने प्रति बरती गयी एकमात्र उदारता है. बाकी तो सब कुछ भ्रम और स्वयं पर किये गए अत्याचार ही हैं.
 
ओशो के शब्दों में महावीर को जानना एक ऐसे वैज्ञानिक को जानना है जिनका विज्ञान सिर्फ और सिर्फ उत्थान और विकास की बातें करता है, जिसमें विनाश कहीं भी नहीं. महावीर को जानना एक ऐसे धर्म को जानना है जो सही मायनों में धर्म जान पड़ता है, जो सदा से हमारे भीतर है, जो हमारा स्वभाव है, बस बाहरी आवरण ने जिसे ढक दिया है. महावीर को जानना एक ऐसे प्रेमी को जानना है जो प्रकृति के जीव मात्र के प्रति प्रेम और करुणा से परिपूर्ण है. ऐसा प्रेम जो पूर्णत: निर्लिप्त होने के बावजूद भी सही मायनों में प्रेम है. महावीर को जानना एक ऐसे चिकित्सक को जानना है जो हमारी सारी बीमारियों के लिए एक ऐसी दवा बताते हैं, जिसके कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं. महावीर को जानना एक ऐसे गुरु को जानना है जो निश्चित रूप से असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर एवं मृत्यु से अमरता की ओर ले जाते हैं. महावीर को जानना एक ऐसी परम आत्मा को जानना है, जिनसे काल की सीमाओं से परे भी आत्मिक सम्बन्ध की अनुभूति होने लगती है. महावीर को जानना स्वयं को जानने और पाने का मार्ग जानना है.

किसी गंभीर दर्शन को पढ़ते हुए भी लगातार मुस्कुराया जा सकता है, यह अहसास इस किताब को पढ़कर ही हुआ. लेखक और पुस्तक के पात्र के प्रति मन इतनी श्रद्धा से भर सकता है कि उनके भौतिक रूप से उपस्थित ना होने पर भी वे आसपास ही हैं, यह अहसास इस किताब ने ही करवाया. इतनी रहस्यमयी और रोमांचक अनुभूतियाँ जैसे प्रकृति के सबसे सुंदरतम स्थल को घूम आई हूँ. पूर्णत: निर्लिप्तता के सन्देश के साथ भी इतना प्रेम जैसे जीवन में पहली बार किसी सच्चे मित्र, सच्चे प्रेमी से मिलकर आई हूँ. और यह ज्ञान के अथाह सागर ओशो के जादुई शब्दों के बिना संभव हो ही नहीं सकता था.
 
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद कोई भी बिल्कुल पहले जैसा रह ही नहीं सकता. यह पुस्तक परिवर्तन की दस्तक है, एक सुनहरे परिवर्तन की.
 
By Monika Jain ‘पंछी