Monday, September 7, 2015

Poem on Ego in Hindi


Poem on Ego in Hindi. Ahankar Par Kavita, Pride Shayari, Narcissism Poetry, Aham Quotes, Ahankaar Sms, Attitude Messages, Arrogance Status, Rhymes, Sayings, Lines. अहंकार पर कविता, दोहे, अहम शायरी.
 
अंधा
 
तारीफें बरस रहीं थीं 
"वाह! बहुत ख़ूब!
उम्दा! बेहतरीन! शानदार!"
 
वो मुस्कुरा रहा था
हर एक लफ़्ज़ के साथ,
और झुकता जा रहा था.
लेकिन; अंदर ही अंदर
तन रहा था...
ज़्यादा, और ज़्यादा.
 
बड़ा होता जा रहा था
भीतर ही भीतर.
होते होते; इतना बड़ा हो गया
कि उसकी आँखों के
नीचे अब कुछ नहीं दिखता
सिवाय बादल,
और धुँए के.
अंधा हो गया है
वह!

By Aman Tripathi

How is this hindi poem about ego?