Wednesday, September 16, 2015

Poem on Student in Hindi


Poem on Student Life in Hindi. For Kids, Children, Primary Students Learning, Pupil Sms, Disciple Poetry, Learner, Guru Shishya par Kavita, Chatra Jeevan Shayari. गुरु शिष्य पर कविता, छात्र जीवन.
 
यह सीखने का अकाल दौर है
 
जब भी कोई बच्चा,
नए आखर को,
नए आकार-चित्र से,
अपने मन-मस्तिष्क में आश्रय देकर,
अपने मुस्काए ओठों से,
शब्द-चित्र-ध्वनि को बोलता है,
तो ऐसा लगता है,
जैसे पाँच दिन से प्यासे को पानी मिला हो।
या किसी अँधे को अचानक,
उजाला दिखा हो।
या फिर निर्जन मरुस्थल की छाती पर,
किसी अजनबी ने पाँव रखा हो।
 
कितनी उत्सुकता से देखते हैं हम,
जब कोई बच्चा सिखाये हुए को,
अपने मगज पर जोर देकर,
एकाग्रचित होकर बोलने लगता है,
तो सच्चे शिक्षक का सिखाना,
सीख बन जाता है,
अपने लिए, बच्चे के लिए,
और उन लोगोँ के लिए जो
बच्चों को सिखाना चाहते है।
 
पर सीखना-सिखाना इतना आसाँ नहीं,
इस महायात्रा में कई पड़ाव है।
उन पड़ावों से पार पाना सरल नहीं।
पहले हम सीखें, फिर सिखाएं,
यह नियम है, होना भी चाहिए।
 
पर आज शिष्यत्व भूल कर,
हर कोई शिक्षक बनना चाहता है।
सिखाने वालों की ऐसी बाढ़ सी आई,
कि उसमें सीखने वाले बह गए हैं।
 
रह गयी तो बस,
सूखी, निरीह, बंजर धरती।
किसे सिखाएं?
यह सीखने का अकाल-दौर है।
 
शम्भु कुमावत
वरिष्ठ अध्यापक-हिंदी
स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, मांडलगढ़, भीलवाड़ा, राजस्थान।