Tuesday, August 9, 2016

Understanding Quotes in Hindi

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Understanding Quotes

  • सबसे गहन बातों के अनर्थ सबसे अधिक होते हैं। क्योंकि अहम् अक्सर यह स्वीकारना नहीं चाहता कि समझ नहीं आया। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कौन ज्यादा अभागा? जिसे समझा नहीं गया वह या फिर जो समझ नहीं पाया वह? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • भला हो जाता सारी दुनिया का अगर लोग शब्दों को पकड़ने के बजाय, उनके मर्म को समझ लेते। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ये समझदार और ब्रेव होने का जो ठप्पा होता है न?...कभी-कभी दिल करता है इसे उतार फेंके। क्योंकि ये समझदार और ब्रेव होना कितनी भी बड़ी प्रॉब्लम हो या कोई भी दूसरी बात, लोगों को हमारे प्रति एकदम निश्चिन्त और बेफिक्र बना देता है : that you are brave and sensible so you can handle anything. पर कभी-कभी (बस कभी-कभी ही) मन करता है काश! हम भी गुस्सैल, जिद्दी, मूडी, बात-बात पे बिगड़ने वाले दुष्ट बच्चों की तरह अपनी हर बात मनवाने वाले होते तो लोगों को हमारी कितनी फ़िक्र होती। समझदार और ब्रेव होकर तो कभी-कभी रो भी नहीं पाते ठीक से। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ओशो के विचारों की ओशो के ही भक्तों द्वारा धज्जियां उड़ते देखना अच्छा नहीं लगता। खैर! ओशो ही क्या यह बात तो हर विचारक के साथ है। पर जब ओशो कहते हैं अपनी सारी कमियों, बुराइयों, वासनाओं, इच्छाओं, अपराधों को स्वीकारने की बात...तो इसका आशय यह नहीं होता कि कोई अपनी बुराइयों या कमियों के प्रति इतना मुग्ध हो जाए कि उससे छुटकारा पाने की सारी जिम्मेदारी परमात्मा पर डालकर खुद चैन से डूबा रहे। स्वीकार करना सुधार करने की दिशा में पहला कदम है। जब तक हम अपने मन में यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हम चोरी करते हैं, जब तक हम यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हम झूठ बोलते हैं, जब तक हम यह स्वीकार नहीं करेंगे कि हम क्रोध करते हैं, शोषण या अन्याय करते हैं तब तक हम इन्हें दूर करने या सुधार करने की दिशा में सोच भी कैसे पायेंगे। समर्थक या अनुयायी बनना ज्यादातर लोगों के लिए सबसे आसान काम है। जिसका समर्थन किया जा रहा है उसे समझ पाना बड़ा मुश्किल। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • पढ़ो कम...समझो ज्यादा। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • तुम कुछ भी कहो...कोई उतना ही समझेगा, जितना वह समझ सकता है और समझना चाहता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • शब्दों को सबसे अधिक वही पकड़ते हैं जो सन्दर्भ और सापेक्षता को नहीं समझ पाते। सूचना और ज्ञान में गहरा अंतर होता है। सूचना स्थूल व ज्ञान सूक्ष्म होता है। सूचना सतही व ज्ञान गहरा होता है। सूचना का स्रोत बाहरी तो ज्ञान अंत:करण से उपजता है। जो ज्ञानी है वह अलग-अलग समय, परिस्थितियों और सापेक्षता को समझकर दो विरोधाभासी कथनों से भी सहमत हो सकता है। और जो सिर्फ सूचना का भंडार है वह अपने आपको ज्ञानी सिद्ध करने के लिए हर परिस्थति में विरोध प्रकट कर सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • तुम्हें कोई समझेगा...ये अपेक्षा ही बेमानी है। शायद तुम जन्मी ही हो सबको समझने के लिए। (बहुत दिनों से इंतजार में था...आज आखिर छलक ही आया… :’( ) ~ Monika Jain ‘पंछी’

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