Tuesday, December 15, 2015

Broken Heart Messages in Hindi

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एक पैगाम टूटे दिल के नाम

कोमल : वह हमेशा खुद को प्यार कहता रहा पर उसने कभी धोखे, नफ़रत, झूठ, अपमान, चालाकी और दर्द के सिवा कुछ भी नहीं दिया.
 
रश्मि : देता भी कैसे? जिसके पास जो होगा वही तो देगा.
 
कोमल : तो वह खुद को प्यार क्यों कहता फिरता है ?
 
रश्मि : तुमने ऐसे लोगों के बारे में जरुर सुना होगा जो अपने पुराने, नकली, सड़े-गले बेकार सामान को बेचने के लिए एक अच्छी सी कंपनी का सुन्दर और आकर्षक लेबल चिपका लेते हैं. बस वह भी यही करता है. अपनी गले तक भर आई नफ़रत, झूठ, चालाकी, फ़रेब आदि को बाहर निकालने के लिए उसने प्यार का चोला ओढ़ रखा है. जिसका शिकार तुम जैसे कई लोग बन जाते हैं.
 
कोमल : लेकिन, मैं ही क्यों ?
 
रश्मि : तुम ही इसलिए क्योंकि तुम्हारी अच्छाई में ऐसे बुरे लोगों से लड़ने की शक्ति है. तुम कभी टूट नहीं सकती...कभी नहीं... और तुम उदास क्यों होती हो...तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हें सच पता चल गया. वैसे भी कोई कितने भी खुशबूदार, सुन्दर और आकर्षक चोले से खुद को ढक ले. ज्यादा देर तक वह अपनी दुर्गन्ध छिपा नहीं सकता.
 
कोमल : पर वह कहता है कि वह कभी गलती नहीं करता. वह तो हमेशा दूसरों को ही दोष देता है. अपनी गलती कभी नहीं मानता.
 
रश्मि : जो ऊपर से नीचे तक कीचड़ से सना हो. उसके पास दूसरों को देने के लिए और क्या होगा? अफ़सोस ! उसने कभी आइना देखा ही नहीं.
 
कोमल : हम्म...प्यार और नफरत कुछ भी नहीं. वह तो बस दया का पात्र है.
 
रश्मि : एकजेक्ट्ली!
 
देखो! बुरा जो छूट रहा है, उसे छूटने दो. बुरे को छोड़ने का गम ना करो. यह समय दु:ख मनाने का है भी नहीं, बल्कि जश्न मनाने का है. जश्न अपनी आज़ादी का. आज़ादी उस घुटन से जो तुमने कई बार उस रिश्ते में महसूस की. आज़ादी उस दर्द से जो तुम्हें हमेशा अपने प्यार के बदले मिलता रहा. आज़ादी उस दुर्गन्ध से जो उसकी घिनौनी सोच से निकल तुम्हारे फूल सरीखे जीवन में पसरती रही. आज़ादी उन आँसुओं से जो तुम्हारी आँखों में इरादतन भरे गए, जिनके लिए तुम कभी बनी ही नहीं थी. आज़ादी उस अपमान से जो वह खुद को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ में वक्त-बेवक्त तुम्हें देता रहा. आज़ादी उस बर्बर, धूर्त और स्वार्थी बंधन से जो तुम्हारी मासूमियत के लिए सजाये मौत था. इतनी आज़ादी और खुशियाँ एक साथ मिलने का भी कोई गम करता है भला?
 
उसका अहम् और दिखावा रिश्ते से ज्यादा जरुरी था, पर तुम्हारे आत्मसम्मान से ज्यादा नहीं. जो रिश्ता सिर्फ नाम का था, सिर्फ स्वार्थ पर टिका, प्यार, विश्वास, परवाह, समझ से पूरी तरह नदारद, और जो भीतर से पूरी तरह खोखला था, उस रिश्ते का बोझ ढ़ोना कहाँ की बुद्धिमानी है? याद रखो, आज़ादी हर हाल में सुकून देने वाली है. जरुरत बस हिम्मत, साहस और अडिग फैंसलों की है.
 
तुम्हारे लिए उसे भूल पाना मुश्किल होगा, लेकिन नामुमकिन नहीं. सुनो, यह मानव का स्वभाव है, वह हमेशा उन चीजों के पीछे भागता है जो उसकी पहुँच से बाहर होती है. तुम अच्छी तरह जानती हो जिस प्यार को सिर्फ तुम उससे पाना चाहती हो, वह तुम्हें कभी मिल नहीं सकता. तो फिर क्यों तुम अपनी ख़ुशी को किसी की कृपा का गुलाम बनाना चाहती हो. याद रखो, यह कतई जरुरी नहीं है कि जो चीजें आसानी से मिल जाए, उनका मोल कम है और जो ना मिले, उनका ज्यादा. जो हमसे सच्चा प्यार करते हैं, जो निस्वार्थ भाव से हमारी मदद करते हैं, जो हमारी मजबूरियों का फायदा नहीं उठाते, जो हमारी समस्याओं को समझते हैं, जिन्हें हमारी परवाह होती है, या यूँ कहूँ कि जो सच्चे अर्थों में हमारे दोस्त होते हैं, कई बार हम उन्हें वह इम्पोर्टेंस नहीं दे पाते जिनके वे हकदार होते हैं. क्योंकि हम तो उन लोगों के पीछे भाग रहे होते हैं, जो हमें आकर्षित करते हैं, जो हमें कभी नहीं समझते, जो हमें धोखा दे रहे होते हैं.
 
तुम समझ रही हो न? इसलिए फिर कहती हूँ, बुरा जो छूट रहा है, उसे छूटने दो. बुरे को छोड़ने का गम ना करो. एडजस्टमेंट करना गलत नहीं, लेकिन यह तुम्हारी मुस्कुराहट की कीमत पर तो नहीं होना चाहिए न? किसी को माफ़ कर देना भी गलत नहीं है. पर कई बार हमारी माफ़ी को हमारी कमजोरी समझ लिया जाता है और सामने वाला इसे अपने उचित-अनुचित हर तरह के व्यवहार पर हमारा समर्थन समझने लगता है. और फिर माफ़ कर देने का मतलब स्वीकार करना तो नहीं होता.
 
जो टूट गया है, वह व्यर्थ नहीं गया. उसने तुम्हें ज़िन्दगी जीने के कई सबक सिखाएँ हैं. तुम बस स्वागत करो उस खुले आकाश का जो तुम्हारे पंखों को उड़ान देने को व्याकुल है. जो तुम्हारी बातों, आँखों और मुस्कुराहटों को जीवन देने वाला है. जो तुम्हें सही मायनों में प्यार करना सिखाने वाला है. पहले खुद से प्यार और फिर सबसे प्यार.

By Monika Jain ‘पंछी’

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