Sunday, December 6, 2015

Essay on Books in Hindi

Essay on Books are Our Best Friend in Hindi for Kids. Kitab par Nibandh, Pustak Lekh, Importance of Book Article, Library Speech, Pustakalaya Anuched, Paragraph. पुस्तक का महत्व पर निबंध, किताब लेख.

खुद से बेहतर किताब कौनसी?
 
अगर कोई आज मुझसे पूछे कि दुनिया में करने लायक सबसे अच्छे काम क्या हैं तो उस लिस्ट में एक काम को मैं निश्चित रूप से शामिल करुँगी, वह है किताबें पढ़ना, इसके बावजूद कि आज तक कोर्स बुक से इतर कुल 10-15 किताबें हीं पढ़ी हैं, और इस बात का गहरा अफ़सोस भी है कि मैंने बचपन से कोर्स से इतर किताबें पढ़ने में रूचि क्यों नहीं ली और तब वैसा मार्गदर्शन क्यों नहीं मिला जैसा फेसबुक से जुड़ने के बाद खोज पायी. पर हाँ एक बात यह भी है कि किसी भी अच्छे काम की शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती और जो आत्मा को ही एकमात्र सच मानते हैं उनके लिए तो वाकई में कभी देर नहीं होती क्योंकि उस सच को पाने के लिए अभी क्रमिक विकास के पथ पर चलते हुए जाने कितने जन्मों से गुजरना होगा. और अच्छी किताबों को पढ़ने में रूचि का जाग्रत हो जाना उसी विकास पथ पर आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करना है.

अब बात आती है अच्छी किताबों की तो निश्चित रूप से यह व्यक्तिगत रूचि का विषय है कि किसे कौनसी किताब अच्छी लगेगी और कौनसी नहीं. पर मुझे यह लगता है कि हर मनुष्य अपने आप में एक मुक्कमल किताब है जिसे पढ़ लेने के बाद कुछ भी पढ़ना शेष नहीं रह जाता. हमारे अपने मन से बेहतर और कोई किताब नहीं हो सकती. इसलिए सबसे अच्छी किताबों की श्रेणी में मैं उन किताबों को रखती हूँ जो हमारे मन को निष्पक्ष रूप से पढ़ने में सहायक बनती है. क्योंकि स्वयं को पढ़ना ही जिसे हम स्वाध्याय या आध्यात्म भी कहते हैं हमें हमारी एकमात्र मंजिल तक पहुँचाने में सहायता करता है.

कुछ शब्दों, कुछ वाक्यों के गहरे अर्थ बहुत देर से समझ आते हैं. अब तक यह बात हमेशा सिर्फ दूसरों के मुंह से सुनी थी कि किताबें सबसे बेहतर दोस्त होती हैं पर बीतें दिनों कुछ ऐसी किताबें हाथ में आई जो कोरा आईना थी. जिन्हें पढ़ते हुए पता चला कि कोर्स से इतर भी ऐसी किताबें होती हैं जिन्हें घंटों बैठकर पढ़ा जा सकता है. कोर्स बुक्स तो अक्सर मजबूरी में ही पढ़नी होती है पर ये किताबें कुछ ऐसी थीं कि गंभीर विषय होते हुए भी इन्हें पढ़ते समय लगातार मुस्कुराया जा सकता है; जो ठहरकर बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देती है; जो हमारी अच्छाईयों, बुराईयों, कमियों और शक्तियों सभी का परिचय कुछ इस तरह हमसे करवाती हैं कि अपने विचारों और भावनाओं के प्रति एक सजग दृष्टि हममें विकसित हो जाती है; और इन सबसे इतर ऐसे अद्भुत अहसास और अनुभव दे जाती हैं जिन्हें शब्दों में व्यक्त किया ही नहीं जा सकता. इन किताबों ने मन के अध्ययन में बहुत सहायता की इसलिए इनके प्रति कृतज्ञता स्वाभाविक है और इन्हें सच्चा दोस्त समझना भी.

जब से किताबें पढ़ने का स्वाद चढ़ा है तो लिखना बस एक औपचारिकता भर रह गया है. पाठकों के सन्देश, उनके ईमेल्स, उन्हें ब्लॉग से मिली सहायता, प्रेरणा और मार्गदर्शन यही बस कुछ कारण रह गए हैं जिनकी वजह से लिखना जारी है. बाकी आज मुझे बाल गंगाधर तिलक का यह कथन बिल्कुल सार्थक लगता है, ‘मैं नरक में भी उत्तम पुस्तकों का स्वागत करूँगा, क्योंकि इनमें यह शक्ति है कि जहाँ ये होंगी, वहां अपने आप ही स्वर्ग बन जायेगा.’
 
By Monika Jain ‘पंछी’

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