Thursday, December 10, 2015

Power of Mind in Hindi

Essay on Power of Mind in Hindi. Positive Attitude Thoughts, Subconscious Thinking Article, Words, Law of Attraction, The Secret Rahasya, Vichar Shakti Ka Vigyan. सकारात्मक विचार शक्ति, आकर्षण का नियम.

विचार वस्तु है ~ समझे अपने विचारों की जिम्मेदारी

कुछ सालों पहले मैंने एक दोस्त से कहा था, 'मैंने अपने जीवन में कभी कोई चमत्कार घटित होते हुए नहीं देखा.' आज भी मैं यही कहती हूँ कि मैंने अपने जीवन में कोई चमत्कार घटित होते हुए नहीं देखा. लेकिन तब से लेकर आज तक के इसी वाक्य में सोच और समझ का एक विस्तृत अंतर आ चुका है. तब मन यह सोचता होगा कि दूसरों के लिए चमत्कार जैसा कुछ होता होगा पर मेरे लिए नहीं हुआ कभी लेकिन आज मन यह जानता है कि चमत्कार जैसा कुछ होता ही नहीं. हर चीज का कोई कारण कोई विज्ञान अवश्य होता है. या फिर यूँ कहूँ कि जो कुछ भी है सब चमत्कार ही है और दोनों बातों के मायने बिल्कुल एक ही हैं.
 
कुछ दिनों से एक लैटर का इंतजार हो रहा था. लैटर को अब तक आ जाना चाहिए था...लेकिन नहीं आया और यह बेहद जरुरी था मेरे लिए. मम्मा से रोज पूछ रही थी कि पोस्टमैन अंकल आये क्या? आज इंतजार की शिद्दत कुछ ज्यादा ही बढ़ गयी थी. आज फिर पूछा तो मम्मा ने कहा पोस्टमैन को कई दिनों से इधर देखा ही नहीं है. लैटर का न आना बहुत परेशानी में डाल सकता था. इसलिए थोड़ी बेसब्री थी, पर कहीं न कहीं मन में विश्वास भी था कि आएगा जरुर. कुछ देर बाद पोस्टमैन अंकल आ ही गए. माँ ने मुझे बुलाया. माँ को उन्होंने कई सारी पोस्ट्स पकड़ाई पर मेरी नज़र जिस लिफाफे को ढूंढ रही थी वह नहीं दिखा. तो मैंने पोस्टमैन अंकल को उस लैटर के बारे में बताते हुए जब भी वह आये उसे जल्द से जल्द पहुँचाने की कह दिया. मम्मा ने अंदर आते हुए मैगजीन्स के बीच में से एक लिफाफा निकालते हुए मुझसे पूछा और हाँ यही मेरा वह सुकून लौटाने वाला लिफाफा था. इंतजार के खत्म होने से बड़ा सुकून और हो भी क्या सकता है.
 
कुछ देर बाद मैं पोस्टमैन अंकल के बारे में सोच रही थी. यहाँ इस शहर में आने के बाद से कितनी ही बार काँटों से भरे जीवन पथ में वो खुशियों के फूल चुन-चुन कर मेरे लिए लाते रहे हैं, जिनसे स्थायी न सही पर ज़िन्दगी का दर्द कुछ समय के लिए कम तो हो ही जाता है और सबसे बड़ी बात मुश्किलों का सामना करने का हौंसला भी मिल जाता है. मुझे उन्हें कुछ गिफ्ट देना चाहिए. क्या देना चाहिए यह सब सोचते-सोचते मैं कुछ काम निपटाने लगी और कुछ देर बाद फेसबुक पर आई. न्यूज़ फीड देखते हुए नज़र अचानक एक पोस्ट पर पड़ी जो कि एक पोस्टमैन और एक लड़की की संवेदनशील कहानी थी. उसमें उस लड़की ने उस पोस्टमैन को दिवाली के अवसर पर एक दिल छू लेने वाला गिफ्ट दिया था. मैं सोचने लगी देखो! इस लड़की ने तो गिफ्ट कर भी किया और मैं जो अभी तक सोच ही रही हूँ. उस पोस्ट को पढ़कर यह भावना और भी दृढ़ हो गयी कि अब तो कुछ अच्छा सा गिफ्ट करना ही है.
 
पिछले कुछ महीनों में (जब से ध्यान देना शुरू किया है) हजारों ऐसी घटनाएँ हो चुकी हैं, जिसमें जब भी कोई विचार मन में उठता है उसी से मिला जुला कुछ न कुछ कहीं देखने-पढ़ने को मिल जाता है. कोई पोस्ट लिखना टाल देती हूँ तो कुछ ही घंटों में किसी और की पोस्ट में वही विचार प्रकट हो जाते हैं. किसी बुक को पढ़ते समय कुछ सवाल पैदा होते हैं तो कुछ ही देर में किसी न किसी रूप में कहीं न कहीं उनका जवाब मिल जाता है. कई सवाल बहुत गूढ़ होते हैं पर एक दिन बस यही सोच लिया कि यह रसभरी क्या होती है? (रसमलाई का नाम रसभरी भी होता है यह मुझे नहीं पता था) और कुछ ही देर बाद फेसबुक पर किसी ने रसमलाई की फोटो पोस्ट की और उस पर रसभरी लिखा था. महीनों बाद किसी की पोस्ट दिखती है, उस व्यक्ति या उस पोस्ट के बारे में कुछ सोचने लगती हूँ कि मेरे लाइक या कमेंट कुछ करने से पहले ही उन जनाब का कोई कमेंट या लाइक मेरी पोस्ट पर आ जाता है. कई चीजों का पूर्वानुमान हो जाता है. ये सब तो बहुत छोटी-छोटी सी बातें हैं पर कुछ अनुभव तो इतने अद्भुत हैं कि उन्हें शब्द दे पाना संभव ही नहीं है. इन्हें संयोग कहा जा सकता है लेकिन वास्तव में संयोग जैसा कुछ होता नहीं. यह विचारों और मन पर काम करने वाला विज्ञान है. जिसे आधुनिक युग में आकर्षण का नियम कहा जाता है. लेकिन आध्यात्म में इसका समावेश युगों-युगों से है. कई उदाहरणों के साथ इस रूप में भी कि जब तक हमारी एक भी इच्छा शेष है हमें जन्म लेते ही रहना पड़ेगा.
 
फेसबुक पर आलोचना करती हुई, क्रूर व्यंग्य करती हुई, ख़तरनाक ताने मारती हुई, नकारात्मक, सिर्फ समस्यायों ही समस्यायों से भरी, गालियों और घृणा से सनी पोस्ट्स की अति देखती हूँ तो अच्छा नहीं लगता. विचार स्पंदन होते हैं. अपने ही जैसे विचारों और घटनाओं को आकर्षित करते हैं. विचार कब वस्तु या वास्तविकता बन जाए कहा नहीं जा सकता. हम अपने शब्दों और विचारों की अहमियत नहीं समझते, लेकिन इनके कितने घातक और अच्छे प्रभाव हो सकते हैं यह सोचा जाना बेहद जरुरी है. इसलिए शब्दों और विचारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझिये. ये सिर्फ आपके जीवन को नहीं बल्कि सबके जीवन को प्रभावित करते हैं. इसलिए जितना संभव हो प्रेम और सकारात्मकता को फैलाइये. कुछ पाने के लिए सबसे पहले उसके बारे में सोचना और बात करना ही जरुरी है. सिर्फ समस्यायों की चर्चा से तो समस्याएं ही हासिल होनी है. जरुरी है बातें समाधान की भी हो. प्रेम बोईये ताकि प्रेम पुष्पित और पल्लवित हो. ज़िन्दगी नफ़रत पर बर्बाद कर देने के लिए नहीं है. ज़िन्दगी का हासिल तो सिर्फ प्रेम ही हो सकता है और कुछ भी नहीं क्योंकि यहीं मृत्यु के उस हासिल तक पहुँचा सकता है जिसे मुक्ति कहते हैं.
 
By Monika Jain ‘पंछी’

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