Tuesday, March 8, 2016

Spiritual Quotes in Hindi

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Spiritual Quotes

  • हर व्यक्ति विरोधाभासी विचारों और शब्दों का पुतला है. कोई ज्यादा, कोई कम. हमारी दृष्टि जब तक 'पर' पर रहेगी विरोधाभास रहेंगे, और जितनी ज्यादा रहेगी उतने ही रहेंगे. ऐसे में विरोधाभास नजर तो आयेंगे पर सिर्फ 'पर' के ही 'स्व' के नहीं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • आध्यात्म की सफलता इसमें भी होगी, अगर यह अपने नाम पर होने वाले क्रूर से क्रूरतम व्यंग्यों और तमाशों को पढ़ते, देखते और सुनते हुए भी विचलित न हो. क्योंकि आध्यात्म ही सिखाता है : आत्मवत् सर्वभूतेषु...तो महावीर, बुद्ध, कबीर, विवेकानंद, ओशो आदि सभी विचारकों की मान्यताओं को पागलपन और मानसिक बीमारी करार देने वाले नास्तिक बुद्धिजीवियों! और अर्थ का अनर्थ कर देने वाले तथाकथित आस्तिक भक्तों! हमें आप दोनों से प्यार है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कल एक दोस्त ने मेरी आध्यात्म से संदर्भित पोस्ट्स के लिए कहा, 'अगर मुझे पहले पता होता कि आगे जाकर तुम इतनी खतरनाक वाली पोस्ट्स करने लगोगी तो मैं तुम्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट ही नहीं भेजता.’ वैसे मुझे भी कहाँ पता था. :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • सब कुछ चमत्कार है और कुछ भी चमत्कार नहीं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • छोटी-छोटी आध्यात्मिक अनुभूतियाँ यह अहसास करवाने के लिए पर्याप्त हैं कि अगर कोई रास्ता पूर्णता और स्थायी आनंद की ओर जाता है तो वह आध्यात्म ही है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • साथी ऐसा हो जो आत्मिक उत्थान में सहायक बनें, वह नहीं जो पतन के गर्त में ले जाए. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कितनी अजीब बात है न...ज्यादातर मनुष्य सबसे ज्यादा बोर खुद के साथ ही महसूस करते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मनुष्य कितने बड़े भ्रम में जीता है इसका पता उसे उसी दिन से लगना शुरू हो जाता है जब वह अपने मन, विचारों और कार्यों पर एक सजग और निष्पक्ष दृष्टि रखने लगता है. अक्सर व्यक्ति प्रवाह में बह जाते हैं. भीड़ और भेड़ चाल ही उनकी पसंद और नापसंदगी तय करने लगती है. मनोरंजन. ख़ुशी, सफलता, समर्थन, विरोध, नैतिकता और अनैतिकता के मापदंड भी यहीं से तय होने लगते हैं. विरले ही होते हैं जो हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लेने वाली भीड़ के शोर में अपने अंतर्मन की आवाज़ सुन पाते हैं. बाकी सब सिर्फ दुनियादारी में मुखौटें बदलते रह जाते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • दुनिया-जहाँ की घटनाएँ देखते-सुनते मन अक्सर सवाल करता है...आखिर इंसान पहुँचना कहाँ चाहता है? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ दिन पहले कहीं पढ़ा था 'जो भी इच्छाएं और वासनाएं बाकी रह गयी है उन्हें इसी जन्म में पूरा कर लो क्योंकि दमित इच्छाएं आध्यात्म के मार्ग में बाधा बनती है.' इसे पढ़ने के बाद एक मुस्कान आई चेहरे पर और पहला प्रश्न मन में आया : क्या इच्छाएं कभी पूरी हुई हैं? आध्यात्म का मार्ग इच्छाओं को पूरा करने से या दमन से शुरू नहीं होता. आध्यात्म का मार्ग शुरू होता है इच्छाओं से ऊपर उठते जाने से. जहाँ न उनके दमन की आवश्यकता है और न ही उन्हें पूरा करने की. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • एक अध्ययन ऐसा भी है...जो शब्दकोष नहीं बढ़ाता...वहां तो शब्द गुम होने लगते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’
 
How are these spiritual quotes?