Wednesday, September 30, 2015

Mouth Ulcer Home Remedy in Hindi

 
Mouth Ulcer Home Remedy in Hindi. Canker Sores Ayurvedic Treatment, Oral, Tongue Throat Ulcers, Gum Blisters Herbal Cure, Natural Remedies, Treating Muh Ke Chale. मुंह के छाले, जीभ के छालों का उपचार.
 
Mouth Ulcers Home Remedy

  • मुंह के छालों पर दो ग्राम भुने सुहागे का चूर्ण 15 ग्राम ग्लिसरीन में मिला कर लगायें. ऐसा दिन में तीन बार करें. राहत मिलेगी. 
  • मुलेठी को पानी में उबालकर काढ़ा बनाइये. इसे ठंडा कर व छानकर दिन में तीन-चार बार गरारे करने से छाले ठीक हो जाते हैं. 
  • हरे धनिये को पीसकर उसका रस छालों पर लगाने से भी छाले ठीक हो जाते हैं. 
  • सूखे धनिये को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा कर व छान कर दिन में तीन-चार बार गरारे करने से आराम मिलता है. 
  • पानी में शहद मिलाकर कुल्ले करने से भी मुंह के छालों में राहत मिलती है. 
  • इलायची पाउडर को शहद में मिलाकर छालों पर लगाने और लार टपकाने से भी आराम मिलता है.
  • चमेली की पत्तियां चबाने से भी मुंह के छाले ठीक होते हैं.
  • अमरुद की पत्तियों को उबालकर कुल्ला करने से गला और जीभ साफ़ होता है और छाले भी ठीक होते हैं.
  • हल्दी को कुछ देर पानी में डाल दें. फिर इस पानी को छान कर इससे कुल्ले करें. इससे भी राहत मिलती है. 
  • मिश्री की डली, इलायची या गोंद के टुकड़े को पूरे दिन चूसते रहने से भी छालें ठीक होते हैं.
 
परहेज : खान-पान में सावधान रहें. गरिष्ठ, मसालेदार भोजन ना करें. रेशेदार हरी सब्जियों का सेवन करें. विटामिन बी व सी से पूर्ण आहार का सेवन करें जैसे पालक, अंकुरित अनाज, अमरुद, संतरा, आवंला, बंद गोभी आदि.
 
Note : Take doctor’s advice before following any remedy stated above for the treatment of mouth ulcers. 
 
 

Poem on Dussehra in Hindi


Poem on Dussehra in Hindi for Kids. Vijayadashami par Kavita, Greetings, Vijaya Dashami Festival Wishes Sms, Poetry, Rhymes, Messages, Quotes, Shayari, Slogans. विजयदशमी दशहरा शायरी, दशहरे पर कविता.
 
विजय हमारी हो जाए

 
एक आग हो ऐसी भी 
जो जला दे भीतर के सारे तम
देने को हो बस प्रेम ही प्रेम 
ना बने हम किसी का गम.
 
भय, ईर्ष्या और नफरत का 
छाया है जो घना अँधेरा 
मिट जाए इस आग में जलकर 
खिले यहाँ फिर नया सवेरा.
 
अर्थ ना हो अब कोई भी व्यर्थ 
सत्य सांस ले सके बेशर्त 
धूल जमी है जो सदियों से 
उड़ जाए वह पर्त दर पर्त.
 
मन का रावण बढ़ने के संग 
कागज़ के रावण बढ़ते हैं 
कागज पल में जल जाता है 
मन रावण ऊंचे चढ़ते हैं.
 
मन के रावण भी जल जाए 
ऐसा कोई दीप जलाएं 
विजयदशमी के अवसर पर 
विजय हमारी हो जाए.

By Monika Jain ‘पंछी’

How is this poem about Dussehra?


Monday, September 28, 2015

Poem on Childhood in Hindi

 
Poem on Childhood Memories in Hindi for Kids. Children Poetry, Mera Bachpan, Bachchon Ki Yaadein par Kavita, Child Rhymes, Baby Quotes, Bal Shayari Sms. मेरा बचपन पर बाल कविता, बच्चों की यादें शायरी.
 
यादें
 
कुछ खट्टी, कुछ मीठी
कुछ कड़वी, कुछ तीखी
यादें तो यादें होती जो
कभी न मन से मिटती.
 
कॉपी कलम उठा ले हाथ 
भावों को चेताया मैंने
याद आया वह मीठा बचपन
जिसे उतारा पन्नों में मैंने.
 
लिखते-लिखते खो गयी मैं
बचपन की रंगीनी में
छिपा-छिपी का खेल खेलने लगी
पूरानी गलियों में.
 
कितना सच्चा, कितना अच्छा
जीवन का वह लम्हा था
न तनाव, न चिंता सचमुच!
कितना प्यारा जीवन था.
 
खिले फूल सा खिला वो बचपन
याद बहुत आता है
मुरझाये इस जीवन को
ग़मगीन बना जाता है.
 
बचपन, बचपन क्यों न रहता 
क्यों बढता जाता है?
समय देवता क्यों न थमता 
क्यों चलता जाता है?
 
हे ईश्वर! मुझको पहुंचा दो
बचपन के उस आँचल में
हे ईश्वर! मुझको दे दो
जीवन के वे सच्चे क्षण.
 
By Monika Jain 'पंछी'
 
How is this poem about childhood?



Riddles in Hindi for Kids


Riddles in Hindi with Answers for Kids, Children. Funny Easy Puzzle Sms, Solve Paheli, Hard Mind Puzzles Questions, Paheliyan, Difficult Brain Teasers, Puzzling Quiz Messages, Riddle. पहेली, बूझ.

Hindi Riddles 

  • तीन आखर से मैं बनूँ , पर्यावरण की सुरक्षा करूँ , शुरू कटे तो गल जाए , आखिर कटे तो जंग हो जाए. 
  • खबर लाता हूँ प्रातः, नहीं लगाता हूँ देर मैं, फ़ेंक दिया जाता हूँ, दूसरे दिन रद्दी के ढेर में.  
  • सात रोज में हूँ आता, बालकों का हूँ चहेता, वे करते हैं बस मुझसे प्यार, नित्य करते हैं मेरा इंतजार. 
  • शरीर है, जिसका लम्बा लम्बा, मुख है, कुछ-कुछ गोरा, पेट में जिसके है काली डंडी, नाम लिखे है वो मेरा  
  • पूरे विश्व में है एक यही, सबसे बड़ा महाद्वीप, भारत, पाक, रूस और, इसमें ही है चीन.  
  • आदि अंत को अगर मिला दो, बन जाऊं मैं बाल्टी का अंग, पहले पहुँच वहां मैं जाती, जहाँ पर हो नाच, मृदंग. 
  • लम्बा लगभग है मीटर एक, दिया है उसे दीवार पर टेक, अन्धकार को हरता वह डंडा, गरम रात्रि को दिन में ठंडा. 
  • निकलता रात में, पर नहीं चोर, छिपता दिन में, मचाता न शोर, प्रदूषण से हुआ दिखना मुश्किल, आसमान में करता रहता झिलमिल.  
  • डालो जब मेरी आँखों में उंगली, तो खोलूं मैं अपना जबड़ा, कपड़े, कागज़ या बाल काट लो, काम हो चाहे छोटा या बड़ा. 
  • मेरे हैं कई शहर, पर मकान नहीं, बहुत है जंगल पर पेड़ नहीं, नदियाँ और समुद्र हैं पर पानी नहीं, मेरे बिना किसी का बनता काम नहीं.  
  • हवा में उड़ना है मुझे पसंद, खींच कर डोरी करे बच्चे हुडदंग, तेज हवा में करती मैं फुर्रफुर्र, मिले ढील तो उड़ती हूँ दूर.  
  • रोगी मेरे दर्द से घबराते, विज्ञान के छात्र मुझे सह जाते, मैं सिखाता उनको छेद करना और भरना, सुन्दर दंतपंक्ति हर इंसान का सपना.  
  • मंदिर में सब शीश नवाएँ, राह मिले तो ठुकराएं. 
  • रात गली में खड़ा-खड़ा, डंडा लेकर बड़ा-बड़ा, रहो जागते होशियार, कहता है वो बार-बार  
  • हरा चोर लाल मकान, उसमें बैठा काला शैतान, गर्मी में दिखता है वह, सर्दी में गायब हो जाता.  
  • ना किसी से झगड़ा, ना किसी से लड़ाई, फिर भी उसको देखो, होती सदा पिटाई  
  • चार हैं रानियाँ, और एक है राजा, हर एक काम में, उनका अपना साझा  
  • आँखें हैं पर अंधी हूँ, पैर हैं पर लंगड़ी हूँ, मुंह हैं पर मौन हूँ, बतलाओं मैं कौन हूँ.  
  • दिन में सोये, रात में रोये, जितना रोये, उतना खोये.  
  • गर्मी में जिससे घबराते, जाड़े में हम उसको खाते, उससे है हर चीज चमकती, दुनिया भी है खूब दमकती. 
  • हम सबके घर ये आये, तीन अक्षर का नाम बताये, शुरू के दो अति हो जाये, अंतिम दो से तिथि बताये.  
  • एक ऐसी चिड़िया का नाम बताओ, जिसके सिर पर पैर होते हैं.  
  • धूप लगे पैदा हो जाए, छाहँ लगे मर जाए, करे परिश्रम तो भी उपजे, हवा लगे मर जाए. 
  • लाल डिबिया में हैं पीले खाने, खाने में मोती के दाने. 
  • तीन अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान. 
  • वह रहती नहीं बीमार, फिर भी खाती गोली, बच्चे, बूढ़े डर जाते, सुनकर उसकी बोली. 
  • धन दौलत से बड़ी है यह, सब चीजों से ऊपर है यह, जो पाए पंडित बन जाए, बिन पाए मुर्ख रह जाए. 
  • जो करता है वायु शुद्ध, फल देकर जो पेट भरे, मानव बना है उसका दुश्मन, फिर भी वह उपकार करे. 
  • गोल है पर गेंद नहीं, पूँछ है पर पशु नहीं, पूँछ पकड़कर खेलें बच्चे, फिर भी मेरे आंसू न निकलते. 
  • श्याम वर्ण और तीखे दांत, लचक-लचक चले नारी, जिससे मिले उसी को काटे, तो भी लोग कहें उसे ‘आ री’.  
  • ना किसी से झगड़ा, न लड़ाई, फिर भी होती सदा पिटाई. 
  • कपड़े उतरवाए पंखा चलवाए, कहती ठंडा पीने को, अभी-अभी तो नहा के आया, फिर से कहती नहाने को. 
  • नहीं मैं मिलती बाग़ में, आधी फल हूँ, आधी फूल, काली हूँ पर मीठी हूँ, खा के न पाया कोई मूल.  
  • जो जाकर न वापस आये, जाता भी वह नजर ना आये, सारे जग में उसकी चर्चा, वह तो अति बलवान कहाये.  
  • प्यार करूँ तो घर चमका दूँ, वार करूँ तो ले लूँ जान, जंगल में मंगल कर दूँ, कभी कर दूँ मैं शहर वीराना.
Answers : (1) जंगल (2) अखबार (3) रविवार (4) पेंसिल (5) एशिया (6) तबला (7) ट्यूबलाइट (8) तारा (9) कैंची (10) मानचित्र (11) पतंग (12) डेन्टिसरी (दन्त चिकित्सा) (13) पत्थर (14) चौकीदार (15) तरबूज (16) गेंद (17) हाथ (18) डॉल (19) मोमबत्ती (20) धूप (21) अतिथि (22) सभी चिड़िया (23) पसीना (24) अनार (25) जहाज (26) बन्दूक (27) विद्या (28) पेड़ (29) गुब्बारा (30) आरी (31) ढोल (32) गर्मी (33) गुलाब (34) जामुन (35) बिजली

How are these hindi riddles for kids?

Saturday, September 26, 2015

Motivational Poem in Hindi


Motivational Sailor Poem in Hindi for Students. Motivating Kavita, Success Shayari, Inspiring Motivation Quotes, Inspiration Poetry Sms, Motivated Rhymes, Inspirable Ghazal. प्रेरणादायक प्रेरक कविता.
 
तू ना कहीं रुक जाना

तूफ़ानों से घबराकर नाविक पथ से ना डिग जाना 
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना.
 
चाहे हो आंधी की बयार, चाहे हो तूफ़ानी वार
चाहे हो अग्नि की मार, चाहे हो काँटों की धार
तू ना कभी घबराना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना.
 
सच और साहस को अपना शस्त्र बनाकर
दियें आशाओं के नयनों में जलाकर
आत्मविश्वास को हृदय में बसाकर
हर विषमता में धैर्य को अपनाकर
तू ना कहीं रुक जाना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना.
 
आंधी जो आये तो तू , बन पर्वत टकरा जाना
सागर जो आये तो, बन कश्ती तू अड़ जाना
काँटों के पथ को राही, फूल समझ बढ़ते जाना
अंधियारी राहों में तू, बन दीपक जलते जाना
तू ना कहीं बुझ जाना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना.

पूर्वा भी आएगी, मस्ती भी छाएगी
तेरे ख्वाबों को पूरा करने, मंजिल तुझे बुलाएगी
तेरे साहस और हिम्मत से, सब सपने सच हो जायेंगें 
जमीं, आसमां और फिज़ा, तेरी जीत का जश्न मनायेंगें
तू बस जीत का गीत सुनाना!
लहरें आती जाती रहती, तू बस बहते जाना.

By Monika Jain 'पंछी'

How is this motivational poem? 

Friday, September 25, 2015

Article on Selfie Addiction in Hindi


Article on Selfie Addiction in Hindi. Selfies Photo Culture Advantage Disadvantage Essay, Photography Mania, Narcissism Syndrome, Personality Psychological Disorder. सेल्फी मेनिया, सिंड्रोम, संक्रमण.
 
यह सेल्फी संक्रमित युग है

Article on Selfie Addiction in Hindi

(ललकार टुडे में प्रकाशित )
 
प्रकृति की अनमोल धरोहर को समेटे दूर तक फैले उस हरी मखमली दूब वाले मैदान और बादलों की श्वेत-श्याम नदी को बहाते उस नील परी के आसमान से बेखबर जब सब लोग अपनी-अपनी सेल्फी लेने में व्यस्त थे तो दूर एक झील के किनारे उगे रंग-बिरंगे फूलों से मैं बातें कर रही थी। फूलों को देखकर मैं और मुझे देखकर फूल चहक रहे थे। तभी एक फूल ने कहा, ‘कितना समय हो गया, कितने दिन बीत गए, कितना अच्छा लग रहा है कि इतने दिनों बाद कोई हमसे मिलने आया है।’ और उसके स्वर को निरंतरता देते हुए एक दूसरे फूल ने कहा, ‘यूँ तो यहाँ बहुत भीड़ देखी है हमने। हम पर गिरते-पड़ते झील के किनारे खड़े होकर ये लोग हाथ में जाने क्या लेकर घंटों बटन दबाते रहते हैं। पर आज कितने दिनों बाद किसी ने आकर सहलाया है हमें और बिखेरी है एक चिर परिचित मुस्कान जो अक्सर खो जाती है यहाँ आये पर्यटकों के शोर शराबे, प्रदूषण और खींचातानी के बीच।’ तभी एक तीसरा फूल लहराकर मेरे गालों को छू गया। मेरी आँख खुली और मैंने देखा यह तो एक सपना था।

थोड़े विस्मय से भरी मैं, नींद से जागकर, फ्रेश होकर, लेमन टी की चुस्कियों के साथ जैसे ही अख़बार हाथ में थामती हूँ तो पन्ने पलटते-पलटते नजर पड़ती है एक ख़बर पर : रूस में सिखाये जा रहे हैं सेफ सेल्फी लेने के तरीके। इस ख़बर को पढ़ने के बाद सबसे पहला विचार मन-मस्तिष्क में यही कौंधता है कि हम इंसान प्रकृति के समस्त प्राणियों में से सबसे बेजोड़ नमूने इस मामले में भी हैं कि पहले तो हम लगाते हैं आग और फिर खोदते हैं कुआँ, और इसी विचार के साथ एक विचारों की श्रृंखला दौड़ पड़ती है।

बीते कुछ दिनों की बात है। सऊदी अरब में एक किशोर ने अपने दादा के शव के साथ शरारती मुस्कान और जीभ को बाहर निकालते हुए ‘अलविदा दादा’ कैप्शन के साथ एक सेल्फी पोस्ट की। असंवेदनशीलता की उपज यह मुस्कान सेल्फी पोस्ट कर लाइक पाने के क्रेज का एक उदाहरण मात्र है। ऐसे ना जाने कितने उदाहरण आजकल सुर्ख़ियों में बने हुए हैं।

पाकिस्तान की मशहूर गायिका कोमल रिजवी को ही लिया जाए। एक ओर 90 वर्ष के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल सत्तार एधी गंभीर हालत में बिस्तर पर लेते हुए हैं, और दूसरी ओर कोमल रिजवी हँसते हुए उनके साथ सेल्फी लेकर फेसबुक पर पोस्ट कर रही हैं।

यह सब तो कुछ भी नहीं, सेल्फी का फीवर कुछ ऐसा चढ़ा है कि कई लोगों की सेल्फी उनके जीवन का आखिरी क्लिक बनकर रह गयी।

ऑस्कर ओटेरो एगुइलर नाम का एक व्यक्ति अपनी एक ख़ास सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों को इम्प्रेस करना चाहता था। इसके चलते उसने एक गन अपने सर पर तानी और सेल्फी लेने लगा। लेकिन सेल्फी लेने के दौरान गलती से गन का ट्रिगर दब गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गयी।

इसी तरह पुर्तगाल में एक दंपत्ति ऊंची चट्टान के ऊपर जाकर, बैरियर को लांघकर समुद्र के साथ आकर्षक सेल्फी लेने के चक्कर में उल्टे सर फिसले और सीधे चट्टान से समुद्र में समा गए। अपने पीछे वे दो मासूमों को छोड़ गए।

हैदराबाद से मनाली घूमने गए इंजीनियरिंग के उन 25-30 छात्रों को हम कैसे भूल सकते हैं जो व्यास नदी की लहरों से अनजान सेल्फीज और फोटोज क्लिक करने में इतने मस्त और मग्न थे कि कब लहरें उन्हें बहाकर ले गयी पता भी न चला।

सेल्फी लेते समय ध्यान भटक जाने के चलते विमान हादसे और कार एक्सीडेंट जैसी घटनाएँ भी अंजाम लेने लगी है।

कुछ ख़ास क्षणों को कैद करना हुनर होता है, यादों को संजोने के लिए जरुरी भी। पर इतना तो ख़याल हो कि कहीं यादों के एल्बम सजाने के चक्कर में हम खुद ही उस एल्बम की एक याद बनकर ना रह जाएँ।

ऐसी ही घटनाओं के चलते रूस में सेल्फी प्रेमियों के लिए एक गाइडलाइन तैयार की गयी है जिसमें ब्रोशर, वीडियो और वेब कैंपेन के जरिये तेज रफ्तार ट्रेन, पहाड़ों के किनारे, बन्दूक और खतरनाक जानवरो के साथ सेल्फी ना लेने के लिए आगाह किया गया है। सेल्फी स्टिक से हो सकने वाली दुर्घटनाओं की आशंका के चलते विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के दौरान, कई फुटबॉल क्लबों, नेशनल गैलरी, द ऑल इंग्लैंड टेनिस एंड क्रिकेट क्लब आदि में सेल्फी स्टिक के प्रयोग पर पाबंदी है। डिज्नी ने दुनिया भर में अपने थीम पार्कों में सुरक्षा के चलते सेल्फी स्टिक के प्रयोग पर रोक लगा दी है।

लेकिन कहाँ-कहाँ और कैसे-कैसे रोक लगायी जायेगी। आजकल टूरिज्म सिर्फ टूरिज्म नहीं सेल्फी टूरिज्म बनकर रह गया है। बल्कि टूरिज्म क्या अब तो लगभग हर घटना के आगे या पीछे सेल्फी शब्द जोड़ा जा सकता है : भूकम्प सेल्फी, ज्वालामुखी सेल्फी, शमशान सेल्फी, बाथरूम सेल्फी और भी पता नहीं कौन-कौन सी सेल्फी।

सेल्फी का क्रेज नेता, अभिनेता, युवाओं-युवतियों सब पर सर चढ़कर बोल रहा है। वो दिन गए जब सेलिब्रिटीज के ऑटोग्राफ लिए जाते थे। आजकल प्रशंसक अपने स्टार्स को अपने साथ ली गयी सेल्फी में संजो कर रखना चाहते हैं। पर यह सेल्फी मेनिया सेलिब्रिटीज के लिए समस्या भी खड़ी कर रहा है। बीते दिनों युवा ब्रिटिश गायक ज्यान मलिक ने पॉप बैंड ‘वन डायरेक्शन’ को छोड़ने का ऐलान यह कहकर किया कि वे सेल्फी कल्चर के शिकार हुए हैं। कुछ मौकापरस्त लड़कियों ने उनके साथ ली गयी सेल्फीज के आधार पर अफवाहें फैलाई जिसके चलते वे तनाव ग्रस्त हो गए।

सेल्फी के प्रति बढ़ती दीवानगी कई मनोरोगों को आमंत्रित कर रही है। अमेरिका के ओहियो यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिकों के 800 पुरुषों पर अध्ययन के अनुसार वे पुरुष जो घंटों फोटोशॉप पर एडिटिंग के बाद बहुत ज्यादा सेल्फी पोस्ट करते हैं, ऐसे लोग आत्ममुग्धता के शिकार होते हैं। उनमें स्वार्थ की अधिकता और संवेदनशीलता जैसे गुणों का अभाव होता है। उन्हें गुस्सा भी जल्दी आता है। वे अपने शरीर का एक वस्तु की तरह प्रदर्शन करते हैं, जो कि एक यौन विकृति है। महिलाओं को ऐसे पुरुषों से गंभीर रिश्ते बनाने से बचना चाहिए।

वहीँ एक सर्वे जो 16-25 वर्ष की 2000 युवतियों पर किया गया, जिसके अनुसार युवतियाँ दिन में कम से कम 48 मिनट और सप्ताह में 5-6 घंटे सेल्फी लेने में गुजार देती है। सर्वे में शामिल हर 10 में से एक लड़की के कंप्यूटर या स्मार्ट फ़ोन में स्नानघर, कार और कार्यालय में ली गयी लगभग 150 तस्वीरें पायी गयी। लाइक और कमेंट पाने का जूनून इस कदर हावी है कि कई युवतियाँ अपनी बॉडी इमेज को लेकर बहुत ज्यादा कोंशस होने के चलते ईटिंग डिसऑर्डर का शिकार हो रही है।

अमेरिकी साइकियाट्रिक ऐसोसिएशन की एक रिपोर्ट के अनुसार ‘सेल्फी’ को ‘आब्सेसिव कम्पलसिव डिजायर’ से जोड़ा गया है, जिसमें व्यक्ति अपनी तस्वीरें खींचना और शेयर करने का आदी हो जाता है। यह लत आत्मविश्वास को कमजोर करती है और नकारात्मकता को बढ़ावा देती है।

हालांकि हर चीज के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलु होते हैं। सेल्फी का उपयोग कई सामाजिक आन्दोलनों को सक्रीय बनाने में भी किया जा रहा है। कुछ ही समय पहले ब्रिटेन में कैंसर रोगियों की मदद के लिए कैंसर रिसर्च यूके चैरिटी ने ‘नो मेकअप सेल्फी फॉर कैंसर अवेयरनेस’ नामक एक अभियान चलाया। इस अभियान के जरिये कैंसर रोगियों के लिए करोड़ों रुपयों की मदद जुटाई गयी। इसी तरह का ‘पिंक सेल्फी अभियान’ ओगां कैंसर फाउंडेशन और एले ब्रेस्ट कैंसर कैंपेन की पहल पर बॉलीवुड हस्तियों और फैशन डिज़ाइनर्स की मदद से स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के उद्देश्य से चलाया गया। हमारे देश में चल रहे सेल्फी विथ डॉटर अभियान से हम सब परिचित ही हैं। इसी तरह 5 सितम्बर, 2014 से ही आगाज हुआ ग्लोबल ह्यूमनराइट समूह का ‘सेल्फीज4स्कूल’ अभियान जिसके तहत सेल्फीज पोस्ट कर लड़कियों को स्कूल भेजने का बीड़ा उठाया गया है।

ये सब सकारात्मक पहलु हैं लेकिन जब सामाजिक सरोकारों से इतर यह सेल्फी क्रेज स्टेटस सिंबल बनकर हर पीढ़ी के लोगों पर हावी होता हुआ नजर आता है तो चिंता होना स्वाभाविक है। सेल्फी शब्द सिर्फ ऑक्सफ़ोर्ड ‘वर्ड ऑफ़ द इयर 2013’ ही नहीं बना बल्कि यह सोते-जागते, उठते-बैठते, खाते-पीते, नहाते-गाते हर घटना, हर पल के साथ जुड़ता चला जा रहा है। जिसके घातक परिणाम हम ऊपर देख चुके हैं। नकारात्मकता, आत्मविश्वास की कमी, अकेलापन, दिखावा, क्रोध, चिड़चिड़ाहट, तनाव, आत्महत्या यह सब सेल्फी युग की सौगाते हैं जो हम पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करने वाले हैं। क्योंकि हम कुआँ तो तभी खोदेंगे जब आग लगेगी और वह भी सिर्फ फोरी तौर पर।
 
By Monika Jain ‘पंछी’
 
How is this article about selfie addiction?


Tuesday, September 22, 2015

Poem on Humanity in Hindi

 
Poem on Humanity in Hindi. Manushyata Shayari, Human Rights Quotes, Manavta par Kavita, Insaniyat Slogans, Human Values Poetry, Humanism, Being Human Rhyme. मानवता पर कविता, मनुष्यता शायरी, इंसानियत.

जरुरत है तो बस एक इंसान की
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
गूँज रही चीखों और चीत्कारों को जो सुन पाये
टूट रहे सपनों के टुकड़ों को जो चुन पाये
अंधियारी राहों में खोयी आशाएं जो बुन पाये
ऐसे दयावान की. 
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
कदम-कदम पे सरहद की दीवारों को जो फोड़ सके
जाति, धर्म, समाज की दरारों को जो जोड़ सके
जंग लगे दिल के दरवाजों के ताले जो तोड़ सके
ऐसे ऊर्जावान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
इक प्यासे की प्यास बुझाने को जो पानी बन जाये
डूबे सपने पार लगाने को जो कश्ती बन आये
निर्बल का मान बचाने को बन रक्षक जो तन जाये
ऐसे दिल के धनवान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
नफरत, शोषण, लालच, हिंसा का तांडव जो रोक सके
आतंकवादी राहों पे चलते क़दमों को टोक सके
दहशतगर्दों की दहशत को बन लाठी जो ठोक सके
ऐसे शक्तिमान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
निज़ी स्वार्थ की सीमाओं से परे जो सोच सके
खून से लथपथ मानवता के दामन को पौंछ सके
जिससे बिखरी खुशियों को भर सारी दुनिया नाच सके
ऐसे करुणानिधान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.

By Monika Jain 'पंछी'
 
How is this poem about humanity? 

Mahatma Gandhi Quotes in Hindi


Mahatma Gandhi Quotes in Hindi. Mohandas Karamchand Gandhiji Ke Vichar, Slogans, Quotations, Sayings, Anmol Vachan, Dialogues, Suvichar, Words, Sentences, Lines, Sms. महात्मा गाँधी जी के अनमोल विचार.

Mahatma Gandhi Quotes

  • पहले वो आप पर ध्यान नहीं देंगे, फिर वो आप पर हँसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, और तब आप जीत जायेंगे. 
  • जो बदलाव आप दुनिया में देखना चाहते हैं वह पहले स्वयं में लायें. 
  • समाज में से धर्म को निकाल फेंकने का प्रयत्न बाँझ के पुत्र पैदा करने जितना ही निष्फल है और अगर कहीं सफल हो जाय तो समाज का उसमें नाश है. 
  • जो लोग अपनी प्रशंसा के भूखे रहते हैं, वो साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है. 
  • यदि शारीरिक उपवास के साथ-साथ मन का उपवास न हो तो वह दम्भपूर्ण और हानिकारक हो सकता है. 
  • आप नम्र तरीके से दुनिया को हिला सकते हैं. 
  • अहिंसात्मक युद्ध में अगर थोड़े भी मर मिटने वाले लड़ाके मिलेंगे तो वे करोड़ों की लाज रखेंगे और उनमें प्राण फूकेंगे. अगर यह मेरा स्वप्न है, तो भी मेरे लिए मधुर है. 
  • मैं हिंदी के जरिये प्रांतीय भाषाओँ को दबाना नहीं चाहता, किन्तु उनके साथ हिंदी को भी मिला देना चाहता हूँ. 
  • विश्व इतिहास में आज़ादी के लिए लोकत्रांत्रिक संघर्ष हमसे ज्यादा वास्तविक किसी का नहीं रहा है. मैंने जिस लोकतंत्र की कल्पना की है, उसकी स्थापना अहिंसा से होगी. उसमें सभी को समान स्वतंत्रता मिलेगी. हर व्यक्ति खुद का मालिक होगा. 
  • आपका कोई काम महत्वहीन हो सकता है लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि आप कुछ करें. 
  • अपनी बुद्धिमता को लेकर बेहद निश्चित होना बुद्धिमानी नहीं है. यह याद रखना चाहिए कि ताकतवर भी कमजोर हो सकता है और बुद्धिमान से बुद्धिमान भी गलती कर सकता है. 
  • भविष्य में क्या होगा, मैं नहीं सोचना चाहता. मुझे वर्तमान की चिंता है. ईश्वर ने मुझे आने वाले क्षणों पर कोई नियंत्रण नहीं दिया है. 
  • लम्बे - लम्बे भाषणों से कहीं अधिक मूल्यवान है इंच भर कदम बढ़ाना. 
  • कमजोर कभी क्षमा नहीं कर सकता. क्षमा करने का गुण ताकतवर का है. आँख के बदले आँख की भावना का हश्र यह होगा कि दुनिया में आँखों वाला कोई नहीं बचेगा. 
  • मेरी आज्ञा के बिना मुझे कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता. 
  • सच पूछो तो हम सब द्रौपदी की स्थिति में हैं. हमारी लाज कोई मनुष्य नहीं ढक सकता, उसे तो ईश्वर ही ढक सकता है. ऐसा जरुर होता है कि वह अपनी सहायता मनुष्य के द्वारा भेजता है, पर मनुष्य तो निमित्त मात्र है. 
  • आस्था तर्क से परे की चीज है. जब चारो ओर अँधेरा ही दिखाई पड़ता है और मनुष्य की बुद्धि काम करना बंद कर देती है उस समय आस्था ज्योति प्रखर रूप में चमकती है और हमारी मदद को आती है. 
  • अहिंसा में इतनी ताकत है कि वह विरोधियों को भी अपना मित्र बना लेती है और उनका प्रेम प्राप्त कर लेती है. 
  • क्रोध एक किस्म का क्षणिक पागलपन है.  
  • क्षणभर भी काम के बिना रहना ईश्वर की चोरी समझो. मैं दूसरा कोई रास्ता भीतरी या बाहरी आनंद का नहीं जानता. 
  • सच्चा सुख वही है जब आप जो सोचें, कहें और करें तारतम्य में हो.
 
महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi

How are these quotes of Mahatma Gandhi?


Sunday, September 20, 2015

Khalil Gibran Quotes in Hindi


Khalil Gibran Quotes in Hindi. Philosopher Kahlil Jibran Prophet on Love, Marriage, Children, Work, Life, Death, Giving, Friendship. Quotations, Thoughts, Inspirational Sayings. खलील जिब्रान के विचार.
 
Khalil Gibran Quotes

  • जिस प्रकार मैं एक गुलाम नहीं बनना चाहता, उसी प्रकार मैं किसी गुलाम का मालिक भी नहीं बनना चाहता. यह सोच लोकतंत्र के सिद्धांत को दर्शाती है. 
  • अपने विरोधियों से मित्रता कर लेना क्या विरोधियों को नष्ट करने के समान नहीं है?
  • इंसान जितना अपने मन को मना सके, उतना ख़ुश रह सकता है.
  • उस व्यक्ति को आलोचना करने का अधिकार है जो सहायता करने की भावना रखता है. 
  • मित्रता कभी भी अवसर नहीं, अपितु एक मधुर उत्तरदायित्व होती है. जिनसे प्रेम करते हैं उन्हें जाने दे. वे यदि लौट आते हैं तो वे सदा के लिए आपके हैं और अगर नहीं लौटते हैं, तो वे कभी आपके थे ही नहीं.
  • किसी व्यक्ति के दिल और दिमाग को समझने के लिए इस बात को ना देखे कि उसने अभी तक क्या प्राप्त किया है. बल्कि इस बात को देखे कि वह क्या अभिलाषा रखता है.
  • मानवता प्रकाश की वह नदी है, जो सीमित से असीम की ओर बहती है.
  • आप अपने रहस्य यदि पवन पर खोल देते हैं तो वृक्षों में बात फ़ैल जाने का दोष पवन पर मत मढ़े.
  • दानशीलता यह नहीं है कि तुम मुझे वह वस्तु दे दो जिसकी मुझे आवश्यकता तुमसे अधिक है. बल्कि यह है कि तुम मुझे वह वस्तु दो जिसकी आवश्यकता तुम्हें मुझसे अधिक है.
  • प्रेम के बिना जीवन एक ऐसे वृक्ष के समान है जिस पर ना कोई फूल हो, ना फल.
  • बीता कल आज की याद है, और आने वाला कल आज का स्वप्न.
खलील जिब्रान / Khalil Gibran

How are these quotes of Khalil Gibran?
 
 

Saturday, September 19, 2015

Forgiveness Quotes in Hindi


Forgiveness Quotes in Hindi. Uttam Kshama Yachna Diwas, Michhami Dukkadam Parv Messages, I am Sorry Sms, Apology, Please Forgive Me, Apologize, Forgiving, Mafi, Pardon Status. उत्तम क्षमा वाणी पर्व.

Forgiveness Quotes

  • जिसने कभी तुम पर उपकार किया है, यदि उससे कोई भारी अपराध हो जाये, तो भी पहले के उपकार का स्मरण करके उस अपराधी के अपराध को क्षमा कर देना चाहिए. संसार में ऐसे अपराध कम नहीं हैं, जिन्हें हम चाहें और क्षमा न कर सकें. ~ शरत चन्द्र चटर्जी / Sarat Chandra Chatterjee 
  • जो व्यक्ति दूसरों को क्षमा नहीं कर सकता वो उस पुल को तोड़ देता है जिसे उसे पार करना था, क्योंकि हर व्यक्ति को क्षमा पाने की आवश्यकता होती है. ~ थॉमस फुलर / Thomas Fuller
  • कोई भी क्यों ना हो, जिसका कार्य कारण हमें नहीं मालूम उसे अगर हम क्षमा ना भी कर सकें, तो उसका विचार करके कम से कम उसे अपराधी तो नहीं ठहरावे. ~ शरत चन्द्र चटर्जी / Sarat Chandra Chatterjee
  • मानवता कभी उतनी सुन्दर नहीं होती, जितनी कि जब वो क्षमा के लिए प्रार्थना करती है या जब किसी को क्षमा करती है. ~ जीन पॉल / Jean Paul
  • माफ़ करने का मतलब किसी कैदी को आजाद करना है और यह जानना है कि आप ही वो कैदी थे. ~ लुईस बी. स्मेडेस / Lewis B Smedes
  • जब आप माफ़ करते हैं तो आप भूत को नहीं बदलते हैं, लेकिन आप निश्चित रूप से भविष्य को बदल देते हैं. ~ बर्नार्ड मेल्त्जर / Bernard Meltzer
  • क्षमाशीलता मनुष्य का गुण है.
  • कभी-कभी एक कमी सारे गुणों पर भारी पड़ जाती है, जैसे एक गलती सारी अच्छाइयों पर. किसी के हजार जुल्म सह लिए जाते हैं...तो किसी की एक ख़ता को भी नहीं मिलती माफी. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • क्षमा सिर्फ अभिव्यक्त नहीं, अनुभूत और आत्मसात होना चाहती है. सत्य तो यही है कि मेरे पास किसी को क्षमा करने या किसी से क्षमा पाने का अधिकार नहीं. लेकिन मेरे पास स्वयं को परिवर्तित करने का अधिकार है. और यह परिवर्तन वहां तक संभव है जहाँ पर क्षमा शब्द की कोई आवश्यकता रह ही नहीं जाती. क्योंकि वहां सब कुछ स्वीकृत हो जाता है. क्षमा एक दिन ऐसी ऊँचाइयों तक पहुँचने में भी सहयोगी बने, इसी भाव के साथ मिच्छामी दुक्कडम्. ~ Monika Jain ‘पंछी’
How are these hindi quotes about forgiveness?


Friday, September 18, 2015

Essay on Mahaveer Swami in Hindi


Essay on Lord Mahaveer Swami in Hindi. Review of Mahavir Vani by Osho, Bhagwan Vardhamana Jayanti, Jainism Life History, God Mahavira Biography, About Jain Dharma, Paragraph. महावीर स्वामी जयंती पर निबंध.
 
पुस्तक परिचय : महावीर वाणी ~ ओशो

कुछ किताबें आईना होती है...कोरा आईना. ओशो की ‘महावीर वाणी’ भी मेरे लिए एक किताब नहीं बल्कि एक आईना ही है. एक ऐसा आईना जिसमें खुद को अपनी सारी अच्छाईयों और बुराईयों...सारी शक्तियों और कमजोरियों के साथ देखा जा सकता है. इस किताब को पढ़ने के साथ कई बार यह ख़याल मन में आया कि यह किताब तो मुझे बहुत-बहुत पहले पढ़नी थी. पर शायद नियति इतनी उदार नहीं होती, या यूँ कहूँ कि हम खुद ही अपने लिए इतने उदार नहीं होते, तभी तो मनुष्य द्वारा निर्मित इस कृत्रिम दुनिया के जाल में उलझकर रह जाते हैं. खैर! देर से ही सही सत्य को दिखाने वाला आईना कभी भी, कहीं भी दिखे, उसे देख ही लेना चाहिए. और जितना संभव हो सके सत्य को आत्मसात कर लेना चाहिए. क्योंकि यही हमारे लिए अपने प्रति बरती गयी एकमात्र उदारता है. बाकी तो सब कुछ भ्रम और स्वयं पर किये गए अत्याचार ही हैं.
 
ओशो के शब्दों में महावीर को जानना एक ऐसे वैज्ञानिक को जानना है जिनका विज्ञान सिर्फ और सिर्फ उत्थान और विकास की बातें करता है, जिसमें विनाश कहीं भी नहीं. महावीर को जानना एक ऐसे धर्म को जानना है जो सही मायनों में धर्म जान पड़ता है, जो सदा से हमारे भीतर है, जो हमारा स्वभाव है, बस बाहरी आवरण ने जिसे ढक दिया है. महावीर को जानना एक ऐसे प्रेमी को जानना है जो प्रकृति के जीव मात्र के प्रति प्रेम और करुणा से परिपूर्ण है. ऐसा प्रेम जो पूर्णत: निर्लिप्त होने के बावजूद भी सही मायनों में प्रेम है. महावीर को जानना एक ऐसे चिकित्सक को जानना है जो हमारी सारी बीमारियों के लिए एक ऐसी दवा बताते हैं, जिसके कोई भी साइड इफ़ेक्ट नहीं. महावीर को जानना एक ऐसे गुरु को जानना है जो निश्चित रूप से असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर एवं मृत्यु से अमरता की ओर ले जाते हैं. महावीर को जानना एक ऐसी परम आत्मा को जानना है, जिनसे काल की सीमाओं से परे भी आत्मिक सम्बन्ध की अनुभूति होने लगती है. महावीर को जानना स्वयं को जानने और पाने का मार्ग जानना है.

किसी गंभीर दर्शन को पढ़ते हुए भी लगातार मुस्कुराया जा सकता है, यह अहसास इस किताब को पढ़कर ही हुआ. लेखक और पुस्तक के पात्र के प्रति मन इतनी श्रद्धा से भर सकता है कि उनके भौतिक रूप से उपस्थित ना होने पर भी वे आसपास ही हैं, यह अहसास इस किताब ने ही करवाया. इतनी रहस्यमयी और रोमांचक अनुभूतियाँ जैसे प्रकृति के सबसे सुंदरतम स्थल को घूम आई हूँ. पूर्णत: निर्लिप्तता के सन्देश के साथ भी इतना प्रेम जैसे जीवन में पहली बार किसी सच्चे मित्र, सच्चे प्रेमी से मिलकर आई हूँ. और यह ज्ञान के अथाह सागर ओशो के जादुई शब्दों के बिना संभव हो ही नहीं सकता था.
 
इस पुस्तक को पढ़ने के बाद कोई भी बिल्कुल पहले जैसा रह ही नहीं सकता. यह पुस्तक परिवर्तन की दस्तक है, एक सुनहरे परिवर्तन की.
 
By Monika Jain ‘पंछी

Wednesday, September 16, 2015

Poem on Student in Hindi


Poem on Student Life in Hindi. For Kids, Children, Primary Students Learning, Pupil Sms, Disciple Poetry, Learner, Guru Shishya par Kavita, Chatra Jeevan Shayari. गुरु शिष्य पर कविता, छात्र जीवन.
 
यह सीखने का अकाल दौर है
 
जब भी कोई बच्चा,
नए आखर को,
नए आकार-चित्र से,
अपने मन-मस्तिष्क में आश्रय देकर,
अपने मुस्काए ओठों से,
शब्द-चित्र-ध्वनि को बोलता है,
तो ऐसा लगता है,
जैसे पाँच दिन से प्यासे को पानी मिला हो।
या किसी अँधे को अचानक,
उजाला दिखा हो।
या फिर निर्जन मरुस्थल की छाती पर,
किसी अजनबी ने पाँव रखा हो।
 
कितनी उत्सुकता से देखते हैं हम,
जब कोई बच्चा सिखाये हुए को,
अपने मगज पर जोर देकर,
एकाग्रचित होकर बोलने लगता है,
तो सच्चे शिक्षक का सिखाना,
सीख बन जाता है,
अपने लिए, बच्चे के लिए,
और उन लोगोँ के लिए जो
बच्चों को सिखाना चाहते है।
 
पर सीखना-सिखाना इतना आसाँ नहीं,
इस महायात्रा में कई पड़ाव है।
उन पड़ावों से पार पाना सरल नहीं।
पहले हम सीखें, फिर सिखाएं,
यह नियम है, होना भी चाहिए।
 
पर आज शिष्यत्व भूल कर,
हर कोई शिक्षक बनना चाहता है।
सिखाने वालों की ऐसी बाढ़ सी आई,
कि उसमें सीखने वाले बह गए हैं।
 
रह गयी तो बस,
सूखी, निरीह, बंजर धरती।
किसे सिखाएं?
यह सीखने का अकाल-दौर है।
 
शम्भु कुमावत
वरिष्ठ अध्यापक-हिंदी
स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, मांडलगढ़, भीलवाड़ा, राजस्थान।


Monday, September 14, 2015

Love Quotes in Hindi


I Love You Quotes in Hindi. True Loving Sms, Lovely Sms, Lovable Quotations, Pyar, Prem Ke Vichar, Lovers Sayings, Ishq Sentences, Mohabbat Proverbs, Notes, Dialogues, Messages. प्रेम, प्यार सुविचार.

Love Quotes

  • प्यार सिर्फ किस्मत से मिलता है, किसी भी योग्यता से नहीं. आप चाहे कितने भी सुन्दर हैं, कितने भी प्रतिभाशाली, आपका कितना भी नाम, सम्मान और रुतबा है और चाहे कितना भी अच्छा व्यवहार, तो भी यह जरुरी नहीं कि आपको जीवन में कोई सच्चा प्यार करने वाला मिलेगा/मिलेगी. क्योंकि प्यार सिर्फ किस्मत से मिलता है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • उपेक्षा तभी तक महसूस होती है, जब तक अपेक्षा रहती है और जब तक अपेक्षाएं रहती है तब तक विशुद्ध प्रेम नहीं होता. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • प्रेम पाने वाले में पात्रता हो ना हो पर प्रेम करना निश्चय ही एक पात्रता है, जो विरलों को ही मिलती है. और जिस ह्रदय को प्रेम करना आ जाता है, उस ह्रदय में किसी से भी नफरत के लिए कोई जगह नहीं बचती. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • प्रेम जिसे स्वभाव होना था...आसक्ति, मोह, लालच और स्वार्थ बन गया. प्रेम जिसे बंधन रहित होना था...सम्बन्ध बन गया. वह कौम की कैंची से कुतरा गया. क्षेत्रीयता की धार से काटा गया. प्रेम कतरन-कतरन हो गया. प्रेम, प्रेम नहीं रहा. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • प्रेम कभी दुःख का कारण नहीं होता. प्रेम कभी कोई समस्या भी नहीं होती....हो ही नहीं सकती. प्रेम तो बस समाधान होता है...सिर्फ समाधान. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • अपने आदर्शतम स्वरुप में प्रेम स्वभाव होता है और यह सापेक्ष नहीं निरपेक्ष होता है ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • जिसे प्यार करते हो उसे मुक्त कर दो. तभी प्रेम सार्थक है. वरना तो बस स्वार्थ है. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • एक 'लेखक' की 'प्रेमिका' होना या एक 'लेखिका' का 'प्रेमी' होना इन मायनों में कितना प्यारा है कि जब लिखी जाती है 'प्रेम कविता' कोई तो लिखने वाले के साथ प्यार करने लगते हैं उसे शब्द, प्रकृति, चाँद, सितारे, नदियाँ, फूल, तितिलियाँ और झरने भी. है ना? ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • प्यार से कहे चंद शब्द रोक सकते हैं जाने कितनी बहसों को, सुलझा सकते हैं अनगनित समस्याएँ, कम कर सकते हैं भयंकर चोटों का दर्द, जोड़ सकते हैं कई टूटते रिश्ते, और बचा सकते हैं जाने कितनी जिंदगियाँ. पर अहंकार, स्वार्थ और असंवेदनशीलता के मारे हम सब...अव्वल दर्जे के गरीब हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • स्नेह एक ऐसा चिकना और परिव्यापक भाव है कि उसमें व्यक्तित्व नहीं रहते. स्नेह अपने स्नेह पात्र को कभी 'याद' नहीं करता क्योंकि वह उसे कभी भूलता नहीं. ~ सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन / Sachchidananda Hirananda Vatsyayan
  • जीवन में जो भी स्थायी ख़ुशी है उसका नब्बे प्रतिशत उत्तरदायी प्रेम है. ~ सी एस लुईस / C S Lewis
  • प्रेम की शक्ति दंड की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है. ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi 
  • प्रेम एक ऐसी स्थिति है जिसमें आपकी स्वयं की ख़ुशी के लिए दूसरे व्यक्ति की ख़ुशी भी अनिवार्य होती है. ~ रोबर्ट हेनलेन / Robert Heinlein
  • प्रेम के प्रादुर्भाव के लिए आशा की एक छोटी सी किरण ही पर्याप्त है. ~ मैरी हेनरी बियले / Marie Henri Beyle
  • इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता कि कोई विशेष क्षण कितना कठिन है, प्रेम और आशा हमेशा संभव है. ~ जॉर्ज चैकिरिस / George Chouliarakis
 
How are these quotes about love?
 

Thursday, September 10, 2015

Poem on Life Struggle in Hindi


Poem on What is Life Struggle in Hindi. Struggles Poetry, Zindagi Kavita, Struggling Quotes, Problems Shayari, Jeevan Sangharsh Sms, Challenges Status, Rhymes. जीवन संघर्ष पर कविता, ज़िन्दगी शायरी.

जीवन क्या है?
 
जीवन क्या है?
बहता पानी... 
कभी ना थमती है ये कहानी…
 
जीवन क्या है?
बहता पानी...

उड़ते पंछी की प्यास है ये
भटके राही की तलाश है ये
रोती पलकों की आस है ये
सुख और दुःख का अहसास है ये.

जीवन क्या है?
बहता पानी...

इक गरीब की रोटी है
इक अमीर की कोठी है
ऊँचे पर्वत की चोटी है
गहरे सागर का मोती है.

जीवन क्या है?
बहता पानी...

सोयी आँखों का सपना है
तन्हाई में कोई अपना है
कड़ी धुप में तपना है
नित नए स्वाद को चखना है.

जीवन क्या है?
बहता पानी...

कहीं फूलों का बिछौना है
कहीं हर पल काँटों में सोना है
बेबस आँखों का रोना है
मीठे ख्वाबों में खोना है.

जीवन क्या है?
बहता पानी...
कभी ना थमती है ये कहानी…


By Monika Jain 'पंछी'

 
How is this hindi poem about life struggles?


Monday, September 7, 2015

Poem on Ego in Hindi


Poem on Ego in Hindi. Ahankar Par Kavita, Pride Shayari, Narcissism Poetry, Aham Quotes, Ahankaar Sms, Attitude Messages, Arrogance Status, Rhymes, Sayings, Lines. अहंकार पर कविता, दोहे, अहम शायरी.
 
अंधा
 
तारीफें बरस रहीं थीं 
"वाह! बहुत ख़ूब!
उम्दा! बेहतरीन! शानदार!"
 
वो मुस्कुरा रहा था
हर एक लफ़्ज़ के साथ,
और झुकता जा रहा था.
लेकिन; अंदर ही अंदर
तन रहा था...
ज़्यादा, और ज़्यादा.
 
बड़ा होता जा रहा था
भीतर ही भीतर.
होते होते; इतना बड़ा हो गया
कि उसकी आँखों के
नीचे अब कुछ नहीं दिखता
सिवाय बादल,
और धुँए के.
अंधा हो गया है
वह!

By Aman Tripathi

How is this hindi poem about ego?

Poem on Death in Hindi

 
Poem on Death in Hindi. Funeral Poetry, Passing Away Quotes, Dying, Decease Lines, Die Sms, Maut par Kavita, Mrityu Shayari, Loss of Loved One Status, Departure Rhymes, Dead. मृत्यु कविता, मौत शायरी.

बोध
 
वो जो मर गया
वो, जो अजीब इंसान था बहुत
बड़ी जल्दी मर गया.
 
ज्यादा खाता पीता नहीं था
बाजार का तो कुछ भी नहीं
खाना भी खाता
तो पसीने आने लगते
उससे कहना पड़ता
कि ए फलाने! हई ले आवऽ बजारे से.
 
वो
कभी बफौरी कहता
बनाने के लिये
लेकिन फिर मना कर देता
अब उसके प्रति की गयीं
गलतियाँ
छोटी ही सही
बड़ी लगती हैं.
 
जैसे दही में नमक
ज्यादा डाल देने पर
वो झल्लाया था
कि ‘अब त ई जहर हो गईल.’
 
अब सोचता हूँ,
तो लगता है
कि मेरा भी कुछ योगदान था
उसके मरने में.

By Aman Tripathi


Saturday, September 5, 2015

Poem on Happiness in Hindi

 
Poem on Happiness in Hindi for Kids. Happy Shayari, Khushi par Kavita, Sukh Sms, Khushiyan Short Poetry, Joy Quotes, Messages, Thoughts, Rhymes, Slogans, Status, Lines, Sayings. सुख, ख़ुशी पर कविता.
 
बहाना
 
फुहारें हों
या
चिड़िया
चश्में हों
या
ज्योमेट्री बॉक्स
पतंगें
गेंदें हों
या
रंग-बिरंगे धागे.
बच्चे ढूँढ ही लेते हैं
बहाना
ख़ुश होने का.

By Aman Tripathi

Thank you ‘Aman’ for sharing such a sweet poem about happiness. 

Friday, September 4, 2015

Dr Sarvepalli Radhakrishnan Biography in Hindi


Dr Sarvepalli Radhakrishnan Biography in Hindi. Jeevan Parichay, About Life History, 5th September Teachers Day Information, Essay, Autobiography, Paragraph, Jivani, Story. डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन : जीवन परिचय

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन उन महान राजनेताओं में से एक थे जिन्हें अपनी संस्कृति एवं कला से लगाव होता है। वे एक आस्थावान हिन्दू थे, साथ ही अन्य समस्त धर्मावलम्बियों के प्रति भी गहरा आदर भाव रखते थे। जो लोग उनसे वैचारिक मतभेद रखते थे, वह उनकी बात भी बड़े सम्मान और धैर्य से सुनते थे।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की दर्शनशास्त्र की अगाध विद्वता और अंग्रेजी भाषा पर बेमिसाल अधिकार को देखकर सभी चकित रह जाते थे। दर्शनशास्त्र भले ही शुष्क विषय है और कम लोग ही उसे समझ पाते हैं, परन्तु उनका विषय को उपस्थित करने का ढंग, प्रभावपूर्ण भाषा और उच्चारण से यही प्रतीत होता था कि इस व्यक्ति ने न जाने कितने वर्ष इंगलैंड के आक्सफोर्ड अथवा कैम्ब्रिज विश्वविघालय में शिक्षा पायी होगी। और एक दिन उनकी विद्वत्ता पर मुग्ध छात्रों ने पूछ ही लिया,

‘सर, आपने कौन-सी विदेशी परीक्षा पास की है, और कौन-सी डिग्री प्राप्त की है?’

प्रो. राधाकृष्णन् ने अपनी शैली में ही उत्तर दिया, ‘मैं इंगलैंड पढ़ने नहीं गया, हां पढ़ाने अवश्य जाऊंगा।’

उनका मुख-मण्डल आत्मविश्वास की अनोखी आभा से दमदमा रहा था और छात्र अपने प्रोफेसर की उक्ति से खुशी में उन्मत हो तालियां बजा रहे थे।

इतना कुछ पढ़ने के पश्चात डॉ. राधाकृष्णन के व्यक्तित्व के संबंध में उत्सुकता का जाग्रत होना स्वाभाविक है। इसका शमन नीचे किया जा रहा है :-
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म तिरूतनी में 5 सितम्बर, 1888 को, एक गरीब बाह्मण-परिवार में हुआ था। दक्षिणात्यों के लिए यह स्थान बहुत पहले से एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल रहा है जो आज के चैन्नई शहर से 64 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है।

डॉ. राधाकृष्णन के नाम के पूर्व सर्वपल्ली लगने का एक महत्वपूर्ण कारण है। 1852-55 के आसपास इनके पूर्वज सर्वपल्ली ग्राम से तिरूतनी तीर्थस्थल में आ बसे थे। उन लोगों ने अपने नामों के पूर्व अपनी जन्मभूमि का नाम संयुक्त रखना उचित समझा, जैसा कि दक्षिण में अक्सर होता है। इनके पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी और माता का नाम सीताम्मा था। डॉ. राधाकृष्णन पांच भाई और एक बहन थे। भाईयों में इनका स्थान द्वितीय था।

गरीब ब्राह्मण-परिवार के होने के कारण तथा अपेक्षाकृत भाई-बहनों की बड़ी संख्या के फलस्वरूप् डॉ. राधाकृष्णन की आरम्भिक शिक्षा-दीक्षा तिरूतनी और देश के सर्वश्रेष्ठ तीर्थस्थल तिरूमाला अथवा तिरूपति में हुई।

राधाकृष्णन आरम्भ से ही मेघावी थे। साथ ही परिश्रमी भी। तिरूतनी में अपने आरम्भिक जीवन के आठ वर्ष व्यतीत करने के पश्चात् ही वे विद्याध्ययन के लिए तिरूपति भेजे गए। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर ही आर्थिक दृष्टि से असहाय पिता ने पारम्परिक धार्मिक शिक्षा देने के बदले उन्हें अंग्रेजी माध्यम से शिक्षित करने का निर्णय लिया।
राधाकृष्णन ने ‘लूथरन मिशन स्कूल’ तिरूपति में पांच वर्ष, वेल्लोर के एक प्रसिद्ध कॉलेज में पांच वर्ष तथा मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पांच वर्ष तक अध्ययन किया।

बालक राधाकृष्णन के इस अध्ययन में केवल पिता का ही आर्थिक सहयोग नहीं था, राधाकृष्णन ने मात्र चौदह वर्ष की अवस्था अर्थात् 1902 में मद्रास विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी में उच्च अंक प्राप्त कर मैट्रिकुलेशन की परीक्षा उर्त्तीण की थी।

स्कूली और महाविद्यालय की पुस्तकों के अतिरिक्त इन्होंने स्वाध्याय के द्वारा भी अपने ज्ञान में अभिवृद्धि की और उसी के बल पर राष्ट्र और विश्व के विशिष्टम विद्वानों में इनकी गिनती हुई। दर्शनशास्त्र में एम. ए. करने के फलस्वरूप इन्हें वेदों, उपनिषदों और गीता में पर्याप्त रूची थी, जिनका उन्होंने गहराई से अध्ययन किया। दूसरे धर्मों के प्रति भी इनकी रूचि थी। ईसाइयों का धर्मग्रन्थ बाईबल पूर्णतया कंठस्थ था।

डॉ. राधाकृष्णन की गांधीजी से पहली मुलकात 1938 में सेवाग्राम में हुई। वैसे वे इससे पहले ही गांधी जी के संपर्क में आ चुके थे। गांधीजी जब दक्षिण अफ्रीका से लौटे थे, तब मद्रास में श्री नटेसन के घर पर मुलाकात और दिलचस्प वार्तालाप भी हो चुका था। गांधी जी का उन दिनों मूंगफली पर जोर था और वह लोगों को दूध पीने से मना किया करते थे। वह कहा करते थे कि दूध गाय के मांस का ही अतिरक्ति उत्पादन है। यह बात युवा प्रोफेसर से भी हुई, राधाकृष्णन ने उत्तर दिया कि तब तो हमें मां का दूध भी नहीं पीना चाहिए। गांधी जी को पता था कि वह उन दिनों ‘लाजिक’ के प्रोफेसर थे। महात्मा गांधी के प्रति डॉ. राधाकृष्णन् की अगाध श्रद्धा थी। उन्होंने एक जगह उन्हें ‘मानव जाति का अमर स्वर’ बताया था और उन्हें मानवीय प्रयत्नों का सर्वश्रेष्ठ प्रतीक भी घोषित किया था।

डॉ. राधाकृष्णन को प्रायः सभी ने ‘शिक्षक’ कहा है। अतः उनका जन्म दिन 5 सितम्बर आज भी शिक्षक-दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है कि उन्होंने जीवन के चालीस वर्ष शिक्षा के क्षेत्र में बिताये, परन्तु वस्तुतः वह इतने प्रभावशाली व्यक्ति रहे कि उन्होंने शिक्षा, लेखन, व्यवस्था, राजनीति और शासन सभी क्षेत्रों में महान् छाप छोड़ी। यह ठीक है कि मूलरूप उनका शिक्षक का ही रहा हो, परन्तु लेखन और दर्शन शास्त्र के व्याख्याता के रूप को शिक्षक से पृथक नहीं किया जा सकता। वह शिक्षक से लेकर शिक्षण संस्थाओं के मूर्धन्य व्यवस्थापक-कुलपति तक रहे और सभी प्रकार के कार्यों को अपनी प्रतिभा से चमत्कृत करते रहे। एक प्रोफेसर के रूप में जहां उनका अपने विषय पर पूरा अधिकार था, वहां उनमें उसे प्रभावशाली भाषा में उपस्थित करने की भी महान दक्षता थी। उसके लिए उन्होंने कितना तप किया होगा, इसे कौन भुलाने को तैयार होगा। वह 12-12, 18-18 घंटे अध्ययन करते रहते थे। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने जो कार्य किया वह भुलाया नहीं जा सकता।

ऑक्सफोर्ड विश्वविघालय में डॉ. साहब ने काफी समय तक अध्यापन कार्य किया था। इंग्लैंड के कई चर्चों में भी उन्होंने भाषण दिये थे। एक बार पोप ने डॉ. साहब को सम्मानित किया था। उनके भाषणों को सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध रह जाते थे। वस्तुतः उनके प्रवचनों की वास्तविक महत्ता उनके अन्तर में निवास करती थी, जिसकी व्याख्या नहीं की जा सकती। उनकी यही आध्यात्मिक शक्ति सबको प्रभावित करती थी।

डॉ. राधाकृष्णन बड़े हाजिर जवाब थे। विश्व में उन्हें हिन्दुत्व के परम विद्वान के रूप् में जाना जाता था। एक बार वे इंगलैंड गये, तब देश अंग्रेजों के आधीन था, बड़ी संख्या में लोग उनका भाषण सुनने आये थे। भोजन के दौरान एक अंग्रेज ने उनसे पूछा, ‘क्या हिन्दू नाम का कोई समाज है? कोई संस्कृति है? तुम कितने बिखरे हुए हो, तुम्हारे रंग एक जैसा नहीं है, कोई गोरा, कोई काला, कोई धोती पहनता है, कोई लुंगी, कोई कुर्ता तो कोई कमीज। देखो, हम अंग्रेज सब एक जैसे हैं, सब गोरे लाल-लाल।’ इस पर डॉ. राधाकृष्णन ने तपाक से जवाब दिया, ‘घोड़े सब अलग-अलग रंग-रूप के होते हैं, पर गधे सब एक जैसे होते हैं, अलग-अलग रंग और विविधता विकास के लक्षण हैं।’

सन् 1949 में डॉ. साहब को राजदूत बनाकर मास्को भेजा गया। इससे पहले भारत और महात्मा गांधी के सम्बन्ध में रूस की राय अच्छी नहीं थी। परन्तु डॉ. साहब ने वहां जाते ही अपनी प्रतिभा का सिक्का जमा दिया। एक घटना अत्यनत महत्वपूर्ण रही, जब डॉ. साहब प्रथम बार रूस के लौह पुरूष जैकब स्टालिन से मुलाकात करने पहुंचे, बातचीत के दौरान डॉ. साहब ने कहा, ‘हमारे देश में एक महान सम्राट हुआ है, उसने भीषण युद्ध और विजय के पश्चात अपनी तलवार तोड़ दी थी और अहिंसा का दामन थाम लिया था। आपने शक्ति अर्जित करने के लिए हिंसा का तरीका अपनाया है। किसी को क्या मालुम, हमारे उस महान सम्राट की वह घटना आपके यहां दोहरा दी जाये।’ स्टालिन ने मुस्कुराते हुए कहा ‘हां वास्तव में कभी-कभी ऐसे चमत्कार हो जाते हैं। मैं भी पांच वर्षों तक ब्रह्मज्ञान के शिक्षालय में रह चुका हूं।’

सन् 1952 में डॉ. राधाकृष्णन को भारत का उपराष्ट्रपति चुना गया। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय का कुलपति, साहित्य अकादमी का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। ये दायित्व भी उन्होंने बहुत कुशलता से निभाये।

डॉ. राधाकृष्णन ने 87 वर्ष की आयु प्राप्त की। वे सादा खाना खाने वाले अल्पभाषी व्यक्ति थे। जीवन के अंतिम वर्षों में सामान्य लोग भी इनसे सहजता से मिल लेते थे। एक ऐेसे ही भेंटकर्ता ने उनसे प्रश्न किया - ‘अपने दीर्घ जीवन का राज बताने की कृपा करेंगे?’

डॉ. राधाकृष्णन ने हल्की मुस्कराहट के साथ कहा- ‘कम खाओ।’

दुर्भाग्यवश डॉ. राधाकृष्णन के अंन्तिम कुछेक वर्ष बुरे बीते। कभी का अप्रतिम स्मरण-शक्ति वाला व्यक्ति जो अंग्रेजी और संस्कृत के उद्धरण देते नहीं थकता था, अपनी स्मरण-शक्ति पूर्णतया खो चुका था। उनकी यह दशा देखकर बहुत लोग व्यथित हुए, किन्तु नियति के सामने किसकी चलती है?

अन्ततः भारत का यह महान सपूत 1975 के 17 अप्रैल की प्रातः बेला में अपनी प्राणवायु विसर्जित कर बैठा।

सम्पूर्ण देश की जनता और अखिल विश्व के विद्वान शोक-सन्तप्त हो उठे।

भारत के इतिहास में कोई भी राष्ट्रपति अपनी राजनैतिक कुशलता, चातुर्य एवं अपनी बुद्धिमता के लिए याद किया जाएगा- किन्तु एक विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक एवं बहुआयामी विद्वता के लिए किसी को स्मरण किया जाएगा तो वह होंगे भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन।

By Mukesh Pandit
MotivationalStoriesinHindi.in

Thank you Mukesh Ji for sharing such valuable information about Dr. Sarvepalli Radhakrishnan on the occasion of teachers day.