Saturday, November 21, 2015

Vinoba Bhave Quotes in Hindi

Acharya Vinoba Bhave Quotes in Hindi, Quotations, Slogans, Message, Sayings, Suvichar, Vichar, Teachings, Statements, Shiksha, Updesh. आचार्य विनोबा भावे के विचार, सुविचार, शिक्षाएं, उपदेश.
 
Vinoba Bhave Quotes

  • तगड़े और स्वस्थ व्यक्ति को भीख देना, दान करना अन्याय है. कर्महीन मनुष्य भिक्षा के दान का अधिकारी नहीं हो सकता. 
  • संघर्ष और उथल पुथल के बिना जीवन बिल्कुल नीरस बन कर रह जाता है. इसलिए जीवन में आने वाली विषमताओं को सह लेना ही समझदारी है.
  • ज्ञानी वह है जो वर्तमान को ठीक प्रकार समझे और परिस्थति के अनुसार आचरण करे.
  • कलियुग में रहना है या सतयुग में, यह तुम स्वयं चुनो, तुम्हारा युग तुम्हारे पास है.
  • निष्काम कर्मयोग तभी सिद्ध होता है जब हमारे बाह्य कर्म के साथ अन्दर से चित्त शुद्धि रुपी कर्म का भी संयोग होता है.
  • भविष्य में स्त्रियों के हाथ में समाज का अंकुश आने वाला है. उसके लिए स्त्रियों को तैयार होना पड़ेगा. स्त्रियों का उद्धार तभी होगा, जब स्त्रियाँ जागेंगी और स्त्रियों में शंकराचार्य जैसी कोई निष्ठावान स्त्री होगी.
  • खुदा से डरने वाले को और किसी का क्या डर.
  • महान विचार ही कार्य रूप में परिणित होकर महान कार्य बनते हैं.
  • यदि किसी को भी भूख-प्यास नहीं लगती तो अतिथि सत्कार का अवसर कैसे मिलता.
  • अभिमान कई तरह के होते हैं, पर मुझे अभिमान नहीं है, ऐसा भास होने जैसा भयानक अभिमान दूसरा नहीं है.
  • बुद्धि का पहला लक्षण है काम आरम्भ न करो और अगर शुरू कर दिया है तो उसे पूरा करके ही छोड़ो.
  • जिस राष्ट्र में चरित्रशीलता नहीं है, उसमें कोई योजना काम नहीं कर सकती.
  • यदि आप किसी चीज का सपना देखने का साहस कर सकते हैं तो उसे प्राप्त भी कर सकते हैं.
  • जब हम किसी नयी परियोजना पर विचार करते हैं तो हम बड़े गौर से उसका अध्ययन करते हैं. केवल सतह मात्र का नहीं, बल्कि उसके हर एक पहलू का.
  • ऐसा व्यक्ति जो एक घंटे का समय बर्बाद करता है, उसने जीवन के मूल्य को समझा ही नहीं है.
  • हम आगे बढ़ते हैं, नए रास्ते बनाते हैं और नयी परियोजनाएं बनाते हैं क्योंकि हम जिज्ञासु हैं और जिज्ञासा हमें नयी राहों की ओर ले जाती है.
  • प्रेरणा कार्य आरम्भ करने में सहायता करती है और आदत कार्य को जारी रखने में सहायता करती है.
  • अनुशासन, लक्ष्यों और उपलब्धि के बीच का सेतु है. यकीन मानिए ज्ञान की अपेक्षा अज्ञान ज्यादा आत्मविश्वास पैदा करता है.
  • औपचारिक शिक्षा आपको जीविकोपार्जन के लिए उपयुक्त अवसर देती है, जबकि अनुभव आपका भाग्य बनाते हैं.
  • जो सब की प्रशंसा करता है वह किसी की प्रशंसा नहीं करता.
  • परस्पर आदान-प्रदान के बिना समाज में जीवन का निर्वाह संभव नहीं है. 
  • जब तक कष्ट सहने की तैयारी नहीं होती तब तक लाभ दिखाई नहीं देता. लाभ की इमारत कष्ट की धूप में ही बनती है.
  • गरीब वह नहीं जिसके पास कम है, बल्कि धनवान होते हुए भी जिसकी इच्छा कम नहीं हुई है, वह सबसे अधिक गरीब है.
  • मौन और एकांत आत्मा के सर्वोत्तम मित्र है. 
  • द्वेष को हम द्वेष से नहीं मिटा सकते. प्रेम की शक्ति ही उसे मिटा सकती है.
  • प्रतिभा का अर्थ है बुद्धि में नयी कोंपलें फूटते रहना. नयी कल्पना, नया उत्साह, नयी खोज और नयी स्फूर्ति प्रतिभा के लक्षण हैं. 
  • मनुष्य जितना ज्ञान में घुल गया हो उतना ही कर्म के रंग में रंग जाता है
 
विनोबा भावे / Vinoba Bhave

How are these quotes of Vinoba Bhave?

Character Quotes in Hindi

Character Quotes in Hindi. Charitra Bal Nirman, Attitude Dialogues, Habits Status, Conduct Quotations, Nature Sayings, Trait Lines, Moral Characteristics Slogans. चरित्र बल, प्रकृति, स्वभाव निर्माण.
 
Character Quotes

  • मनुष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा नहीं वरन चरित्र है और यही उसका सबसे बड़ा रक्षक है. ~ अज्ञात / Unknown 
  • यदि नेता चरित्रवान नहीं है तो अनुयायियों में उसके प्रति श्रद्धा टिकना संभव नहीं. पूर्णतया शुद्ध चरित्र के आधार पर ही विश्वास टिक सकता है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • चरित्र बनाये रखना आसान है, लेकिन उसके भ्रष्ट हो जाने के बाद उसे सुधारना कठिन है. ~ थॉमस पेन / Thomas Paine 
  • परिस्थितियां मानव के नियंत्रण से बाहर हैं लेकिन हमारा आचरण हमारे नियंत्रण में हैं. ~ बेंजामिन डिजायरली / Benjamin Disraeli 
  • नीति परायण बनो, साहसी बनो, धुन के पक्के बनो. तुम्हारे नैतिक चरित्र में कहीं एक धब्बा तक न हो, मृत्यु से भी मुठभेड़ लेने की हिम्मत रखो. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • हमारा व्यक्तित्व जैसा होगा, वैसा ही दुनिया का नक्शा हम बनायेंगे. इसे चारित्र्य कहते हैं. ~ दादा धर्माधिकारी / Dada Dharmadhikari 
  • याद रखो कि न धन का मूल्य है, न नाम का, न यश का, न विद्या का, केवल चरित्र ही कठिनाई रुपी पत्थर की दीवारों में छेद कर सकता है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • इंसान का मन अक्सर चेहरे पर झलकने लगता है. बस पढ़ने का हुनर चाहिए. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • सम्मान की बजाय अपने चरित्र के प्रति अधिक गंभीर रहें. चरित्र ही यह बताता है कि आप वास्तव में क्या हैं. ~ जॉन वुडन / John Wooden
  • बिना आचरण के कोरा बौद्धिक ज्ञान वैसा ही है जैसे खुशबूदार लेप किया हुआ शव. ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi
  • आचरण बिना और अनुभव बिना केवल श्रवण से आत्मज्ञान की माधुरी का पता कैसे चले? ~ संत ज्ञानेश्वर / Saint Gyaneshwar
  • जिस राष्ट्र में चरित्रशीलता नहीं है उसमें कोई योजना काम नहीं कर सकती. ~ विनोबा भावे / Vinoba Bhave
 
How are these quotes about character?

Tuesday, November 17, 2015

Childhood Memories Essay in Hindi

Childhood Days Memories Essay in Hindi. Love Letter Memoir, Bachpan ki Yaadein, Prem Patra, My School Life Teasing, Time Pass Affairs, Molestation Paragraph. बचपन की यादें, प्रेम पत्र संस्मरण, छेड़छाड़.

काश! वह प्रेम पत्र रहा होता

कागज पर लिखे प्रेम पत्र का अपना एक अलग ही आकर्षण है. कितना रोमांचक समय होगा वह जब एक दूसरे को प्यार करने वाले डर-डर के छुप-छुप के एक दूसरे को लैटर लिखा करते होंगे. फूल, गिफ्ट्स, चॉकलेट्स, मेसेजेज, ईमेल्स, फोन, व्हाट्स एप और डेटिंग के इस दौर में वह खतों वाला प्यार जाने किसे नसीब होता होगा. 

हमेशा स्कूल/डिस्ट्रिक्ट टॉप करने के लिए किताबों में खोयी रहने वाली, अव्वल दर्जे की अंतर्मुखी और सिंसियर यह लड़की, जिसे हमेशा बस एक-दो की ही कंपनी चाहिए होती थी, जिसे ग्रुप्स में रहना ज्यादा पसंद नहीं था...क्या किसी ने कभी मुझे भी वो कागज़ वाला प्रेम पत्र लिखा होगा यही याद करते-करते बचपन के समय में चली गयी. 

तब पाँचवी क्लास में पढ़ती थी. इनोसेंट का टैग तो आज तक नहीं उतर पाया है तो उस वक्त क्या रही होऊँगी, पता नहीं. पर हाँ, सही शब्द, गलत शब्द इतना तो पहचानती थी. भावनाओं को तो नवजात शिशु भी पहचान लेता है तो फिर मैं तो 10-11 साल की लड़की थी. कहते हैं इंटेलीजेंट और सिंसियर लड़कियों से लड़के थोड़ा डरते हैं. और खुद यह लड़की भी अपने में ही खोयी रहने वाली किसी की ओर नजर उठाकर भी नहीं देखने वाली, जिसे यह भी न मालूम होता था कि क्लास में पढ़ता कौन-कौन है, पर हाँ तब क्लास के कुछ लड़के होमवर्क के लिए कॉपी मांगने के लिए जरुर अक्सर घर आते थे. पाँचवी क्लास तक आते-आते लड़के और लड़कियों के बैठने की जगह अलग-अलग हो गयी थी. इसलिए शायद मन ने भी लड़के और लड़की के भेद को कुछ-कुछ स्वीकार कर लिया होगा. 

एक दिन प्रेयर के बाद क्लास में आकर बैठी थी. कॉपी-किताब निकालने के लिए बैग खोला तो देखा उसमें कागज का बॉल बनाकर डाला हुआ था. मैंने और मेरे पास बैठी मेरी सहेली दोनों ने उसे देखा. फिर मैंने उसे खोला तो उसमें एक लड़के ने अपने नाम के साथ कुछ मेसेज लिखा था. एक पार्क में मिलने के लिए बुलाया था. और जिन शब्दों का प्रयोग करते हुए यह लिखा था वह बिल्कुल अच्छे नहीं थे. सहेली तो हंसने लगी थी और मैंने झट से उसे वापस फोल्ड करके बैग में रख दिया. घर आकर चुपके से छत पर गयी और रोते-रोते उस लैटर के जितने बारीक टुकड़े कर सकती थी किये और उसे एक बारिश का पानी जाने वाले पाइप में डाल दिया. अब तो समझती हूँ कि ये गलत किया था, पर तब शायद मन में जाने क्या डर रहा हो.

कुछ दिन बाद वापस वैसा ही लैटर घर पे बैग खोलते वक्त मिला. भैया पास में ही बैठा था. मैंने फिर रोने लगी और रोते-रोते वह ख़त भैया को पकड़ा दिया. घर पे सबको पता चला. पापा ने प्रिंसिपल मैम से बात की. उस नाम के दो लड़के पढ़ते थे स्कूल में. एक सीनियर और एक जूनियर. प्रिसिपल मैम ने लैटर माँगा और कहा हैण्डराइटिंग मिलाकर उसे समझा देंगी और डांट देंगी. खैर! बात आई गयी हो गयी. लड़के का पता चला या नहीं यह सब कुछ पता नहीं. पर हाँ उसके बाद कोई ख़त नहीं आया था. वे दोनों लड़के रास्ते में भी एक-दो बार नजर आये थे. पर कभी पता नहीं चल पाया कि कौन था. इसके बाद स्कूल भी बदल गयी. आज कुछ बच्चे अपने स्कूल में चलने वाले टाइम पास और रोज-रोज बदलने वाले अफेयर्स के बारे में बता रहे थे. अचानक ही वह घटना याद आ गयी. जाने क्यों मन ने कहा कि काश! वह प्रेम पत्र रहा होता.


By Monika Jain ‘पंछी’

Interesting Facts about Books in Hindi

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Interesting Facts about Books

  • सन् 1939 में अर्नेस्ट विंसेट द्वारा लिखी गयी किताब गेड्सबाई में पांच हजार शब्द थे. इस किताब में एक बार भी ई (e) वर्ड का प्रयोग नहीं किया गया. 
  • एक लाख, तीस हजार डॉलर मूल्य की मिचेलेंजेलो-ला दोता दुनिया की सबसे महंगी किताब है. इसे मार्बल से डिजाइन किया गया है और इसका वजन 62 पौंड है. 
  • दुनिया में बेस्ट सेलिंग बुक्स की लिस्ट में सबसे ऊपर ’द बाइबिल’ है. इसके बाद सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों में है : क्वेश्चन फ्रॉम चेयरमैन माओ जेदोंग, कुरान, झिहुआं जिदिऑन, द बुक ऑफ़ मॉरमॉन. 
  • बुकवर्म दो तरह के होते हैं. एक जो किताबें पढ़ने के बहुत ज्यादा शौक़ीन होते हैं जिन्हें किताबी कीड़ा भी कहा जाता है और दूसरे वे कीड़े जिन्हें सच में किताबों के पन्ने खाना बहुत पसंद होता है. 
  • पुस्तकों की संख्या और शेल्फ के आधार पर वाशिंगटन डीसी, यूएसए में स्थित ’द लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस’ दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है. यहाँ बुक शेल्फ के दायरे को कवर करने के लिए वाहनों की सहायता लेनी पड़ती है. बिना रुके इस पूरे क्षेत्र को 8 घंटे में कवर किया जा सकता है. 
  • दुनिया का सबसे बड़ा बुक स्टोर बारनस एंड नोबेल बुक स्टोर है जो न्यूयार्क में स्थित है और 21 किमी क्षेत्र में फैला है.  
  • जनसँख्या बढ़ने से भी ज्यादा तेज गति से दुनिया में किताबें प्रकाशित होती हैं. जनसँख्या जहाँ 1.6 % प्रतिवर्ष की रफ़्तार से बढ़ती है वहीँ किताबें 2.8 % प्रतिवर्ष की रफ्तार से.
How are these facts about books? 
 
 

Sunday, November 15, 2015

Suji Upma Recipe in Hindi

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उपमा 

Suji Upma Recipe in Hindi


सामग्री :

सूजी : 2 कप
घी : ½ कप  
हरी मिर्च बारीक कटी हुई : 1 या सुखी पूरी लाल मिर्च के टुकड़े
8-10 काजू के टुकड़े या मूंगफली के दाने
पानी : 8 कप
राई, जीरा, सौंफ, नमक आदि.

विधि :

एक गैस पर पतीली में पानी लेकर इसे गर्म करने के लिए रख दें. दुसरे गैस पर एक कड़ाई में सूजी लें और इसे धीमी आंच पर 10 मिनट तक भूने. अब इसे एक बर्तन में खाली कर दें. कड़ाई को कपड़े से पौंछकर इसमें घी डालें. घी के गर्म होने पर इसमें काजू या मूंगफली के टुकड़े डालें. इसे 1 मिनट चलायें. अब इसमें राई, जीरा, सौंफ के दाने डालकर उनके तड़कने पर हरी मिर्च या सूखी पूरी लाल मिर्च के टुकड़े डाल दें. मिर्च को 1-2 मिनट पकाने के बाद इसमें भूनी हुई सूजी मिला दें और 1 मिनट चलायें. अब इसमें स्वादानुसार नमक भी मिला दें. अब इसमें दूसरी गैस पर गर्म किया हुआ पानी मिला दें और सूजी के गाढ़ी होने तक हिलाते रहें. अब गैस बंद कर गर्मागर्म सूजी को प्लेट में आम के अचार के साथ परोसें.
 
By Monika Jain ‘पंछी’

How is this recipe of suji upma? 
 
 

Roasted Poha Namkeen Recipe in Hindi

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रोस्टेड पोहा नमकीन

Roasted Poha Namkeen Recipe in Hindi


सामग्री :

पोहा : 4 कप

तेल या देसी घी : 4 टी स्पून

मूंगफली के दाने : 1 कप

काली मिर्च पाउडर, पुदीना पाउडर, सेंधा नमक, पिसी हुई शक्कर, सादा नमक : स्वादानुसार

 
विधि :

सबसे पहले कड़ाई में तेल या घी लें. इसके गर्म होने पर इसमें पोहा डाल दें. अब तेज आंच पर इसे लगातार 2 मिनट तक चलायें. इसके बाद आंच धीमी करके फिर 3-4 मिनट तक हिलाते रहें. पोहे थोड़े फूल जायेंगे और अलग-अलग हो जायेंगे. अब इन्हें एक चौड़े बर्तन में ले लें. अब कड़ाई में मूंगफली के दाने डालकर उन्हें भूने. जब दाने भुन जाएँ तो उन्हें एक अलग प्लेट में ले लें. ठंडा हो जाने पर हाथ से मसलकर इनके छिलके अलग कर दें, और छिले हुए दानों को बीच से दो-दो टुकड़े कर लें. अब इन्हें पोहे में मिला दें. अब इसमें काली मिर्च पाउडर, पुदीना, सेंधा और सादा नमक मिला दें. लीजिये तैयार है कम ऑइल में बनी पोहे की रोस्टेड नमकीन. अगर आप चाहे तो इसमें रोस्टेड चना दाल और रोस्टेड परमल भी मिला सकते हैं.
 
By Monika Jain ‘पंछी

How is this recipe of roasted poha namkeen?


Monday, November 9, 2015

Essay on Social Service in Hindi

Essay on Social Service in Hindi. Samaj Seva par Nibandh. Welfare Work Speech, Workers, Helping Services Write Up, Madad, Sahayta, Responsibility Article, Help Paragraph. समाज सेवा पर निबंध, सहायता.
 
सेवा नहीं है वह जिससे पाना हो मेवा

कोई भी कार्य सौ फीसदी सही या गलत नहीं हो सकता. क्योंकि इस पृथ्वी पर हर प्राणी का जीवन कुछ इस तरह से है कि बिना किसी दूसरे के शोषण और हिंसा के उसका अस्तित्व बच ही नहीं सकता. जब हम एक बिल्ली की जान बचा रहे होते हैं तब भी हम अनजाने में ही सही हजारों चूहों की जान को ख़तरे में डाल रहे होते हैं. इसके साथ ही हमारा हर कार्य चलना-उठना, बैठना, खाना-पीना, यहाँ तक कि सांस लेना भी असंख्य जीवों की मृत्यु पर ही संभव है. यह बात हर कार्य पर लागू है फिर चाहे वह सेवा ही क्यों न हो. ऐसे में जो चीज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है वह है कार्य करने के पीछे के भाव. इसी के चलते कुछ कार्य बंधन बन जाते हैं तो कुछ मुक्ति.

अक्सर लोगों को लगता है कि अनाथाश्रम में जाकर, वृद्धाश्रम में जाकर, गरीब बस्तियों में जाकर या कुछ विशेष लाइमलाइट में आने वाला कार्य करके ही सेवा हो सकती है. पर सेवा का यह कांसेप्ट जो कि पूर्णत: ईसाई धर्म से आयातित है भविष्योन्मुखी है. जब तक सेवा में कुछ पाने का प्रयोजन छिपा हुआ है, कुछ विशिष्ट महसूस करने की भावना का समावेश है तब तक वस्तुत: वह सेवा है नहीं. वह भी शोषण और हिंसा का विस्तार मात्र ही है. क्योंकि एक ओर भविष्य में धन, सुख, वैभव, यश, प्रसिद्धि, स्वर्ग या किसी भी प्रतिफल की चाह लिए कोई सेवा कार्य करता है तो वह भी किसी के दुःख के व्यवसायीकरण पर आधारित प्रतिफल ही हुए. दूसरी ओर पुण्य जो भविष्योन्मुखी होता है वह फिर नए जन्म और कर्मों का बंधन बनता है...तो वस्तुत: वह हिंसा का विस्तार ही है.

ऐसे में एक आध्यात्मिक यात्री के लिए सेवा हेतु अलग से किसी कूच या अभियान की जरूरत नहीं होती. उसका तो पूरा जीवन ही आत्म सुधार की दिशा में होता है. अपने विस्तार, शोषण और हिंसा को कम करने से बेहतर कोई इस दुनिया के लिए और स्वयं के लिए कुछ कर भी नहीं सकता. इसके अलावा अपनी जीवन यात्रा में चलते हुए व्यक्ति को हजारों ऐसे अवसर मिलते हैं जहाँ वह सेवा का उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है. पर वह सेवा निष्प्रयोज्य होनी चाहिए. वह भविष्योन्मुखी नहीं बल्कि अपने ही किसी पुराने पाप कर्म की निर्जरा के रूप में या प्रायश्चित्त के रूप में अतीतोन्मुखी होनी चाहिए. और उसे वहीँ भूलकर आगे बढ़ जाना चाहिए.

यह तो बात हुई आध्यात्मिक यात्री की. लेकिन हम जैसे सामान्य मनुष्य जो न तो पूर्ण रूप से आध्यात्म को चुन सकते हैं और ना ही पूरी तरह से भौतिकवादी होना चाहते हैं ऐसे में हमारा रास्ता क्या हो? बेशक जहाँ तक संभव हो हमारी सेवा निष्काम और निष्प्रयोज्य ही होनी चाहिए. अवसर होते हुए भी जितना संभव हो हमें अपना विस्तार कम ही रखना चाहिए. क्योंकि पहले लाखों जीवों का शोषण करके करोड़पति बनना और फिर लाखों रुपये दान करना अपनी ऊर्जा को व्यर्थ गंवाना है. लेकिन हाँ जब उद्देश्य से बचना संभव न हो हो तब वह निश्चित रूप से नैतिक ही हो, अनैतिक नहीं. भविष्योन्मुखी पाप और पुण्य दोनों में से हम किसी को न चुने वह सबसे आदर्श स्थिति होती है, क्योंकि अंतत: दोनों पाप ही बन जाते हैं, अंतर बस परिमाण का होता है. लेकिन जब दोनों में से किसी एक को चुनना अपरिहार्य हो तो बेशक पुण्य का ही चुनाव होना चाहिए. क्योंकि जब तक दुनिया में रहने की चाह है तब तक हर कोई सुख की मात्रा ही अधिक चाहेगा इसलिए दुनिया को बेहतर बनाने के लिए समाज कल्याण और कुरूतियों के उन्मूलन की दिशा में किये गए कार्य भी बेहद जरुरी है. भले ही सब कुछ आँखों का भ्रम ही क्यों न हो.

इसके अतिरिक्त आत्म सुधार के लिए भी निरंतर प्रयत्नशील रहना चाहिए. हम जो भी कार्य करते हैं हम उसके प्रति कितने ईमानदार हैं...एक शिक्षक के रूप में, एक डॉक्टर के रूप में, एक वकील के रूप में हम अपने प्रोफेशन के प्रति कितने ईमानदार हैं...हमसे मदद मांगने वालों की सक्षम होते हुए हम कितनी मदद कर पाते हैं...रिश्वत, चोरी, भ्रस्टाचार, शोषण, अन्याय, झूठ, छल, धोखा, क्रोध इन सब चीजों से हम अपने आपको कितना दूर रख पाते हैं...हम लोगों की आर्थिक, जातीय, धार्मिक किसी भी स्थिति को नजरंदाज करते हुए उनके साथ किस तरह से व्यवहार करते हैं...आत्म सुधार की दिशा में ऐसी हजारों बातें हैं जो अपनाई जा सकती है. क्योंकि वस्तुत: कर्म से पूर्ण रूप से बचना तो संभव है नहीं इसलिए कर्म के पीछे के भाव बहुत महत्वपूर्ण हो जाते हैं.

By Monika Jain ‘पंछी’


Thursday, November 5, 2015

Essay on Children’s Day in Hindi

Essay on Children’s Day in Hindi. 14 November Kids Speech, Jawaharlal Nehru Article, Child Labour Paragraph, Bal Diwas par Nibandh, Bachpan Bachao Bhashan. बाल दिवस पर निबंध, बचपन बचाओ, भाषण, लेख.
 
बचपन कहीं बचा नहीं

Essay on Children’s Day in Hindi

एक औरत ठिठुरती सर्दी में चार-पांच महीने के बच्चे को बिना कोई कपड़ा पहनाये घर-घर भीख मांगने जाती है। एक दूसरी औरत बच्चे को इस हालत में देखकर उसके पहनने के लिए कोई कपड़ा देती है। पहली औरत कपड़ा बच्चे को पहनाकर आगे बढ़ जाती है और दूसरे घर के सामने पहुँचने से पहले बच्चे के शरीर से वह कपड़ा उतार लेती है और भरी सर्दी उसे नंगा कर फिर से भीख मांगने लगती है। पहली औरत बस विस्मय से देखती रह जाती है। जानती हूँ पेट की आग, स्वार्थ और लालच के सामने रिश्ते दम तोड़ देते हैं, बच्चे उस आग से लड़ने के हथियार बन जाते हैं। सवेरा होते ही कूड़ेदान से प्लास्टिक, लोहा आदि बीनने के लिए घर से बाहर निकाल दिए जाते हैं। पर भूख की यह कीमत सच बहुत बड़ी है, बहुत बोझिल। इतनी कि सारी दुनिया के पेट की तृप्ति भी इसे न्यायसंगत नहीं ठहरा सकती।
 
खैर, यह तो बात हुई उन बच्चों की जिनका जन्म ही अभावों में होता है, और अक्सर इन्हीं अभावों में इनका सारा बचपन घुल जाता है। जिसे बचाने के लिए एक व्यक्ति से लेकर पूरे राष्ट्रीय स्तर तक व्यापक प्रयासों और नीतियों की जरुरत है। पर सुख सुविधा से संपन्न या मध्यमवर्गीय घरों के बच्चे? क्या वे अपना बचपन जी पा रहे हैं? क्या उनकी मासूमियत को हम सहेज पा रहे हैं? शायद नहीं।
 
एक पिता अपनी एक छोटी सी बच्ची के साथ बाहर खड़े हैं। शरीर पर खुजली से त्रस्त एक श्वान सड़क पर इधर-उधर दौड़ रहा है। बच्ची ने जिज्ञासावश पूछा, ‘पापा, इस डॉगी को क्या हुआ’ पापा ने उस जानवर की तरफ नाक-भौंह सिकोड़ते हुए कहा, ‘बेटा, यह बहुत गन्दा डॉगी है। इसके पास बिल्कुल नहीं जाना है और यह कभी पास भी आये तो इसे पत्थर मारकर भगा देना।’
 
पापा चाहते तो यह भी कह सकते थे कि यह कोई गन्दा नहीं बस एक बीमार जानवर है। आप छोटे हो इसलिए आपको उसके पास नहीं जाना है। उसे बेवजह पत्थर नहीं मारना है, बस उससे दूर रहना है और उसके लिए मन में दया के भाव ही रखने हैं। लेकिन हम बच्चों को प्रेम नहीं नफरत करना सिखा रहे हैं।
 
बचपन का वह समय जो खिलखिलाता, मुस्कुराता, हर तरह के तनाव से कौसों दूर और मासूमियत व निर्दोषता से परिपूर्ण होना चाहिए, उसे हम नहीं सहेज पा रहे। क्या थमा रहे हैं हम बच्चों को? जो उम्र दादा, नाना, पापा, मामा और चाचा के कन्धों की सवारी करने की है, उस उम्र में हम बच्चों के कन्धों पर दुनिया-जहाँ का बोझ बस्ते के रूप में लाद रहे हैं। क्लास में अव्वल आने या परीक्षा में ज्यादा से ज्यादा अंक लाने का तनाव समय से पहले उन्हें बहुत गंभीर बना देता है। कई बच्चे तो इन अपेक्षाओं के बोझ को झेल भी नहीं पाते और इतनी छोटी उम्र में आत्महत्या कर इस समूची शिक्षा व्यवस्था पर एक प्रश्न चिह्न छोड़कर चले जाते हैं। जो समय उछलने-कूदने, फुदकने, टहलने और किलकारियों का है उस समय को हम कैद कर रहे हैं खचाखच भरी बसों में। और तो और आजकल बच्चों को यह भी पता नहीं होता कि खेलना क्या और कैसे है? गिल्ली-डंडा, छिपा-छिपी, सितोलिया, लंगड़ी टांग, शतरंज, कैरम, खो-खो, रुमाल झपट्टा ये सब गुजरे जमाने के किस्से हैं। आजकल के बच्चों के पास कंप्यूटर और मोबाइल गेम्स के अलावा कोई ऑप्शन नहीं। और फिर हम बड़ों के रेस्ट्रिक्शंस भी बड़े गज़ब के होते हैं। मिट्टी में नहीं खेलना है, उन बच्चों के साथ नहीं खेलना है (क्योंकि उन बच्चों के बड़ों से नहीं बनती), ये नहीं खेलना है, ऐसे नहीं खेलना है और भी न जाने क्या-क्या।
 
बच्चों से प्रेम और मैत्री की भावना भी छीन ली हमने और उसकी जगह थमा दिए प्रतिस्पर्धा, तनाव और कुछ भी कर गुजरने की भावना से भरे टैलेंट हंट शोज और कम्पटीशन्स। जाहिर है इन प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए दिन रात एक कर दिए जाते हैं। हर अभिभावक की उम्मीद कि मेरा बच्चा ही जीते, पर सारे बच्चे तो जीत नहीं सकते। ऐसे में जो हारते हैं, उन्हें एक पल को लगता है जैसे उनकी सारी दुनिया ही खत्म हो गयी हो। इतनी सी उम्र में मायूसी और निराशा कौनसे गुल खिलाएगी, यह जरा सोचने वाली बात है। दूसरी ओर सबकी आँखों का तारा बना, जीत का ताज पहनने वाला बच्चा कितनी महत्वकांक्षाओं, अभिमान और अपेक्षाओं से भर सकता है, यह भी विचारणीय है। आगे चलकर यही भावनाएं तो दुनिया जहाँ के संघर्षों और शोषण की जड़े बनती है। जरा सोचकर देखने वाली बात है। क्या इतनी सी उम्र में जीत-हार से इतना फर्क पड़ना चाहिए? बच्चों में कैसी होड़? लेकिन बड़ों की अपेक्षाओं, प्रतिस्पर्धा और स्वार्थ के इस खेल में कई बच्चों का आत्मविश्वास टूट जाता है और कुछ बच्चे आत्ममुग्धता के शिकार हो जाते हैं। दोनों ही स्थितियां भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं।

इसलिए बहुत जरुरी है हम सब के लिए यह समझना कि अगर बच्चों को हम ऐसी प्रतियोगिताओं का हिस्सा बनाते भी हैं तो बस उनका प्रतिभागी होना ही महत्वपूर्ण होना चाहिए। जीतने और हारने से कई ज्यादा जरुरी है कुछ बेहतर सीखना और अपने डर को खत्म करना। क्योंकि प्रतियोगिताएं होती ही कुछ बेहतर सीखने-सिखाने, आत्मविश्वास को मजबूत करने, नए-नए लोगों से मिलने और नयी-नयी जानकारियां प्राप्त करने के लिए। और जिसने सीख लिया वह तो हारकर भी जीत गया। इसलिए अगर जीत की ख़ुशी हो तो हार भी सहर्ष स्वीकार होनी चाहिए। बच्चे अभी इतने नाजुक हैं कि मैडल्स, सर्टिफिकेट्स और तमगों का बोझ नहीं उठा सकते। उन्हें फूलों सा खिला रहने दिया जाये, इसी में हमारी समझदारी है।
 
टीवी, इन्टरनेट और मोबाइल संस्कृति ने भी बचपन को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अपनी मासूमियत से सभी के दिलों को जीत लेने वाले बाल कलाकारों के जीवन की सच्चाई इतनी मासूम नहीं। इतनी छोटी उम्र का अभिनय, पॉपुलैरिटी और स्टारडम आने वाले भविष्य के उतार-चढ़ावों को स्वीकार करने में बाधा डालता है और बचपन की सारी बेफिक्री को भी लूटकर ले जाता है। वहीं दूसरी ओर टीवी, मोबाइल और इन्टरनेट के उपयोगकर्ता बच्चे प्रकृति की निकटता से दूर इस आभासी मनोरंजन में डूबे हिंसक और फूहड़ कार्टून सीरियल्स और वीडियो गेम्स की लत के कारण गुस्से, तनाव, चिड़चिड़ाहट, अकेलेपन, हिंसा और अवसाद के शिकार हो रहे हैं। जिसकी वजह से उनका मानसिक और शारीरिक विकास बाधित हो रहा है। एकल परिवारों और जनरेशन गैप के चलते अब वो दादी और नानी की कहानियां भी नहीं रही जो बचपन से बच्चों के चरित्र को वह मजबूती देती थी जो आगे चलकर देश का भविष्य बनता था। अब तो मम्मी और पापा दोनों की जॉब में व्यस्तता की वजह से बाकी रह गए हैं बस टीवी पर आने वाले ऊलजुलूल कार्यक्रम, हिंसक और बेहुदे कार्टून केरैक्टर्स, इन्टरनेट पर पोर्न तक पहुँच, एक्शन मूवीज, फूहड़ और अश्लील गाने, मोबाइल के उत्तेजना और निराशा पैदा करने वाले गेम्स जो नफरत, हिंसा, उन्माद और भटकाव से भरे भविष्य का आईना दिखा रहे हैं।
 
बड़ी ही विडम्बना पूर्ण स्थिति है। एक ओर देश का भविष्य कचरे के ढेर में से प्लास्टिक, पोलीथिन और बेचने लायक चीजें चुन रहा है, ताकि एक वक्त की रोटी का जुगाड़ हो सके। होटल, रेस्तरां और घरों में झूठे बर्तनों को रगड़ रहा है ताकि रात को भूखे पेट न सोना पड़े। स्कूल जाते बच्चों को देखकर इस बचपन की आँखें एक पल को चमकती है लेकिन अगले ही पल मालिक की फटकार पर फिर से बर्तनों के ढेर में जा गढ़ती है। दूसरी ओर कन्धों पर जमाने भर का बोझ लादे ऊपर से नीचे तक बंधा हुआ बचपन है जो सड़कों पर दौड़ते-खेलते पिल्लों को देखकर पल भर ठहरकर मुस्कुरा लेना चाहता है लेकिन अगले ही पल खचाखच भरी बसों का हॉर्न उनकी मुस्कुराहट को लील जाता है। एक बचपन वर्तमान की रोटी के इंतजाम के लिए जूझ रहा है और दूसरा बचपन भविष्य की रोटियों के इंतजाम के लिए। और जिस देश का बचपन ही इतना जूझता नजर आये उस देश के भविष्य की दिशा क्या होगी?
 
Monika Jain ‘पंछी’
 
How is this essay about Children’s Day?

Wednesday, November 4, 2015

Milk Dalia Recipe in Hindi

Doodh Dalia Recipe in Hindi. How to Make Sweet Milk Wheat Healthy Instant Breakfast, Gehun ka Meetha Daliya, Indian Baby Fast Food Recipes, For Kids. दूध गेंहू का दलिया बनाने की विधि, नाश्ता रेसिपी.
  
गेहूं और दूध का मीठा दलिया

Milk Dalia Recipe in Hindi
बेचलर्स, अकेले रहने वाले या बहुत ज्यादा व्यस्त लोगों के लिए खाना बनाना एक भारी काम हो जाता है. इसी तरह बच्चों के लिए भी ऐसा क्या बनाया जाए जो हेल्थी होने के साथ-साथ टेस्टी भी हो, यह प्रश्न हर माँ को परेशान करता है. ऐसे में दूध दलिया एक अच्छा ऑप्शन है जो झटपट तैयार तो होता ही है. इसके साथ-साथ हेल्दी और टेस्टी भी है. बच्चे अगर दूध न पीते हों तो भी एक बहुत अच्छा विकल्प है और सुबह के नाश्ते के लिए सबसे बेहतर भी.
 
सामग्री :
 
गेहूं का दलिया : ½ कप 
दूध : 4 कप या 2 गिलास
इलायची पाउडर : दो चुटकी 
कुटी हुई बादाम, अखरोट व काजू : 2 छोटे चम्मच 
किशमिश : 20-30 दाने या इच्छानुसार 
घी : 1 छोटा चम्मच 
शक्कर : स्वादानुसार
 
विधि :
 
एक प्रेशर कुकर लें. इसमें सबसे पहले दलिया, फिर इलायची पाउडर, कुटी हुई बादाम, अखरोट व काजू , किशमिश सब मिला दें. अब इसमें दूध डालकर गैस पर रखे. 1-2 मिनट्स चम्मच से हिलाकर कुकर बंद कर दें. धीमी आंच पर दो सीटी लें. कुकर के खुलने पर इसे एक कटोरी या थाली में परोसे. इसमें इच्छानुसार घी और शक्कर मिलाएं. किशमिश दलिया को मीठा कर देती है इसलिए शक्कर को अवॉयड किया जा सकता है. इसी तरह जिन्हें घी से परहेज हो वे घी को भी अवॉयड कर सकते हैं. लीजिये तैयार है गरमागरम दलिया सुबह के नाश्ते के लिए.
 
नोट : जब बच्चों के लिए यह दलिया बनाये तो ड्राई फ्रूट्स और किशमिश का इस्तेमाल उनकी आयु अनुसार करें. ड्राई फ्रूट्स का पाउडर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

Tuesday, November 3, 2015

Methi Benefits in Hindi

Methi Dana Health Benefits in Hindi. Khane ke Fayde, Fenugreek Seeds Nutritional Value, Leaves Vegetable Advantages, Nutrition Facts Information, Medicinal Uses, Gun, Labh. मेथी खाने के फायदे, लाभ.
 
Methi Health Benefits
 
  • मेथी दाने में फास्फेट न्युक्लिओ अल्ब्यूमिन, लेसिथिन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, कॉपर, जिंक, सोडियम आदि शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. 
  • मेथी दानों को पीसकर उसका लेप बालों में लगाने से बाल मजबूत होते हैं, रूसी और बालों के झड़ने की समस्याएं समाप्त होती है. मेथी दानों को रात भर नारियल के गर्म तेल में भिगोकर रखने और सुबह इस तेल से मसाज करने से भी लाभ मिलता है.
  • जोड़ों के दर्द की स्थिति में सुबह-शाम एक से तीन ग्राम मेथी दाने पानी में भिगोकर व चबाकर खाने से लाभ होता है.
  • मेथी का सेवन मानसिक सक्रियता को भी बढ़ाता है.
  • डायबिटीज में हरी मेथी का सेवन फायदेमंद रहता है. सुबह शाम इसका रस भी पीया जा सकता है. यह रक्त में शक्कर की मात्रा को कम कर देता है. इसके अलावा प्रतिदिन एक चम्मच मेथी दाना पाउडर का पानी के साथ सेवन भी इस रोग में राहत पहुंचाता है.
  • मेथी पाचन क्रिया में सहायक है. इसमें मौजूद पाचक एंजाइम्स अग्नाशय को अधिक क्रियाशील बनाते हैं.
  • हाई बीपी, कब्ज, निम्न रक्तचाप, अपच आदि रोगों में मेथी का सेवन उपयोगी रहता है.
  • मेथी के पत्तों की सब्जी सुबह शाम खाने और 1 चम्मच मेथी के बीज का सुबह शाम गर्म दूध के साथ सेवन करने से सर्दी जुकाम में राहत मिलती है.
  • मेथी दाने के लड्डू बनाकर 3 हफ्ते सुबह शाम सेवन करने से और दर्द वाले अंग पर मेथी के तेल से मालिश करने से कमर दर्द में आराम मिलता है.
  • मेथी के पत्तों को अच्छी तरह पीसकर पानी में घोल कर पीने और शरीर पर लेप करने से शारीरिक जलन में राहत मिलती है.
  • दाना मेथी का एक इंच मोटा तकिया बनायें. इसे सिरहाने लगाकर सोने से गहरी नींद आती है.
  • एक चम्मच मेथी के दानों को एक कप पानी में डालकर उबालें. जब पानी आधा रह जाएँ तो इसे छानकर पी लें. इससे खांसी में राहत मिलती है.
 
If you are also aware about any other health benefits of Methi than feel free to share it here.
 
Note : Consult your doctor before using any remedy stated here.