Tuesday, January 26, 2016

Essay on Luck in Hindi

Essay on Luck in Hindi. Fortunate, Being Lucky, Bhagyashali, Religious Conversion, Change in Religion, Peace, Compassion, Sachcha Dharma, Symbol, Sign, Narrow Broad Thinking, Islam. भाग्य, भाग्यशाली.
 
जब बनेंगे हम सच में भाग्यशाली
 
अभी-अभी एक नोटीफिकेशन मिला :
 
Saddam Ansari added you to the public group 'I am so lucky because I am Muslim. Do you?'
 
प्यारे अंसारी जी,
 
सबसे पहले तो बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे लकी बनने का सुअवसर प्रदान किया. विगत कुछ वर्षों से लक की कुछ ज्यादा ही जरुरत है मुझे. आपके इस अतिसंवेदनशील कृत्य का सम्मान करते हुए, आपके ग्रुप की सदस्य मैं बनी रहूंगी और दिन दोगुनी-रात चौगुनी दर से अपने आप को लकी महसूस करती रहूंगी. (ये बात अलग है कि बस नोटीफिकेशन बंद करके यह कृतज्ञता सामन्यतया उन सभी मित्रों के लिए रहती है जो इतने प्यार से कहीं भी एड कर देते हैं.) क्या करूँ इतने प्यार को ठुकरा नहीं पाती. तो अंसारी जी मैं आपके इस स्नेहिल निमंत्रण का बेहद सम्मान करती हूँ और तहे दिल से अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ कि आपने मुझे इस योग्य समझा. बस आपसे कुछ सवालों के जवाब चाहिए :
 
इंसान का भाग्य क्या सच में किसी शब्द या प्रतीक के साथ मात्र इस तरह से जुड़ जाने से बदल जाता है? और इंसान खुद क्या सच में इस तरह धर्म परिवर्तन से बदल जाता है? अगर ऐसा है तो फिर इस शब्द प्रतीक के अलावा बाकी किसी चीज की तो आपको जरुरत ही न होगी? ऐसा जादू संभव हो तब तो दुनिया की सारी समस्याएं गरीबी, बेरोजगारी, बलात्कार, चोरी, लूट, बेवफाई सब एक चुटकी में हल हो जाए. निश्चित रूप से आपकी कौम में ऐसी कोई समस्या नहीं होती होगी. है न?
 
इस दुनिया में जहाँ मनुष्य खुद अपने जीवन के लिए पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, हवा, पानी, सूर्य...न जाने किस-किस पर निर्भर है. जिस ब्रह्माण्ड में पृथ्वी तक की एक बिंदु से ज्यादा कोई औकात नहीं. वहां अपने दृष्टिकोण को इतना संकुचित आप लोग कैसे कर लेते हो दोस्त? इस ग्रुप में एक महिला हिन्दू महिलाओं के इस्लाम को ग्रहण कर लेने पर अपनी बेइंतहा ख़ुशी को जाहिर कर रही है. यह सफलता बहुत-बहुत मुबारक आपको. पर यह कैसी ख़ुशी है और यह कैसा धर्म है जो सिर्फ अहंकार, विस्तार और नियंत्रण से सम्बंधित हो?
 
ग्रुप में लिखा है : Islam is the religion of peace and compassion. मने अल्टीमेट गोल शांति और करुणा ही है. तो मतलब शांति और करुणा से ही इस्लाम की सार्थकता है. है न? तो फिर ये मुस्लिम-हिन्दू क्यों लगा रखा है? देखो मेरी शांति और करुणा में तो चींटी और मच्छर को मारना भी शामिल नहीं. तो मेरा धर्म का टैग बदलवाकर मुझे और कितना शांत और करुण बना पाओगे? अगर इस्लाम स्वीकार करके ऐसा चमत्कार हो जाए कि मैं सारे दृश्य-अदृश्य जीवों पर करुणा बरसा सकूँ तो फिर मैं मुस्लिम बनने को तैयार हूँ. वैसे दोस्त! यह भी संभव है लेकिन धर्म का टैग मात्र बदलने से नहीं.
 
अपने अहंकार को, अपने स्वार्थ को, अपने यश, विस्तार और नाम को धर्म का नाम जाने कितने लोग सदियों से देते आ रहे हैं. पर दोस्त! मैंने धर्म का अर्थ सिर्फ इतना सा जाना है जहाँ अहंकार पूरी तरह से विसर्जित हो जाता है, जहाँ मैं और तुम की सारी दीवारें गिर जाती है...सिर्फ मानव-मानव के लिए नहीं..ब्रह्माण्ड के कण-कण के लिए. तो अगर समझ सको तो सिर्फ इतना सा समझ लो कि जिस दिन हमारे मन से बांटने वाले सारे शब्द और प्रतीक एक-एक करके गिरने लगेंगे...धर्म की शुरुआत उसी दिन से होगी. उस दिन सिर्फ कहने भर को नहीं तुम, मैं और हम सब...सच में भाग्यशाली होंगे...सच में!
 
शुभकामनाएं!
 
(नोट : जिन-जिन धर्म प्रेमियों को सिर्फ इस्लाम के लिए लिखे जाने की वजह से यह पत्र पढ़कर बहुत-बहुत ख़ुशी हुई...वे अपना नाम और धर्म जोड़कर इस ख़त को एक बार फिर से पढ़ें. धन्यवाद!)
 
By Monika Jain ‘पंछी’
 
How is this article about being lucky in true sense and about true religion?