Sunday, January 31, 2016

Poem on Clock in Hindi

Poem on Clock in Hindi for Kids, Children. Ghadi Par Kavita, Wrist, Table, Wall Watch, Clocks Short Nursery Rhymes, Time Lines, Quotes, Slogans, Sms, Messages, Poetry, Shayari. घड़ी पर कविता, समय.
 
घड़ी
 
टिक-टिक-टिक-टिक
मैं हूँ घड़ी
आती हूँ मैं काम बड़ी.
 
कहीं कलाई पर बंध जाती
कहीं मेज पर पड़ी इठलाती
कहीं दीवारों पर टंग जाती 
समय हुआ क्या, ये बतलाती.
 
समय से आना, समय से जाना
समय से खाना, समय से पढ़ना
मुझे देखकर पता है चलता 
कब है सोना, कब है जगना.
 
सूईया मेरी सरपट दौड़े 
जैसे किसी रेस के घोड़े 
बीता समय न वापस आये 
 काम कभी कल पर न छोड़ें.
 
याद करो दादा के बोल 
समय बड़ा ही है अनमोल
उसे बड़ा पछताना पड़ता 
जो न जाने समय का मोल.
 
घंटा, मिनट और हर सेकंड का 
रखती हूँ मैं पूरा हिसाब 
जो चलता है सदा समय से 
उसके होते पूरे ख़्वाब.

By Monika Jain ‘पंछी’

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