Sunday, March 27, 2016

Short Love Stories in Hindi

Short Sad Love Stories in Hindi. Dard Bhari Prem Kahani, Heart Touching Real Memories, Wait, Intezar Kahaniyan, Small Story, Pyar ki Yaadein Tale, Painful Tales. लघु प्रेम कहानी, कहानियां.
 
(1)

छोटी बेबी
 
कभी वह उसके लिए उसकी लड्डू, बेटू और छोटी बेबी हुआ करती थी. दिन में कई बार तीन फ्लोर की सीढियाँ चढ़ते उतरते और बहुत पैदल चलने पर कभी जब उसके पाँव दर्द करने लगते तो वह रात में उसके पाँव दबा देता था और उसके बालों को सहलाते हुए उसे सुला देता था. रात-रात जागते परीक्षा के दिनों में किसी पेपर के खत्म होकर घर पहुँचते ही खाना खाकर वह उसकी गोद में सर रखकर...उसे पकड़कर सो जाती थी. वह दीवार से सटकर उसे यूँ ही सुलाए रहता. वह अक्सर कहता था, 'तुममें जितना बचपन है...उतना ही बड़प्पन भी. पता है...जिससे भी तुम्हारी शादी होगी उसे बच्चा और समझदार बीवी दोनों साथ-साथ मिल जायेंगे.'

वह हँसती और कहती, 'किसी और से क्यों, तुमसे क्यों नहीं?'

'तुम्हारा परिवार नहीं मानेगा. लेकिन मैं हमेशा तुम्हारा इंतजार करूँगा. तुम्हारी शादी के बाद भी. अगर जीवन में कभी भी तुम्हें लगे कि तुम ख़ुश नहीं हो तो तुम मेरे पास लौट आना' ...और ऐसा कहते और सुनते उन दोनों की आँखें भीग जाती.

अतीत की स्मृतियों से अचानक वह बाहर आती है. आज उससे फोन पर बात हुई थी. उसने बताया था वह पापा बनने वाला है. वह ख़ुश हुई और उसे उसकी इस ख़ुशी पर बधाई दी. बचपन और बड़प्पन दोनों उसमें आज भी है न. :)

(2)

इंतजार
 
वे दोनों सालों से नहीं मिले. गुजरते समय ने दोनों के जीवन में बहुत कुछ बदल दिया.

दूरियाँ ग़लतफ़हमी पैदा करती है, पर जब भी वे बात करते हैं तो सारी गलतफहमियां और गिले-शिकवे दरकिनार हो जाते हैं और उनकी बातों में उन मीठी पुरानी यादों का पिटारा खुल जाता है. भीगी आँखों में एक दूसरे के पुराने अक्स तैरने लगते हैं और धड़कते दिलों में बस एक ही शब्द गूंजता है...काश!

वह नहीं चाहती पर उसकी आँखों से आंसू निकलने लगते हैं. वह छिपाती है पर आवाज़ का भारीपन और रह-रह कर निकलती सिसकियाँ उसकी तकलीफों और तड़प को बयां कर देती है.

पर ये आंसू भी उसका सारा दर्द कहाँ निकाल पाते हैं. जब रोती आँखों को कन्धों का सहारा ना मिले तो दर्द की घुटन तो बाकी रहनी ही है.

वह कहता है (क्योंकि सिर्फ वही समझता है ) 'तुम्हें ढेर सारे प्यार की जरुरुत है. तुम यहाँ आ जाओ, मैं तुम्हारा बहुत खयाल रखूँगा. फिर धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा.'

वह छटपटाती है. उड़ना चाहती है. उसके पास जाना चाहती है. पर वह अपनी तकलीफों से लड़ते-लड़ते बहुत थक चुकी है. उसमें अब उड़ने की ताकत नहीं. न ही कोई नया सपना संजोने की हिम्मत. ऊपर से ढेर सारे बन्धनों की जकड़न. वह बहुत मजबूर है. बहुत ज्यादा.

पर वह खुश है कि आज भी उसे उसका इंतजार है. लेकिन वह यह भी चाहती है कि वह आगे बढ़ जाए.

अतीत की स्मृतियों से वह बाहर आती है. साल भर पहले ही तो उसकी शादी हुई थी. इसके कुछ सालों पहले वह उसके इंतजार में ख़ुश थी...और अब उसके आगे बढ़ जाने पर भी.
 
(3)

कितनी बातें याद आती हैं...
 
आज अचानक तुम्हारी बहुत याद आई. तुम्हारे पास रहते हुए...तुम्हारे साथ रहते हुए...कभी महसूस ही नहीं हुआ कि मैं किसी बंधन में हूँ. मुझे याद नहीं हमारी किसी भी बात को लेकर कभी भी कोई बहस हुई हो. हमने कभी कुछ नहीं थोपा एक दूसरे पर...कुछ भी नहीं.

हम अक्सर देखा करते थे...कैसे कई कपल्स हमेशा एक दूसरे से लड़ते-झगड़ते रहते थे...और मैं अक्सर सोचती थी कि हमारे बीच कभी झगड़ा क्यों नहीं होता?...और फिर कभी-कभी मैं जान-बूझकर वाली लड़ाई किया करती थी...पर उसमें भी कभी कामयाब नहीं हो पाती.

क्योंकि एकतरफ़ा लड़ाई और गुस्सा भला कब तक चलेगा? मुश्किल से आधा घंटा भी नहीं होता होगा और मेरी आँखों से गंगा-यमुना बहने लगती...और फिर लम्बी लड़ाई का सारा प्लान फ्लॉप हो जाता. उसके बाद भीगी आँखें और डरे-सहमे से मन के साथ कैसे मैं बच्चों की तरह तुम्हारा हाथ पकड़ लेती और फिर हम मेरी सबसे पसंदीदा..एक लम्बी सी वाक पर जाते. सोच रही हूँ...वो रास्ते आज भी हमें याद करते होंगे न?
 
By Monika Jain 'पंछी'