Friday, February 12, 2016

World Aids Day Essay in Hindi

World Aids Day Essay in Hindi. International HIV Awareness Month, 1st December Story, Vishva Aids Diwas Kahani, Article, Paragraph, Speech, Information, Messages. विश्व एड्स दिवस पर निबंध, कहानी.
 
अंधेरों में गुम न हो रोशनी

कुछ महीनों पहले ही इस नए शहर में शिफ्ट किया है। घर के पास ही बच्चों का एक पार्क है। शाम होते ही खेलते हुए बच्चों का शोर चिड़ियों की चहचहाहट की तरह हवा में घुल जाता है। बच्चों को इस तरह खिलखिलाकर खेलते हुए देखना मुझे बहुत सुकून देता है। अक्सर जब काम करते-करते थक जाती हूँ तो पार्क की ओर अपना रुख कर लेती हूँ। कभी बच्चों से बातें, कभी उनके साथ खेलना, कभी यूँ ही उन्हें बैठे-बैठे निहारना और अपने बचपन में खो जाना मुझमें एक नयी ही ऊर्जा भर देता है।

पर कल शाम पार्क से लौटने के बाद मन बहुत बेचैन था। तरह-तरह के सवाल मन में उठ रहे थे और बार-बार उस मासूम बच्ची का चेहरा मेरे दिल और दिमाग में उभर रहा था। करीब 7-8 साल की होगी वो। पहली बार ही उसे पार्क में देखा था।

काम करने में मन नहीं लग रहा था सो मेरे कदम पार्क की ओर बढ़ गए। पार्क में सारे बच्चे ग्रुप्स बनाकर खेल रहे थे। कोई पकड़म-पकड़ाई, कोई रुमाल झपट्टा तो कोई आँख मिचौनी। कुछ बच्चे पार्क के झूलों में झूल रहे थे, कुछ फिसल पट्टी पर फिसल रहे थे। सब अपने में मग्न थे। मैं भी उन्हें देखते-देखते टहल रही थी, तभी सहसा पार्क के एक कोने में नज़र पड़ी जहाँ एक प्यारी सी बच्ची अकेले ही मिट्टी से खेल रही थी।

उसके बार-बार आँखों पर गिरते बाल, मिट्टी से सने हाथों से उन्हें हटाने की कोशिश, बीच-बीच में खेलते हुए बच्चों को बड़ी उम्मीद भरी नजरों से देखते हुए मुस्कुरा जाना और फिर उदास होकर मिट्टी के घरौंदे बनाने में लग जाना, यह सब मुझे उसकी ओर खींच रहा था। ऐसा महसूस हुआ जैसे वह बच्चों के साथ खेलना चाह रही है पर कुछ सहमी हुई सी है।

मुझे लगा नयी बच्ची होगी, सबके साथ घुलने-मिलने में शर्मा रही होगी सो उससे दोस्ती करने और सबसे उसकी दोस्ती करवाने की सोचकर मैंने उसकी ओर रुख किया। मुझे अपनी और आता देखकर उसने खेलना एकदम से बंद कर दिया और सहमी हुई नज़रों से मुझे देखने लगी। मैंने उसके पास बैठकर ज्यों ही उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा। वह एक दम हड़बड़ाहट में उठ खड़ी हुई। उसके हाथों की मिट्टी चारों ओर बिखर गयी। मैं कुछ बोलती इससे पहले ही वह डरते हुए वहां से तेजी से दौड़ कर भाग गयी।

‘बच्चे मूडी होते हैं। अजनबी हूँ सो घबरा गयी होगी।’, यह सोचते हुए मैं वापस अपनी जगह पर आ गयी। पर ना जाने क्यूँ उसके बारे में जानने की जिज्ञासा में मैंने एक बच्चे को आवाज़ दी और अपने पास बुलाया। पार्क के कई बच्चों से दोस्ती हो गयी थी। बच्चा बुलाते ही दौड़ा-दौड़ा चला आया।

‘अभी थोड़ी देर पहले वह छोटी सी लड़की जो उस कौने में खेल रही थी, क्या तुम उसे जानते हो? मैंने उसे पहले कभी यहाँ देखा नहीं, क्या वह यहाँ नयी है? तुम लोग उसे अपने साथ क्यूँ नहीं खिला रहे थे और वह इतना डर क्यों रही थी?’ एक ही सांस में न जाने कितने सवाल पूछ डाले मैंने।

बच्चा थोड़ा सकपकाया हुआ बोला, ‘ रोssशनी, क्या आप रोशनी के बारे में पूछ रहे हो दीदी? वह जो मिट्टी में खेल रही थी? मैंने सहमति में सर हिला दिया और कहा, ‘हाँ! मैं उसके पास भी गयी पर वह भाग कर चली गयी।’

बच्चा घबराया हुआ सा बोला, ‘दीदी! आपको उसके पास नहीं जाना चाहिए था। मम्मी कहती है, उसे कोई भयंकर बीमारी है। हम उसके साथ खेलेंगे तो वह हमें भी बीमार कर देगी, इसलिए हममें से कोई भी उसके पास नहीं जाता। कल भी वह हमारे ग्रुप के पास आ गयी थी तो हमने उसे भगा दिया। आप भी उसके पास मत जाया करो।’ यह कहकर बच्चा तो दौड़ कर चला गया और अपने ग्रुप में शामिल होकर फिर से खेलने लगा पर मेरे दिल और दिमाग में न जाने कितने सवाल छोड़ गया।

मैं एकदम निश्चेत सी बैठे कभी उस ग्रुप को तो कभी उस कौने को देखती रही जहाँ अब रोशनी की जगह बस अँधेरा ही अँधेरा नज़र आ रहा था।
 
मैंने आसपास के लोगों से मालूम किया तो पता चला उसके मम्मी, पापा और उसे एड्स है। सब लोग उसके परिवार से दूर रहते हैं। यहाँ तक कि उन पर कॉलोनी को खाली करने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
 
मेरे मन में बहुत से सवाल उठे, ‘इतनी सी बच्ची जो बिल्कुल निर्दोष है उसे इतनी भयानक बीमारी? ऊपर से इस तथाकथित पढ़े लिखे समाज की अज्ञानता और संकीर्णता से भरी यह मानसिकता जो पीढ़ी दर पीढ़ी थोपी जा रही है। आखिर क्यों?’

मैंने तुरंत निश्चय किया कि उस परिवार की मदद करुँगी और एड्स को लेकर जो भी भ्रम और भ्रांतियां लोगों के दिमाग में हैं, उसे दूर करुँगी। उन्हें बताऊँगी कि एड्स छूने से नहीं होता। साथ-साथ उठने-बैठने, खाना खाने, एक दूसरे के कपड़े इस्तेमाल करने से भी एड्स नहीं फैलता। बल्कि एड्स के मरीज के प्रति नम्र व्यवहार जरुरी है ताकि उसकी हिम्मत और हौंसला बना रहे और वह भी एक आम जीवन जी सके। रोशनी की किरणें उसके जीवन में सदा बिखरी रहे और कभी अँधेरा न हो।
 
By Monika Jain ‘पंछी’