Saturday, March 19, 2016

Poem on Darkness in Hindi

Poem on Darkness in Hindi. Andhera Kavita, Andhkar Shayari, Dark Matter Poetry, Energy, Shiva, Shakti, Beyond Duality, Light, Jealousy, Competition, Fearlessness Lines. अँधेरा कविता, अंधकार शायरी.
 
मुझे तो बनना ही है अंधकार...
 
ईर्ष्या से प्रेरित प्रतिस्पर्धा तुम्हारी
जीतने चली है उससे
जो दौड़ में शामिल ही नहीं!
 
चलो तुम बन जाओ चमकदार
मुझे तो बनना ही है अंधकार...
वह अंधकार जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं!
पर देखो! जिसका कोई अस्तित्व नहीं
उसी से तो है यह सारा अस्तित्व!

पहुँचने को मुझ तक
बनाने पड़ते हैं तुम्हें छद्म रास्तें,
पर यहाँ है सब कुछ प्रकट और स्पष्ट,
जहाँ सच और ईमानदारी नहीं है
अवसरवादिता के वास्ते!

चलो तुम गर्व करो अपनी कठोरता पर
मैं ख़ुश हूँ अपनी कोमलता के संग!
कठोरता की कमजोरी और
कोमलता की मजबूती से अनभिज्ञ
तुम यह तो जानते ही होंगे कि
कठोरता बना जाती है अघुलनशील
और कोमलता बन जाती है स्नेह की झील!

द्वंद्वों की शुरुआत थी तुम्हारी ओर से
मैं करुँगी इनका अंत बनकर निर्द्वंद्व!
गांठों में उलझा है तुम्हारा व्यक्तित्व!
उलझे रहो! मैं बनूँगी एक दिन निर्ग्रन्थ!

तुम्हारे लांछन, व्यंग्य और विश्वासघात
नहीं पहुंचा सकते अब कोई भी आघात!
तुम उधेड़ते रहो मेरे चरित्र की बखिया
पर निर्भयता से सदा चमकती रहेंगी ये अँखियाँ!

By Monika Jain ‘पंछी’

( नोट : कुछ कवितायेँ लिखी नहीं जाती, बस लिख जाती है, अनन्त की प्रेरणा से!)
( नोट : शिव को डार्क मैटर और शक्ति को डार्क एनर्जी कहा जाता है. )