Sunday, March 6, 2016

Tradition Quotes in Hindi

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Tradition Quotes

  • प्रेम? नहीं शायद अहंकार और स्वार्थ अँधा होता है...फिर चाहे वह अपनी परम्पराओं, संस्कृति, रीति-रिवाजों और कर्म कांडों से हो या तथाकथित स्वछन्द फूहड़ आधुनिकता से. क्योंकि यह इनके नाम पर घुस आने वाली विकृति, आतंकवाद, हिंसा, शोषण, अराजकता, अन्याय और असंवेदनशीलता को देख नहीं पाता. और फिर आजकल तो परंपरा और आधुनिकता दोनों का वह कॉकटेल दिखाई पड़ता है जिसने चमक और धमक की अति के पीछे अपने सारे आधारों को खोखला कर देने की ठानी है. पर इस अहंकार और स्वार्थ के वशीभूत लोगों को भला वह खोखलापन नजर क्यों कर आने लगा? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मेरी बातों से बहुत से लोग ये आशय लगा लेते हैं कि मैं नास्तिक हूँ और धर्म तथा परम्पराओं की विरोधी हूँ...पर न तो मैं नास्तिक हूँ और न ही धर्म तथा परम्पराओं की विरोधी हूँ. हाँ बस मैं अन्धविश्वासी नहीं हूँ और आडम्बरों और अंधविश्वासों से मुक्त समाज चाहती हूँ. ईश्वर का अस्तित्व है या नहीं यह बात मुझे परेशान नहीं करती, पर ईश्वर के नाम को कलंकित होते देखना...यह मुझसे नहीं होता. धर्म की आड़ में हो रहे अपराध मुझे दूसरे अपराधों से ज्यादा घृणित लगते हैं. देखा है मैंने...कैसे आडम्बरों के चलते गरीब लोग जिन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता अपने खून पसीने की मेहनत से कमाया हुआ धन जादू टोने और टोटकों में खर्च कर आते हैं. कई लोग अंधविश्वासों के चलते अपने जीवन तक से हाथ धो बैठते हैं. धर्म की आड़ में चल रहे अय्याशों के अड्डे सिर्फ एक-दो नहीं...हर धर्म में इनकी भरमार है. सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाने के लिए न जाने कितनी धर्म की दुकाने चल रही है. धर्म के इस अपराधीकरण और व्यवसायीकरण को स्वीकार करना मेरे बस में तो नहीं. इसलिए मुझे बहुत ज्यादा जरुरी लगता है कि आज के युग की आवश्कताओं के अनुसार धर्म और परम्पराओं में आमूलचूल परिवर्तन किये जाए. हर युग की अपनी आवश्यकताएं हैं और यह जरुरी नहीं है कि हजारों लाखों वर्षों से जो परम्पराएँ चली आ रही है वे सभी आज के युग में प्रासंगिक हों. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • लोग हमेशा इतिहास के पीछे क्यों पड़े रहते हैं? आप कितनी भी कोशिश कर लें उन घटनाओं की पूरी सच्चाई नहीं जान सकते, जो आपके अस्तित्व से हजारों सालों पहले की है. राम, रावण, दुर्गा, महिषासुर, कृष्ण, दुर्योधन, पांडव किसने क्या किया, कौन सही था, कौन गलत?...कोई था भी या नहीं...क्या अब इन बातों से फर्क पड़ना चाहिए? जो नहीं हैं उनके लिए जो हैं...क्या उनको लड़-कट के मरना चाहिए? तब की परिस्थितियाँ और आज की परिस्थितियाँ क्या बिल्कुल एक सी है? कोई ये क्यों नहीं समझ पाता कि कोई भी व्यक्तित्व सबके लिए, सब परिस्थितयों में पूर्ण रूप से आदर्श नहीं हो सकता. उसकी सभी बातों का समर्थन नहीं किया जा सकता. पर अंधभक्ति तो बड़ी प्यारी है मेरे देश के लोगों को. पूजना इतना जरुरी हो गया है कि उसके लिए तो जिसे पूजा जा रहा है, जिस कारण पूजा जा रहा है, उन्हीं आदर्शों की बलि देने में नहीं हिचकते लोग. जो अदृश्य है उसके लिए जो दिखाई दे रहा है, उसे काट डालने में शर्म नहीं आती किसी को. कभी-कभी लगता है सब कुछ मनोरंजन के लिए करते हैं लोग. लड़ना शायद बेहद पसंद है इसलिए नित नए बहाने ढूंढते हैं लोग. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हर्षोल्लास और आमोद प्रमोद के लिए पर्वों का मनाया जाना बेशक जरुरी है पर उनके मनाये जाने की सार्थकता तभी है जब उनमें छिपे सन्देश को आंशिक तौर पर ही सही हम अपने जीवन में उतारें. ~ Monika Jain ‘पंछी’
 
How are these quotes about traditions?