Sunday, April 17, 2016

Essay on Emotions in Hindi

Essay on Managing Emotions in Hindi. Mood Awareness, Mind Consciousness, Strong Feelings, Emotional Thoughts, Sense, Bhavna, Bhav, Thinking, Vichar, Wish, Chetna. भाव भावना, विचार, चेतना, होश, सजगता.
 
विचार/ भाव कर्म हैं
 
“तुम्हारा मुझे इतने दिनों बाद अचानक कुछ लिख भेजना अनायास ही न था। कुछ ही देर पहले मन की गहराईयों ने तुम्हें याद किया था।”
 
इस स्टेटस को लिखते हुए मन की असीम क्षमताओं को परिचित करवाते न जाने कितने चल-चित्र आँखों से गुजर गए । बिना एक शब्द कहे विचारों और भावनाओं के सम्प्रेषण के अनगनित उदाहरणों का यह मन साक्षी रहा है.

जैसे कुछ ही दिनों पहले एक घटना हुई. कई महीनों पहले एक पोस्ट पर मुझसे काफी बड़े एक फेसबुक मित्र से किसी विचार के न मिलने पर हुई एक चर्चा पर शायद कोई बात उन्हें हर्ट कर गयी (हालाँकि अपनी बात मर्यादित तरीके से ही रखती हूँ ) और वे अनफ्रेंड करके चले गए. उस पोस्ट पर उनके कमेंट्स जिस तरह थे पढ़कर थोड़ा बुरा मुझे भी लगा था क्योंकि हमेशा उनके कमेंट्स बहुत विनम्र भाषा में होते थे...और उनके कमेंट्स से उनका विशेष स्नेह झलकता था. वे अमित्र करके चले गए, मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की. लेकिन कुछ दिनों से 'on this day' वाली पोस्ट्स में उनके पुराने बहुत प्रेरणादायक कमेंट्स देखे तो सोच रही थी कि हम मनुष्य कितनी छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमियां और अहंकार पाल कर बैठ जाते हैं और जो अच्छा होता है उसे भूल जाते हैं.

खुद पर भी गुस्सा आया कि मुझे तर्क-वितर्क में पड़ने की जरुरत ही क्या थी. ये जरुरी तो नहीं कि किसी बात पर विचार न मिले तो अपनी बात को सही सिद्ध करने की कोशिश की ही जाए. गलत कौन था और कौन नहीं ये बातें हमेशा मायने नहीं रखती. मायने रखती है वह सहज अनुभूति जो हम सभी को आपस में जोड़ती है. और फिर जब अच्छा सोचने के लिए इतनी सारी बातें हों तो फिर किसी छोटी सी बात का बुरा माना ही क्यों जाए. यह सब एक-दो दिन पहले सोचा ही था कि अगले दिन होली पर उनका शुभकामनाओं का मेसेज आ गया. यह बिल्कुल अप्रत्याशित था. जिस तरह से वह गए थे, जीवन में फिर कभी कोई बात होने के आसार न लगते थे. लेकिन भाव कितने सशक्त होते हैं यह इसका एक उदाहरण था. इसलिए हमारी कोशिश यह रहे कि हम अपने भावों और विचारों को हमेशा अच्छा रखें.

दुनिया की समस्त समस्यायों का कारण और समाधान हमारे भाव और विचार ही हैं जो कर्म बनते हैं...और बिना बाहरी कर्म बने भी बहुत गहरा प्रभाव डालते हैं. क्योंकि भाव अपने आप में एक कर्म है. और चर्चा करते समय जो विजयी ही होने का भाव अनायास ही हमारे मन में चला आता है बडा ही तुच्छ है, उस भाव के सामने जिसे ‘स्वीकार’ कहते हैं. एक बार कहीं पढ़ा था कि आन्दोलन और क्रांतियाँ अक्सर सूर्य/ग्रहों से संचालित होती है. मनुष्य के विचारों और भावों पर भी प्रकृति का बहुत प्रभाव होता है. एक नियमित समय के बाद व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों ही स्तर पर घटनाओं का दोहराव होता है. ऐसे में सिर्फ वहीँ व्यक्ति काल चक्र और प्रारब्ध के प्रभाव में अनायास बहने से खुद को बचा सकते हैं जो हमेशा सजग रहे. मुक्ति का द्वार भी सिर्फ उन्हीं के लिए होता है.

By Monika Jain ‘पंछी’

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