Saturday, April 23, 2016

Essay on Respect in Hindi

Essay on Respect in Hindi. Samman Apmaan par Nibandh. Respecting Self Others Article. Give and Take Honor, Regard, Value, Insult, Disgrace, Humiliation, Speech, Paragraph. आदर सम्मान पर निबंध, अपमान.
 
सम्मान मांगता है सम्मान...
 
सामान्यतया मेरा किसी के प्रति सम्मान उसके पद, ओहदे, यश, डिग्री, ख्याति, रूप, रंग आदि का मोहताज नहीं है. हाँ यह उसके कुछ विशेष आंतरिक गुणों-अवगुणों और निर्दोषिता-दोष से प्रभावित जरुर हो सकता है. और अगर बात आदर्श की हो तो सम्मान सिर्फ व्यक्तियों का नहीं, सिर्फ प्राणियों का नहीं बल्कि वस्तुओं का भी होना चाहिए. इसके अलावा कोई भी आपका अपमान तब तक नहीं कर सकता जब तक आप उस अपमान को स्वीकार न करें.
 
लेकिन आदर्शों से नीचे जब-जब हम सांसारिक लेनदेन में सक्रिय होते हैं, तब अगर हम सम्मान चाहते हैं तो सबसे पहले हमें सम्मान देना भी आना चाहिए. और काश! कि सम्मान सिर्फ शब्दों का मोहताज होता. सम्मान तो भावना, वाणी, कर्म हर स्तर पर कार्य करता है.
 
  • जब आप किसी के आपके प्रति प्रेम, चिंता और संवेदनशीलता की पूर्ण उपेक्षा करके अपने दोस्तों के साथ लगायी गयी शर्तों और उनके सामने अपनी छवि विशेष को बनाये रखने को अधिक महत्व देते हैं. 
  • जब आप किसी और की गलती की सजा किसी और को देते हैं. 
  • जब आप स्नेहवश या जबरन किसी को कोई वस्तु दें और बाद में अहंकार वश यह घोषित करें की आपने दान दिया है. 
  • जब आपके शक और संदेह के दायरे में किसी को बार-बार अपनी विश्वसनीयता, सच्चाई और ईमानदारी का प्रमाण देना पड़े. 
  • जब आप अपने अंधविश्वासों के चलते अपने साथ हुई हर बुरी घटना के लिए किसी निर्दोष को जिम्मेदार समझने लगते हैं (प्रकट या अप्रकट रूप में). और उससे अछूतों से भी बदतर बर्ताव करते हैं. 
  • जब आप अति सम्मानजनक, आलंकारिक शब्दों और असुर पात्रों के नाम का प्रयोग व्यंग्य बाण छोड़ने और किसी को नीचा दिखाने के लिए करते हैं. 
  • प्रेम को भले ही प्रेम का प्रतिदान न मिले लेकिन वह स्वीकृति और सम्मान तो चाहता ही है. जब आप किसी के प्रेम को सम्मान न देकर अपने इतिहास और भविष्य के प्रेम में ही खोये रहकर बार-बार उसे उपेक्षित महसूस करवाएं. 
  • जब कोई आपसे इन सब चीजों की वजह से उपजे गहरे तनाव से बाहर निकलने के लिए थोड़ी सी मदद चाहता हो, जहाँ प्रश्न उसके जीवन और मृत्यु तक का हो, तब भी आप असंवेदनशील बने रहें. 
  • किसी की मजबूरियों को समझे बिना, पूरा सच क्या है यह जाने बिना, आप किसी की रचनात्मकता पर भावनाओं के दोहन का दोषारोपण करते हैं (तब जबकि भावनाएं भी उसकी स्वयं की है). उसकी हर अच्छी बात, उसके प्रेम और समर्पण सबको नजरंदाज कर सिर्फ उसमें दोष ही दोष ढूंढते हैं. 
  • स्वयं को आप जिसके किसी कार्य की प्रेरणा समझते हैं, निष्पक्ष होकर विचार करने पर पायेंगे कि उसमें भी आपको बहुत कुछ प्रेरणादायक मिला ही होगा. फिर भी आप उसे कोसते हैं, नीचा दिखाते हैं, हीन महसूस करवाते हैं. 
  • जब आधे सच को प्रकट करते हुए आप बार-बार किसी का विश्वास तोड़ते हैं, कभी किसी की ईर्ष्या से बचने के लिए तो कभी अपने अहम् और मनोरंजन के लिए. 
  • और इन सारे अपमानों को नजरंदाज करके भी कोई सुलह चाहता हो, अपनी गलतियों की क्षमा मांगता हो, थोड़ी सी समझ, विश्वास, समय और सहयोग चाहता हो, पर आप पत्थर से भी अधिक कठोर बन जाएँ. 
  • और भी ढेर सारी बातें जो फ़िलहाल स्मृतियों से बाहर है…                                             
जब आप यह सब करते हैं तब आप सम्मान/अपमान क्या कर रहे होते हैं...फुर्सत में सोचियेगा. इसके बाद भी अगर आप यह अपेक्षा करें कि आपको सम्मान मिलना चाहिए, आपको कोई कुछ भी न कहे...तब तो आप अद्भुत हैं.

अगर मानना चाहें तो सम्मान और अपमान की सीमायें बहुत विशाल है, और अगर न माने तो सम्मान और अपमान जैसा कुछ होता ही नहीं. बाकी कोई व्यक्ति जो सामान्यतया राह में चलते कीड़ों-मकोड़ों और वस्तुओं के प्रति भी सम्मान रखता है. जो अपने घर के बाहर कुछ खाने या पहनने को मांगने आये गरीब बच्चों और लोगों से भी ससम्मान आचरण करता हो, वह उसका अपमान क्यों करेगा, जिससे वह उस समय भावनात्मक रूप से इतना जुड़ा हुआ हो. यह भी विचारणीय है. फिर भी आपको ससम्मान धन्यवाद!

By Monika Jain ‘पंछी’