Wednesday, April 13, 2016

Guru Purnima Poem in Hindi

Guru Purnima Poem in Hindi for Kids. Ved Vyasa Poornima Kavita, Shishya Shikshak Diwas Shayari, Teacher’s Day Poetry, Wishes Rhymes, Quotes, Sms, Messages, Slogans, Lines. गुरु व्यास पूर्णिमा कविता.

गुरु

बहुत मुश्किल है कह पाना 
किसी एक को गुरु,
क्या हो आधार
और कहाँ से हो शुरू?

वह कोयल जो रोज
मेरी बालकॉनी के 
सामने वाले पेड़ पर 
कूंकती है घंटों, 
वह भी बता जाती है कि 
वह चींटी जो बार-बार
नीचे उतार देने पर भी 
चढ़ आती है मेरे बिस्तर पर, 
कह जाती है 
न कोई हार,
न कोई जीत है।
 
वह चाँद जो रोज 
उग आता है आकाश में 
कर अपनी अनोखी कलाओं को साकार, 
द्वैत ही है संसार

और वह सूरज जो 
बिना कुछ पाने की उम्मीद किये 
लाता है हर रोज 
अपार ऊर्जा का भंडार, 
गहरे में उतार जाता है...
बस देना है जीवन 
किस-किस का मैं नाम लूँ
किस-किस को उतारूँ? 
किस-किस को पुकारूँ?
 
जो आँखों में है आंसूओं का सबब 
वह आग का धुआँ भी तो है 
गुरु का ही एक रूप, 
छाया जहाँ देती है
जीवन को सुख की परिभाषा, 
यह जताती है धूप

By Monika Jain ‘पंछी’

How is this poem on the occasion of Guru Purnima?