Monday, May 30, 2016

Bhakti Kavita in Hindi

Devotional Poem in Hindi. Bhakti Ras Prarthana Kavita, Spiritual Poetry, Devotion Shayari, Dedication Lines, Samarpan Prayer. भक्ति रस कविता, समर्पण प्रार्थना.
और नहीं कुछ सिवा प्रेम के...
 
भगवन! भक्त तुम्हारे लाते बहुमूल्य उपहार 
सोना, चांदी, हीरे, मोती के पहनाते हार।
 
धूप, दीप, नेवैद्य चढ़ाकर करते तुम्हें प्रसन्न 
धूमधाम से गाते हैं वें, भजन और कीर्तन।
 
मैं कुटियां की वासी हूँ, कुछ साथ नहीं मैं लायी हूँ 
फिर भी साहस करके मैं, पूजा करने को आई हूँ।
 
घी के दीप जला पाऊं, ऐसा मेरा सौभाग्य नहीं 
खीर बना कर भोग लगाऊं, इसके भी तो योग्य नहीं।
 
आई हूँ मैं तेरी चौखट, लेकर खाली हाथ 
दान-दक्षिणा चढ़ा ना पाई, तेरे द्वारे नाथ।
 
भक्ति गीत सुर से गा पाऊं, ऐसा मेरा गान नहीं 
मैं अनपढ़, भारी शब्दों का मुझको कोई ज्ञान नहीं।
 
ह्रदय में तेरे लिए बसा जो प्रेम दिखाने आई हूँ 
और नहीं कुछ सिवा प्रेम के, यहीं लुटाने आई हूँ।

By Monika Jain 'पंछी'


(सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता से प्रेरित)

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