Monday, May 9, 2016

Poem on Meditation in Hindi

Poem on Meditation in Hindi. Present Moment Poetry, Dhyan Sakshi Bhav Kavita, Samyak Darshan, Concentration, Vartman Lines, Awareness, Consciousness, Vivek. ध्यान साक्षी भाव, एकाग्रता, वर्तमान कविता.

जग की हर सीमा से पार
 
जो बीत गया वह ढोना मत 
तुम वर्तमान को खोना मत
भार चित्त पर रहे न कोई
जो चला गया उसे रोना मत।

जो छूट गया उसे छोड़ तू चल
बस वर्तमान को जी हर पल
शांत चित्त और निर्मल मन
न आने वाला, न बीता कल।

स्मृति है अतीत की सत्ता
कल्पना है भविष्य की वक्ता
है वर्तमान बस एक ही द्वार
जो पहुँचा दे सब तक स्वतंत्रता

तुम क्षण-क्षण जीवन जी लेना
सारी चिंताएं सी लेना
तन-मन को रखना एक साथ
तुम ध्यान का अमृत पी लेना।

बस कर्म रहे तुम होना मत
जगना हर पल तुम सोना मत
कुछ न होकर सब कुछ होंगे
तुम धैर्य का मोती खोना मत।

है सरल चित्त ईश्वर का द्वार
जीवन एक खेल, तुम हो फनकार
बस ग्रहणशील हो जाता है
जग की हर सीमा से पार...
जग की हर सीमा से पार।

By Monika Jain ‘पंछी’

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