Thursday, May 5, 2016

Poem on Zero in Hindi

Poem on Zero in Hindi. Shunya Shunyata par Kavita, Soul Poetry, Aatma Shayari, Null Rhymes, Universal Spirit Lines, Nil, Emptiness, Existence, Infinite Brahma. शून्य पर कविता, आत्मा, निराकार ब्रह्म.

मैं शून्य!

लहू के आखिरी 
कतरे को भी 
बहा देने वाला, 
जो नहीं छीन पाया 
वह प्राण हूँ मैं!
साक्ष्य सारे मिट गए 
समय की रेत पर... 
जो नहीं मिट पाया 
वह प्रमाण हूँ मैं!
 
देह के राख में 
तब्दील हो जाने पर भी,
जो राख न हो पायी 
वह आग हूँ मैं!
घोर से घनघोर
तूफानी रात में भी, 
जो न हुआ स्याह
वह चिराग हूँ मैं!
 
जो न कभी भूत होगा 
और न हुआ कभी भविष्य, 
वह वर्तमान हूँ मैं!
जो छेड़ी नहीं जाती वह तान,
और जिसका नहीं कोई स्त्रोत 
वह ज्ञान हूँ मैं!
 
जो मिली हुई है सदा से 
और जिसके सिवा 
न कुछ पाया जा सके, 
वह पहचान हूँ मैं!
जिस पर चढ़कर 
कभी कोई नहीं उतरा, 
वह मचान हूँ मैं!

By Monika Jain ‘पंछी’

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