Friday, June 24, 2016

Nature Quotes in Hindi

प्रकृति पर नारे, कुदरत, सृष्टि, पृथ्वी, ब्रह्माण्ड. Nature Quotes in Hindi. Prakriti Slogans, Mother Earth, Kudrat, Srishti, Universe, Cosmos, Prithvi, Brahmand.

Nature Quotes

  • मनुष्यों द्वारा सिर्फ कानून/नैतिक व्यवस्था हो सकती है न्याय नहीं। असल न्याय तो प्रकृति के हिस्से ही है और उसी के हिस्से रहेगा। एक सीमाहीन, आत्मानुशासित विश्व निसंदेह एक श्रेष्ठतम कल्पना है। यह कल्पना मुझे भी बेहद पसंद है। लेकिन एक सच यह भी है कि यह आदर्श व्यक्तिगत स्तर पर संभव हो सकता है...समूह पर लागू नहीं किया जा सकता। क्योंकि जहाँ-जहाँ लागू करने की बात आई वहां आत्म-अनुशासन रहा ही कैसे? यह तो चेतना के स्तर का विषय है, जिसे एक जैसा कोई कैसे बना सकता है? व्यक्तिगत रूप से सभी को एक जैसा अनुभूत करना निसंदेह संभव है...लेकिन इसे सभी अनुभव करे ही करे यह उद्देश्य लेकर चलना उस आदर्श विश्व के सिद्धांत का ही खंडन है। इसलिए समूह के हाथ में व्यवस्था है एक देश के रूप में, एक समाज के रूप में, कानून के रूप में... बाकी का काम हर एक व्यक्ति को अपने स्तर पर करना है - नैतिकता की बजाय अपनी चेतना को निखारने का काम, जिसमें सहयोगी निसंदेह हम सब लोग हो सकते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यहाँ लोगों की लाउड स्पीकर वाली भक्ति ने प्रकृति से पंछियों की सुरीली चहचहाहट के साथ शुरू होने वाली सुबहों को भी छीन लिया। कहीं तो, कभी तो, कुछ तो प्राकृतिक रहने दिया होता, प्रकृति के सबसे बुद्धिमान (?) प्राणी! ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • प्रकृति के मूल तत्व से जुड़े बिना भेद समाप्त हो ही नहीं सकते। एक जगह से धुंधले होंगे तो दूसरी जगह उभर आयेंगे। बाहर की क्रांतियाँ कभी-कभी ठीक होती है, लेकिन उससे पहले जरुरत भीतरी क्रांति की है। भीतर जो बदलेगा वह स्वाभाविक और स्थायी होगा। केवल बाहर जो बदलेगा वह बस रूप बदलेगा। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यहाँ एक ओर परंपरा, धर्म और संस्कृति का शोर सुनाई देता है जो मात्र दिखावा बनकर रह गये हैं, तो दूसरी ओर वेस्टर्न कल्चर हावी है, जो मात्र भ्रम लगता है। इन दोनों से इतर कोई प्रकृति की बात क्यों नहीं करता? कितना आकर्षित करती है वह! ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कहते हैं कि प्रकृति तीन गुणों से मिलकर बनी है...तम, रज और सत्व। सबमें ये गुण अलग-अलग समय में अलग-अलग मात्रा में होते हैं, जिन पर कई कारकों का प्रभाव पड़ता है और इस त्रिगुण प्रकृति को माया कहा जाता है। जो इन तीनों गुणों से ऊपर उठ जाता है (त्रिगुणातीत), वह अपनी वास्तविक प्रकृति (निर्गुण) को पा लेता है। अर्थात् अपने मूल रूप में हम सभी एक ही हैं। आंशिक ही सही कभी-कभी यह अनुभूति होती भी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हम जब प्रकृति के संरक्षण की बात कहते हैं तो हम अपने ही संरक्षण की बात कह रहे होते हैं। बाकी मनुष्य रहे न रहे...प्रकृति या इस पूरे ब्रह्माण्ड को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ने वाला। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • प्रकृति अपनी प्रगति एवं विकास में रुकना नहीं जानती और हर अकर्मण्यता पर अपने शाप की छाप लगाती जाती है। ~ गेटे 
  • जो बसे हैं, वे उजड़ते हैं, प्रकृति के जड़ नियम से। पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है? है अँधेरी रात पर दिया जलाना कब मना है? ~ हरिवंश राय बच्चन / Harivansh Rai Bachchan 
  • विवाह के मंत्र कर्त्तव्य बुद्धि दे सकते हैं, भक्ति दे सकते हैं किन्तु माधुर्य देने की शक्ति उनमें नहीं है। यह शक्ति केवल प्रकृति के दिए नियम पालन में है। ~ शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय / Sarat Chandra Chattopadhyay
 
How are these quotes about nature?