Monday, June 13, 2016

Poem on Life and Death in Hindi

जीवन मृत्यु कविता, आत्मज्ञान, सत्य की खोज. Poem on Life and Death Cycle in Hindi. Hide Seek, Jeevan Mrityu Kavita, Aatma Gyan, Search of Truth, Self Knowledge.

छुपम-छुपाई

अपने ही साथ
छुपम-छुपाई का खेल
खेल रहे हैं हम तबसे,
आये हैं इस दुनिया में जबसे।

लम्हा-लम्हा कर रहे
खुद अपनी ही तलाश!
पर राह जो चुनी है हमने
वह बुन रही है एक पाश!

वह पाश
जो उलझा देता है हमें
पसंद और नापसंद के घेर में।
वह पाश जो
भटका रहा है हमें
जन्म और मृत्यु के फेर में।

पसंद के खाने, गाने और
बजाने से लेकर
प्रेम के अफसाने तक!
घर बनाने और सजाने से लेकर
बच्चों के खिलखिलाने तक!

हर पल हमने
खुद को ही तलाशा है,
हम तो कहीं न मिले खुद को
पर बढ़ती ही रही
आशा और निराशा है।

भ्रम टूटते रहे
हम चूकते रहे।
बाहर जो थी दौड़
उसमें सब छूटते रहे।

स्वप्न बिखरे
और बस आँसू रह गए
ताश के पत्तों से
सारे किले ढह गए

अपने ही साथ
छुपम-छुपाई का खेल
खेल रहे हैं हम तबसे,
आये हैं इस दुनिया में जबसे।

By Monika Jain ‘पंछी’

How is this hindi poem about Life and Death cycle?