Sunday, August 28, 2016

Sensitive Quotes in Hindi

संवेदनशील, संवेदनशीलता, संवेदना, समानुभूति, सहानुभूति उद्धरण. Sensitive Insensitive People Quotes in Hindi. Sensitivity, Insensitivity, Empathy, Sympathy.

Sensitive Quotes

  • व्यक्ति और घटनाओं पर चर्चा में हमेशा से ही आवश्यकता से अधिक रूचि नहीं रही। व्यक्तिगत जीवन में इसका प्रत्यक्ष नुकसान यह हुआ कि सामने वाले ने अपनी गलतियाँ छिपाकर कितनी ही मनगढ़ंत कहानियां बनाई और एक ही पक्ष को सुनकर निष्कर्ष निकाल बैठी दुनिया में मेरी अंतर्मुखता, संवेदनशीलता और कभी-कभी अपने हिस्से का अपराध बोध मेरा पक्ष प्रकट नहीं कर पाया। लेकिन इस प्रत्यक्ष नुकसान के कई अप्रत्यक्ष और आंतरिक लाभ भी होते हैं जिनके सामने ये अस्थायी नुकसान मायने नहीं रखते। हालाँकि किसी समय विशेष पर हमें चुप रहना है या बोलना है यह पूरी तरह से समझ और जागरूकता का विषय है लेकिन अनावश्यक अतिप्रचार और दुष्प्रचार तो कुंठित मन का ही काम होता है। इसके अलावा किसी घटना या व्यक्ति विशेष के प्रति ही हमारी संवेदना संवेदना कम भावुकता अधिक हो जाती है। क्योंकि जिस समाज में संवेदनशीलता होती है वहां दुर्घटनाएं कम ही होती है। विचारों और भावनाओं (जो कि घटनाओं का मूल है) उन्हें छोड़कर सिर्फ और सिर्फ घटनाओं और व्यक्तियों पर चर्चा होना ही हमारी संवेदनहीनता की ओर एक इशारा है। बाकी तो घटनाओं, किस्से और कहानियों की उपयोगिता सिर्फ इतनी ही है कि वे हमें उनकी जड़ों तक पहुँचने में मदद करे, जहाँ से उनकी उत्पत्ति होती है। और जड़ें कहीं बाहर नहीं होती। जड़ें भीतर ही होती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यूँ तो आदर्श दृष्टिकोण से किसी भी तरह का मोह,आसक्ति या जुड़ाव सही नहीं होता। लेकिन किसी गलत व्यक्ति, वस्तु, आदत...आदि से जुड़ाव की गलती चक्रवृद्धि ब्याज की तरह फलित होती ही रहती है। आपका एक बार कहा गया ’आ बैल मुझे मार’ बैल द्वारा हमेशा के लिए रिकॉर्ड करके भी रखा जा सकता है। ताकि बार-बार, हजार बार सुना और सुनाया जा सके। और फिर एक बार की गलती की सजा आपको न जाने कितनी बार भुगतनी होती है। किसी की परिस्थितिजन्य मामूली सी गलती जो भोलेपन और अनजाने में हो गयी है उसका बार-बार मखौल उड़ाकर उसे गंभीर अपराध सिद्ध करने वाले लोग काश यह समझ पाते कि वे कितनी बड़ी गलती और अपराध कर रहे हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हम ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ किताबी और डिजिटल कहानियाँ पढ़ते-सुनते समय मुंह खुला रह जाता है, आँखें छलक पड़ती है, कानों में चीत्कारें गूँजने लगती है, पर यहीं आँखें, कान और मुंह असल कहानियों के सामने बंद हो जाया करते हैं। नैतिकता और संवेदनशीलता अब बस कागजों और कीबोर्ड को गीला करने के लिए ही बची है या फिर सिर्फ रोनी-धोनी स्माइली बनाने के लिए। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • धर्म का आधार होता है - अहिंसा, करुणा और समानुभूति। हमारे भीतर ऐसी संवेदनशीलता होनी चाहिए कि अगर कोई और व्यक्ति तकलीफ में हो तो उसकी पीड़ा का अहसास हमें भी हो। हमें अहसास होता तो है पर सिर्फ वहाँ जहाँ हमारा अनुराग होता है। किसी का अपना बच्चा बीमार हो गया तो उसे पीड़ा होगी लेकिन वही पीड़ा पड़ोसी के बच्चे के बीमार होने पर नहीं होगी।
    जहाँ सच में संवेदनशीलता होती है, अनुकम्पा होती है वहाँ तेरे-मेरे की दीवार नहीं होती। वहाँ अपनों के लिए वात्सल्य और परायों के लिए आत्मीयता का अभाव, ऐसा नहीं होता। लेकिन आज हमने अपनी नैतिकता और संवेदनशीलता को सिर्फ अपनों तक सीमित कर रखा है जिसकी सीमा हमारे स्वार्थ के अनुसार बदलती रहती है।

    आज जितनी भी आपराधिक घटनाएँ होती है, उसका मूल कारण संवेदनशीलता का अभाव है जिसकी वज़ह से मनुष्य दूसरों के दुःख, दर्द और पीड़ा का अनुभव नहीं कर पाता। इसलिए बहुत जरुरी है अपनी संवेदनाओं को जाग्रत करना। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 'असंवेदनशीलता' समस्या बस यही है और कुछ भी नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अच्छा करने पर अच्छा होता है या नहीं, पता नहीं। बुरा करने पर बुरा ही होगा, ये भी नहीं जानती। पर हाँ इतना पता है कि एक संवेदनशील ह्रदय के लिए किसी भी अपराध बोध के साथ जीना बेहद मुश्किल होता है।...और आत्म संतुष्टि एक ऐसी चीज है जिसके सामने क्या मिल रहा है और क्या खो रहा है, मायने नहीं रखता। ~ Monika Jain ‘पंछी’

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