Tuesday, September 6, 2016

Michhami Dukkadam - Kshamavani Parva in Hindi

क्षमावाणी पर्व, क्षमा दिवस. Michhami Dukkadam, Daslakshan Kshamavani Parva, Jain Paryushan Uttam Kshama Divas, Samvatsari Kshamapana Messages, Khamat Khamna Sms.

क्षमत क्षमापना

हर दिवस विशेष पर यह बात सुनने को मिलती ही है कि वर्ष में सिर्फ एक ही बार क्यों? बात सही भी है कि वर्ष में सिर्फ एक ही दिन क्यों? तो सबसे पहले तो हमसे किसने और कब मना किया कि हम किसी चीज को वर्ष में सिर्फ एक ही बार अहमियत दें? किसी ने किया क्या? चलो हम वर्ष में सिर्फ एक दिन मनाना भी छोड़ देते हैं। लेकिन क्या सिर्फ उससे हम वर्ष में बाकी सब दिन वह मानने लगेंगे। बल्कि मुझे तो यह लगता है कि ये सब दिवस हमारी भागदौड़ वाली जीवन शैली की ही देन है कि जिन चीजों को रोजमर्रा की ज़िन्दगी में अहमियत मिलनी चाहिए थी...कम से कम उन्हें हम साल में एक बार तो याद कर लें।

एक दृष्टान्त देती हूँ : एक ही परिवार के दो सदस्य थे। दोनों में किसी विवाद के बाद से 8-10 वर्षों तक अनबोला रहा। दोनों कभी परिवार में साथ-साथ होते तब भी अजनबियों की तरह होते थे। मन में एक तरह का तनाव या खिंचाव रहता ही होगा। अहम् बड़ा था इसलिए किसी ने बात करने की शुरुआत भी नहीं की। फिर एक दिन क्षमापना दिवस के दिन परिवार के बाकी सदस्यों को बात करते देख उनमें से एक ने किसकी गलती थी और किसकी नहीं इस बात को पूरी तरह से नजरंदाज कर क्षमा मांग ली...और फिर सब कुछ पहले की तरह से नार्मल हो गया। उसके बाद कभी बात बंद होने की स्थिति नहीं आई।

तो इस तरह से कोई दिन विशेष प्रेरणा का काम भी कर सकता है। बल्कि इन दिवसों का वास्तविक उद्देश्य भी यही है कि ये हमारे लिए प्रेरक बनें। तो जब कोई क्षमावाणी जैसे पर्व पर भी व्यंग्य करता हुआ या उसका विरोध करता हुआ दिखाई देता है तो यह नकारात्मकता की अति लगती है। यह मैं इसलिए नहीं कह रही क्योंकि मेरे नाम के साथ ‘जैन’ का टैग लगा है। यह मैं इसलिए कह रही हूँ क्योंकि यह कहना जरुरी है। बाकी न ही ‘जैन’ शब्द पर और न ही ‘क्षमा’ शब्द पर किसी का भी एकाधिकार है। ‘क्षमा’ का अर्थ तो सभी जानते ही हैं बाकी ‘जैन’ शब्द भी ‘जिन’ शब्द से बना है। ‘जिन’ का अर्थ होता है जिसने ‘राग’ और ‘द्वेष’ को जीत लिया हो...और इस नाते जैन वे सब होंगे जो इस मार्ग के अनुयायी होंगे। खैर! किसी को जैन कहलवाना न कहलवाना मेरा उद्देश्य नहीं है। मुझे तो खुद ही ख़याल नहीं रहता कि सिर्फ किसी शब्द के जुड़ जाने से मैं किसी से अलग भी हो सकती हूँ। पर हाँ, अगर इस क्षमा पर्व के सम्बन्ध में कोई चीज है जो प्रकृति को, लोगों को, प्राणियों आदि को नुकसान पहुँचा रही हो तो मैं खुद आपके साथ उसका विरोध करुँगी। लेकिन कृपया विरोध करने के लिए विरोध या व्यंग्य करना बंद कीजिये। यह अच्छा नहीं है।

खैर! आज यह सब बातें करने का समय नहीं है। जब भी लगता है गलती की है, तो क्षमा मांगने का ख़याल रहता है। लेकिन आज विशेष दिन है :

तो सबसे पहले उन मित्रों से क्षमा जो फेसबुक के शुरूआती दिनों में बने थे। कुछ स्कूल जाने वाले बच्चे थे। एक बार किसी ने कहा था, ‘मोनिका दी, आप बहुत बदल गयी हो। पता नहीं क्या-क्या लिखती हो। हमें पहले वाली मोनिका दी चाहिए।‘ :) बदलाव तो खैर प्रकृति का नियम है। मैं इससे अछूती कैसे हो सकती हूँ? पहले जैसी रहूँ न रहूँ, संपर्क रहे न रहे। लेकिन मन में स्नेह और दुआएं हमेशा रहेंगी। बचपन, स्कूल और कॉलेज के मित्रों की भी यही शिकायत होगी। अत: उनसे भी अंतर्मन से क्षमा याचना।

क्षमा उन सभी मित्रों से जो जीवन और फेसबुक की यात्रा के दौरान अमित्र हुए या ब्लॉक किये गए। ऐसे लोग नगण्य हैं। लेकिन उनसे बस इतना कहना है कि कभी-कभी दूर होना शायद दोनों के ही हित में होता है। समय के गर्भ में क्या है पता नहीं...लेकिन मन में किसी के लिए भी किसी तरह का द्वेष न रहे इसका पूरा प्रयास रहेगा।

क्षमा उन सभी मित्रों से जिन्हें मेरी किसी भी बात, पोस्ट, कमेंट, व्यवहार आदि ने आहत किया। भावनाओं के प्रवाह में कभी-कभी ऐसी गलतियाँ हो जाती है जो सामने वाले को आहत कर जाती है। इसके अलावा मतों में भिन्नता को भी दिल पर ले जाते हैं हम लोग। मतभेद मिटे न मिटे, लेकिन मनभेद न रहे इसका पूरा प्रयास रहेगा।

क्षमा उन सभी मित्रों से जिन्होंने कभी कोई सन्देश भेजा हो और उसका जवाब मैंने न दिया हो। मेरा दिल निश्चय ही इतना बड़ा नहीं कि मैं हर या किसी भी तरह के सन्देश का जवाब दे सकती हूँ। लेकिन उपेक्षा आहत करती है और इसके लिए क्षमा याचना।

क्षमा उन मित्रों से जिनसे मैंने अनावश्यक अपेक्षाएं की हों और उन्हें बुरा लगा हो। अपेक्षाओं से पूर्ण मुक्ति बहुत मुश्किल है। इसलिए अभी आपसे क्षमा की अपेक्षा है। :)

क्षमा सृष्टि के हर जीव से, अजीव से...जिनसे भी मैंने जाने-अनजाने में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप से राग या द्वेष का सम्बन्ध बनाया हो। यह क्षमा राग व द्वेष को जीतकर विशुद्ध प्रेम के प्रकट होने में हमारी मदद करे इसी मंगल कामना के साथ क्षमत-क्षमापना। :)

By Monika Jain ‘पंछी’

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