Wednesday, October 26, 2016

Break Up Poem in Hindi

Break Up Poem in Hindi. Breaking Love Kavita, Broken Relationship with Boyfriend Poetry, Marriage Breakup Shayari for Him, Story, Sms, Status, Lines, Messages.

Break Up Poem in Hindi

क्यों बदल गयी ये कहानी? 

एक दौर था जब
हर बात मेरी
तारीफ तेरी पा जाती थी
एक दौर था जब…...

फूलों से भी ज्यादा मेरी
ख़ुशबू तुझको भाती थी
कोयल से भी ज्यादा मीठी
मेरी बोली तुझे लुभाती थी
एक दौर था जब…...

मोती बिखर पड़े हो जैसे
मेरी हंसी तुझे यूँ रिझाती थी
जैसे चंदा ने बरसाई चांदी
मुस्कान मेरी यूँ लुभाती थी
एक दौर था जब……

आँखों में मेरी एक गहरा सा
तुझे सागर नज़र जो आता था
घंटो देखा करता मुझको
और मुझमे डूब जाता था
एक दौर था जब……

मेरा गुस्सा, मेरा ताना
तेरा हँसना और मनाना था
मेरी चुप्पी, मेरा गाना
हर बात का तू ही दीवाना था

क्यों बदल गया है दौर वो अब?
क्यों बदल गया है पानी?
क्यों बदल गया है तू बिल्कुल?
क्यों बदल गयी ये रवानी?

तेरा ख्वाब हुआ करती थी मैं
क्यों वहां रही न ये दीवानी?
कुछ भी न रहा पहले जैसा
क्यों बदल गयी ये कहानी?

By Monika Jain 'पंछी'

Listen or watch the video of this poem about break up in my voice.


Friday, October 21, 2016

Essay on Diwali in Hindi

दिवाली पर निबंध, दीपावली लेख. Essay on Diwali in Hindi for Kids. Deepavali ka Tyohar Nibandh, Festival of Lights Article. Deepawali Paragraph, Anuched, Speech.

Essay on Diwali in Hindi

जीवंतता कभी बुझ न पाए

दीपक जलकर रोशन करता है अँधेरे...तो जब अंधकार पर प्रकाश की विजय का, असत्य पर सत्य की विजय का, बुराई पर अच्छाई की विजय का, अन्याय पर न्याय की विजय का और मूर्छा पर होश की विजय का उत्सव मनाने की बात आती है तो प्रतीक दीपक से बेहतर और क्या हो सकता है? हमारे सारे उत्सव भी तो प्रतीक ही हैं। ये उत्सव क्यों बनाये गए? इन प्रतीकों की जरुरत क्यों पड़ी?...ताकि हमारी विस्मृति बनी रहे कि हमारा मार्ग क्या है। हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है। भारत में तो हर दिन कोई न कोई उत्सव होता ही है। हमारे उल्लास, उत्साह और हर्ष को बनाये रखने के लिए और किसी मार्ग विशेष पर चलने की प्रेरणा के स्त्रोत के रूप में ही उत्सवों का प्रचलन शुरू हुआ होगा। लेकिन वर्तमान के सन्दर्भ में ये उत्सव अपने उद्देश्य को पूरा कर पाने में कितने सफल हैं, इसका संज्ञान लेना भी बहुत जरुरी है।

जरुरी है त्योहारों का वैज्ञानिक-अध्यात्मिक पक्ष भी प्रकट किया जाए। सामाजिक पारिवारिक सौहार्द वाली बात ठीक है लेकिन केवल कंडीशनिंग और मिथकों के आधार पर कुछ भी करते जाना आस्तिकता को पुष्ट नहीं करता। बल्कि धर्म और अधर्म की जो सबसे उपयुक्त और सदा प्रासंगिक रहने वाली परिभाषा है वह है ही यही कि जो भी कार्य होश या जागरूकता में किया जाए वह धर्म है और जो भी कार्य बेहोशी में किया जाए वह अधर्म।

लेकिन कंडीशनिंग का हाल यहाँ ऐसा है कि दिवाली के पटाखों को लेकर (आजकल तो जन्माष्टमी और छठ पूजा पर भी छूटने लगे हैं) कोई व्यक्ति बात शुरू न करे उससे पहले ही यहाँ हिंदुत्व ख़तरे में आ जाता है। मानों हिंदुत्व का अस्तित्व केवल पटाखों पर ही टिका है। इसी ख़तरे के तहत ‘बाकी धर्मों का भी यही हाल है’ यह बोलना जरुरी है यहाँ।...और ये कंडीशनिंग ऐसी है कि आने वाले समय में बच्चे दीपावली पर निबंध में लिखा करेंगे : आज के दिन अयोध्या वासियों ने श्री राम का स्वागत पटाखे छोड़कर किया था। केवल संस्कृति और परंपरा के नाम पर हम उत्सवों में होने वाली बेबुनयादी और गैरजिम्मेदार चीजों को स्वीकृति नहीं दे सकते। किसी एक का उत्सव दूसरे की पीड़ा न बन जाए इसका ख़याल रखना भी तो जरुरी है न?...और समय के साथ-साथ गैरजरूरी चीजों और दूषित परम्पराओं से छुटकारा भी।

वैसे सबके पास अपने-अपने कारण है दिवाली मनाने के, इसलिए दिवाली किसी वर्ग विशेष का त्यौहार बनकर रहा ही नहीं। किसी के लिए राम की विजय और उनके अयोध्या वापस लौटने का उल्लास है, तो किसी के पास महावीर के निर्वाण प्राप्त करने का। किसी के पास फसल कटकर घर आने का उत्साह है तो किसी के पास गौतम बुद्ध के स्वागत का। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध चाहे जितने भी पंथ या संप्रदाय हो दिवाली एक ऐसा त्यौहार है जो सीमाओं और वर्गों में बंधकर कभी रहा ही नहीं।...और फिर रौशनी को बाँटा भी कहाँ जा सकता है? उस पर तो सबका पूरा-पूरा अधिकार है

दिवाली सूक्ष्म सफाई अभियान के भी अपने वैज्ञानिक पहलु हैं। वर्षा के बाद बढ़ जाने वाली सीलन, नमी, फफूंद आदि से इस सफाई के द्वारा निजात पायी जाती है। घर के हर कोने, छोटी से छोटी हर चीज को दिवाली के बहाने साल में एक बार संभाल लिया जाता है। अतिरक्त और अनुपयोगी सामान निकाल दिया जाता है। सर्दी के कपड़ों को धूप दिखाकर आने वाली सर्दी की तैयारी कर ली जाती है। वैसे मनुष्य कितना परिग्रही है इसका अहसास दिवाली सफाई अभियान में हो ही जाता है। अपने परिग्रह को कम करने का भी यह एक अच्छा अवसर है।

दिवाली यही याद दिलाने आती है हर साल कि हमारे भीतर की जीवंतता कभी बुझ न पाए।...और इस जीवंतता की रौशनी में हमारी दृष्टि स्पष्ट बने। अज्ञान के बादल जिन्होंने ढक रखा है हमारे मन को, उन्हें हम छितरा दें। आशा है यह दिवाली हमारे मन के अंधेरों को जीतने में सहायक बनेगी। इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ : Happy Diwali. :)

By Monika Jain ‘पंछी’

Thursday, October 20, 2016

Nice Quotes in Hindi

अच्छे विचार, वचन, सुविचार. Nice Quotes in Hindi. Achchhe Vichar, Vachan, Fair Quotations, Good Sms, Messages, Status, Lines, Sayings, Thoughts, Proverbs.

Nice Quotes

  • सारी कायनात में मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो समूची प्रकृति और इसके समस्त जीवों का क्रूर से क्रूरतम तरीके से शोषण करता है।...और ताज्जुब यह है कि इसी शोषण के आधार पर वह प्रकृति के सबसे श्रेष्ठ और बुद्धिमान प्राणी होने का दंभ भरता है। मनुष्य नामक प्राणी होने के नाते चारो तरफ यह जितना भी विकास है...कई बार इसे देखकर मुझे आत्मग्लानि महसूस होती है। प्रकृति को निचोड़-निचोड़ कर अपने अधीन कर लेने का मनुष्य का सपना तो हमेशा सपना ही रहना है, क्योंकि इस सपने को पूरा होते हुए देखने के लिए वह शेष रहेगा नहीं। पर काश! वह समझ पाता कि अपने अहंकार और महत्वकांक्षाओं के चलते किसी और का अपराधी वह खुद को माने न माने लेकिन खुद अपना तो सबसे बड़ा अपराधी है ही। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • प्रेम अँधा होता है...यह जितना सच है, उतना ही सच है यह भी कि प्रेम के अतिरिक्त और किसी के पास आँखें होती ही नहीं। शब्दों के अर्थ बदलते ही सारा परिदृश्य बदल जाता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जो बांधेगा, उसका बंधना तय है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • शर्तें प्रकट हो या अप्रकट होती तो शर्तें ही हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ऐसा नहीं हो सकता न कि तुम किसी को प्रेम करो और वह तुम्हारे व्यक्तित्व में शामिल न हो। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • परिपक्वता : आज जिन बातों के लिए हम परेशान हैं, कल हम उन पर हंसने वाले हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हर किसी पर विश्वास कर लेना खतरनाक है लेकिन किसी पर भी विश्वास न करना बहुत ही ज्यादा खतरनाक है। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln  
  • जो सबका मित्र होता है, वह दरअसल किसी का मित्र नहीं। ~ अरस्तु / Arastu 
  • प्यार कभी एकतरफा होता है न होगा। दो रूहों के मिलन की जुड़वा पैदाइश है ये। प्यार अकेला नहीं जी सकता, जीता है तो दो लोगों में, मरता है तो दो मरते हैं। ~ गुलजार / Gulzar 
  • पूरी पंक्तियाँ दिखाई नहीं देने के बावजूद कदम बढ़ा देना आस्था है। ~ मार्टिन लूथर किंग जूनियर / Martin Luther King Junior 
  • मैं समाचार पत्र यह जानने के लिए पढ़ता हूँ कि ईश्वर विश्व पर किस प्रकार शासन करता है। ~ जोसेफ फोर्ट न्यूटन / Joseph Fort Newton 
  • किसी भी चीज की गुणवत्ता प्रचुरता से कहीं ज्यादा बेहतर होती है। दो-दो रन जोड़ने से एक छक्का लगाना कहीं ज्यादा अच्छा है1 ~ स्टीव जॉब्स / Steve Jobs 
  • जब आप शहद की तलाश में जाते हैं तो मधुमक्खियों द्वारा काटे जाने की संभावना स्वीकार करनी चाहिए। ~ जोसेफ जोबर्ट / Joseph Joubert 
  • कम से कम के बारे में अधिक से अधिक जानने वाले को विशेषज्ञ कहते हैं। ~ एन बटलर / Ann Butler 
  • मैं सुख साधनों का कतई तिरस्कार नहीं करता, लेकिन इनका अपना एक स्थान है और वह पहला नहीं है। ~ ई. एफ. शुमाकर / E F Schumacher 
  • पहले उन कामों को पहचानिए जिन्हें किया जाना जरुरी है, फिर उन्हें करने का रास्ता खोजिये। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln 
  • तीन चीजें ज्यादा समय तक छिपी नहीं रह सकती - सूर्य, चाँद और सच। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha

Thursday, October 13, 2016

Politics Quotes in Hindi

राजनीति, सियासत. Politics Quotes in Hindi. Political Quotations, Politicians, Raajneeti Sms, Government, Diplomacy Status, Rajniti Suvichar, Messages, Slogans.

Politics Quotes

  • ऐसे...वैसे...जैसे भी...जिन-जिन को अटेंशन पाना होता है...लगता है राजनीति उन सबके लिए ही रह गयी है। बिल्लियों की लड़ाई में बन्दर रोटी ले जाता है। भारत का तो कितना पुराना सम्बन्ध है इस कहानी से।...पर यहाँ बिल्लियाँ इतिहास से कुछ सीखती नहीं...बल्कि वे तो भूतकाल की किसी रोटी (जो अस्तित्व में ही नहीं) के लिए भी लड़ लेती है...वर्तमान और भविष्य के तो कहने ही क्या! ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • आज कहीं लिखा पढ़ा कि 'हम XYZ धर्म से हैं इसलिए ZYX नहीं खाते।' पढ़कर कुछ अजीब लगा...पर अक्सर ऐसी बातें कह दी जाती है। लगभग सबने कभी न कभी कही होगी किसी न किसी सन्दर्भ में। लेकिन मांसाहार, जमीकंद, दूध या कोई भी चीज छोड़ने का कारण या कुछ भी अपनाने का कारण जैन, ब्राह्मण, मुस्लिम, ईसाई या कुछ भी क्यों होना चाहिए? सिर्फ खाने की बात ही नहीं, बहुत सी चीजें और परम्पराएँ ऐसे ही चलती आ रही है सदियों से...ज्यादातर लोगों को कारणों से कोई मतलब ही नहीं होता। अगर सच में कारण जानने की कोशिश की जाए तो बहुत कुछ और जो जरुरी है वह भी छूट जाये और अपना लिया जाए। क्योंकि चीजे छोड़ी नहीं जाती छूट जाती है...और हाँ XYZ और ZYX पर ज्यादा ध्यान न लगाया जाए। मुझे नफ़रत की राजनीति नहीं आती। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 'राजनीति' शब्द से ही ऐतराज है। जो नीति ही राज करने की हो...वह कोई अच्छी नीति तो हो नहीं सकती। लोकतंत्र के लिए 'लोकनीति' जैसा शब्द ही प्रचलन में होना चाहिए। हालाँकि शब्दों के भीतर के खोखलेपन से हम सब वाकिफ़ हैं और उसे भरने के लिए बहुत कुछ करना शेष है। लेकिन सबसे पहले शब्द तो उचित हो। कुछ लोग कहेंगे नाम में क्या रखा है? नाम में रखा तो कुछ नहीं है। लेकिन नाम के अर्थ और ध्वनि के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभाव तो होते ही हैं। अच्छे प्रभाव हो न हो...बुरे तो होते ही हैं। भाषा की मर्यादा इसलिए ही जरुरी है। और सकारात्मकता...वह तो हर स्तर पर जरुरी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • नेता तो रहे बस एक ही थाली के चट्टे-बट्टे...पर उनके पीछे तुमने कितनों से किये मन खट्टे? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कोई सा भी पंथ हो या वाद...अच्छा नेता बनने के लिए सिर्फ भाषण देना आना चाहिए और केवल नेता बनने के लिए वह भी जरुरी नहीं। देश के सबसे जिम्मेदार पदों के लिए हमारे यहाँ यह योग्यता है। ~ Monika Jain ‘पंछी 
  • किसी ने कहा, 'आप राजनीति पर कुछ क्यों नहीं लिखती?' एक्चुअली लम्बे समय से राजनीतिमय हो रखी फेसबुक पर बारी-बारी से एक ही व्यक्ति के पक्ष और विपक्ष में आने वाली ख़तरनाक पोस्ट्स पढ़-पढ़ कर दिमाग ने काम करना बिल्कुल बंद कर दिया है और मेरी कलम इससे ज्यादा और कुछ लिख ही नहीं पाती :
    भक्तजनों!
    न राहुल का द्वार, न केजरी का दरबार
    और न ही मोदी की सरकार
    किसी के हाथों नहीं होना तुम्हारा उद्धार
    जिनके लिए लड़-झगड़ कर करते हो दिन बेकार
    वे सब कुछ खाकर भी लेंगे नहीं डकार। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • राजनीति में भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण सदा लाभदायक होते है। ~ वृन्दावनलाल वर्मा / Vrindavan Lal Verma

Feel free to add your views or more quotes about politics.

Friday, October 7, 2016

Meaningful Quotes in Hindi

सार्थक विचार, अर्थपूर्ण. Meaningful Quotes in Hindi. Important, Worthwhile Status, Worth Reading Lines, Worthy Words, Significant Meaning Sms, Messages.

Meaningful Quotes

  • जानना और छूटना साथ-साथ चलता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • बहुत मतलबी हो गयी हूँ मैं! अक्सर खुद समझकर खुद के लिए ही लिख देती हूँ। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • वह सहानुभूति बटोरने में माहिर है। अपनी गलतियाँ छिपाने का उसका यह तरीका है। वैसे वह अक्सर कहता है ईश्वर सब देखता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • आकार का निराकार बनते जाना ही प्रेम है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जहाँ सन्दर्भ खत्म होते हैं...सत्य वहां होता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • मुझे अपने आपको दूसरों की नज़रों से परखने की प्रवृति छोड़ने में लम्बा समय लग गया। ~ सेली फील्ड / Sally Field 
  • जीवन उस इंसान के साथ बिताएं जो आपको ख़ुशी दे, उसके साथ नहीं जिसे आपको हमेशा प्रभावित करना पड़े। ~ अज्ञात / Unknown 
  • जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है, उसी प्रकार ह्रदय की मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है। मनुष्य की वाणी जो शब्द विधान करती आई है, उसे कविता कहते हैं। ~ आचार्य रामचंद्र शुक्ल / Acharya Ramchandra Shukla 
  • सीधे ही किसी निष्कर्ष पर कूद पड़ना कभी-कभार ही खुशहाल पड़ाव पर पहुंचता है। ~ एस. सिपोरिन / S. SIporin 
  • थोड़ा बोलो, थोड़े शब्दों में अधिक करो। ~ एपोक्रिफा / Apokrifa 
  • एक का अनुकरण करके दूसरा भी बुरा काम करने लगता है, लेकिन परमार्थ के काम का कोई भी अनुकरण नहीं करता। अन्धानुकरण से आत्मविश्वास के बजाय आत्म संकोच होता है। ~ योगिराज अरविन्द / Yogiraj Arvind 
  • सौहार्द वाले, समान व्रत वाले होकर भद्र भाव से वचन बोलो। ~ अथर्ववेद / Atharva Veda 
  • परमेश्वर से बस एक कठोर चमड़ी और एक कोमल ह्रदय भर मांगिये। ~ रुथ ग्राअम / Ruth Graham 
  • जो जैसी संगति करता है वह वैसा ही फल पाता है। ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi 
  • अच्छा कवि होना चाहते हैं तो अच्छे श्रोता भी बनें। ~ वाल्ट व्हिटमैन / Walt Whitman 
  • जो हर झाड़ी की जांच करता है, वह वन में क्या घुस पायेगा। ~ जर्मन कहावत / German Sayings 
  • मनुष्य जिस समय पशु तुल्य आचरण करता है, उस समय वह पशुओं से भी नीचे गिर जाता है। ~ रवीन्द्रनाथ टैगोर / Rabindranath Tagore 
  • कभी भी सफाई नहीं दें। आपके दोस्तों को इसकी आवश्यकता नहीं है और आपके दुश्मनों को विश्वास ही नहीं होगा। ~ अल्बर्ट हब्बार्ड / Elbert Hubbard 
  • तूफ़ान और बवंडर में बड़े-बड़े पेड़ समूल उखड़ जाते हैं लेकिन कोमल लता पर कोई असर नहीं होता। अहम् को भूल कोमल लता की भांति आचरण करना चाहिए। ~ भगवती प्रसाद वाजपेयी / Bhagwati Prasad Vajpayee 
  • जब आप स्थितियों को देखने का नज़रियां बदल लेते हैं तो स्थितियां भी अक्सर बदल जाया करती है। ~ वायन डायर / Wayne Dyer 
  • बजट हमें यह तो जानकारी देता है कि हम कौन सी वस्तु खरीदने में समर्थ नहीं हो सकते, लेकिन वह खरीदने पर पाबंदी नहीं लगा सकता। ~ विलियम फीदर / William Feather 
  • इस बात का महत्व नहीं है कि दुनिया में हम कहाँ खड़े हैं, महत्त्व तो इस बात का है कि हम किस दिशा में अग्रसर हैं। ~ Oliver Wendell Holmes / ओ. डब्ल्यू. होम्स 
  • हम जो हैं, वही बने रहकर, वह नहीं बन सकते, जो हम बनना चाहते हैं। ~ मैक्स डेप्री / Max Depree

Feel free to add your views or more meaningful quotes.

Saturday, October 1, 2016

Rat Story in Hindi with Moral

शरारती चूहे की कहानी, जंगल कथा, जानवर, चूहा. Rat Story in Hindi with Moral for Kids. Chuhe ki Kahani, Chuha, Mischievous, Naughty Mouse, Forest Animals Tales.

डालू चूहे का नया जन्म
(नन्हें सम्राट में प्रकाशित)

डालू चूहा बड़ा ही शैतान था. दूसरों को परेशान करने में उसे बड़ा मजा आता था. अपने चमकीले, सफ़ेद, पैने दांतों पर उसे बड़ा घमंड था. अपने नुकीले दांतों से वह कभी किसी के कपड़े कुतर आता तो कभी खाने-पीने की चीजों की बर्बादी कर देता. चंपक वन में किसी के भी घर में कोई भी नया सामान आता और डालू को उसकी ख़बर लग जाती तो वह पहुँच जाता अपनी शरारत करने. शातिर इतना था कि कभी किसी के भी पकड़ में नहीं आता और बस हीही करके दौड़ जाता.

चंपक वन के सभी जानवर डालू चूहे की हरकतों से बहुत परेशान थे. डालू के माता-पिता भी रोज-रोज के उलाहनों से तंग आ चुके थे. वे डालू को कभी प्यार से समझाते और कभी डांटते पर उस पर किसी भी बात का कोई असर नहीं पड़ता. एक छोटे से चूहे ने सबकी नाक में दम कर रखा था.

शाम को चौपाल पर चर्चा चल रही थी. डालू की बात आई तो गोलू खरगोश बोला, ‘अभी कुछ ही दिन पहले डालू छुपके से मेरे कपड़ों की दूकान में आया और हजारों का नुकसान करके चला गया.’

हीरू हिरण ने कहा, ‘आज मैं अपने खेत में सिंचाई कर रहा था तब ना जाने कब डालू ने नली को बीच में से काट दिया और बहुत सारा पानी बेकार चला गया. मैं उसके पीछे दौड़ा पर हँसते-हँसते जाने कहाँ ओझल हो गया.’

‘मेरी मिठाई की दूकान में तो वह कभी भी आ धमकता है और बहुत सारी मिठाई खाकर और बर्बाद करके चला जाता है. उसे पकड़ने के लिए पिंजरा भी रखा पर शैतान कभी भी पकड़ नहीं आता.’ मोलू कछुएं ने गुस्से में कहा.

सबकी बातें सुनकर भोलू भालू परेशान हो गया. कुछ ही दिन बाद उसकी बेटी की शादी थी. पिछली बार मोंटी बन्दर की शादी में उसने सारे नए-नए कपड़े कुतर डाले थे. इस बार वह कोई गड़बड़ ना कर दे यही सोचकर भोलू भालू चिंता में पड़ गया.

गिन्नी लोमड़ी भोलू भालू की चिंता को भांप गयी. वह बोली, ‘काका ! आप परेशान ना हो. हम मिलकर जल्द ही इस समस्या का कोई हल निकाल लेंगे. डालू के माता-पिता का हम चंपक वन के निवासियों पर बहुत अहसान है. कई बार वे शहर से आये शिकारियों के जाल को काटकर हमें मुक्त कराते हैं. इसलिए हम डालू के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाकर या उसे कड़ी सजा देकर उन्हें दुखी नहीं कर सकते पर डालू को सबक सिखाना बहुत जरुरी है और इसके लिए मैंने कुछ सोचा है.’

गिन्नी ने सभी को अपनी योजना बताई. सभी ने उसकी योजना से सहमति जताई. डालू के माता-पिता को भी इस बारे में बता दिया गया.

योजना के अनुसार दो दिन के बाद गज्जू हाथी के जन्मदिन का उत्सव मनाया जाना था. जिसके लिए एक बहुत बड़ा आकर्षक और सुन्दर केक बनाया गया. इस केक को बनाने में एक थोड़े बहुत चिपकाने वाले पदार्थ का उपयोग किया गया. सभी को पता था जैसे ही डालू को खबर मिलेगी कि चंपक वन में अब तक का सबसे बड़ा और स्वादिष्ट केक बनाया जा रहा है तो वह खुद को रोक नहीं पायेगा और केक को खाने और ख़राब करने जरुर आएगा.

डालू को जब केक के बारे में पता चला तो वह पार्टी शुरू होने के कुछ देर पहले ही आयोजन स्थल पर पहुँच गया. इतना बड़ा और सुन्दर केक देखकर उसका मन ललचा गया और खुराफात भी सूझने लगी. वह केक काटने से पहले ही छुपके से केक पर चढ़ गया और उसे खाने लगा. जैसे ही उसने केक खाना शुरू किया तो कभी उसके हाथ तो कभी उसके पाँव केक में चिपकने लगे. वह एक पाँव छुड़ाता तो दूसरा चिपक जाता और दूसरा छुड़ाता तो पहला. यहाँ तक कि उसके दांत भी आपस में चिपकने लगे जिसकी वजह से वह मदद के लिए चिल्ला भी नहीं पा रहा था.

धीरे-धीरे सभी मेहमान आने लगे. डालू बस धीमी सी आवाज़ में चींचीं कर पा रहा था. पर जान बूझकर कोई भी उस ओर ध्यान नहीं दे रहा था. सभी आपस में बातचीत करने में व्यस्त थे. एक ओर भूख-प्यास और दूसरी ओर केक से बाहर ना निकल पाने के कारण उसका रोना छूट रहा था. उसे अपने माता-पिता और सभी की दी गयी सलाहें और सीखे याद आ रही थी. सब उससे कहते थे जो दूसरों का बुरा करता है उसके साथ भी बुरा होता है...पर उसने कभी किसी की भी नहीं सुनी. वह मन ही मन पछता रहा था और भगवान् से प्रार्थना कर रहा था, ‘हे ईश्वर! बस इस बार मुझे बचा लो. आज के बाद मैं किसी को परेशान करने का ख्याल भी अपने दिमाग में नहीं आने दूंगा.’

कुछ देर बाद डालू चूहे की दबी-दबी आवाजें सुनकर उसके माता-पिता और सभी जानवर केक के पास आये. डालू बार-बार हाथ जोड़कर मदद की गुहार कर रहा था. वह ठीक से कुछ बोल नहीं पा रहा था पर उसका पछतावा उसकी बातों में साफ़-साफ़ झलक रहा था.

डालू का हुलिया देखकर वहां खड़े सभी जानवरों के बच्चे उस पर हंस रहे थे.

डालू के माता-पिता ने कहा, ‘यही तुम्हारी सजा है. अब तुम यही रहो और अपने नुकीले दांतों और फुर्तीले शरीर पर घमंड करते रहो.’

डालू को अपने किये पर बहुत अफ़सोस हो रहा था. उसका सर शर्म से नीचे झुका हुआ था. कुछ जानवरों से देखा ना गया और उन्होंने एक लकड़ी के डंडे की सहायता से डालू को केक से बाहर निकाला. इसके बाद थोड़ा गुनगुना पानी मंगवाया गया और डालू को उससे नहलाया गया. वह बिल्कुल साफ़ हो गया और अब वह चल भी पा रहा था और बोल भी.

वह दौड़ा-दौड़ा अपने मम्मी-पापा के पास गया और उनसे लिपट कर रो पड़ा. उसने सभी से काम पकड़कर अपने किये की माफ़ी मांगी और वादा किया कि अब वह किसी को भी कभी भी परेशान नहीं करेगा और सबकी मदद करेगा.

यह कहकर वह पार्टी में आये सभी मेहमानों को नाश्ता और चाय सर्व करने लगा. डालू में आये बदलाव को देखकर उसके माता-पिता और सभी चम्पक वन के वासी बहुत खुश थे. गज्जू हाथी ने जल्दी से नया केक मंगवाया और कहा, ‘आज तो डालू का भी नया जन्म है इसलिए हम दोनों मिलकर केक काटेंगे.’ गज्जू हाथी ने डालू को अपनी सूंड पर बैठा लिया और फिर दोनों ने मिलकर केक काटा. इसके बाद सबने केक खाया और मिलकर डांस किया. इसके बाद अँधेरा होने पर सभी ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर चले गए.

By Monika Jain ‘पंछी’

Feel free to add your views about this story on a mischievous rat.


Diwali Poem for Kids in Hindi

दिवाली कविता, दीपावली. Diwali Poem for Kids in Hindi. Happy Deepavali Wishes Poetry, Festival Shayari Lines, Nursery Children Rhymes, Sms, Messages, Slogans.
 
Diwali Poem for Kids in Hindi
 
इस दिवाली…

इस दिवाली दिया जलाना
प्रेम और विश्वास का
हर चेहरे पर झलके जो
बन मधुर गीत उल्लास का।

तेल स्नेह का भरती बाती
हर आँगन रोशन कर आती
काश! दिवाली की थाली
कुछ ऐसे सजायी जाती।

इस दिवाली मीठा करना
मुंह धरती से आकाश का
कोई रहे न भूखा-प्यासा
हर मुख हो चाँद उजास का।

धरती के तारो से रोशन
हो अम्बर भी इतराए
जब भूखा-नंगा हर बच्चा
भर किलकारी मुस्काए।

इस दिवाली खूब छुड़ाना
मन से बैर खटास का
हिल-मिल कर सब गीत सुनाना
सुकूं और मिठास का।

By Monika Jain ‘Panchhi’

Feel free to add your views about this kids poem on diwali.