Friday, November 25, 2016

Hate Quotes in Hindi

नफ़रत, घृणा, द्वेष. Hate Quotes in Hindi. Anti Hatred Slogans, Hateful, Haters, Nafrat Suvichar, Hating People Status, Dislike Sms, Messages, Lines, Sayings.
Hate Quotes in Hindi
Hate Quotes

  • कुछ लोगों के अतीत के कड़वे गीत कभी नहीं छूटते या यूँ कहूँ कि कुछ लोगों के मन का जहर कभी जाता ही नहीं। तिस पर चित भी मेरी और पट भी मेरी वाला व्यक्तित्व हो तब तो डील करना बहुत मुश्किल। बार-बार चिंगारी भड़काने की किसी की आदत हो, अपनी गलतियों और उनकी गंभीरता का कभी अहसास हो ही नहीं तो ऐसे व्यक्ति से सुलझने/उलझने की कोशिश मतलब...उलझते ही जाना...उलझते ही जाना और उलझते ही जाना।...और इस कथा का कोई अंत ही नहीं। कुछ लोगों से मुक्त होने का बस एक ही तरीका है...खुद से मुक्त हो जाना। जहाँ उनका जहर और चिंगारियाँ सबको बेअसरदार होना ही है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • तुम इतनी अच्छी क्यों हों?
    क्या तुम्हारे जैसे लोग भी दुनिया में होते हैं?
    आप मेरे जीवन की प्रेरणा हैं।
    आपके शब्दों में दुनिया को बदलने की ताकत है।
    बस तुम ही तो एक दोस्त हो।
    ऐसे 999 वाक्य 999 लोगों के मुंह से सुनकर भी दूर कहीं नफरत लिए बैठे एक व्यक्ति का एक वाक्य इन 999 वाक्यों से उपजी ख़ुशी को पल भर में छीन ले जा सकता है। इतने दुःखवादी क्यों हैं हम? और क्यों ऐसा है कि हमारी खुशियाँ किसी के शब्दों की मोहताज है? असल सुख तो वाकई में भीतर का है जो न 999 लोगों की तारीफ से प्रभावित होता है और न ही किसी एक की नफ़रत के झांसे में आकर दुःख में बदल सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • घृणित कुछ भी नहीं होता, बस त्याज्य होता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मंदिर कहते समय मस्जिद, गुरुद्वारा न कहा तो शामत
    ईश्वर कहते समय खुदा, अल्लाह न कहा तो शामत
    हिन्दू से जुड़ी बात कर दी, मुस्लिम की न की तो शामत
    उफ्फ, ये धार्मिक लोग!
    एक और शामत को निमंत्रण देने वाली थी पर अच्छा हुआ याद आ गया।
    मस्जिद कहते समय मंदिर न कहा तो शामत
    खुदा कहते समय भगवान न कहा तो शामत
    मुस्लिम कहते समय हिन्दू को भूल गयी तो शामत!...शामत ही शामत! ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • कुछ लोग आपको सिर्फ इसलिए पढ़ते हैं ताकि आपके प्रति अपनी नफरत को बाहर निकालने का कोई बहाना ढूंढ सकें। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ लोगों के दिल में इतनी नफरत क्यों होती है? न कोई जान पहचान, न कभी पाला पड़ा, न कभी कुछ बिगाड़ा, तब भी बेवजह सीधी-साधी पोस्ट्स पर जहर उगलने लगते हैं। असहमति या तर्कों से कोई समस्या नहीं, पर नफरत और पूर्वाग्रहों से भरे दिलों से है। कुछ लोग कहेंगे बर्दाश्त क्यों करते हो? शायद इस विश्वास में कि हो सकता है कभी पोस्ट्स पढ़ते-पढ़ते उनकी नफरत कम हो जाए, पर ऐसा कुछ भी तो नहीं होता...और तब लगता है लेखक के तौर पर हम बुरी तरह से असफल हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • सहमति और असहमति दोनों स्वीकार्य है। लेकिन नफ़रत फैलाने और बात का बतंगड़ बनाने का इरादा नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मेरी किसी पोस्ट पर अगर फ्रेंडलिस्ट के दो मित्र या उनमें से कोई एक आपस में स्वस्थ चर्चा को छोड़कर लड़ने-झगड़ने लगे, और बीच में पड़ने का कोई औचित्य न हो तो मैं पोस्ट ओनली मी या डिलीट कर देती हूँ। जगह ही नहीं मिलेगी तो लड़ेंगे कैसे? :p ;)
    देखिये! मुझे सभी प्रिय हैं। यूँ किसी को लड़ते-झगड़ते देखना अच्छा नहीं लगता। स्वस्थ चर्चा का माहौल बनाईये, अगर वाकई समस्यायों के समाधान के प्रति जागरूक हैं तो। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जानवरों को बक्श दीजिये। उन्हें अपनी कुंठा और नफरत की लपेट में मत लीजिये। खैर! आप तो स्त्रियों को भी कहाँ बख्शतें हैं? माँ-बहनों के रूप में उन्हें भी बात-बात में लपेट ही लेते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यदि आप और मैं इस क्षण किसी के भी विरुद्ध हिंसा या नफरत का विचार ला रहे हैं, तो हम दुनिया को घायल करने में योगदान दे रहे हैं। ~ दीपक चोपड़ा / Deepak Chopra

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