Wednesday, December 21, 2016

Christmas Story in Hindi for Kids

क्रिसमस की कहानी, सांता क्लॉज़. Merry Christmas Story in Hindi for Kids. Santa Claus Tales, Jesus Christ Birthday, Xmas Festival, Saint Nicholas Day. 
Christmas Story in Hindi for Kids
खुद बनो सेंटा क्लॉज़

हर वर्ष की तरह जिम्मी और जॉनी दिसम्बर के आते ही बहुत उत्साहित थे। क्रिसमस का त्यौहार जो आने वाला था। पर क्रिसमस का उनका सारा उत्साह उनके मामा जॉन से जुड़ा था जो हर साल क्रिसमस पर सेंटा बनकर उनके घर आते और बच्चों के लिए ढेर सारे उपहार लाते। उसके बाद सब मिलकर खूब धूम और मस्ती से क्रिसमस मनाते।

लेकिन आज ही शाम को डिनर के समय मम्मी ने बताया कि इस बार मामा को बहुत जरुरी काम है इसलिए वे नहीं आ पायेंगे। यह सुनते ही जिम्मी और जॉनी का चेहरा उतर गया।

‘मामा के बिना तो बिल्कुल भी मजा नहीं आएगा।’ जिम्मी बोली।

‘हाँ, और मामा ही तो सेंटा बनते है, गिफ्ट्स लाते हैं और गेम्स खिलाते हैं। बिना सेंटा के कैसा क्रिसमस?’ जॉनी रूहासा हो गया।

‘कोई बात नहीं बेटा, पापा तो गिफ्ट्स लायेंगे ही न?’ मम्मी बोली।

‘नहीं मम्मा, पापा तो हमेशा ही लाते हैं लेकिन क्रिसमस पर तो हमें हमारे सेंटा मामा से ही गिफ्ट लेना है।’ यह कहकर जिम्मी और जॉनी रूहासे से अपने कमरे में चले गए।

घर में क्रिसमस ट्री लाया जा चुका था, पर उसे सजाने में जिम्मी और जॉनी को कोई दिलचस्पी ही नही थी।

क्रिसमस से दो दिन पहले मामा का फिर फोन आया बच्चों का हालचाल और तैयारी के बारे में पूछने के लिए। जिम्मी और जॉनी की मम्मी ने उन्हें बताया कि दोनों बच्चे इस बार कोई तैयारी नहीं कर रहे। कह रहे हैं मामा के बिना नहीं मनाएंगे क्रिसमस। जॉन ने बच्चों को फोन देने को कहा। जिम्मी ने मामा से कहा, ‘मामा, आप ही तो सेंटा क्लॉज़ बनते हो। हम लोगों को इतना हंसाते हो। इतने गेम्स खिलवाते हो। हर बार नए-नए गिफ्ट्स लाते हो। अब आपके बिना हम क्या करेंगे?’

मामा ने कहा, ‘कुछ नहीं! इस बार तुम सेंटा बन जाना।’

जॉनी चौंका। ‘हम सेंटा?’

‘हाँ, क्यों नहीं? बच्चों, गिफ्ट्स लेने में जितना मजा आता है उससे कई अधिक मजा आता है गिफ्ट्स देने में। तुम बनकर तो देखो एक बार?’ मामा बोले।

फिर बच्चे मामा से बात कर अपने सोने के कमरे में चले गए। सोते-सोते एक दूसरे से बातें करने लगे।

जॉनी बोला, ‘जिम्मी दीदी, सेंटा तो हम बन जायेंगे लेकिन हम गिफ्ट्स क्या लायेंगे और किसे देंगे?’

जिम्मी ने कहा, ‘जॉनी, गिफ्ट्स तो हम बोलेंगे तो पापा दिला देंगे। लेकिन मैंने सोचा है कि हम इस बात को सरप्राइज रखते हैं। हमारे घर जो रोली आंटी आती है न काम करने के लिए, उनके मोहल्ले में बहुत बच्चे हैं। उनके वहां कोई सेंटा भी नहीं जाता और वो हमारी तरह कोई फेस्टिवल बहुत अच्छे से मना भी नहीं पाते। हम उनके मोहल्ले में चलेंगे। हम मम्मा और पापा के लिए भी गिफ्ट्स लायेंगे और मामा भी कुछ दिन बाद आयेंगे तो उनके लिए भी।’

‘लेकिन पैसे? वो कहाँ से आयेंगे?’ जॉनी ने कहा।

‘अरे! हमारे पिग्गी बैंक कब काम आयेंगे? अब तक तो उनमें खूब पैसे जमा हो गए होंगे। मैंने सोचा है उन सब बच्चों के लिए हम रंग-बिरंगी पेंसिल्स, रबर और शार्पनर लायेंगे।’ जिम्मी बोली।

‘अरे वाह दीदी! यह तो बहुत अच्छा आइडिया है। मैंने सोचा है - मम्मा, पापा और मामा के लिए हम न्यू ईयर की डायरी और पेन लायेंगे। मम्मी और मामा को तो लिखने का भी शौक है और पापा को सब हिसाब-किताब के लिए डायरी की जरुरत होती ही है।’ जॉनी ने कहा।

‘हाँ जॉनी। यह तुमने बहुत अच्छा सोचा। चलो अब हम सो जाते हैं। कल हमें बहुत सारी तैयारियाँ करनी है।’ यह कहकर जिम्मी ने लाइट बंद कर दी।

अगले दिन दोनों से सबसे पहले अपने-अपने पिग्गी बैंक तोड़ दिए। कुल 500 रुपये उसमें जमा थे। अपने दोस्त से मिलने जाने की कहकर वे सुबह ही घर से निकल गए। फिर उन्होंने एक स्टेशनरी की शॉप पर जाकर सारा सामान खरीदा और कुछ देर बाद घर लौट आये। आते ही दौड़कर सामान को छिपाकर रख दिया। बाकी सारा दिन अगले दिन की तैयारियों में गुजरा।

जिम्मी और जॉनी को अचानक इस तरह से उत्साहित और ख़ुश देखकर मम्मी ने राहत की सांस ली और वह भी दिल से मिठाई आदि तैयार करने में जुट गयी।

अगले दिन सुबह जिम्मी और जॉनी ने उठते ही पापा और मम्मी को विश किया और उन्हें गिफ्ट दिया। पापा-मम्मी की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। पापा-मम्मी ने भी जिम्मी और जॉनी को गिफ्ट्स दिए। उन्होंने खोलकर देखा तो उसमें से दोनों के लिए सेंटा क्लॉज़ की ड्रेस थी। सेंटा क्लॉज़ की ड्रेस देखते ही जिम्मी और जॉनी दोनों हैरान रह गए। उन्होंने मम्मी-पापा को अचरच भरी निगाहों से देखा तो मम्मी ने बताया कि मामा ने ही उन्हें यह आईडिया दिया था कि इस बार बच्चों के लिए सेंटा की ड्रेस ले आये।

‘भैया, हम तो सेंटा की ड्रेस के बारे में भूल ही गए थे। मामा कितने अच्छे हैं। अब हम शाम को रोली आंटी के मोहल्ले के बच्चों के साथ और भी मजे से क्रिसमस मनाएंगे।’ जिम्मी बोली।

इसके बाद दोनों बच्चों ने अपने प्लान के बारे में पापा-मम्मी को बताया और मार्केट से लायी गयी पेन्सिल्स, रबर और शार्पनर सब लाकर दिखाये। पापा-मम्मी को अपने बच्चों पर बेहद गर्व महसूस हुआ। पापा भी मार्केट जाकर उन मोहल्ले के बच्चों के लिए खिलौने और मिठाई ले आये।

इसके बाद सब शाम को रोली आंटी के मोहल्ले में गए और वहां एक क्रिसमस ट्री मंगवाकर सबके साथ उसे सजाया। प्रार्थना के बाद सेंटा बने जिम्मी और जॉनी ने सब बच्चों को गिफ्ट्स और मिठाई बांटी। सबने मिलकर कई गेम्स खेले और इसके बाद सब ख़ुशी-ख़ुशी घर आ गए। घर आकर जिम्मी और जॉनी ने मामा को फ़ोन किया और कहा, ‘मामा आपने बिल्कुल सही कहा था। गिफ्ट्स लेने से भी कई ज्यादा ख़ुशी तो गिफ्ट्स देने में होती है। इस बार का क्रिसमस हम कभी नहीं भूलेंगे और अबसे आपके साथ-साथ हम भी सेंटा बनेंगे।’ मामा ने बच्चों को खूब प्यार और आशीर्वाद दिया और मधुर यादों को मन में संजोये दोनों बच्चे सोने चले गए।

By Monika Jain ‘पंछी’

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