Sunday, January 31, 2016

Poem on Clock in Hindi

Poem on Clock in Hindi for Kids, Children. Ghadi Par Kavita, Wrist, Table, Wall Watch, Clocks Short Nursery Rhymes, Time Lines, Quotes, Slogans, Sms, Messages, Poetry, Shayari. घड़ी पर कविता, समय.
 
घड़ी
 
टिक-टिक-टिक-टिक
मैं हूँ घड़ी
आती हूँ मैं काम बड़ी.
 
कहीं कलाई पर बंध जाती
कहीं मेज पर पड़ी इठलाती
कहीं दीवारों पर टंग जाती 
समय हुआ क्या, ये बतलाती.
 
समय से आना, समय से जाना
समय से खाना, समय से पढ़ना
मुझे देखकर पता है चलता 
कब है सोना, कब है जगना.
 
सूईया मेरी सरपट दौड़े 
जैसे किसी रेस के घोड़े 
बीता समय न वापस आये 
 काम कभी कल पर न छोड़ें.
 
याद करो दादा के बोल 
समय बड़ा ही है अनमोल
उसे बड़ा पछताना पड़ता 
जो न जाने समय का मोल.
 
घंटा, मिनट और हर सेकंड का 
रखती हूँ मैं पूरा हिसाब 
जो चलता है सदा समय से 
उसके होते पूरे ख़्वाब.

By Monika Jain ‘पंछी’

How is this poem on clock in hindi for kids?

Friday, January 29, 2016

Essay on Valentine’s Day in Hindi

Essay on Valentine’s Day in Hindi. Happy Saint Valentine Week, Prem Diwas Speech, 14 Feb Article, Love Story, Pyar, Basant Panchami Ritu, Spring Season, Paragraph. प्यार, प्रेम दिवस, बसंत पंचमी, ऋतु.
 
प्रेम और संतुलन
सुनो प्रेम!
 
हमने फूलों को तुम्हारे आगमन का प्रतीक माना. हमने हरियाली को तुमसे जोड़ा. हमने रंगों को भी तुम्हें अर्पित कर किया. कोयल के स्वर, मयूर का नृत्य, बादलों की रिमझिम...प्रकृति में ऐसा कोई भी चित्र, कोई भी भाव और कुछ भी तो शेष नहीं जो सुन्दर हो और तुमसे न जोड़ा गया हो. तुम पर इतना लिखा गया जितना कभी किसी शब्द पर नहीं लिखा गया. तुम्हें इतना पढ़ा गया जितना कभी कुछ और नहीं पढ़ा गया. फिर भी हर बार, बार-बार तुम बिल्कुल ताजा होकर खिल आते हो...कभी किसी की लेखनी से बिखरे शब्दों को चुनकर, तो कभी किसी प्रेयसी की आँखों में चंद सपनों को बुनकर...कभी किसी माँ की ममता में लिपट कर...तो कभी किसी पिता के वात्सल्य में रमकर...कभी किसी के गीतों के स्वर में...तो कभी किसी के ध्यान के प्रहर में…
 
पर जाने क्यों तुम पर हुई इतनी चर्चाओं, इतने प्रतीकों, इतने शब्दों, इतनी उपमाओं और अलंकारों के बावजूद भी ऐसा लगता है जैसे हम लोगों ने तुम्हें ठीक से समझा ही नहीं. इसलिए ही तो इस दुनिया में तुम्हारी कुछ कमी सी खलती है. पर शायद सारी दुनिया को प्रेममय देखने की ख्वाहिश ही कुछ बड़ी सी है, और शायद संतुलन के चलते यह संभव भी नहीं, लेकिन नकारात्मकता की अनावश्यकता तो कम होनी ही चाहिए न?
 
माँ कहती है अब फलों, सब्जियों, दालों, दूध आदि में पहले सी मिठास नहीं रही. पर माँ, यह मिठास रहेगी भी कैसे? मन की मिठास ही तो दुनिया के हर कौने तक पहुँचती है. मन ही तो स्त्रोत है. जब-जब मन में मिलावट होगी तो वह बाहर अभिव्यक्त होगी ही. सिर्फ प्रेम भरा मन ही तो शुद्धता बिखेर सकता है. और कुछ कैसे?
 
रूह को कंपा देने वाले हैं इस समाज के कुछ घिनौने सच. और जब घटनाएँ हमारी सोच और विचारों से भी परे की हो तो क्या किया जाए? काश! इतना भी हो कि हर एक हत्या हमारे भीतर किसी को जीवन देने की भावना को मजबूत करे. हर एक अन्याय हमारे भीतर न्याय करने की क्षमता को बल दे. हर एक शोषण हमारे भीतर करुणा और दया को संरक्षित करे. हर एक आडम्बर हमारी पारदर्शिता को बढ़ाये और हर एक नफरत से भरी नजर हमारी आँखों को प्रेम की गहराई दे. संतुलन के लिए यह भी तो जरुरी है.
 
By Monika Jain ‘पंछी’
 
How is this article about love on the occasion of Valentine’s day?

Tuesday, January 26, 2016

Essay on Luck in Hindi

Essay on Luck in Hindi. Fortunate, Being Lucky, Bhagyashali, Religious Conversion, Change in Religion, Peace, Compassion, Sachcha Dharma, Symbol, Sign, Narrow Broad Thinking, Islam. भाग्य, भाग्यशाली.
 
जब बनेंगे हम सच में भाग्यशाली
 
अभी-अभी एक नोटीफिकेशन मिला :
 
Saddam Ansari added you to the public group 'I am so lucky because I am Muslim. Do you?'
 
प्यारे अंसारी जी,
 
सबसे पहले तो बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे लकी बनने का सुअवसर प्रदान किया. विगत कुछ वर्षों से लक की कुछ ज्यादा ही जरुरत है मुझे. आपके इस अतिसंवेदनशील कृत्य का सम्मान करते हुए, आपके ग्रुप की सदस्य मैं बनी रहूंगी और दिन दोगुनी-रात चौगुनी दर से अपने आप को लकी महसूस करती रहूंगी. (ये बात अलग है कि बस नोटीफिकेशन बंद करके यह कृतज्ञता सामन्यतया उन सभी मित्रों के लिए रहती है जो इतने प्यार से कहीं भी एड कर देते हैं.) क्या करूँ इतने प्यार को ठुकरा नहीं पाती. तो अंसारी जी मैं आपके इस स्नेहिल निमंत्रण का बेहद सम्मान करती हूँ और तहे दिल से अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ कि आपने मुझे इस योग्य समझा. बस आपसे कुछ सवालों के जवाब चाहिए :
 
इंसान का भाग्य क्या सच में किसी शब्द या प्रतीक के साथ मात्र इस तरह से जुड़ जाने से बदल जाता है? और इंसान खुद क्या सच में इस तरह धर्म परिवर्तन से बदल जाता है? अगर ऐसा है तो फिर इस शब्द प्रतीक के अलावा बाकी किसी चीज की तो आपको जरुरत ही न होगी? ऐसा जादू संभव हो तब तो दुनिया की सारी समस्याएं गरीबी, बेरोजगारी, बलात्कार, चोरी, लूट, बेवफाई सब एक चुटकी में हल हो जाए. निश्चित रूप से आपकी कौम में ऐसी कोई समस्या नहीं होती होगी. है न?
 
इस दुनिया में जहाँ मनुष्य खुद अपने जीवन के लिए पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, हवा, पानी, सूर्य...न जाने किस-किस पर निर्भर है. जिस ब्रह्माण्ड में पृथ्वी तक की एक बिंदु से ज्यादा कोई औकात नहीं. वहां अपने दृष्टिकोण को इतना संकुचित आप लोग कैसे कर लेते हो दोस्त? इस ग्रुप में एक महिला हिन्दू महिलाओं के इस्लाम को ग्रहण कर लेने पर अपनी बेइंतहा ख़ुशी को जाहिर कर रही है. यह सफलता बहुत-बहुत मुबारक आपको. पर यह कैसी ख़ुशी है और यह कैसा धर्म है जो सिर्फ अहंकार, विस्तार और नियंत्रण से सम्बंधित हो?
 
ग्रुप में लिखा है : Islam is the religion of peace and compassion. मने अल्टीमेट गोल शांति और करुणा ही है. तो मतलब शांति और करुणा से ही इस्लाम की सार्थकता है. है न? तो फिर ये मुस्लिम-हिन्दू क्यों लगा रखा है? देखो मेरी शांति और करुणा में तो चींटी और मच्छर को मारना भी शामिल नहीं. तो मेरा धर्म का टैग बदलवाकर मुझे और कितना शांत और करुण बना पाओगे? अगर इस्लाम स्वीकार करके ऐसा चमत्कार हो जाए कि मैं सारे दृश्य-अदृश्य जीवों पर करुणा बरसा सकूँ तो फिर मैं मुस्लिम बनने को तैयार हूँ. वैसे दोस्त! यह भी संभव है लेकिन धर्म का टैग मात्र बदलने से नहीं.
 
अपने अहंकार को, अपने स्वार्थ को, अपने यश, विस्तार और नाम को धर्म का नाम जाने कितने लोग सदियों से देते आ रहे हैं. पर दोस्त! मैंने धर्म का अर्थ सिर्फ इतना सा जाना है जहाँ अहंकार पूरी तरह से विसर्जित हो जाता है, जहाँ मैं और तुम की सारी दीवारें गिर जाती है...सिर्फ मानव-मानव के लिए नहीं..ब्रह्माण्ड के कण-कण के लिए. तो अगर समझ सको तो सिर्फ इतना सा समझ लो कि जिस दिन हमारे मन से बांटने वाले सारे शब्द और प्रतीक एक-एक करके गिरने लगेंगे...धर्म की शुरुआत उसी दिन से होगी. उस दिन सिर्फ कहने भर को नहीं तुम, मैं और हम सब...सच में भाग्यशाली होंगे...सच में!
 
शुभकामनाएं!
 
(नोट : जिन-जिन धर्म प्रेमियों को सिर्फ इस्लाम के लिए लिखे जाने की वजह से यह पत्र पढ़कर बहुत-बहुत ख़ुशी हुई...वे अपना नाम और धर्म जोड़कर इस ख़त को एक बार फिर से पढ़ें. धन्यवाद!)
 
By Monika Jain ‘पंछी’
 
How is this article about being lucky in true sense and about true religion? 
 
 

Tuesday, January 19, 2016

Education Quotes in Hindi

Education Quotes in Hindi. Shiksha Quotations, Educational Thoughts, Learning, Knowledge, Gyan par Vichar, Sayings, Sms, Proverbs, Messages, Slogans. शिक्षा पर नारे, ज्ञान, उद्धरण, विचार, स्लोगन.

Education Quotes

  • आत्मज्ञान के द्वारा परमात्म तत्त्व को प्राप्त करना ही मानव शिक्षा का मूल उद्देश्य है. 
  • शिक्षा वह है जो सन्मार्ग प्रदान करे.
  • सच्ची शिक्षा वही है जो मानव को मानव बन कर रहना जीना सिखाये.
  • रोशनी फ़ैलाने के दो तरीके हैं - या तो खुद दीपक बन जाएँ या फिर उसके प्रकाश को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण. ~ एडिथ वार्टन / Edith Wharton
  • नैतिक सुधारों के लिए व्यक्तिगत रूप से मैं कभी बल या कानून का सहारा नहीं लूँगा. मैं इसके लिए शिक्षा, तार्किकता, समझाने-बुझाने और प्रभाव डालने वाले अन्य उपायों को अपनाऊंगा. ~ रदरफोर्ड बी. हाएस / Rutherford B Hayes
  • आप एक आदमी को शिक्षित करते हैं तब आप सिर्फ एक आदमी को शिक्षित करते हैं, जब आप एक औरत को शिक्षित करते हैं तब आप एक पीढ़ी को शिक्षित करते हैं. ~ ब्रिघैम यंग / Brigham Young
  • जिस शिक्षा से हम अपना जीवन निर्माण कर सकें, मनुष्य बन सकें, चरित्र गठन कर सकें और विचारों का सामंजस्य कर सकें, वही वास्तव में शिक्षा कहलाने योग्य है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda
  • मैं केवल उसी बात की शिक्षा देता हूँ जिसको मैंने स्वयं अनुभव करके सत्य पाया है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda
  • जो आप हैं, उसके द्वारा ही अपने बच्चों को शिक्षा दें. उससे नहीं जो आप कहते हैं. ~ सुसान नार्मन / Susan Norman
  • शिक्षा देने से दोगुना उसे अर्जित करो. ~ जोसेफ जोउबर्ट / Joseph Joubert
  • शिक्षा बालक तथा व्यक्ति के शरीर, मन एवं आत्मा की सर्वोत्तमता का सामान्य प्रकटीकरण है. शिक्षा व्यक्ति के शारीरिक, बौद्धिक, संवेगात्मक, नैतिक एवं आर्थिक विकास से संबद्ध है. यह विकास और समाज के सर्वांगीण विकास को ही लक्षित करता है. ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi
  • ज्ञान अपने चिह्न छोड़ जाता है, जिसमें एक से दूसरे का विकास होता है. निश्चय ही छात्र कोष की तरह होते हैं, जहाँ आप अपना सबसे कीमती खजाना जमा कर सकते हैं. ~ यूजेन पी. बर्टीन
  • शिक्षा का सबसे बड़ा उद्देश्य आत्मनिर्भर बनाना है. ~ सेमुअल स्माइल्स / Samuel Smiles
  • शिक्षा किसी घड़े को भरने जैसा नहीं है, यह तो अग्नि प्रज्ज्वलित करने जैसा है. ~ डब्लू बी पीट्स / Wb Peats
  • संसार में जितने प्रकार की प्राप्तियां हैं, शिक्षा सबसे बढ़कर है. ~ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला / Sooryakant Tripathi Nirala
  • विद्या अमूल्य और अनश्वर धन है. ~ ग्लैडस्टन / Gladstone
  • शिक्षा जीवन की परिस्थितयों का सामना करने की योग्यता का नाम है. ~ जॉन जी. हिबन / John G Hibben
  • अगर सुचना देना या पुस्तक पढ़ना ही शिक्षा का अर्थ होता तो पुस्तकालय विश्व के महान संत के रूप में स्वीकार किये जाते. जिसको पूरा पुस्तकालय कंठस्थ है, उसकी अपेक्षा मैं उस शिक्षक को अधिक प्रभावी मानता हूँ जो छात्रों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • पहले 6-7 घंटे स्कूल में और फिर 2-3 घंटे कोचिंग क्लासेज में...यह माजरा कुछ समझ नहीं आता. सिर्फ डिग्री और नौकरी (इसका भी भरोसा नहीं) देने वाली शिक्षा के लिए मानव जीवन का इतना अमूल्य समय बर्बाद? ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • दरिद्र से दरिद्र हिंदुस्तानी मजदूर भी शिक्षा के उपकारों का कायल है. उसके मन में यह अभिलाषा होती है कि मेरा बच्चा पढ़ जाए. इसलिए नहीं कि उसे कोई अधिकार मिलेगा, बल्कि केवल इसलिए कि विद्या मानवी शील का एक शृंगार है. ~ मुंशी प्रेमचंद / Munshi Premchand
 
How are these hindi quotes about education?

Monday, January 18, 2016

Munshi Premchand Quotes in Hindi

Munshi Premchand Quotes in Hindi. Ke Vichar, Information About Life, Hindi Writer, Author Quotations, Thoughts, Lines, Ki Shiksha, Sayings, Slogans, Dohe, Biography, Profile. मुंशी प्रेमचंद के विचार.
 
Munshi Premchand Quotes

  • मनुष्य कितना ही हृदयहीन हो, उसके ह्रदय के किसी न किसी कोने में पराग की भांति रस छिपा रहता है. जिस तरह पत्थर में आग छिपी रहती है, उसी तरह मनुष्य के ह्रदय में भी - चाहे वह कितना ही क्रूर क्यों न हो, उत्कृष्ट और कोमल भाव छिपे रहते हैं. 
  • जो प्रेम असहिष्णु हो, जो दूसरों के मनोभावों का तनिक भी विचार न करे, जो मिथ्या कलंक आरोपण करने में संकोच न करे, वह उन्माद है, प्रेम नहीं.
  • मनुष्य बिगड़ता है या तो परिस्थितियों से अथवा पूर्व संस्कारों से. परिस्थितियों से गिरने वाला मनुष्य उन परिस्थितियों का त्याग करने से ही बच सकता है.
  • चोर केवल दंड से ही नहीं बचना चाहता, वह अपमान से भी बचना चाहता है. वह दंड से उतना नहीं डरता जितना कि अपमान से.
  • जीवन को सफल बनाने के लिए शिक्षा की जरुरत है, डिग्री की नहीं. हमारी डिग्री है - हमारा सेवा भाव, हमारी नम्रता, हमारे जीवन की सरलता. अगर यह डिग्री नहीं मिली, अगर हमारी आत्मा जागृत नहीं हुई तो कागज की डिग्री व्यर्थ है.
  • साक्षरता अच्छी चीज है और उससे जीवन की कुछ समस्याएं हल हो जाती है, लेकिन यह समझना कि किसान निरा मुर्ख है, उसके साथ अन्याय करना है.
  • दुनिया में विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई भी विद्यालय आज तक नहीं खुला है.
  • हम जिनके लिए त्याग करते हैं, उनसे किसी बदले की आशा ना रखकर भी उनके मन पर शासन करना चाहते हैं. चाहे वह शासन उन्हीं के हित के लिए हो. त्याग की मात्रा जितनी ज्यादा होती है, यह शासन भावना उतनी ही प्रबल होती है.
  • क्रोध अत्यंत कठोर होता है. वह देखना चाहता है कि मेरा एक-एक वाक्य निशाने पर बैठा है या नहीं. वह मौन को सहन नहीं कर सकता. ऐसा कोई घातक शस्त्र नहीं है जो उसकी शस्त्रशाला में न हो, पर मौन वह मन्त्र है जिसके आगे उसकी सारी शक्ति विफल हो जाती है.
  • कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सद्व्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुबाब दिखाने से नहीं.
  • सौभाग्य उन्हीं को प्राप्त होता है जो अपने कर्तव्य पथ पर अविचल रहते हैं.
  • दौलत से आदमी को जो सम्मान मिलता है, वह उसका नहीं, उसकी दौलत का सम्मान है. 
  • ऐश की भूख रोटियों से कभी नहीं मिटती. उसके लिए दुनिया के एक से एक उम्दा पदार्थ चाहिए.
  • किसी किश्ती पर अगर फर्ज का मल्लाह न हो तो फिर उसके लिए दरिया में डूब जाने के सिवाय और कोई चारा नहीं. 
  • मनुष्य का उद्दार पुत्र से नहीं, अपने कर्मों से होता है. यश और कीर्ति भी कर्मों से प्राप्त होती है. संतान वह सबसे कठिन परीक्षा है, जो ईश्वर ने मनुष्य को परखने के लिए दी है. बड़ी-बड़ी आत्माएं, जो सभी परीक्षाओं में सफल हो जाती हैं, यहाँ ठोकर खाकर गिर पड़ती हैं.
  • नीतिज्ञ के लिए अपना लक्ष्य ही सब कुछ है. आत्मा का उसके सामने कुछ मूल्य नहीं. गौरव सम्पन्न प्राणियों के लिए चरित्र बल ही सर्वप्रधान है.
 
By Munshi Premchand / मुंशी प्रेमचंद
 
How are these quotes of Munshi Premchand?
 

Friday, January 8, 2016

Facebook Quotes in Hindi

Facebook Quotes in Hindi. Fb Status, Social Media Sms, Messages, Internet Quotations, Updates, Comments, Msg, Scraps, Vichar, Misuse, Disadvantages. फेसबुक स्टेटस, विचार, सोशल मीडिया, इन्टरनेट.
 
Facebook Quotes

  • फेसबुक और अन्य साइट्स पर कमेंट्स और लाइक्स की संख्या लिखी गयी सामग्री की गुणवत्ता का निर्धारण नहीं कर सकती है. 
  • देखा जाए तो आईडी फेक नहीं होती. उनमें भरा नाम और परिचय भी फेक नहीं होता. फेक तो बस कुछ इंसान होते हैं. फिर चाहे वे कोई भी रूप धरे. क्या फर्क पड़ता है.
  • आप सुबह के बाद सीधा रात में ऑनलाइन आते हैं. कभी-कभी हो सकता है आप कई दिनों बाद भी आयें. इस बीच आपके पास फेसबुक पर मेसेज आते हैं. ऑनलाइन आने के बाद आप तुरंत उनका रिप्लाई करते हैं. और तभी आपको ये पता चलता है कि आपको तो रिप्लाई ना किये जाने की वजह से पहले ही अनफ्रेंड कर दिया गया है. अजीब लगता है, जब वो लोग ऐसा करते हैं, जिनके प्रति आपके मन में सम्मान है, जो अच्छे इंसान है और जिनके पोस्ट्स आप नियमित पढ़ते हैं. आभासी दुनिया में गलतफहमियाँ होने के चांसेस और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं. लेकिन दूसरों पर ना सही खुद पर इतना भरोसा होना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति बेवजह हमें इग्नोर क्यों करेगा. यहाँ तक कि मेसेज सीन हो जाने के बाद रिप्लाई ना आने पर भी हममें इतनी समझदारी होनी चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति किसी जरुरी काम में फँसा हो सकता है, नेट डिसकनेक्ट हो सकता है, वह तसल्ली से फ्री होकर बात करना चाहता हो, या फिर कोई भी और वजह हो सकती है. कई बार हम जो पोस्ट्स लिखते हैं, उनको खुद पर लेकर भी कई लोग ग़लतफ़हमी का शिकार हो जाते हैं. कई बार कमेंट का रिप्लाई ना दे पाने की स्थिति में भी ऐसा होता है. और भी कई कारण होते हैं. बेहतर है गलतफहमियों को सीधा संवाद कर दूर कर लिया जाए. और जहाँ तक मेरी बात है तो बेवजह मैं किसी को इग्नोर नहीं करती (छिछोरों को छोड़कर) और अच्छे लोगों को तो बिल्कुल भी नहीं. फिर भी आपको मुझ पर ना सही कम से कम खुद पर तो भरोसा होना चाहिए.
  • हर जगह को सफाई की जरुरत है...दिल को, दिमाग को, घर को, मौहल्ले को, शहर को, देश को और फेसबुक को भी. आज हमने फेसबुक की सफाई में थोड़ा समय दिया और कुछ अश्लील और बेहद घटिया मानसिकता के लोगों के प्रोफाइल को रिपोर्ट किया और फेसबुक ने उन्हें रिमूव भी किया. आप भी इस सफाई में योगदान दीजिये और इस दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में मदद कीजिये. क्योंकि ब्लॉक करना बस गन्दी जगह से गुजरते हुए नाक पर रुमाल रख लेने जैसा है या आँखों पर पट्टी बाँध लेने जैसा. जिससे समस्या का समाधान कभी नहीं होता. समस्या का समाधान तब होगा जब बुराई या गन्दगी को पनपने का मौका ही ना दिया जाए.
  • एक अच्छी सी पोस्ट पढ़कर जब ध्यान जाता है कि इस पोस्ट को चमकाने के लिए किसी लड़की की फोटो बिना अनुमति के लगायी गयी है (जिसका पोस्ट से दूर-दूर तक लेना देना नहीं है ) तो मूड ख़राब हो जाता है. जब पहले ही फोटो पर ध्यान चला जाता है तो पोस्ट पढ़ने का मन ही नहीं करता...और अगर गलती से पढ़ भी ली तो चाहे कितनी भी अच्छी हो लाइक करने का मन नहीं करता. आपकी मानसिकता और आपकी सोच आप चाहे कितना भी अच्छा लिखें झलक ही जाती है. अपने शब्दों से ज्यादा भरोसा आपको बाहरी सुन्दरता पर होगा, पर लड़कियों की फोटो का मार्केटिंग टूल की तरह इस्तेमाल कर लाइक बटोरने का यह तरीका सच बहुत घटिया है.
 
By Monika Jain 'पंछी'
 
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Thursday, January 7, 2016

Essay on Atheism in Hindi

Essay on Atheism in Hindi. Atheist Nonbeliever Article, Spiritualism Science Quotes, God, Religion, Agnosticism, Agnostic, Theist Believer, Astik vs Nastik, Dharma. आस्तिक, नास्तिक, नास्तिकता.
 
नास्तिकता क्यों एक समाधान नहीं
 
एक ओर धर्म में जहाँ आडम्बर और कर्म-काण्ड आधुनिकता का रंग ओढ़कर आगे से आगे स्थानांतरित होते जा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर स्वयं को तर्कवादी कहने वाले नास्तिकों की संख्या में भी इज़ाफा हो रहा है. हालाँकि आडम्बर एक ऐसी चीज है जिसका सिर्फ धर्म से सम्बन्ध नहीं है, इसका सम्बन्ध मनुष्य के मन से है और इस आडम्बर से तो आस्तिक क्या नास्तिक भी अछूते नहीं है. हाँ, बस ईश्वर और धर्म के नाम पर जो भौंडा प्रदर्शन होता है वह थोड़ा अधिक कुरूप लगता है. धर्म के नाम पर होने वाले अपराध अधिक घृणित लगते हैं. बाकी दिखावों और अपराधों का तो हमारा यह समाज आदि हो ही चुका है. इससे कोई कितना अछूता रह पाता है यह तो उसकी प्रकृति पर ही निर्भर करेगा, आस्तिक या नास्तिक के लेबल पर नहीं.
 
जहाँ एक ओर लोग अपने धर्म और जाति विशेष का होने पर गर्व करते हैं वैसे ही नास्तिक अपने नास्तिक होने पर गर्व महसूसते हैं. कुछ समय तक मैं नास्तिकता के अधिक पक्ष में थी लेकिन तथाकथित आस्तिकता और नास्तिकता का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद मुझे यह महसूस हुआ कि अधिकांश मामलों में दोनों में कोई विशेष अंतर नहीं. दोनों में ही कट्टरता और अन्धविश्वास को देखा जा सकता है. अपवाद भी दोनों में है ही.
 
नास्तिक धर्म को सारे अपराधों की जड़ मानते हैं और उन्हें लगता है कि धर्म के खत्म हो जाने से देश और दुनिया बेहतर बन जायेगी. लेकिन केवल एक नास्तिक शब्द के बल पर जो दुनिया बदलने चले हैं वे बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी में है. अगर उन्हें लगता है कि राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, हजरत मोहम्मद के उपदेशों को मिटा देने से; गीता, कुरान, बाइबिल सभी धर्म ग्रंथों को आग लगा देने से; धर्म शब्द को ही लोगों के जेहन से मिटा देने मात्र से समस्यायों का समाधान हो सकता है तो वे फिर से वही भूल दोहरा रहे हैं जो आस्तिकों ने इस रूप में की है कि सिर्फ ईश्वर की पूजा-पाठ कर लेने से, गंगा में डुबकी लगा लेने से, साधुओं का प्रवचन सुन आने से, मंदिरों या गरीबों में दान कर देने से, अपने-अपने धर्म का प्रसार करने से, निर्दोष पशुओं की बलि देने से और गाय को माता मान लेने से वे स्वर्ग या जन्नत में पहुँच जायेंगे, उनके सारे कष्ट दूर हो जायेंगे या उन्हें अपने गलत-सही हर तरह के स्वार्थ को सिद्ध करने का लाइसेंस मिल जाएगा. दोनों की विचारधारा में ज्यादा कुछ अंतर नहीं. क्योंकि सतही और फोरी तौर पर किये गए उपाय समाधान नहीं बन सकते. इलाज के लिए रुग्ण जड़ों को स्वस्थ जड़ों में रूपांतरित करना जरुरी है. उस कीड़े को मिटाना जरुरी है जिसे स्वार्थ और अज्ञानता कहा जा सकता है. क्योंकि किसी भी तरह के अपराध के मूल में स्वार्थ, अहंकार और अज्ञानता ही होती है, धर्म कहीं भी नहीं.
 
सबसे महत्वपूर्ण चीज यहाँ जो दोनों वर्गों द्वारा इग्नोर की जा रही है वह है मनुष्य का मन और उसका आदतन स्वभाव. जो न तो नाम मात्र का आस्तिक बन जाने से बदल सकता है और न ही नास्तिक बन जाने से. अधिकांश मामलों में आस्तिकता और नास्तिकता एक जिद और अहंकार से ज्यादा कुछ भी नहीं लगती. नास्तिकों की बातें पढ़ें तो नजर आएगा कि उनका एक मात्र उद्देश्य बस धर्म और ईश्वर को गरियाना भर ही रह गया है. जबकि अन्धानुकरण की प्रवृत्ति, शब्दों और प्रतीकों को पकड़ने की प्रवृत्ति सिर्फ धर्म और ईश्वर की मोहताज नहीं. यह पकड़ना मनुष्य का स्वभाव बन गया है, जो जीवन के कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है. बल्कि कई नास्तिक खुद अपने जीवन का अवलोकन करेंगे तो वे खुद भी अपने आपको किसी ना किसी चीज की गंभीर जकड़न में पायेंगे. बहुतों ने तो नास्तिक शब्द को ही पकड़ लिया है. और यह पकड़ना ही तो अन्धानुकरण और अंध श्रद्धा है. बल्कि पकड़ जहाँ जितनी गहरी वहां हिंसा उतनी ही ज्यादा. आडम्बर, हिंसा, दिखावा, पाखण्ड मनुष्य के दिल और दिमाग में इस कदर रच बस गए हैं कि वह धर्म के क्षेत्र से निकल भी जाए तो अन्य रूपों में प्रकट होंगे लेकिन होंगे जरुर. अभी भी हो ही रहे हैं. हिटलर और स्टालिन दोनों से बेहतर इस बात के और क्या उदाहरण हो सकते हैं. एक आस्तिक था, दूसरा नास्तिक, लेकिन दोनों के तानाशाही कांडों में कोई अधिक अंतर नहीं. दुर्गा पूजा के विरोध में जब महिषासुर की पूजा होती है, राम के विरोध में जब रावण को पूजा जाता है, बीफ पार्टी के विरोध में जब पोर्क पार्टी या पोर्क पार्टी के विरोध में जब बीफ़ पार्टी होती है तो यह विश्वास और भी दृढ़ हो जाता है कि समस्या कहीं बाहर है ही नहीं. सारी समस्या तो भीतर ही है.
 
कुछ बातों को समझना यहाँ जरुरी है. अन्धविश्वास अपने पाँव क्यों पसारते हैं? एक पक्ष के स्वार्थ और दूसरे पक्ष के अज्ञान और आत्मविश्वास की कमी के कारण. जिस व्यक्ति को यह न पता हो कि विविध पदार्थों और धातुओं से वैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा निर्मित एक यंत्र सात समुद्र बात करने में भी सक्षम है. उसके लिए पहली बार ऐसे किसी यंत्र से रूबरू होना किसी चमत्कार के साक्षात्कार से ज्यादा कुछ हो भी कैसे सकता है. इसके अलावा मनुष्य का मन बहुत निशक्त है. दिन प्रतिदिन बढ़ती भौतिकवादी सुख-सुविधाओं ने लोगों के मन को इतना कमजोर बना दिया है कि छोटी से छोटी समस्या भी उन्हें पहाड़ जैसी बड़ी लगने लगती है. ऐसे में हमेशा वे अवलंब और सहारा ढूंढने की कोशिश करते हैं कि कोई उनकी समस्यायों का निराकरण कर दे. और जो लोग इन समस्यायों को भुनाने के लिए चमत्कारी दूकानें खोल कर बैठे हैं, वहां उन्हें उम्मीद की किरण नजर आती है इसलिए उनके यहाँ ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगती है. और उनका व्यवसाय दिन दुगुनी, रात चोगुनी दर से फलने-फूलने लगता है.
 
स्वार्थ, अहंकार और अज्ञान केवल तथाकथित धर्म का मोहताज नहीं है. धर्म रहे न रहे स्वार्थ, अहंकार और अज्ञान तो तब तक रहेगा ही जब तक ज्ञान और शिक्षा का प्रसार नहीं होता, जब तक लोगों का मन प्रेम और करुणा से ओतप्रोत नहीं होता. दुनिया को हम अगर अच्छा बनते देखना चाहते हैं तो सबसे पहले जरुरत है संकीर्ण सोच से मुक्त एक खुले दिमाग की और सकारात्मक बातों के प्रसार की. ईश्वर है या नहीं यह चिंता का विषय नहीं है. चिंता का विषय है अज्ञान और स्वार्थ के वशीभूत अपनी कट्टर मान्यताओं को ओढ़े बढ़ती नफरत, हिंसा और मनमुटाव. जैसे ही हम दिमाग को खुला छोड़ेंगे और अपने मन, जीवन और आसपास के परिवेश पर विवेक पूर्वक सकारात्मक दृष्टि रखना शुरू करेंगे तो हमें कई नयी चीजें समझ आने लगेगी. विज्ञान, कारण-कार्य-परिणाम के एक ऐसे परिवेश का निर्माण करना बहुत जरुरी है जहाँ लोग मन से सशक्त, संवेदनशील, प्रेम और करुणा से भरे हो, जो अपने आप से दूर भागने की बजाय अपने भीतर झाँकने की हिम्मत कर सके और वहां अपनी समस्यायों के समाधान ढूंढ सके. जहाँ लोग बाहर कुछ बदलने से पहले भीतर खुद को बदलने का साहस कर सकें. जहाँ लोग सच्चे अर्थों में आत्मनिर्भर बन सके.
 
 By Monika Jain ‘पंछी’

How is this article about atheism?

Tuesday, January 5, 2016

Trust Quotes in Hindi

Trust Quotes in Hindi. Never Trusting Anyone Status, Broken Belief Sms, Break Faith Thoughts, Breaking Bharosa Messages, Betrayal Quotations Lines, Vishwas Sayings, Suvichar. विश्वास, भरोसा, यकीन.
 
Trust Quotes

  • जब एक माँ बच्चे पर किसी वजह से हाथ उठाती है तो किसी और अपने की अनुपस्थिति में वह बच्चा मार खाते हुए भी माँ का ही आँचल पकड़कर प्यार पाने की कोशिश करता है. मासूमियत और भरोसा शायद इसे ही कहते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अविश्वास और शक लोगों के दिलों-दिमाग में इस कदर जगह बना चुके हैं कि कोई खुली किताब सा सामने हो तब भी शक और संदेह से बच नहीं सकता. कई मामलों में सच है कि हम जैसे होते हैं लोगों को भी वैसा ही देखते हैं. अक्सर कहती हूँ और आज फिर, दुनिया के किसी कोने में किसी एक का भी विश्वास टूटता है तो समूची मानवता में अविश्वास गहराता है. मने किसी एक के प्रति हमारा अपराध समूची मानवता के विरुद्ध अपराध है. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • कई बार अकाउंट डीएक्टिवेट करना होता है. ऐसे में हर बार कई दोस्तों को लग जाता है कि उन्हें ब्लॉक कर दिया है. तो कुछ चीजें बताना जरुरी है. मेरे लिए ब्लॉक या अनफ्रेंड करना इन्टरनेट पर किया जाने वाला सबसे महत्वहीन और नीरसता वाला कार्य है. इसकी सामान्यतया मुझे जरुरत भी नहीं होती. बाकी ये काम तभी करती हूँ जब कोई और विकल्प नहीं बचता और तब भी अगर सामने वाला ही कर दे तो मैं उसकी शुक्रगुजार रहती हूँ. ऐसे में अकारण किसी को ब्लॉक करने का तो सवाल ही नहीं उठता.अभी भी मुश्किल से मेरी ब्लॉक लिस्ट में 7-8 लोग होंगे. ब्लॉक सिर्फ वही लोग होते हैं जिनका उद्देश्य बस ब्लॉक होना ही होता है. तो कोई भी ऐसा ख़याल अपने दिल और दिमाग में ना लायें. आप सभी मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं. पोस्ट्स पर आपका समर्थन और स्वस्थ आलोचना दोनों ही मेरे लिए बहुत जरुरी है, और आपकी उदासीनता से भी मुझे लेश मात्र समस्या नहीं. मैं यहाँ बस प्यार बांटने और प्यार पाने के लिए ही हूँ. नफरत की दीवारें तोड़नी हैं, बनानी नहीं. इसलिए खुद पर विश्वास रखिये और मुझ पर भी. ~ Monika Jain ‘पंछी
  • विश्वास का जबरदस्ती पैदा किया जाना और विश्वास का स्वत: उत्पन्न होना. Mostly go for second one and follow the same in case of Distrust. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • Do not let Trust and Faith be Superstition. आस्था और विश्वास को अन्धविश्वास न बनने दे. 
  • If once your trust is broken badly by someone then it damage the word trust itself for forever in the dictionary of your life. अगर एक बार आपका भरोसा बुरी तरह तोड़ दिया जाता है तो आपके जीवन के शब्दकोष में खुद विश्वास शब्द ही हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त हो जाता है. 
  • I'm not upset that you lied to me, I'm upset that from now on I can't believe you. मैं इसलिए दु:खी नहीं हूँ की तुमने मुझसे झूठ कहा बल्कि इसलिए हूँ कि अब से मैं तुम पर भरोसा नहीं कर पाउँगा. ~ Friedrich Nietzsche
  • To be trusted is a greater compliment than being loved. हम पर भरोसा किया जाना हमसे प्यार किये जाने से ज्यादा प्रशंसनीय है ~ George MacDonald
  • थैली पर लगे लेबल पर भरोसा ना करें ~ टी फुलर / T Fuller
 
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Sunday, January 3, 2016

Motivational Quotes in Hindi

Motivational Quotes in Hindi. Motivating Words, Motivation Sms, Motivated Messages, Prernadayak Slogans, Prerak Vichar, Dialogues, Sentences, Sayings, Proverbs, Lines. प्रेरक विचार, प्रेरणात्मक कथन.
 
Motivational Quotes

  • Self-motivation works better than any other source of motivation. स्व - प्रेरणा प्रेरणा के किसी अन्य स्रोत से बेहतर काम करती है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • You are never too old to set another goal or to dream a new dream. आप इतने वृद्ध कभी नहीं हो सकते कि एक नया लक्ष्य निर्धारित न कर सकें या नया सपना ना देख सकें. ~ C. S. Lewis / सी एस लुईस 
  • Nothing great was ever achieved without enthusiasm. बिना उत्साह के कुछ भी महान कभी हासिल नहीं किया गया है. ~ रॉल्फ वाल्डो इमर्सन / Ralph Waldo Emerson
  • If your actions inspire others to dream more, learn more, do more and become more, you are a leader. यदि आपके कार्य दूसरों को अधिक सपने देखने, अधिक सीखने, अधिक करने और अधिक बनने को प्रेरित करते हैं तो आप एक नेता हैं. ~ John Quincy Adams
  • जब हम कठिन कार्यों को चुनौती के रूप में स्वीकार करते हैं और उन्हें ख़ुशी और उत्साह से निष्पादित करते हैं तो चमत्कार हो सकते हैं ~ अल्बर्ट गिल्बर्ट / Albert Gilbert
  • कठिनाइयों का अर्थ आगे बढ़ना है न कि हतोत्साहित होना. मानवीय भावना का अर्थ द्वंद्व से और अधिक मजबूत होना है ~ विलियम एल्लेरी चैनिंग / William Ellery Channing
  • प्रेरणा अंतर्मन से उत्पन्न होने वाली आग है. इसे जगाने का प्रयास किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है तो यह थोड़ी देर ही जलेगी. ~ स्टीफन कोवे / Stephen Kove
 
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Materialism vs Spiritualism Essay in Hindi

Materialism vs Spiritualism in Modern Times Essay in Hindi. Spirituality, Idealism Article, Materialistic World, Spiritual Life Paragraph, Adhyatm, Bhautik Vaad, Adhyatmik. आध्यात्मिक, आध्यात्म, भौतिकवाद.
 
असली विजेता
 
इस भौतिकवादी दुनिया में जहाँ हमारा पूरा जीवन बाहर की ओर जाता है खुद को आंतरिक यात्रा पर ले आना इतना आसान काम नहीं होता. यह जानते हुए भी कि बाहर की यात्रा में हम चाहे चाँद पर पहुँच जाए, चाहे मीलों की दूरियों को चंद क्षणों में बदल दें, चाहे अपार सम्पदा अर्जित कर लें, कितनी ही क्रांतियाँ कर लें, संतुष्टि, सुख या पूर्णता जैसी चीज स्थायी रूप में कहीं नहीं मिलेगी. पूर्णता और आनंद शाश्वत रूप में कहीं अगर मिल सकता है तो वह भीतर ही है. लेकिन यह वह समय भी नहीं जहाँ बाह्य परिस्थितयों और माहौल को पूरी तरह नकारा जा सके. यह बहुत मुश्किल समय है. विज्ञान, सभ्यताओं और परम्पराओं ने एक ओर जहाँ बहुत कुछ सरल किया है तो दूसरी ओर जीवन को अतिसुविधापूर्ण बनाने के चक्कर न जाने कितनी जटिलताएं भी खड़ी कर दी है. ऊपर से किसी की व्यक्तिगत मुसीबतें और परिस्थितयां जाने कितनी सीमायें खड़ी कर देती है.
 
मैं जब आध्यात्मिक विषयों पर कुछ लिखती हूँ तो कुछ दोस्तों के सुझाव आते हैं कि किस चक्कर में पड़ गयी हो, ऐसे तो रचनात्मकता पूरी तरह ही खत्म हो जायेगी. मैं भी यह अच्छी तरह जानती हूँ कि कौनसे विषय हैं जिन पर मेरा लिखा हुआ बहुत ज्यादा पसंद किया जाता है. किन शब्दों को अपनी आवाज़ देने पर वे अधिक सराहे जायेंगे. कौनसा लेखन सफलता की ऊंचाईयों तक पहुँचा सकता है. लेकिन चेतना जिसकी अनुमति नहीं देती वह कार्य कर पाना कितना मुश्किल हो जाता है. एक लेखक की मुसीबतें तो ऐसे में हजार गुना बढ़ जाती है. जब तक उसके मन में अपने अस्तित्व को बचाए रखने की जरा सी भी चाह हो तब तो बहुत ज्यादा. और तब अपने कुछ विरोधाभासों को भी स्वीकार करना पड़ता है. इस आशा के साथ कि किसी दिन हम इतना साहस अर्जित कर पायेंगे कि उनसे भी मुक्ति पा सकें. जब न कदम पूरी तरह आध्यात्मिकता की ओर बढ़ाये जा सके और ना ही भौतिकता को पूरी तरह छोड़ा जा सके तब संतुलन का रास्ता ही चुनना होता है.
 
जब कोई कहता है कि अज्ञानता एक वरदान है. तब वह इस मायने में बहुत सही कहता है कि एक जड़ जीवन, एक बंधा-बंधाया जीवन जीना बहुत आसान होता है. तभी तो पशु दुनिया जहाँ की चिंताओं से मुक्त खुद में ही मग्न नज़र आते हैं. लेकिन जिसकी चेतना धीरे-धीरे जागने लगती है जाने कितने द्वन्द और संघर्ष उसका इंतजार कर रहे होते हैं. और ऐसे में बाहरी और व्यक्तिगत जीवन की परिस्थितियाँ जब पूरी तरह से प्रतिकूल हो तब तो कहना ही क्या. पर इन प्रतिकूलताओं में भी जो अनुकूलता खोज लेता है असली विजेता वही होता है.
 
By Monika Jain ‘पंछी’

How is this article about materialism vs spirituality in modern times?