Sunday, February 28, 2016

Fun Quotes in Hindi

Fun Quotes in Hindi. Funny Slogans, Comedy Comments, Making Joke of Someone, Joking Quotations, Majak Udana, Sms, Messages, Proverbs, Taglines, Sayings, Sentences, Dialogues, Punchlines, Status.
 
Fun Quotes

  • हंसी चाहे 100 वाट की हो, 200 वाट की या 1000 वाट की...किसी दूसरे का मजाक उड़ाने, अपमान करने या नीचा दिखाने पर आश्रित नहीं होती. अगर हो रही है तो हम समझ लें कि वह सहज हास्य नहीं कुंठित हास्य है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • एक दो-तीन साल की बच्ची नमकीन के लगभग खाली पाउच से थोड़ी बची हुई नमकीन को हाथों से चाट-चाट कर इस तरह खा रही है जिसे हम तथाकथित सभ्य लोगों की भाषा में गँवारों की तरह खाना कहते हैं. उसके चारों तरफ खड़े उसके कुछ सभ्य रिश्तेदार उसको देख-देखकर हँस रहे हैं. कोई यह सोचकर हँस रहा है कि कितनी गँवार हैं, मम्मी-पापा ने खाने के मैनर्स तक नहीं सिखाये, खाने के लिए मरी जा रही है. कोई फोटो पे फोटो शूट कर रहा है और फनी से फनी फोटो के लिए उसे प्रेरित का रहा है. कोई ठहाकों पे ठहाकें लगाए जा रहा है. और वह इन सबसे बेखबर अपने काम में मस्त है. उसे समझ नहीं आ रहा कि ये लोग मुझपे क्यों हँस रहे हैं.
    कई लोगों के लिए यह सामान्य हँसी-मजाक की बात है. यूँ तो मैं भी बहुत हँसती-मुस्कुराती हूँ पर पता नहीं क्यों मुझे दूसरों की ऐसी बातों पर कभी हँसी नहीं आती. इन ठहाकों के बीच उसे देखते हुए मेरे दिमाग में सिर्फ एक बात चल रही थी कि बच्चे कितने मासूम होते हैं. उन्हें नहीं आता किसी की हँसी उड़ाना. उन्हें नहीं पता होता कि कौन उनके लिए कैसे भाव रखता है. उन्हें नहीं आता झूठ बोलना या सभ्य होने का दिखावा मात्र करना. दिखावा इसलिए क्योंकि जो लोग सभ्यता से ऊपर से नीचे तक नहाये हुए हैं, उनके मन में कितनी ज्यादा और किस-किस तरह की भूख होती है, यह मैं बेहतर जानती हूँ, जिसके सामने किसी की यह असभ्य भूख तो कुछ भी नहीं है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ये अधिकांश फेसबुक कविताओं को सस्ती तुकबंदी, घटिया जोड़-तोड़, जबरदस्ती की कविता, सरदर्द और भी बहुत कुछ उल्टा-सीधा कहने वाले विद्वान जन खुद को समझते क्या हैं ? ये बेवजह का मजाक उड़ाने वाले लोग मुझे आज तक समझ नहीं आये. कोई कुछ सीख रहा है, लिखने की कोशिश कर रहा है तो पहले ही उसका गला घोंट दो ? आप लोग क्या अपनी माँ के गर्भ से महान लेखक/कवि बनकर ही जन्में थे ? अगर इतने ही साहित्य के हितैषी हैं तो अच्छा नहीं लिखने वालों को सुधार करने में मदद कीजिये, उन्हें उनकी कमी बताइए और वह नहीं कर सकते तो पढ़िए ही मत, अनफॉलो कर दीजिये. ये बार-बार हंसी उड़ाने का क्या फायदा है ? वैसे सच कहूँ तो जिन्हें आप सस्ती कवितायेँ कहते हैं उन्हें पढ़कर इतना सरदर्द नहीं होता जितना आपकी इस तरह की पोस्ट्स से आती अहंकार और जलन की बदबू से होता है. हाँ मेरे पास भी अनफॉलो का विकल्प है, पर क्या हैं ना कि मुझे देखना होता है कि ये महँगी कवितायेँ आखिर होती कैसी हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ लोग किसी की स्वीकारोक्ति पर उसका मजाक उड़ाते हैं. ऐसे लोग असल वाले मुर्ख होते हैं और सच्चाई और ईमानदारी के खात्मे में परम सहयोगी भी. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हर कोई हर चीज में विशेषज्ञ नहीं होता. मुझे अच्छा नहीं लगता जब लोग किसी की अयोग्यता और अकुशलता का मजाक बनाते है. ~ Monika Jain ‘पंछी’
 
By Monika Jain 'पंछी'

How are these quotes about making fun of others?
 
 

Short Sad Love Story in Hindi

Short Sad Love Story in Hindi. Heart Touching Stories, Prem Kahani, Pyar Laghu Kahaniyan, Break Up Katha, Ishq, Parting Tale, Mohabbat, Painful Separation Small Tales. लघु कहानियां, प्रेम कहानी.
 
अधूरी प्रेम कहानियां...
 
(1)

तुम्हें याद रह गए सिर्फ कड़वे शब्द और मेरे जेहन में समा गया था तुम्हारा मीठापन. जबकि अक्सर तुम कह जाते थे, बहुत मीठी है मेरी बातें और अक्सर मुझे लग जाते थे तुम थोड़े से सख्त. मेरी खोज उस सख्ती में छिपी नर्माहट की रही और शायद तुम्हें ढूँढना था मुझमें कड़वाहट को. जिसे जिसकी तलाश थी उसमें वही बाकी रह गया. देखो न तभी तो मैं नहीं तोड़ पायी आज तक नेह का वह बंधन जिसे तुम यह कहकर छिटक गए कि तुम्हें नहीं चाहिए कोई भी नकारात्मकता. और मुझे आज तक एक छोटी सी बात पर यह 'तोड़ना' सकारात्मक नहीं लग पाया.
 
(2)

तुम अकेले आज भी नहीं हो. क्या हुआ जो तुमने कहा था गर है मुझे तुमसे प्रेम तो मैं तुम्हें कभी नजर न आऊँ. मैं घुल गयी थी हवाओं में और आज भी गर्मी के भीषण ताप में शीतल हवाओं के झोंके बन छू जाती हूँ तुम्हें...ताकि पहुँचा सकूँ तुम तक थोड़ी शीतलता. क्या हुआ जो तुमने कहा था गर है मुझे प्रेम तो मैं तुमसे कभी बात न करूँ. मैं बन गयी थी बरगद के पेड़ के चबूतरे का वह सन्नाटा जहाँ तुम अक्सर तुम अपने मन को शांत करने चले आते हो. क्या हुआ जो तुमने कहा था मैं तुम्हें कुछ भी लिखकर न भेजूं. मैंने बंद कर दिए हैं शब्दों के सारे संवाद तुमसे पर वह जो कोयल रोज तुम्हारे घर के सामने पेड़ पर बैठकर घंटों कूंकती हैं न?...वह मेरा मन पढ़कर उड़ी चली आती है तुम्हारे पास. सुना है उसे सुनकर तुम्हें बहुत अच्छा लगता है.
 
(3)

तुमने हमेशा दुनिया की आँखों से मुझे पढ़ा. बस एक बार...सिर्फ एक बार...मेरी आँखों को पढ़ा होता. बहुत कुछ उन ब्लेंक स्पेसेस में भी लिखा होता है...जो शब्दों के बीच छोड़े जाते हैं.
 
 (4)
 
उसका प्रेम खरा था, पर जब सारी दुनिया से उपजी निराशा का ठीकरा उसके सर फोड़ा गया तो वह खुद को निराशा के गहरे सागर में डूबने से नहीं बचा पायी. जब उसकी भावनाओं को दुनिया के सामने दांव पर लगाया गया तो वह अपना आत्मसम्मान भी खोने लगी. हर बार प्रेम के बदले मिली नफरत और तिरस्कार ने उसे खुद से नफरत करना सिखा दिया. जब प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हर गलती का जिम्मेदार उसे ठहराया गया तो वह बेवजह का अपराध बोध पालने लगी. वह मनहूस है, वह विपदा लाने वाली है, ऐसे अहसासों ने उसका आत्मविश्वास डिगा कर रख दिया. गलती मेरी है, गलती मेरी ही है... यह रटते-रटते वह एक दिन खुद को ही गलती मान बैठी. उसने बचपन में स्कूल की कापियों में सीखा था गलतियों को मिटाया जाता है, उन्हें काटा जाता है, उन्हें फाड़ दिया जाता है. उसने खुद के साथ भी वही किया. उसने खुद को मिटा दिया. काश! उसने जो वाकई में गलत लोगों से प्यार करने की गलती को सही किया होता.
 
 
By Monika Jain ‘पंछी’

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Saturday, February 27, 2016

Love Messages in Hindi

I Love You Messages in Hindi. Loving Statements for Him, Her, Girlfriend, Boyfriend, Lovely Msg, Lovers Sms, Lovable Status, Pyar, Prem, Mohabbat, Ishq, Preet. प्रेम, प्यार, इश्क, मोहब्बत सुविचार.
 
Love Messages

  • जिसे तुम प्रेम कहते रहे वह कारागृह था, जहाँ अंधकार था अविश्वास का...जहाँ बस तड़प थी, बेचैनी थी, छटपटाहट थी मुक्ति की. वहाँ मुक्ति कैसे मिलती जहाँ आत्मा का विकास ही अवरुद्ध हो चुका था...जहाँ मेरे पंख काट दिए गए थे...जहाँ सांस लेना भी मुश्किल था. जिसे मैं प्रेम कहती हूँ वह खुला आकाश है...जहाँ विश्वास का प्रकाश है, स्वतंत्रता की सांस है और आत्म उत्थान के पंख भी. वह प्रेम जो सदा ऊंचाइयों पर ले जाता है. जहाँ कोई पछतावा नहीं, जहाँ कोई अनिर्णय की स्थिति नहीं...जहाँ सिर्फ और सिर्फ रोशनी है, जिसमें प्रेम हीरे के मानिंद चमकता है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • तुमने महसूस किया और मैं उपकृत हुई. मेरा प्रेम कभी नहीं चाहेगा अनजाने में भी तुम तक पहुँचे कोई अवांछित शोर...गर वह मधुर संगीत बनकर नहीं बचा पाता अपना अस्तित्व तो वह रहेगा सदा तुम्हारे भीतर नीरव सा...शांत सा...मौन बनकर...बस वह नहीं रह सकता तुमसे जुदा...तुमसे पृथक. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मैं जब भी पढ़ती हूँ यहाँ इस समाज के कुछ घिनौने सच तो रूह तक काँप उठती है...मन बहुत बेचैन हो जाता है...सहम जाता है मेरा दिल...उभर आती है तनाव की लकीरे माथे पर...सिमट जाती हूँ अपनी ही जगह पर...कुछ समय के लिए सुन्न सा हो जाता है दिमाग और तब एक ही चीज की जरुरत शिद्दत से महसूस होती है...तुम्हारे स्नेह भरे स्पर्श की. सोचती हूँ जो इस घिनौने सच का वास्तव में सामना करते होंगे, उनके लिए तो जीवन डर का ही दूसरा नाम बन जाता होगा...और उन्हें कितने-कितने ज्यादा प्यार की जरुरत होती होगी न? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • सदियों में ऐसे लोग बनते होंगे न...जो दिल, दिमाग सब छू जाते हैं...और होठों पर रह जाती है फकत मुस्कुराहटें. क्या कोई अजनबी ऐसा भी हो सकता है जिसके लिए मन एकदम निर्मल और निष्कपट बन जाए और दिल बस प्यार और विश्वास से भरा हुआ. क्या कोई ऐसा भी हो सकता है जिससे दिल बिना कुछ कहे और सुने भी बात करना चाहे उस शुद्धतम और सर्वव्यापी भाषा में जिसे प्रेम कहते हैं. क्या कोई ऐसा भी हो सकता है जिस तक आकर ज़िन्दगी की सारी तलाश खत्म हो जाए. जिसे जानने के बाद और किसी को जानने की ख्वाहिश ही न रहे. जिसके अहसास के साथ कुछ पल जी लेने के बाद लगे कि अब बस मौत भी आ जाए तो कोई गम नहीं. इतना सुकून, इतनी शांति और इतनी ख़ुशी देने वाला भी क्या कोई हो सकता है? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ लोग आपकी अच्छाईयों और कमियों का परिचय आपसे कुछ इस तरह करवाते हैं कि फिर तो बुराई की ओर भटकने का कोई चांस ही नहीं रहता. फिर कितनी भी मुश्किल आये अच्छाईयाँ अच्छी ही लगती है. खुद से प्यार बढ़ जाता है, लोगों से प्यार बढ़ जाता है और ज़िन्दगी से भी. कितने तो अच्छे होते हैं कुछ लोग. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जीवन में कभी प्यार की कमी महसूस हो तो खुद को ही प्रेम से इतना परिपूर्ण कर लो कि किसी और की जरुरत ही ना रहे. दिल बहलाने को ख़याल अच्छा है न? ~ Monika Jain ‘पंछी’
 
How are these messages of love?
 
 

Friday, February 26, 2016

Smile Quotes in Hindi

Smile Quotes in Hindi. Always Keep Smiling Sms, Smiley Day Messages, Muskan Suvichar, Muskurahat Thoughts, Laugh Msg, Laughter Status, Laughing Lines, Slogans, Proverbs. मुस्कान, मुस्कुराहट, हंसी.
 
Smile Quotes

  • जीवन में सब कुछ छिन जाए तब भी एक चीज हमेशा बचाकर रखना...अपनी मुस्कुराहट. क्योंकि मुस्कुराहट सृजन करती है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जब भी उदास होती हूँ, जाने कहाँ से कोई अजनबी मित्र मुस्कुराहट लाने वाला सन्देश भेज देता है. सबसे खूबसूरत रिश्ते बिना अपेक्षाओं वाले ही होते है न? और प्रकृति वह तो हमारी सबसे सच्ची मित्र है. वह हमेशा हमें मुस्कुराता हुआ ही देखना चाहती है...हम बस अपने मित्र बन जाएँ. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • किसी के लिए कुछ बुरा सोचते हो वह कभी कहो ना कहो, पर अगर किसी के लिए कुछ भी अच्छा सोचते हो तो आज, अभी और इसी वक्त कह दो. क्या पता कल हो न हो. मुस्कुराहटें बहुत कीमती है और किसी के चेहरे पर खिलने पर तो अनमोल हो जाती है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • पर्सनली मुझे फोटोग्राफी पसंद नहीं है, क्योंकि ऐसा लगता है जैसे कुछ कैप्चर करने के चक्कर में बहुत कुछ छूट जाता है. दूसरी ओर विरोधाभास यह है कि जब भी मैं उदास होती हूँ तो शेयर करने के लिए अपनी हँसती-मुस्कुराती फोटो ढूंढती हूँ, एंड इट वर्क्स. कारण अब तक तो पता नहीं था, पर शायद यही है कि हमें खुद को उदास देखना पसंद नहीं होता. शायद खुद को मुस्कुराते हुए देखते हैं तो मुस्कुराने भी लगते हैं, तो इसलिए अब ये भी लगता है कि ख़ुशी के पलों की कुछ तस्वीरें तो होनी चाहिए...तो इस विरोधाभास का निष्कर्ष यह है कि कैमरा किसी और को पकड़वा दो और खुद एन्जॉय करो :p. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मुस्कुराहटें संक्रामक होती है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जो लोग छोटी-छोटी बातों में ख़ुश हो जाते हैं, उन्हें अक्सर छोटी-छोटी बातों के लिए ही तरसाया जाता है. इसलिए अपनी ख़ुशी के लिए किसी का मोहताज क्यों होना? एक सकारात्मक दिल, दो मुस्कुराते होंठ और दो उम्मीद से चमकती आँखें. बस काफी है ख़ुश रहने के लिए. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • किसी को चीयर अप कर दिया तो समझो दिन बन गया, और जब-जब कोई कह देता है कि तुम ज़िन्दगी भर याद रहोगी, तब तो नींद में भी मुस्कुरा लेती हूँ. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • छोटी-छोटी बातों में खुश हो लेना चाहिए. कभी-कभी बिन बात के भी खुश हो लेना चाहिए. क्योंकि होठों की मुस्कुराहट मन की ख़ुशी का सीक्रेट है. और यह उतना ही सच है जितना कि दिल की ख़ुशी होठों की मुस्कुराहट का राज. और हाँ ये फेसबुक की स्माइल भी बहुत काम की है. सो रोज यहाँ भी जहाँ-तहाँ ढेर सारी स्माइली बना लेनी चाहिए. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कोई परेशानी में है, तकलीफ में है, दुःख में है तो बार-बार उससे कारण मत पूछो. बस इतना प्रयास करो कि वह अपने दुःख से ध्यान हटाकर मुस्कुरा सके. मुस्कुराहट बाँटों... सहजता दौड़ी चली आएगी. ना भी आई तो उद्देश्य तो पूरा हुआ. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • गरीब है वह जिसके पास दूसरों के लिए मुस्कुराहट नहीं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • एक्स्ट्रा चीजों को जब भी खुद से मुक्त करके किसी जरूरतमंद को देते हैं, तब उसके चेहरे पर जो मुस्कुराहट खिलती है, उसे देखकर लगता है कि चवन्नी की चीज के चार हजार वसूल हो गए. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • बहादुर वह है जो सबसे मुश्किल समय में भी अपने चेहरे की मुस्कान खोने नहीं देता. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मुस्कराहट, आपकी ख़ूबसूरती में सुधार का सबसे सस्ता तरीका है ~ अज्ञात / Unknown  
  • यदि मुस्कान आपके स्वभाव में नहीं, तो दुकानदारी के चक्कर में ना पड़ें ~ जर्मन कहावत / German Sayings  
  • मनुष्य को आपत्ति का सामना करने में सहायता देने के लिए मुस्कान से बड़ी कोई चीज नहीं है. ~ संत तिरुवल्लुवर / Saint Thiruvalluvar 
  • मुस्कान की लागत कुछ नहीं होती, पर इससे मिलता बहुत कुछ है. ~ अज्ञात / Unknown
 
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Quotes on God in Hindi

Quotes on God in Hindi. Bhagwan Sms, Allah Thoughts, Eeshwar Messages, Parmatma par Vichar, Slogans, Ishwar Sayings, Divinity Quotations, Status, Lines, Slogans. ईश्वर, भगवान, परमात्मा सुविचार.
 
Quotes about God

  • जो भक्त बनाना चाहते हैं...भगवान नहीं हो सकते. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • बहुत सारे ईश्वर और बहुत सारी श्रद्धाएँ...आस्था और श्रद्धा का हवाला देते अधिकांश लोगों की आस्था खोखली. क्यों? क्योंकि किसी के प्रति आस्था तब तक आस्था नहीं हो सकती जब तक उसके सुविचारों में आस्था ना हो...और सुविचारों में आस्था मतलब कहीं ना कहीं उन्हें अपनाने का प्रयास. जो अपनाने का प्रयास होता तो दुनिया में इतनी समस्याएँ क्यों कर होती? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जब भी यह सवाल पूछा जाता है कि सृष्टि की रचना किसने की तो एक सामान्य जवाब होता है ईश्वर ने, परमात्मा ने. पर फिर एक सवाल खड़ा हो जाता है कि परमात्मा को किसने बनाया? और जो ईश्वर राग, द्वेष, काम, क्रोध, लोभ, माया सबसे मुक्त माना जाता है उसे सृजन की जरुरत या चाह क्यों आन पड़ी? ऐसे में मुझे तो हमेशा से यही थ्योरी सही लगती है कि :
  1. परमात्मा शुरुआत नहीं चरम है. 
  2. परमात्मा निर्माण नहीं निर्वाण है.
  3. परमात्मा कारण नहीं परिणाम है.
  4. परमात्मा साधन नहीं साध्य है.
  5. परमात्मा (परम+आत्मा) कोई एक दृश्य स्वरुप नहीं बल्कि आत्मा की उच्चतम व स्थायी अवस्था है, जिसे हर एक आत्मा प्राप्त कर सकती है. अर्थात जितनी आत्माएं हैं उतनी ही परम आत्माएं संभव है. यह एक स्केल का शीर्ष बिंदु है जो कि अंतिम लक्ष्य है. और वे सभी साधु सन्यासी जिनमें सांसारिकता कूट-कूट कर भरी है, वे स्केल पर एक साधारण मानव से भी निचले पायदान पर होते हैं, जिन्होंने धर्म तक को व्यापार बना दिया. ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 'अल्लाह ओ अकबर' का नारा लगाकर खून की नदियाँ बहाने वाले इन नर पिशाचों के सामने अगर कोई सबसे बेबस और लाचार नज़र आता है, तो वह खुद इनका अल्लाह ही है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ लोगों का जनसँख्या के मुद्दे से कोई लेना देना नहीं होता, क्योंकि वे सोचते हैं बच्चे भगवान की देन होते हैं. समझ नहीं आता अपनी करनी लोग भगवान् पर कैसे थोप देते हैं? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कई लोग ईश्वर की पूजा इसलिए करते हैं ताकि वे बुरे काम करने का लाइसेंस प्राप्त कर सके. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ईश्वरत्व को पाने के लिए आडम्बर की नहीं मन की पवित्रता की जरुरत होती है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कोई भी व्यक्ति सेब के बीजों की गिनती कर सकता है लेकिन बीज में सेबों की गिनती केवल भगवान ही कर सकते हैं. ~ रोबर्ट एच शुलर / Robert H Schuller  
  • भगवान पर भरोसा रखें लेकिन अपनी तैयारी पूरी रखें. ~ ऑलिवर क्रॉमवेल / Oliver Cromwell 
  •  जो ईश्वर की सेवा करना चाहता है उसे पहले उसके संतानों की, इस संसार के सारे जीवों की सेवा करनी चाहिए. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda  
  • परमात्मा जब माया का शासक रहता है, तब उसे ईश्वर कहा जाता है और जब माया के अधीन होता है तब जीवात्मा कहलाता है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda  
  • भगवान में विश्वास न रखने वाले व्यक्ति के लिए मृत्यु एक अंत है, लेकिन विश्वास करने वाले के लिए यह एक शुरुआत है. ~ अज्ञात / Unknown 
  • सौन्दर्य और शील भगवान के लोक पालन व लोक रंजन के लक्षण हैं, जबकि शक्ति उद्भव और लय का लक्षण है. ~ रामचंद्र शुक्ल / Ramchandra Shukla
  • जब तक ईश्वरीय इच्छा हमारा नियम है, हम एक प्रकार के केवल सभ्य दास हैं. ~ मैकडोनल्ड / Madonald

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Thursday, February 25, 2016

Amazing Facts about Facebook in Hindi

Amazing Facts about Facebook in Hindi. Social Media Sites, Interesting, Fun, Funny Information, Unknow, Crazy, Cool, Weird, FB Good Bad Figures, Negative, Dislike Button. फेसबुक से जुड़े रोचक तथ्य, जानकारी.
 
Amazing Facts about Facebook

  • लाइक नहीं किया, बिना पढ़े लाइक किया, कमेंट नहीं किया, कमेंट को लाइक नहीं किया, कमेंट को सिर्फ लाइक ही किया, कमेंट का रिप्लाई नहीं किया, रिप्लाई में सिर्फ वाह, गुड, नाइस और स्माइल ही किया....उफ़...ये शिकायतें हैं कैसी-कैसी? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ समय पहले मैंने 2-3 महीने के लिए अपना फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया था. तब फ्रेंड लिस्ट में कुछ फ्रेंड्स को लगा कि मैंने उन्हें ब्लॉक कर दिया है. कृपया ऐसी ग़लतफ़हमी न पाले. मुझे बेवजह ब्लॉक या अनफ्रेंड करने के दौरे नहीं पड़ते. मेरे द्वारा यूज़ किये जाने वाले ये सबसे रेयर ऑप्शन्स हैं. वैसे ब्लॉक और अनफ्रेंड करने की बात पर कुछ मजेदार बातें आप लोगों से शेयर करने का मन कर रहा है. जैसे कुछ लोग सिर्फ इसलिए किसी को ब्लॉक या अनफ्रेंड कर देते हैं क्योंकि वह उनकी पोस्ट्स पर लाइक और कमेंट नहीं करता. कुछ लोग बाकायदा अपनी फ्रेंड लिस्ट की छंटनी की पूर्व सूचना का स्टेटस डालते हैं, बिल्कुल उसी तरह जैसे मंदी के समय कर्मचारियों की छंटनी होती है. कुछ लोग टैग करने वालों को अनफ्रेंड करने की धमकी भरे स्टेटस डाल-डाल कर थक जाते हैं पर टैग करने वाले टैग करते नहीं थकते. एक बार एक बन्दे ने मुझे यह मेसेज करते हुए अनफ्रेंड किया कि आप तो सेलेब्रिटी हो, आपके बहुत से फेंस हैं इसलिए आपकी मित्रता नहीं संभाली जायेगी. मैं कुछ देर तक सोचती रही - यह कॉम्प्लीमेंट था या कमेंट :p . वैसे मैं इतने मजेदार कारणों कि वजह से किसी को भी अनफ्रेंड या ब्लॉक नहीं करती इसलिए ग़लतफ़हमी कि स्थिति में बेझिझक मुझसे क्लियर कर लें. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • फेसबुक पर 'dislike' के आप्शन का समर्थन करने वालों : पहले ही क्या कम नफरत, घृणा, ईर्ष्या, द्वेष, नकारात्मकता और जहर है जो और बढ़ाना चाहते हो? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • फेसबुक पर होने का एक नुकसान यह है, कोई भी बात मन में नहीं टिकती, तुरंत उतर जाती है यहाँ. बातें जो सिर्फ खुद के लिए और खुद तक ही सीमित होनी चाहिए वें भी अभिव्यक्त हो जाती है. अंतर्मुखता और निजता को पूरी तरह से खत्म करने की साजिश है यह. सबकी पर्सनल डायरी बन गयी है यह जो बिल्कुल भी पर्सनल नहीं. कुछ विचार ऐसे होते हैं जिन पर विचार करना बनता है, वे खुद के लिए होते हैं, तुरंत अभिव्यक्त करने के लिए नहीं. इसके अलावा सुबह उठने से लेकर रात सोने तक की हर एक बात, पूरा का पूरा किचन, हर एक ख़बर फेसबुक पे आना पता नहीं सही है या नहीं. दिखावे की प्रवृति बहुत बढ़ रही है और धैर्य गुम हो रहा है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कई बार फेसबुक खोलते ही ताजा ख़बरें मिलती है - आज इतनों को ब्लॉक किया, आज उतनों को अनफ्रेंड किया ....लोग अनफ्रेंड और ब्लॉक करने के समाचार इतने गर्व से सुनाते हैं, जैसे कि माउंट एवरेस्ट फतह कर आये हों. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यह एक सामान्य मानसिकता है कि 100 अच्छाईयाँ याद नहीं रहती, पर एक बुराई याद रह जाती है. 1000 बार की गयी मदद याद नहीं रहती पर 1 बार का मना कर देना याद रह जाता है. इसी तरह हजारों बार किये गए लाइक याद नहीं रहेंगे, लेकिन एक बार का डिसलाइक याद रह सकता है. और यह डिसलाइक संक्रामक बीमारी की तरह फैलने के पूरे आसार हैं. हालाँकि यह बटन आ भी जाए पर मैं इसका उपयोग कभी नहीं करुँगी. गलत कंटेंट के लिए रिपोर्ट करना ज्यादा उचित है. 'Dislike Button' फेसबुक के विनाश का कारण बन सकता है. ~ Monika Jain ‘पंछी’
 
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Truth Quotes in Hindi

Truth Quotes in Hindi. Bitter Fact of Life Thoughts, Truthfulness Sms, Satya Vachan, Vichar, Kathan, Reality Slogans, Genuineness Status, Lines, Dohe, Sayings, Proverbs. सत्य पर विचार, कथन, वचन.
 
Truth Quotes

  • अहंकार सच स्वीकार नहीं कर पाता, भय सच प्रकट नहीं कर पाता और स्वार्थ सच को भी झूठ सिद्ध कर देता है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जो शब्दों में उलझकर रह जाते हैं...सत्य से दूर हो जाते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ‘मैं हमेशा सच बोलता/बोलती हूँ’, यह कहना अपने झूठ में बस एक और इजाफा करना भर है. सत्य यह है कि जिस क्षण हम बोलना शुरू करते हैं, असत्य की हमारी यात्रा शुरू हो जाती है. व्यक्ति दर व्यक्ति इसमें मात्रात्मक भिन्नता हो सकती है, किन्तु असत्य की पूर्णतः अनुपस्थिति दुर्लभतम है. शायद इसलिए मौन को सर्वश्रेष्ठ तप कहा गया है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कल किसी ने भ्रम की बात की कि वास्तविक दुनिया से परे सब बातें भ्रम है. वैसे अनुभव यह कहता है कि जो चीजें आज हैं, कल नहीं होंगी. कल होंगी तो परसों नहीं रहेंगी, वे सारी चीजें भ्रम है. सत्य सिर्फ वही होता है जो हमेशा और हमेशा रहता है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जिसने सत्य को जान लिया उसके लिए सत्य के विपरीत जाना असंभव है. लेकिन जिसे सत्य की आंशिक झलक भी नजर आई हो, उसके लिए भी ठहरना बहुत मुश्किल है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • सत्य परंपरा से नहीं मिलता, सत्य सतही तर्कों से भी नहीं मिलता, सत्य सिर्फ अनुभूतियों से मिलता है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ पंक्तियाँ अवचेतन मन से उतरती है...जादुई सी...शाश्वत सत्य सी...अनजाने में. जिन्हें पढ़कर यह अहसास होता है कि हम सब कुछ जानते हैं...सिर्फ भुलाये बैठे हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • व्यक्ति का आत्मबल उसकी जड़ वस्तुओं से अवरुद्ध हो जाता है. जिसके पास ये जड़ बंधन जितने ही कम होते हैं, वह उतनी ही जल्दी सत्यपरायण हो जाता है. ~ हजारी प्रसाद द्विवेदी / Hazari Prasad Dwivedi 
  • सत्य और अहिंसा से तुम संसार को अपने सम्मुख झुका सकते हो. ~ जैन संत / Jain Saint 
  • पूर्व धारणा के साथ बोला गया ‘नहीं’ सिर्फ दूसरों को खुश करने या समस्या से छुटकारा पाने के लिए बोले गए ‘हाँ’ से बेहतर है. ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi  
  • सत्य की जिज्ञासा ऋषित्व का प्रथम और अंतिम लक्षण है. सत्य का साक्षात् दर्शन जिसे हो, वह ऋषि है. ~ वासुदेव शरण अग्रवाल / Vasudev Sharan Agarwal 
  • एक झूठ हजार सच्चाइयों का नाश कर देता है. ~ अज्ञात / Unknown 
  • मनुष्य चाहे जितने प्रकार के सत्य की उपलब्धि करे, उसका प्रत्येक सत्य भगवान के दर्शन के सिवाय और कुछ नहीं है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda  
  • सच बोलने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको यह याद नहीं रखना पड़ता कि किससे क्या कहा था. ~ रोबर्ट बेंसन / Robert Benson 
  • सत्य को शब्दों में नहीं ढाला जा सकता. सत्य अभिव्यक्त होते ही असत्य हो जाता है. यह सिर्फ अनुभूति का तत्व है. अभिव्यक्ति का नहीं. ~ अज्ञात / Unknown 
  • सच थोड़ी देर के लिए दर्द देता है पर झूठ हमेशा के लिए दर्द देता है. ~ Eileen Prr 
  • सत्य से प्यार करें और गलती को क्षमा कर दें. ~ वाल्तेयर / Voltaire 
  • कोई भी बात इसलिए सच्ची नहीं हो सकती कि वह बहुत दिनों से बहुत लोगों द्वारा कही जाती रही है. ~ शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय / Sarat Chandra Chattopadhyay
 
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Wednesday, February 24, 2016

Essay on Education System of India in Hindi

Essay on Modern Education System of India in Hindi. Adhunik Shiksha Pranali par Nibandh. Schooling Structure, Educational Problems Article, Speech, School Paragraph. आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर निबंध.
 
और भी लाखों तरीके हैं...
 
भाषा व्याकरण और वर्तनी सम्बन्धी अशुद्धियाँ हममें से अधिकांश लोग करते हैं। कुछ कम, कुछ ज्यादा। अशुद्धियाँ करने वालों का मजाक उड़ाती पोस्ट्स भी कई बार देखी हैं। यहाँ तक कि यह भी लिखा देखा है कि अशुद्ध लिखने से बेहतर है लिखा ही न जाए। इससे ज्यादा नकारात्मक और निराशवादी कथन और क्या होगा? यह बिल्कुल ऐसा ही है कि अगर आप हकलाते हैं तो बोलना बंद कर दें; लंगड़ाते हैं तो चलना बंद कर दें; कम नज़र आता है तो देखना ही बंद कर दें।
 
हममें से कईयों की प्रारंभिक शिक्षा ऐसे विद्यालयों में हुई है, जहाँ ये कभी बताया ही नहीं गया कि विराम चिह्न, अनुस्वार, नुक्ता आदि किस बला का नाम है। कहाँ और कैसे इनका प्रयोग करना है। बताया जाता भी कैसे? जिनसे अपेक्षा थी, वे या तो बड़े आलसी थे या फिर उन्हें खुद इनका सही प्रयोग नहीं मालूम था। मतलब यह समस्या अधिकांश मामलों में व्यक्ति विशेष की नहीं, एक तंत्र की है। कमजोर शिक्षा तंत्र की। जिसे केवल ठहाके लगाकर तो कभी भी नहीं सुधारा जा सकता।
 
कुछ समय पहले पड़ोस में रहने वाली एक 6th क्लास की स्टूडेंट ने बताया कि उनका हिंदी विषय में शब्दार्थ का क्लास टेस्ट था। उसमें एक शब्द था विधाता, जिसका अर्थ वह भगवान लिखकर आ गयी तो उनकी टीचर ने यह कहते हुए गलत कर दिया कि बुक में तो ईश्वर दिया हुआ है और तुम्हारा पर्यायवाची शब्दों का टेस्ट नहीं हो रहा है, शब्दार्थ का हो रहा है। इसलिए वही लिखना है जो बुक में लिखा है। ज्यादा आश्चर्य तो नहीं हुआ क्योंकि ऐसी घटनाएँ तो मैं भी पढ़ाई के दौरान बहुत बार झेल चुकी हूँ। जहाँ टीचर्स सही आंसर को गलत कर देते थे। क्लास के सबसे होशियार बच्चे को ब्लैक बोर्ड पर सबके लिए आंसर्स लिखने को कहकर आराम से कुर्सी पर पसर जाते थे। बच्चों से कॉपीज चेक करवाते थे। पढ़ाई के नाम पर सिर्फ और सिर्फ चैप्टर की रीडिंग...पर मैं एक छोटे से कस्बे की एक सरकारी हिंदी माध्यम स्कूल की छात्रा रही हूँ और ये जो वाकया है ये शहर की एक नामी स्कूल का है जहाँ बच्चों से फीस के नाम पर मोटी-मोटी रकम वसूल की जाती है। इसलिए थोडा आश्चर्य मिश्रित दुःख हुआ और समझ नहीं आया कि क्या कहूँ...हे ईश्वर!...हे भगवान्!...या हे विधाता!
 
इसी तरह एक बार घर के बाहर एक लड़की आई। मैंने पूछा क्या करती हो? वह बोली, 'बकरियाँ चराते हैं।' मैंने पूछा स्कूल नहीं जाती? उसने कहा, 'स्कूल तो छोड़ दी है। स्कूल वाले कौनसी नौकरी दे रहे हैं, जो स्कूल जाएँ। करना तो खेती और बकरियाँ चराने का काम ही है।' आगे मैं कुछ बोल नहीं पायी, क्योंकि जहाँ दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो, वहाँ पर बाल श्रम का विरोध और तथाकथित स्कूली शिक्षा की बातें बेमानी है। क्योंकि जो स्कूली शिक्षा दी जा रही है, वह शिक्षित बेरोजगारों की भीड़ बढ़ाने का काम जरुर कर रही है। ऐसे बेरोजगार जो खेती और पशुपालन के काम को अपने लायक नहीं समझते और सफ़ेद कॉलर वाली नौकरी पा नहीं सकते।
 
खैर! यह एक अलग मुद्दा है, लेकिन हाँ बात अगर लेखन सम्बन्धी अशुद्धियों की हो तो बेहतर होगा कि सामान्य अशुद्धियों को इंगित करती हुई पोस्ट्स विद्वजन डालते रहें या फिर जहाँ अशुद्धि दिखे वहीं अशुद्ध और शुद्ध शब्द बता दिया जाए। यह भी जरुरी है कि जिनकी अशुद्धियाँ बतायी जा रही हैं, वे इसे अपने अहम् पर चोट का मसला न बनायें और सहर्ष गलतियों को सुधारने को तैयार रहें। समाज सेवा सिर्फ वृद्धाश्रम या अनाथाश्रम में जाकर फोटो खिंचवाने से ही नहीं होती, और भी लाखों तरीके हैं।
 
 
By Monika Jain ‘पंछी’

How is this essay about education system of India? 
 
 

Death Quotes in Hindi

Death Quotes in Hindi. Life Sms, Die Messages, Dead, Died, Dying Status, Maut, Mrityu par Vichar, End Slogans, Ending Lines, Jeevan Quotations, Will to Live, Survival Sayings. मृत्यु पर विचार, मौत.
 
Death Quotes

  • एक चींटी मर गयी. रोज लाखों चींटियाँ मरती है. कोई बड़ी बात नहीं. आँखों के सामने न हो तो मेरे लिए भी नहीं होती. पर उस दिन उस चींटी का मरना मेरे लिए बड़ी बात थी. हलके से हाथ से उसे हटाते हुए भी जाने कैसे उसका एक पाँव टूट गया और अपने तीन पांवों पर लंगड़ाते हुए घंटे भर तक एक छोटे से घेरे में चलने का अथक प्रयास करते हुए वह तड़प-तड़प कर मर गयी. उस दिन मैंने जीजीविषा को बेहद करीब से देखा. संघर्ष को बेहद करीब से देखा. मौत को बेहद करीब से देखा था, बल्कि उस एक घंटे में उस मृत्यु को जीया था. सब कहते हैं...चींटी का मरना बड़ी बात नहीं. पर उस दिन मैंने देखा था मृत्यु छोटी या बड़ी नहीं होती. उस दिन मैंने महसूस किया अपने आदर्श रूप में संवेदनशीलता, करुणा और प्रेम सापेक्ष नहीं होते...और मन यही मानता है कि जब किसी के जीवन में ये निरपेक्ष रूप से घटित होते हैं उसकी मुक्ति तय है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जब भी किसी की मृत्यु का समाचार मिलता है, जिन्हें हम थोड़ा बहुत भी जानते हैं तो एकदम से अचंभित हो जाते हैं. कुछ पलों के लिए विश्वास ही नहीं होता...कहीं यह झूठ तो नहीं...कोई मजाक तो नहीं. पर थोड़ी देर बाद हमें यकीन करना पड़ता है, न चाहते हुए भी...और उस समय कुछ देर के लिए ही सही पर दुनिया निस्सार लगने लगती है. जिन्दगी कितनी अप्रत्याशित है. मैं इस बात का भी दावा नहीं कर सकती कि अभी जो मैं लिख रही हूँ उसे पूरा भी कर पाऊंगी या नहीं. हम सब ये बात जानते हैं, पर फिर भी हम पूरी जिंदगी दौड़ते रहते हैं, न जाने कितना बोझ अपने सर पर लादे हुए...कभी ये पाने के लिए तो...कभी वो पाने के लिए. हमारा अंत निश्चित है पर इच्छाओं का कोई अंत नहीं. कई बार मन कहता है, मुझे नहीं बनना इस दौड़ का हिस्सा! मुझे कुछ पल ठहरना है...मुझे सुननी है जिंदगी की वह आवाज़ जो इस शोर में कहीं खो गयी है...किसी ने सुनी है? ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • जीवन की हर एक घटना एक सन्देश देती है...हर एक मृत्यु भी...कि अब भी समय है हम अपनी जड़ता छोड़ दें और प्रेम, अहिंसा व करुणा को आत्मसात कर लें. ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • मौत से मत डरो, ना ही जी गयी जिंदगी से डरो, तुम्हें हमेशा के लिए नहीं जीना है, तुम्हे सिर्फ जीना है. ~ नैटली बैबिट / Natalie Babbitt 
  • मृत्यु भयावह तरीके से निर्णायक होती है, जबकि जीवन संभावनाओं से भरा हुआ है. ~ टायरियन लेनिस्टर  
  • असली घुम्मकड़ मृत्यु से नहीं डरता, मृत्यु की छाया से वह खेलता है लेकिन हमेशा उसका लक्ष्य रहता है, मृत्यु को परास्त करना. वह अपनी मृत्यु द्वारा उस मृत्यु को परास्त करता है. ~ राहुल सांकृत्यायन / Rahul Sankrityayan

How are these quotes about death? 
 
 

Monday, February 22, 2016

Essay on Change in Hindi

Hindi Essay on Be the Change You want to See in the World. Social System Changes Article, Parivartan Paragraph, Badlav Speech, Citizen Responsibility, Society, Samaj Sudhar. परिवर्तन, सुधार, बदलाव.
 
बनों वह बदलाव, जो तुम देखना चाहते हो
 
लेखन कभी मेरा क्षेत्र नहीं था. आज से लगभग तीन साल पहले जब लिखना शुरू किया तब किसी ने कहा, 'तुम्हारे शब्दों में दुनिया को बदलने की ताकत है.' कल फिर किसी ने कहा, 'काश! आप और आप जैसे लोग बच्चों के शिक्षक होते तो यह दुनिया कितनी सुन्दर होती.' ऐसी प्रतिक्रियाएं निश्चित रूप से अनमोल हैं. लेकिन एक चीज हम सब लोगों के लिए समझना बेहद जरुरी है. एक पाठक या एक लेखक की जिम्मेदारी बस यहीं खत्म नहीं हो जाती. बल्कि यहीं से जिम्मेदारियां शुरू होती है. माता-पिता और शिक्षक ये तीन लोग निसंदेह पूरी दुनिया को बेहतर बनाने की ताकत रखते हैं. लेकिन सबसे पहली जरुरत होती है खुद को बेहतर बनाना.
 
कुछ दिन पहले किसी ने कहा, ‘मुंशी प्रेमचंद का ‘हामिद’ दुनिया में कहीं नहीं मिलता।’ क्यों नहीं मिलता? क्योंकि हम हमेशा हामिद की तलाश में रहते हैं। हम कभी भी हामिद बनना नहीं चाहते। हम हमेशा सोचते हैं हमें कहीं कोई महावीर और बुद्ध जैसा दिख जाए, लेकिन हम उनकी राह पर चलने की कोशिश कभी नहीं करेंगे। हम अक्सर अपनी अच्छाईयों की तुलना अपने से कमतर से करेंगे और खुद को बेहतर समझेंगे। लेकिन अगर तुलना करनी भी हो तो हमेशा आदर्श व्यक्तित्व से ही होनी चाहिए। अच्छाई को लेकर हमारी अपेक्षाएं हमेशा दूसरों से जुड़ी रहती है, लेकिन जिस दिन ये अपेक्षाएं खुद से जुड़ जायेंगी, उस दिन दुनिया खुद-ब-खुद अच्छी बन जायेगी।
 
हम भ्रष्टाचार रहित देश चाहते हैं, लेकिन अगर भ्रष्टाचार शब्द का सही अर्थ हमें मालूम होता तो हेलमेट को जानकार घर पर भूल आने के बाद चालान से बचने के लिए ट्रैफिक पुलिस को हम 50-100 को नोट न थमाते। हम हमेशा जगह-जगह गन्दगी फैली होने की शिकायत करते हैं, लेकिन अगर सफाई के मायने हमें पता होते तो प्रकृति को निहारने गए हम, अपने पेट को भरने के बाद बचे प्लास्टिक और पोलीथिन के कचरे को प्रकृति की गोद में न छोड़ आते। हम अच्छी शिक्षा चाहते हैं लेकिन जब कुछ अच्छा पढ़ाया जा रहा होता है, तब भी हम ध्यान नहीं देते क्योंकि हम तो ट्युशन पढ़ने जाते हैं। हम न्याय देखना चाहते हैं, लेकिन अपने पारिवारिक और सामाजिक जीवन में हम न्याय के कितने समर्थक हैं, यह सोचना नहीं चाहते। हम सच का नहीं पैसे और ताकत का समर्थन करते हैं। अपने स्वार्थ के खातिर वृद्ध माता-पिता को वृद्धाश्रम छोड़ आते हैं। अपनी बेटी के लिए जैसे ससुराल की कामना करते हैं, वैसा अपनी पत्नी या बहु को नहीं दे पाते। हमें अपनी माँ, बेटी और बहन की इज्जत बहुत प्यारी है, लेकिन दूसरों की बेटियों और बहनों को हम बुरी नजर से देखना नहीं छोड़ेंगे।

आन्दोलन या क्रांति, ये शब्द कितने अच्छे लगते हैं न हमें? इनका हिस्सा बनकर कितना गर्व महसूस करते हैं हम। न सर्दी देखते हैं, न बारिश। समय की परवाह भी नहीं करते। लेकिन जब बीच सड़क कोई दर्द से कराहता मदद की गुहार लगा रहा होता है तब हम बहरे और अंधे बन जाते हैं। तब हम दुनिया के सबसे व्यस्त इंसान नजर आते हैं।

हमें बेहतर समाज चाहिए, बेहतर न्यायिक व्यवस्था चाहिए, बेहतर सरकार, बेहतर तंत्र, बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, सब कुछ बेहतर चाहिए। लेकिन बेहतरी का यह रास्ता अगर कहीं से शुरू होता है तो हमारे ही भीतर से। पर हम खुद को नहीं बदलना चाहते...तो फिर हम दोयम दर्जे के आत्मकेंद्रित और स्वार्थी इंसान किस मुंह से बदलाव और परिवर्तन की बातें करते हैं?

मुझे याद आते हैं कुछ लोग जो कपड़े समय पर न धुल पाने पर पसीने से तरबतर कपड़ों की सड़ांध से परेशान होकर डीयो या परफ्यूम छिड़ककर खुद को और कपड़ों को सुगन्धित बनाकर बेफिक्र हो जाते थे। बिल्कुल यही...बिल्कुल यही हम अपनी समस्यायों के साथ भी करते हैं। हम समाधान करते हैं और समस्याएं नित नए रूपों में उभरकर सामने आती है। हमें एक परेशानी से निजात नहीं मिलता कि दूसरी परेशानी सर उठाये खड़ी नजर आती है। हमने प्लेग को मात दी तो बर्ड फ्लू का खतरा पैदा हुआ, बर्ड फ्लू को हराया तो स्वाइन फ्लू ने आ झपटा। प्रदुषण, ग्लोबल वार्मिंग, गरीबी, बेरोजगारी, बलात्कार, चोरी, महंगाई...हमारे पास समस्यायों के भंडार हैं। समस्यायों पर ढेरों चर्चाएँ होती है, पर समाधान? क्या सच में हम समाधान ढूंढते हैं? हम सिर्फ सतही बातें करते हैं। हम जानते हुए भी यह स्वीकार नहीं करते कि दुनिया की अधिकांश समस्याएं वैचारिक प्रदूषण से उपजी है। और यही वैचारिक प्रदूषण नित नयी-नयी समस्यायों के रूप में हमारे सामने आता है। जब तक हम सबने अपने मन को शुद्ध करने के प्रयास शुरू नहीं किये तब तक समस्यायों से मुक्ति एक दिवा स्वप्न है।

गरीब अमीर बन जायेंगे, अमीर गरीब बन जायेंगे...नौकर मालिक की जगह पा लेगा, मालिक नौकर की...सवर्ण दलित बन जायेंगे, दलित सवर्ण...महिलाएं पुरुष की जगह पा लेगी और पुरुष महिलाओं की...पर समानता या समाधान तब तक दिवा स्वप्न रहेगा, जब तक हमारे मन से मालकियत, नियंत्रण, अहंकार और स्वार्थ की अति खत्म नहीं होती, जब तक हम अपने मन का कचरा साफ़ नहीं करते, जब तक हम दूसरों के साथ वैसा व्यवहार नहीं करते जैसा हम खुद के साथ चाहते हैं. जब तक हम वह बदलाव नहीं बनते जो हम देखना चाहते हैं.
 
By Monika Jain ‘पंछी’
 
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Thursday, February 18, 2016

Faith Quotes in Hindi

Faith Quotes in Hindi. Faithfulness Sms, Trust and Strength Sayings, Believing Quotations, Belief Slogans, Keeping Confidence, Having Devotion, Loyalty Messages, Dedication Lines. विश्वास, श्रद्धा.
 
Faith Quotes

  • कैसी होती होगी उस मन की स्थिति, जिसे खूनी ना होने पर भी खूनी करार दे दिया जाये. जिसके चोर ना होने पर भी चोरी का इल्जाम लग जाए. जिसके झूठ ना बोलने पर भी उसे झूठा समझ लिया जाए. कितनी भी विषम परिस्थितियाँ हों, सारी दुनिया विरोध में हो, लेकिन जिसे हम चाहते हैं अगर उसका भरोसा साथ हो तो फिर हर मुश्किल को धैर्य से पार पाना आसान हो जाता है. लेकिन अगर स्थिति इसके उलट हो. कोई जिसके विश्वास की सबसे ज्यादा जरुरत हो उसका ही भरोसा ना हो तो ऐसे में 'मैं खूनी नहीं हूँ', 'मैं चोर नहीं हूँ', 'मैं झूठा नहीं हूँ' ये चीत्कारें एक दिन आवाज़ खो देती है और मन के किसी कोने में सिसक-सिसक कर दम तोड़ देती है. ऐसे में बहुत संभव है, जिसने खून नहीं किया वह खुद को खूनी मान ले या खूनी बन जाए. जिसने चोरी नहीं की वह खुद को चोर मान ले या चोरी करने लगे. जिसने झूठ नहीं बोला वह खुद को झूठा समझ ले या सच में झूठ बोलने लगे. और जो पागल नहीं, वह खुद को पागल मान ले या सच में पागल हो जाए. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • प्रॉमिस डे? बस हंसी आ रही है. :) कोई दिन मनाने के विरोध में नहीं रही कभी. लेकिन एक सच यह भी तो है कि जो चीजें दुर्लभ हो जाती हैं, वे दिन विशेष में सिमट कर रह जाती है. यह 'विश्वास' भी तो कुछ ऐसा ही है. इसके लिए किसी वादे की जरुरत नहीं होनी चाहिए थी. लेकिन हमने पैदा कर दी. और तो और उसके बाद 'वादे होते ही हैं तोड़ने के लिए' इस पर भी सील लगा दी. हमेशा कहती हूँ और आज फिर : किसी की सरलता, निर्दोषिता और विश्वास को मजाक मत बनने दो. दुनिया में किसी एक का भी विश्वास टूटता है तो समूची मानवता में अविश्वास गहराता है. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मनुष्य को अपने आप में इतना विश्वास रखना चाहिए कि जीवन टूट जाए पर विश्वास न टूटे. तब पृथ्वी और आकाश दोनों उस पर आशीर्वाद की इतनी वर्षा करेंगे कि वह आशीर्वादमय हो उठेगा. ~ विष्णु प्रभाकर / Vishnu Prabhakar  
  • जब आप कोई निर्णय लेते हैं तो पूरा ब्रम्हान्ड उसे सच करने की कोशिश करता है. ~ राल्फ वाल्डो इमर्सन / Ralph Waldo Emerson 
  • श्रद्धा के मायने अन्धविश्वास नहीं है. किसी ग्रन्थ में कुछ लिखा हुआ था या किसी आदमी का कुछ कहा हुआ था. इसे अपने अनुभव के बिना सच मानना श्रद्धा नहीं है. ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • पुरुष मात्र किसी न किसी के प्रति श्रद्धावान होता ही है. और इसलिए जो जैसा विश्वास करता है, वह वैसा ही बन जाया करता है. ~ गीता / Geeta 
  • यह आपने लिखा है ~ यकीन नहीं हो रहा...यह आपकी आवाज़ है ~ यकीन नहीं हो रहा...यह आपने कुक किया है ~ यकीन नहीं हो रहा...यह आपने ड्रा/डिज़ाइन किया है ~ यकीन नहीं हो रहा... etc...etc...etc. मैं क्या शक्ल से इतनी ढपोल लगती हूँ या जिनपे यकीन होता है वो क्या आसमान से टपकते हैं? काश! कभी कुछ ऐसा बुनूं, जिसपे मुझे भी यकीन न हो. :p ~ Monika Jain ‘पंछी’
 
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Tuesday, February 16, 2016

Essay on Positive Attitude in Hindi

Essay on Positive Attitude in Hindi. Sakaratmak Soch Vichar, Power of Good Thinking Article, Positivity Thoughts, Positiveness, Negative, Negativity. सकारात्मकता, सकारात्मक सोच की शक्ति, फायदे.
 
मैं इस तरह मरना नहीं चाहती

कुछ दिन पहले एक नन्हीं सी चिड़िया सीढ़ियों के रास्ते में फंस गयी थी। छत का दरवाजा और रोशनदान सब खोल देने के बावजूद भी उसे काफी देर तक रास्ता नज़र नहीं आया और बड़ी देर तक वह चीं-चीं करती रही। उसके ये चीं-चीं के स्वर दिल को भेदने वाले थे। जब तक आवाज़ आती रही मन बेचैन रहा। किसी काम में मन नहीं लगा। फिर जब कुछ देर बाद आवाज़ आना बंद हुआ और जाकर देख लिया कि चिड़िया उड़ चुकी है तब जाकर तसल्ली हुई।

नीचे आकर कुछ पढ़ने बैठी तो अचानक ख़याल आया कि यह आवाज़ कितनी जानी पहचानी है। नन्हीं चिड़िया की यह आवाज़ बिल्कुल उस नन्हें बच्चे जैसी ही तो है जो माँ से दूर कहीं अपह्रत करके ले जाया गया हो, या बिल्कुल उस लड़की के जैसी जिसे रास्ते पर कुछ आवारा लड़कों ने घेर लिया हो, या बिल्कुल उस मुर्गे या बकरे जैसी जिसकी गर्दन पर बस कुछ ही देर में छुरी चलायी जाने वाली हो, या बिल्कुल उस वृद्धा जैसी जिसे घर के एक कौने में पटककर उसके मरने का इंतजार किया जा रहा हो। भय और मदद की पुकार की ये आवाजें हर रोज चारों ओर से तो उठती हैं, फिर हमें आजकल कुछ सुनाई क्यों नहीं देता? क्यों धीरे-धीरे हमारी संवेदनशीलता खत्म सी होती जा रही है। जब कारणों को टटोलने बैठी तो देखा एक बहुत बड़ा कारण खुद इन नकारात्मक ख़बरों का अतिप्रसार ही तो है जो धीरे-धीरे हमें संवेदना शून्य बना रहा है।

कुछ दिन पहले ही एक बड़ी अच्छी बात भी मालूम चली। अफ्रीका के समुदाय में जब भी कोई व्यक्ति कोई गलती या अपराध करता है तो उसे गाँव के बीचोबीच ले जाया जाता है। गाँव के लोग उसे चारों ओर से घेर लेते हैं और उसे दो दिन तक उसके सभी अच्छे कामों के बारे में याद दिलाया जाता है, जो उसने अब तक किये हैं। बुराई के आवरण में उसके भीतर उपस्थित अच्छा इंसान जो कहीं खो गया है, यह उसे फिर से जगाने की कोशिश है।

पर हम अगर गौर करें तो पायेंगे कि आज न्यूज पेपर हो, चाहे न्यूज चैनल, सोशल साइट्स हो या कोई भी अन्य माध्यम...सब जगह नकारात्मकता बहुत ज्यादा परोसी जा रही है। सिर्फ समस्या, सिर्फ चिंताएं, सिर्फ शिकायतें ही शिकायतें...समाधान की बातें बहुत कम नज़र आती है। ऐसा लगता है जैसे दुनिया में अच्छाई और भलाई नाम की कोई चीज बची ही नहीं है। खून से लथपथ, बलात्कार, चोरी, रिश्वत, लूट, सांप्रदायिक दंगों और अश्लीलता से सनी ख़बरें दिन-रात हमारे चारों ओर हाहाकार मचाये रहती है। न इनके समाधानों पर ज्यादा चर्चा होती है और न ही उन अच्छी ख़बरों का ज्यादा प्रसार होता है, जहाँ किसी ने किसी के जीवन को बचाया हो या किसी ने अजनबी रहते हुए भी बुरे वक्त में किसी की मदद की हो, या जिसका पूरा जीवन ही मानवता को समर्पित रहा हो।

जबकि इसी दुनिया में ग्यारह साल की एक ऐसी बहन भी है जो अपने छह साल के भाई के बीमार होने पर उसे कंधे पर उठा अकेले आठ किलोमीटर दूर अस्पताल तक पहुंचाकर उसकी जान बचाती है। इसी दुनिया में रिटायर हो चुके एक ऐसे हेडमास्टर भी हैं जो रिटायर होने के बाद भी स्कूल जाकर बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं और पढ़ाने से पहले स्कूल परिसर का झाड़ू भी लगाते हैं। इसी दुनिया में एक ऐसे शिक्षक भी हैं जो सुबह उठकर अख़बार बांटने का काम इसलिए करते हैं ताकि स्कूल के बच्चों को गुणवत्ता युक्त मिड डे मील उपलब्ध करवा सकें और इसी दुनिया में ऐसे माता-पिता भी हैं जो अपनी छह साल की बेटी की मौत हो जाने पर भी अपना धैर्य खोये बिना उसकी आँखों को दान कर किसी की ज़िन्दगी रोशन करने का ज़ज्बा रखते हैं।

तथ्य यह है कि यह दुनिया जो अभी तक टिकी हुई है , अच्छाई पर ही टिकी हुई है। क्योंकि हर इंसान में एक अच्छा इंसान स्वाभाविक तौर पर होता है। मतलब आज भी अच्छाई बुराई की तुलना में ज्यादा है, क्योंकि जिस दिन बुराई बाजी मार लेगी उस दिन तो दुनिया का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। तो बहुत जरुरी है कि हम ज्यादा से ज्यादा अच्छी बातों का, अच्छे लोगों का, अच्छी घटनाओं का प्रसार करें। क्योंकि जो हम पढ़ते, सुनते और देखते हैं उसका हमारे व्यक्तित्व पर बहुत गहरा असर पड़ता है। जिस बात की जितनी ज्यादा चर्चा होती है उसकी उतनी ही गहरी जड़े पैठने लगती है। लगातार बुरी ख़बरों को सुनना हमें संवेदना शून्य, क्रूर और कठोर बनाता है।

क्योंकि बुराई का प्रसार ज्यादा होता है तो व्यक्ति अपनी तुलना अक्सर निम्नतर से करने लगता है। इतने क्रूरता पूर्ण अपराधों की ख़बरें उसे हमेशा इस भ्रम में बनाये रखती है कि वह दूसरों से कम बुरा है, उसकी बुराईयाँ, उसकी गलतियाँ जायज हैं। और ऐसा सोचते-सोचते वह अधिक से अधिक बुराईयाँ संचित करने लगता है।

जब हर तरफ बुराई की ही चर्चा हो; हिंसा, बलात्कार, चोरी की ही बातें हों तो अपराध करते समय उसका डर और संवेदना बिल्कुल खत्म हो जायेगी क्योंकि उसे लगेगा कि सभी यही तो कर रहे हैं। दूसरी ओर अगर अच्छी बातों और अच्छाईयों की चर्चा ज्यादा हो तो व्यक्ति कोई भी हीन कार्य करते समय अपनी तुलना अन्य लोगों की अच्छाई से करेगा और इतना आसान नहीं होगा उसके लिए बुरा काम करना। क्योंकि अच्छाई की चर्चा, भलाई की चर्चा अच्छाई की जड़ें मजबूत करती है।

इसलिए क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम नकारात्मक ख़बरों के प्रसार को थोड़ा कम करें। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम उनके समाधानों की चर्चा ज्यादा करें। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हम अच्छी बातों की चर्चा ज्यादा करें। यह जरुरी है। हमारी संवेदना को बचाने के लिए बेहद जरुरी है। क्योंकि कोई अंतर नहीं एक इंसान के मर जाने में और उसकी संवेदना के मर जाने में। और मैं इस तरह मरना नहीं चाहती, बिल्कुल भी नहीं।
 
By Monika Jain ‘पंछी’ 
 
 

Saturday, February 13, 2016

Love Story in Hindi

Love Story in Hindi. Painful Adhuri Prem Kahani, True, First, Sad, Emotional, Lovers, Dard, Breakup Article, Heart Touching, Broken Trust, One Sided, Valentine Day, Lost Heart. अधूरी प्रेम कहानी.
 
मैं सीख रही हूँ फिर से प्यार बाँटना

उदासी के इस लम्बे दौर में मैंने बना लिए हैं मुस्कुराहटों के कुछ ठिकाने. यूँ तो न जाने कितनी कहानियाँ है इन उदासियों का हिस्सा जिसमें एक कहानी तुम्हारी भी तो है. पर इन कहानियों से चुराकर थोड़े से आंसू मैं बना लेती हूँ हर रोज कुछ मोती और टांग आती हूँ इन्हें उन ठिकानों पर जहाँ इसी तरह जमा की है हर रोज मैंने कुछ मुस्कुराहटें. इस तरह उदासी का हिस्सा होकर भी तुम चमक आते हो कभी-कभी मोतियों सी मुस्कान बनकर...पर फिर भी दिल कहता है कि काश! तुमने मेरी मुस्कुराहटों को चुना होता...उन मुस्कुराहटों को जिनके लिए न चुराने पड़ते मुझे अपने ही आंसू.
 
अपने जीवन के सबसे खुबसूरत और मीठे शब्द मैंने तुम्हारे ही तो नाम किये थे और कभी न सोचा था कि तुम्हारे मन में मेरे लिए इतनी कड़वाहट, इतनी घृणा और इतनी नफरत भर आएगी. अपना अटूट विश्वास मैंने तुम्हें ही तो सौंपा था पर नहीं जानती थी कि तुम्हारे लिए उसका मूल्य दो कोड़ी भी नहीं रहेगा. तुम्हें पाने का कभी इरादा न था लेकिन तुम्हें खो देने के डर में जो गलतियाँ हुई और जो नहीं हुई उनका पूर्ण स्वीकार भी तुम्हारी क्षमा नहीं पा सका. जाते-जाते जो शब्द बाण तुमने छोड़े उनसे बहुत कुछ मर चुका था मेरे भीतर. पर मैं नहीं जानती वह कौनसी भावना होती है जो तुमसे लगातार मिले अपमान, तिरस्कार और व्यंग्य बाणों के बावजूद भी खत्म होने का नाम नहीं लेती. शायद तुमसे कुछ पलों के लिए मिला स्नेह उन सारी उपेक्षाओं पर भारी है जो अब तक जारी है. शायद कुछ लम्हों की मित्रता किसी कसक या द्वेष को मन में ठहरने ही नहीं देती. शायद मेरे प्रति तुम्हारे एक छोटे से अन्तराल के आकर्षण की गुणवत्ता हर उस विकर्षण को हरा देती है जो तुम्हारे अन्याय और पक्षपात को देखकर उपजता है. यूँ तो न जाने कितने लोगों से तारीफें बटोरी है पर तुम्हारे स्नेह से सिक्त प्रेरणात्मक शब्दों की गूँज आज भी तुम्हारी घृणा से उपजे शब्दों पर हावी है. और तुम्हारी नाराजगी देखकर लगता है जैसे सृष्टि का कण-कण मुझसे रूठा है. कुछ ही दिनों की पहचान...पर जैसे सालों का रिश्ता कोई टूटा है.
 
कितना कुछ था जो तुमसे कहना था...कितने सारे डिस्कशंस जो अधूरे छूट गए ...कितना कुछ नया जो उछल कूद कर तुम्हें बताना था. तुम्हारी अनवरत चलती रिसर्च्स, जिनके बारे में कितना कुछ जानना था...सब अधुरा रह गया. अधूरे रह गए वे सुर भी जो सिर्फ तुम्हारी वजह से फिर जागे थे. अधूरी रह गयी न जाने कितनी कवितायेँ जो सिर्फ तुम पर रची जानी थी. अधूरी रह गयी एक कहानी भी, जिसमें बस मुस्कुराहटों को होना था. अब बचा है तो कोरा सन्नाटा...जिसमें सिसकियाँ लेता है वह विश्वास जो तुम मुझ पर ना कर सके, वह भरोसा जो मैंने कभी तोड़ना सीखा ही नहीं और वह दर्द जो सीख रहा है मुस्कुराहटों की आड़ में छिप जाना.
 
सबका भरोसा पाने वाली मैं... नहीं पा सकी एक तुम्हारा ही विश्वास. और देखो न...तुम्हारा भरोसा पाने की जद्दोजहद में जाने कहाँ छूट गया है मेरा ही विश्वास. क्यों हमारे बीच किसी के भ्रम के बीज बोने की कोशिश को तुमने सफल होने दिया? क्यों तुमने किसी और की आँखों से मुझे पढ़ा. बस एक बार...सिर्फ एक बार...मेरी आँखों को पढ़ा होता तो तुम्हें नजर आती वह भावना जो सारी दुनिया की नजरों से तुम्हारी हिफाजत कर सकती थी. तुम्हे अहसास भी नहीं कि सारी दुनिया की ईर्ष्या से बचने की कवायद में तुम उससे ही ईर्ष्या कर बैठे जिसके होठों पर सदा तुम्हारे लिए दुवाएं बसती है. निराशा और झुंझलाहट में अपने जीवन की सारी समस्यायों का ठीकरा तुमने उसके सर फोड़ दिया जो तुम्हारे लिए सकारात्मक ऊर्जा बनना चाहती थी. छोटी-छोटी सी गलतियों को तुमने इतना गंभीर अपराध सिद्ध कर दिया कि अब जरुरत से ज्यादा सजा पाने के बावजूद भी मैं अपराध बोध से मुक्त नहीं हो पाती.
 
जानती हूँ प्रेम के उच्चतम तल को मैं नहीं छू पायी इसलिए ये सारी शिकायतें हैं, ये सारे प्रश्न है. पर हर रोज तुम याद आते हो और मैं खुद को भूल जाती हूँ...हर रोज तुम्हारी बातें दोहराती हैं और मैं ख़ामोश हो जाती हूँ...तुम सिखा रहे हो अपेक्षाओं के पर काटना...और मैं सीख रही हूँ फिर से प्यार बाँटना. लम्हा-लम्हा दर्ज हो रहा है तुम्हारा मौन मन के किसी कोने में...और एक दिन शायद यही सिखाएगा मुझे सही मायनों में प्रेम. वह प्रेम जो सारी अपेक्षाओं, सारी शिकायतों और सारे दर्द से परे हो. वह प्रेम जो सारे बंधनों से परे हो. वह प्रेम जो सिर्फ और सिर्फ मुक्त करता है, वह प्रेम जो समय की सीमाओं से परे हो.

By Monika Jain ‘पंछी’

Friday, February 12, 2016

Love Letter in Hindi

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Love Letter in Hindi

अहा! ज़िन्दगी में प्रकाशित

प्रेम पत्र : एक दिन तुमसे जरुर मिलूँगी 

तुम्हारी ओर क्यों खिंची चली आ रही थी, अब तक नहीं जानती थी. पर जब मासूम अंदाज़ में कही तुम्हारी बातें खुद को बार-बार दोहरा रही थीं तो अचानक अहसास हुआ कि दुनिया में सबसे ज्यादा आकर्षण अगर किसी चीज में है, तो वह मासूमियत में ही तो है. वह मासूम पिल्ला, नन्ही चिड़िया, शांत कबूतर, भोली बछिया, फुदकता मेमना, कोमल शिशु, उसकी नन्हीं सी चप्पल और ऐसी ही मासूमियत को समेटे दुनियाभर की चीजें ही तो सदा से मेरे आकर्षण का केंद्र रही हैं. जिन्हें देखते हुए एक उम्र गुजारी जा सकती है. जिन्हें देखते हुए सारे गम भुलाये जा सकते हैं. जिन्हें देखते हुए दुनिया बहुत-बहुत खूबसूरत लगती है. उस मासूमियत का अंश अगर कहीं पाऊँगी तो खुद को कैसे रोक पाऊँगी. और अब तो रोकना चाहती भी नहीं. क्योंकि मासूमियत से प्रेम ही तो सच्चे अर्थों में ईश्वर से प्रेम है.

तुम तो शायद जानते भी नहीं होंगे कि तुम्हारे बारे में सोच-सोचकर ही चेहरे पर मुस्कुराहट खिल आती है. तुम्हारे खयालों में पूरा दिन और पूरी रात मुस्कुराया जा सकता है. यह दिल तुम पर आँख मूंदकर भरोसा करना चाहता है. जी करता है तुम्हारा हाथ पकड़ लूँ और तुम्हें अपलक देखते हुए, जहाँ तुम चाहो, बिना कुछ सोचे चलती रहूँ. हाथ गालों पर टिका तुम्हारे सामने बैठूं और चुपचाप घंटों तुम्हें सुनती रहूँ. तुम्हें क्या पता... तुम्हारी तो हर बात मानने का दिल करता है. 

जब भी तुम मुस्कुराते हो न तो कुछ ऐसा जादू होता है कि मेरा रोम-रोम मुस्कुराने लगता है . मैं अक्सर तुम्हारी मुस्कुराहटों को काउंट करने लगती हूँ, इस दुआ के साथ कि एक दिन ऐसा आये जब तुम्हारी मुस्कुराहटों को गिन पाना संभव ही न हो. वो अनन्त खुशियों वाला दिन कितना अनुपम होगा न? उस दिन सृष्टि का कण-कण, पत्ता-पत्ता, जर्रा-जर्रा मुझे तुम्हारी मुस्कुराहट प्रेषित करेगा. और मैं? मैं उस दिन बहुत रोऊँगी. जानते हो क्यों? क्योंकि उस दिन मेरे आँसू भी तो मुस्कुराएंगे न.

तुम्हें पता है? जब तुम नहीं होते, तब भी मैं तुमसे बातें करती हूँ, उस सर्वव्यापी भाषा में जिसे प्रेम कहते हैं. इतना निर्मल और निष्कपट मैंने खुद को कभी महसूस नहीं किया. इतने प्यार और विश्वास ने मुझे कभी नहीं छुआ. तुम्हें जान लिया तो लगता है, अब किसी को जानने की ख्वाहिश नहीं. इतना सुकून, इतनी शांति और इतनी ख़ुशी कि तुम तक आकर ज़िन्दगी की तलाश खत्म होती सी लगती है. 

सच कहूँ तो तुम्हें चाहना ज़िन्दगी को चाहना है. जीने की इच्छा जाग उठती है सिर्फ तुम्हें चाहने के लिए. दिल करता है मांग लूँ ईश्वर से एक और जीवन सिर्फ और सिर्फ तुम्हें प्यार करने के लिए. वह जीवन जिसमें तुम्हारे साथ और सामीप्य के लिए किन्तु, परन्तु, अगर, मगर जैसा कोई शब्द मुझे रोक ना सके. वह जीवन जिसमें भूत की परछाइयों और भविष्य के झरोखों से झाँकते भय का कोई अस्तित्व ना हो. वह जीवन जिसमें सिर्फ तुम और सिर्फ मैं के बीच कुछ हो तो वह हो सिर्फ प्रेम. वह प्रेम जो सिर्फ मैं और सिर्फ तुम के अस्तित्व को सदा के लिए मिटा दे और रह जाएँ सिर्फ हम. 

फिर चाहे मैं भोर की पहली किरण बनकर तुम्हारी अलसाई आँखों को सहला उनमें चमक जाऊँ, या फिर चाय की प्याली से चुस्कियाँ लेते तुम्हारे होठों के बीच की रिक्तता से हवा बन तुममें घुल जाऊँ. भोर के भ्रमण में तुम्हारा स्वागत शीतल झोंका बनकर करूँ, या फिर सूरज की गर्मी से सूखे तुम्हारे कंठ में पानी का घूँट बनकर उतरूँ. होली के रंगों में से कोई रंग बनकर तुम्हारे गालों पर खिल जाऊँ, या फिर बारिश की एक बूँद बनकर तुम पर बरसूँ और हौले से तुम्हारे होठों पर लुढ़क आऊँ. रात तुम्हारे सिरहाने कोई मीठी सी धुन बनकर तुम्हें सुलाऊँ या फिर एक हँसी ख़्वाब बनकर नींदों में भी तुम्हें गुदगुदाऊँ. कोयल की कूंक बनकर मिश्री सी तुम्हारे कानों में घुलूँ या फिर भीगी मिट्टी की सौंधी खुशबूं बन तुम्हारी साँसों से जा मिलूं. 

नहीं जानती कैसे, पर एक दिन तुमसे जरुर मिलूँगी. बनूँगी एक लम्हा और बस तुम्हें छू लूंगी.

By Monika Jain ‘पंछी’


World Aids Day Essay in Hindi

World Aids Day Essay in Hindi. International HIV Awareness Month, 1st December Story, Vishva Aids Diwas Kahani, Article, Paragraph, Speech, Information, Messages. विश्व एड्स दिवस पर निबंध, कहानी.
 
अंधेरों में गुम न हो रोशनी

कुछ महीनों पहले ही इस नए शहर में शिफ्ट किया है। घर के पास ही बच्चों का एक पार्क है। शाम होते ही खेलते हुए बच्चों का शोर चिड़ियों की चहचहाहट की तरह हवा में घुल जाता है। बच्चों को इस तरह खिलखिलाकर खेलते हुए देखना मुझे बहुत सुकून देता है। अक्सर जब काम करते-करते थक जाती हूँ तो पार्क की ओर अपना रुख कर लेती हूँ। कभी बच्चों से बातें, कभी उनके साथ खेलना, कभी यूँ ही उन्हें बैठे-बैठे निहारना और अपने बचपन में खो जाना मुझमें एक नयी ही ऊर्जा भर देता है।

पर कल शाम पार्क से लौटने के बाद मन बहुत बेचैन था। तरह-तरह के सवाल मन में उठ रहे थे और बार-बार उस मासूम बच्ची का चेहरा मेरे दिल और दिमाग में उभर रहा था। करीब 7-8 साल की होगी वो। पहली बार ही उसे पार्क में देखा था।

काम करने में मन नहीं लग रहा था सो मेरे कदम पार्क की ओर बढ़ गए। पार्क में सारे बच्चे ग्रुप्स बनाकर खेल रहे थे। कोई पकड़म-पकड़ाई, कोई रुमाल झपट्टा तो कोई आँख मिचौनी। कुछ बच्चे पार्क के झूलों में झूल रहे थे, कुछ फिसल पट्टी पर फिसल रहे थे। सब अपने में मग्न थे। मैं भी उन्हें देखते-देखते टहल रही थी, तभी सहसा पार्क के एक कोने में नज़र पड़ी जहाँ एक प्यारी सी बच्ची अकेले ही मिट्टी से खेल रही थी।

उसके बार-बार आँखों पर गिरते बाल, मिट्टी से सने हाथों से उन्हें हटाने की कोशिश, बीच-बीच में खेलते हुए बच्चों को बड़ी उम्मीद भरी नजरों से देखते हुए मुस्कुरा जाना और फिर उदास होकर मिट्टी के घरौंदे बनाने में लग जाना, यह सब मुझे उसकी ओर खींच रहा था। ऐसा महसूस हुआ जैसे वह बच्चों के साथ खेलना चाह रही है पर कुछ सहमी हुई सी है।

मुझे लगा नयी बच्ची होगी, सबके साथ घुलने-मिलने में शर्मा रही होगी सो उससे दोस्ती करने और सबसे उसकी दोस्ती करवाने की सोचकर मैंने उसकी ओर रुख किया। मुझे अपनी और आता देखकर उसने खेलना एकदम से बंद कर दिया और सहमी हुई नज़रों से मुझे देखने लगी। मैंने उसके पास बैठकर ज्यों ही उसके सर पर प्यार से हाथ फेरा। वह एक दम हड़बड़ाहट में उठ खड़ी हुई। उसके हाथों की मिट्टी चारों ओर बिखर गयी। मैं कुछ बोलती इससे पहले ही वह डरते हुए वहां से तेजी से दौड़ कर भाग गयी।

‘बच्चे मूडी होते हैं। अजनबी हूँ सो घबरा गयी होगी।’, यह सोचते हुए मैं वापस अपनी जगह पर आ गयी। पर ना जाने क्यूँ उसके बारे में जानने की जिज्ञासा में मैंने एक बच्चे को आवाज़ दी और अपने पास बुलाया। पार्क के कई बच्चों से दोस्ती हो गयी थी। बच्चा बुलाते ही दौड़ा-दौड़ा चला आया।

‘अभी थोड़ी देर पहले वह छोटी सी लड़की जो उस कौने में खेल रही थी, क्या तुम उसे जानते हो? मैंने उसे पहले कभी यहाँ देखा नहीं, क्या वह यहाँ नयी है? तुम लोग उसे अपने साथ क्यूँ नहीं खिला रहे थे और वह इतना डर क्यों रही थी?’ एक ही सांस में न जाने कितने सवाल पूछ डाले मैंने।

बच्चा थोड़ा सकपकाया हुआ बोला, ‘ रोssशनी, क्या आप रोशनी के बारे में पूछ रहे हो दीदी? वह जो मिट्टी में खेल रही थी? मैंने सहमति में सर हिला दिया और कहा, ‘हाँ! मैं उसके पास भी गयी पर वह भाग कर चली गयी।’

बच्चा घबराया हुआ सा बोला, ‘दीदी! आपको उसके पास नहीं जाना चाहिए था। मम्मी कहती है, उसे कोई भयंकर बीमारी है। हम उसके साथ खेलेंगे तो वह हमें भी बीमार कर देगी, इसलिए हममें से कोई भी उसके पास नहीं जाता। कल भी वह हमारे ग्रुप के पास आ गयी थी तो हमने उसे भगा दिया। आप भी उसके पास मत जाया करो।’ यह कहकर बच्चा तो दौड़ कर चला गया और अपने ग्रुप में शामिल होकर फिर से खेलने लगा पर मेरे दिल और दिमाग में न जाने कितने सवाल छोड़ गया।

मैं एकदम निश्चेत सी बैठे कभी उस ग्रुप को तो कभी उस कौने को देखती रही जहाँ अब रोशनी की जगह बस अँधेरा ही अँधेरा नज़र आ रहा था।
 
मैंने आसपास के लोगों से मालूम किया तो पता चला उसके मम्मी, पापा और उसे एड्स है। सब लोग उसके परिवार से दूर रहते हैं। यहाँ तक कि उन पर कॉलोनी को खाली करने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
 
मेरे मन में बहुत से सवाल उठे, ‘इतनी सी बच्ची जो बिल्कुल निर्दोष है उसे इतनी भयानक बीमारी? ऊपर से इस तथाकथित पढ़े लिखे समाज की अज्ञानता और संकीर्णता से भरी यह मानसिकता जो पीढ़ी दर पीढ़ी थोपी जा रही है। आखिर क्यों?’

मैंने तुरंत निश्चय किया कि उस परिवार की मदद करुँगी और एड्स को लेकर जो भी भ्रम और भ्रांतियां लोगों के दिमाग में हैं, उसे दूर करुँगी। उन्हें बताऊँगी कि एड्स छूने से नहीं होता। साथ-साथ उठने-बैठने, खाना खाने, एक दूसरे के कपड़े इस्तेमाल करने से भी एड्स नहीं फैलता। बल्कि एड्स के मरीज के प्रति नम्र व्यवहार जरुरी है ताकि उसकी हिम्मत और हौंसला बना रहे और वह भी एक आम जीवन जी सके। रोशनी की किरणें उसके जीवन में सदा बिखरी रहे और कभी अँधेरा न हो।
 
By Monika Jain ‘पंछी’

Saturday, February 6, 2016

Childhood Story in Hindi

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मैं एप्पल चोर

ऐसा भी नहीं था कि मुझे एप्पल खानी थी। ऐसा भी नहीं था कि मन लालची था। ऐसा भी नहीं था कि पहले कभी बिना पूछे किसी की चीज उठाई हो। अपने एग्जाम पेपर्स में कोई सवाल न आने पर एक पल को भी आगे-पीछे, बाएं-दायें न झाँकने वाली लड़की को चीटिंग क्या होता है यह नहीं पता था। दूसरों की चीजों या भौतिक वस्तुओं की ओर कभी कोई खासा आकर्षण रहा ही नहीं तो चोरी क्या होती है यह भी कैसे पता होता? लेकिन जाने क्यों उस दिन राह में चलते हुए भैया के बेफिक्री और मजाक में बार-बार कहे शब्द 'तू वहां से एप्पल नहीं उठा सकती' मैंने बड़ी गंभीरता से ले लिए थे। भैया को खुद भी कहाँ अहसास होगा कि मैं उन शब्दों के विपरीत को साकार कर ही दूंगी। तब उम्र भी क्या थी, यही कोई 6-7 साल और भैया भी तो सिर्फ दो साल ही तो बड़ा था, पर बार-बार ये शब्द सुनकर लगा जैसे मेरे साहस को चुनौती दी जा रही हो। जैसे मेरी निर्भयता को ललकारा गया हो। हालाँकि तब नन्हा और अबोध मन यह कहाँ जानता था कि किसी की चीज को बिना पूछे चुपके से उठा लेना साहस और निर्भयता का काम नहीं होता, तब तो बस कानों में यही शब्द गूँज रहे थे कि 'तू वह एप्पल नहीं उठा सकती' और मैं बिना कुछ और सोचे तुरंत उस ठेले के पास गयी और एक एप्पल उठा लिया।

ठेले वाला आसपास कहीं ओर खड़ा था और उसने मुझे ऐसा करते देख लिया था तो वह वहीँ से चिल्लाया और इधर सारा साहस और निर्भयता एक ही झटके में वहां छोड़कर हम ऐसे दौड़े जैसे कोई मेराथन जीतना था। अपने मोहल्ले के खेलों में अपनी परफॉरमेंस की वजह से मुझे बिजली और भैया को बादल का ख़िताब मिला हुआ था इसलिए ठेले वाला रेस में हमसे जीत तो नहीं सकता था पर उसे पीछे आता हुआ देखकर एप्पल वहीँ छोड़कर कुछ देर और हमारी दौड़ जारी रही। एप्पल वाले को तो उसकी एप्पल मिल गयी थी पर उस दिन मेरे मासूम मन ने बहुत कुछ खो दिया था।

भैया को मुझे ब्लैकमेल करने का एक अच्छा-खासा बहाना मिल गया था। अब जब-जब भैया को मुझसे कोई बात मनवानी होती थी वह यही कहकर मनवाता कि वह मम्मी-पापा को एप्पल चोरी वाली बात बता देगा और कई दिनों तक उसकी ब्लैकमेलिंग सफल रही। पर उसे शायद नहीं पता था कि उसकी बात को चैलेंज की तरह मानकर बीच बाजार में किसी ठेले से एप्पल उठा लेने वाली लड़की अपनी यह करतूत खुद सबको बताने का साहस भी तो कर सकती है। और फिर क्या...मैंने सारी घटना खुद ही मम्मी-पापा को सुना दी और एक बड़ा बोझ मन से उतर गया।

मम्मी-पापा ने क्या कहा वह कुछ याद नहीं पर बचपन की यह घटना कितनी ही हल्की-फुल्की और हंसी मजाक में उड़ा देने वाली ही क्यों न हो इससे कितने सारे सबक सीखे जा सकते हैं। सबसे पहला तो यही कि किसी के भी कहने में आकर, या किसी भी उन्माद में बिना सोचे-समझे हम कोई काम नहीं करें। वह कोई भी कार्य साहस और निर्भयता कभी नहीं हो सकता जिससे हमारी आत्मा पतन के मार्ग पर धकेलता हो। दूसरा अपनी गलतियों, अपराधों और दोषों को स्वीकार करने में हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। सच सिर्फ एक बार ही बोलना होता है पर झूठ और अपराध बोध को तिल-तिल कर जीना पड़ता है और तीसरा यह कि भले ही दूसरे दोषी रहे हों तब भी किसी पर दोषारोपण किये बगैर जब अपने हिस्से की गलतियों की जिम्मेदारी हम खुद लेने लगते हैं तो परिस्थितियां और परिणाम न भी बदल पायें पर उनका सामना करने की हिम्मत जरुर आ जाती है। क्योंकि शिकायतें और अपेक्षाएं अक्सर जीने नहीं देती।

Monika Jain ‘पंछी’
(06/02/2016)

Feel free to add your childhood incidents or your views about this story.

Friday, February 5, 2016

Essay on Salvation in Hindi

Essay on Salvation in Hindi. Mukti par Nibandh. Samyak Drishti, Gyan, Charitra, Right Vision, Knowledge, Conduct. Nirvana, Moksh, Liberation, Sthitpragya. सम्यक ज्ञान, दर्शन, चरित्र, मुक्ति, मोक्ष.
 
मन विजय करे... 

यूँ तो यह पूरा ब्रह्माण्ड ही रहस्मयी है और हमारा जीवन भी अगर हम ध्यान दें तो कितने सारे रहस्यात्मक अनुभवों का साक्षी बनता है. ऐसे ही कई अनुभवों में कल का दिन भी कुछ अद्भुत अनुभवों के नाम रहा. ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ, असुरक्षा, अहंकार और शक किसी व्यक्ति को किस स्तर तक नीचे गिरा सकते हैं इसके कुछ नमूने देखे. उन्हीं में से एक था...जिस लड़की के शब्दकोष में गालियों के नाम पर जानवरों को बदनाम करने वाले सिर्फ एक दो शब्द ही विद्यमान थे उसे एक मोहतरमा ने स्त्री सूचक कई गालियों से परिचय करवाया.
 
खैर! यह सब कुछ इतना अद्भुत नहीं था. जो सबसे अद्भुत चीज थी वह यह थी कि जिन बातों को सुनकर मुझे बहुत अधिक गुस्सा, तनाव या रोना आना चाहिए था उन बातों पर मैं मुस्कुरा रही थी. कोई संघीन मिथ्या आरोपों और अपशब्दों के पटाखे और बम छोड़ रहा था और मैंने चेहरे और होंठों पर फूल खिल रहे थे. अचानक खुद को चिमटी काटकर देखा कि कहीं यह कोई सपना तो नहीं...या फिर कहीं बुद्ध, जीसस या महावीर की आत्मा तो कुछ देर को प्रवेश नहीं कर गयी है. :p क्योंकि एक सीमा से पार हो जाने के बाद, या ऊपर तक भर जाने पर मेरे गुस्से का ज्वालामुखी फूट ही पड़ता है. और इन मायनों में क्रोध मेरी एक बड़ी कमजोरी भी है. लेकिन कल कुछ भी नहीं भर रहा था. बल्कि सब कुछ खाली और शांत होते हुए लग रहा था. मैं लगातार मुस्कुरा रही थी...अभी भी मुस्कुरा रही हूँ. :) और सब कुछ विपरीत होने के बावजूद भी मैं बहुत ख़ुश थी. क्योंकि एक बार फिर यह विश्वास गहरा हुआ कि मन पर विजय ही सबसे बड़ी विजय है. इस विजय के मार्ग में जो सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे दूर करने के लिए प्रकृति कब से संकेत दे रही थी...कल हिम्मत जुटाकर उसे भी दूर कर पायी. क्योंकि मोह और अहंकार अक्सर हमें वह नहीं देखने देता जो सच होता है.
 

महावीर के जीवन का एक किस्सा है. एक बार वे एक वन में गहरे ध्यान में लीन थे. तभी वहां एक ग्वाला अपने बैलों के साथ आया. महावीर को कुछ समय के लिए अपने बैलों का ध्यान रखने की कहकर वह कहीं चला गया. महावीर ध्यान में थे और उन्हें इस बारे में कुछ पता ही नहीं था. जब ग्वाला वापस आया तो बैल वहां नहीं थे. उसने समझा कि महावीर ने उसके बैल कहीं छिपा दिए हैं और क्रोध में आकर उनके कानों में कीले ठोक दिए. महावीर आत्मज्ञानी थे इसलिए समताभाव से चुपचाप सब देखते रहे. उन्हें यह भी स्मरण था कि अपने ही किसी पिछले जन्म में उन्होंने एक राजा के रूप में एक छोटी सी गलती के लिए इसी ग्वाले को जो शायद एक गायक था के कानों में गर्म शीशा पिघलवाकर डाल दिया था.

अगर राग-द्वेष और ऐसे ही सभी विकारों से दूर होकर अपने मन से कोई भी सहयोग दिए बिना हम किसी चीज को सिर्फ साक्षी या दृष्टा की तरह देखते हैं तो इसका अनुभव सच में अवर्णनीय और अद्भुत है. कई लोगों के लिए साक्षी बनने या दृष्टा बनने की टर्म शायद नयी हो, उनके लिए हम एक उदाहरण लेते हैं : जैसे हमारे पाँव या हाथ पर कहीं चोट लगी. 99% लोग दर्द से कराहने लगेंगे. कई जोर-जोर से रोने लगेंगे. लेकिन इस स्थिति में अगर कोई साक्षी बनता है तो वह सिर्फ उस दर्द को द्रष्टा बनकर देखेगा. वह अपने मन से इसे कोई सहयोग नहीं देगा. जैसा है सिर्फ वैसा देखेगा...मन को शरीर से बिल्कुल अलग करके..जैसे दर्द सिर्फ शरीर के उस हिस्से को हो रहा है...मुझे नहीं हो रहा है. जब हम ऐसा करने में संभव हो पाते हैं तो हमें दर्द का अहसास नहीं होता. शरीर और उसका दर्द हमें खुद से अलग जान पड़ता है. यही मुक्त होना है...यही स्वतंत्र होना है. और यह साक्षी बनने की प्रक्रिया हर एक घटना पर लागू की जा सकती है. यही ध्यान है, यही जागरूकता है, यही सम्यक दृष्टि है. जब यह अपने ही मन पर हो तो सामायिक बन जाती है. और यह सम्यक दृष्टि ही हमें सम्यक ज्ञान तक ले जाती है. यह सम्यक ज्ञान ही सम्यक आचरण बनता है और यह सम्यक आचरण ही हमें मुक्ति मने परम स्वतंत्रता की ओर ले जाता है. :)

By Monika Jain ‘पंछी’

Tuesday, February 2, 2016

My Childhood Essay in Hindi

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मैं घुमक्कड़...
 
बचपन से ही मुझे पैदल घूमने का बहुत शौक रहा है. मम्मा बताती है कि जब मैं दो साल की थी तो अपनी ही एक हम उम्र सहेली के साथ बिना किसी को खबर पड़े चुपके से घूमने निकल जाया करती थी. सड़क पर चलते-चलते हम जाने कहाँ-कहाँ पहुँच जाते थे . मतलब हम आये दिन खो जाते थे और दोनों परिवारों में कोहराम मच जाता था. बाद में हमारे बड़े भाइयों को पहरे पर बैठाया जाता था, तो भी हम कभी-कभी जाने कैसे चकमा देकर निकल ही जाते थे.
 
तब हमारा घर बन रहा था और मैं अपनी सहेली से अक्सर कहती, ‘चल, नए घर घूमने चलें’. माँ और भैया यह भी बताते हैं कि हम एक जोड़ी चप्पल पाँव में पहनकर जाते थे और एक जोड़ी जूते हाथ में ले जाते थे :p. अब इसके पीछे क्या लॉजिक रहा होगा यह तो नहीं पता, लेकिन हाँ हमारा यह घूमना तब छूटा जब एक दिन कुछ डॉग्स हमारे पीछे पड़ गए, तब हाथ वाले जूते वहीँ छूट गए और कुछ लोगों की मदद से हम अपने-अपने घरवालों को मिल गए. मैं सहेली की मम्मी की गोद में और सहेली मेरी मम्मी की गोद में...वाह! क्या सीन रहा होगा :p और फिर रोते-रोते, डांट खाते हुए घर पहुँचे होंगे. :) उसके बाद मेरा परिवार नए घर में शिफ्ट हो गया...और उस सहेली के साथ घुमक्कड़ी बस वहीँ तक रही. हालाँकि बाद में फिर एक बार हम दो साल साथ-साथ पढ़े.
 
कुछ भी याद न रहने वाली उम्र के उस दौर के बाद भी किसी ना किसी रूप में यह घुमक्कड़पन हमेशा जारी रहा. जब किसी का साथ रहा तब भी और जब न रहा तब भी. इनफैक्ट मैं तो पढ़ाई भी घूम-घूम कर किया करती थी. तब का एक पड़ोसी दोस्त बताता है कि वह और उसका एक मित्र जो दोनों ही मेरे क्लासमैट्स थे मुझे किताब हाथ में लेकर छत पर लगातार घंटों घूमते देखकर उनका सर चकरा जाता था. छत पर ही एक दिन वह उसके दोस्त का प्रपोजल कार्ड लेकर आया था...और बड़ी मासूमियत से मैंने उसी समय उसे वापस लौटा दिया...और उस पड़ौसी मित्र ने कहा, कोई नहीं वह यूज़ कर लेगा इस कार्ड को किसी लड़की को देने के लिए. :p पता नहीं उसने उसके दोस्त को जाकर क्या कहा होगा. :)
 
मुझे दिन में सोने की आदत कभी नहीं रही इसलिए स्कूल से आने के बाद दिन में जब घर में सब को सोता हुआ देखती थी तो मन न लगने के चलते पूरे घर में पैर पटकते हुए चक्कर लगाती रहती थी और इंतजार करती थी कि कोई उठ जाये. पड़ोस की लड़कियों के साथ भी मोर्निंग और नाईट वाक के कई दौर चले. यहाँ तक कि लव रिलेशन की भी सबसे खूबसूरत चीज लगती है...रात के अँधेरे में हाथ पकड़ कर लम्बी सैर पर जाना, तब ऐसा लगता है कि बस चलते रहें, चलते रहें, वापस कभी लौटना ही न हो….तुम भी चलो, हम भी चलें...चलती रहे ये ज़िन्दगी की तर्ज पर. :)
 
खैर! आज अचानक मेरा मन किया जानने का कि अब तक मैं कितने किलोमीटर चल चुकी हूँ. अगर यह पता चल जाता तो शायद कोई रिकॉर्ड मेरे नाम भी हो जाता. :p ;)
 
By Monika Jain ‘पंछी’
 
How is this essay about childhood memories?

Monday, February 1, 2016

Women's Day Quotes in Hindi

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Women’s Day Quotes
 
  • ‘शोषण, उत्पीड़न, दमन, भेदभाव, पुरुष प्रधानता’ नारी परतंत्रता के इन तमाम रूपों से मुक्ति पाने के लिए कई वर्षों से स्त्रियों का संघर्ष जारी है. अच्छा लगता है यह देखना कि नारी स्वतंत्रता, सम्मान और अधिकारों की बातें हो रही है. पितृ सत्ता के उन्मूलन की बातें हो रही है. कई पुरुष सच्चे सहयोगी बनकर आ रहें हैं. पर नारी स्वतंत्रता के बोये इन पौधों के बीच उग आ रही उस खरपतवार का क्या, जो बढ़ चढ़ कर नारी अधिकारों के पक्ष में बोल तो रहे हैं पर उनके ज़ेहन में तो नारी आज भी केवल उनकी कामेच्छाओं को पूरा करने वाला हाड़-मांस का शरीर भर है. बल्कि नारी विमर्श को तो उन्होंने महिलाओं को आकर्षित करने के एक नए हथकंडे के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. इस खरपतवार को पहचानना मुश्किल जरुर है पर नामुमकिन नहीं. लेकिन समस्या वहां पैदा होती है जहाँ नारी खुद भी स्वयं को एक देह से ऊपर नहीं समझ पाती, और यह समस्या अनपढ़ या गाँव की महिलाओं की नहीं बल्कि पढ़ी-लिखी शहरी मॉडर्न महिलाओं की ज्यादा है. नारी तब तक स्वतंत्र हो ही नहीं सकती जब तक वह अपने विचारों, अपनी बुद्धि, अपनी क्षमताओं और अपने गुणों को अपने बाहरी रूप सौन्दर्य से ज्यादा महत्त्व ना देने लगे. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • लड़का है या लड़की...फेसबुक पर आने के बाद से किसी की पोस्ट्स अच्छी लगने पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजते समय यह कभी दिमाग में नहीं आता था (था इसलिए क्योंकि कुछ समय से पोस्ट्स वाला आधार भी छोड़ चूकी इसलिए फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना भी लगभग छूट गया. क्योंकि सबको दोस्त मान पाना मेरा सपना है...पूरे हो न हो पर सपने सबसे बड़े वाले देखती हूँ मैं :p)बचपन से खुद को लड़की कम इंसान ज्यादा समझा है और दूसरी ओर स्वभाव भी ऐसा है कि कोई लड़कियों वाले जबरदस्ती के ताने सामान्यतया मार नहीं पाता. लेकिन जब एक एक्सट्रीम वाले कुछ लड़के तो अपनी उल्टी-सीधी हरकतों से बार-बार लड़की होने का अहसास कराते हैं और दूसरे एक्सट्रीम वाले लड़के लोग सब कुछ पढ़ते हुए, फ्रेंड रिक्वेस्ट ओपन होते हुए, कमेंट्स में बात करते हुए यह अपेक्षा घनघोर रूप से लगाए हुए रहते हैं कि उनको फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना मेरा ही परम धर्म है तो भाईयों अपना भी स्त्रीत्व जाग उठता है :p. मुख्य बात (सिर्फ पुरुष नहीं सबसे) : सहज को सहज ही रहने दो. चाहती तो हूँ एक ऐसा युग जहाँ जीवन मात्र को सब जीवन समझे...पर उससे करोड़ों सीढियाँ पहले क्या ऐसा युग दोगे...जहाँ स्त्री स्वयं को और बाकी सब उसे इंसान समझ सके? (प्रकृति द्वारा प्रदत्त भेद का सम्मान करते हुए.) ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • अच्छी-खासी, भोली-भाली, गंभीर-मासूम टाइप पोस्ट पे थर्ड ग्रेड शायरी चिपकाकर इश्क फरमाने वालों! भगवान करे तुम्हें कोई ऐसा मिले जो सुबह से शाम, शाम से रात और फिर रात से सुबह तक इतनी शायरी सुनाये, इतनी शायरी सुनाये कि तुम ये जगह-जगह शायरी चिपकाना जन्मजन्मान्तरों तक भूल जाओ. ~ Monika Jain ‘पंछी’
 
How are these quotes about women’s day?

Women Quotes in Hindi

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Women Quotes
  • कई लोग कहते हैं, आजकल लड़कियां भी कम नहीं है. सहमत हूँ...कम नहीं है, पर हर अपराध में लड़कों का प्रतिशत लड़कियों से कई गुना ज्यादा है...बहुत ज्यादा. कल ही अख़बार में एक खबर पढ़ी कि एक लड़की की सहेली के भाई ने उसकी शादी वाले दिन जब वह तैयार होने के लिए पार्लर के यहाँ गयी उस पर एसिड फैंक दिया...कारण उसका उस लड़के के शादी के प्रपोजल को एक्सेप्ट न करना. ऐसी न जाने कितनी ख़बरों से अखबार भरे पड़े हैं. मार-पीट, बलात्कार, हत्या, एसिड अटैक, इस्तेमाल करके छोड़ देना, छेड़छाड़, फब्तियां कसना और न जाने कितनी तरह से महिलाओं का उत्पीड़न मामूली सी बातें है, जिन्हें लड़कों ने अपना एकाधिकार क्षेत्र समझ रखा है. 99 % ऐसे मामले लड़कों के नाम पर है, और अगर कोई इक्की दुक्की लड़की भी ऐसा कुछ कर देती है तो लड़कों का ईगो हर्ट हो जाता है, उनके एकाधिकार का हनन हो जाता है. इसलिए सब चिल्लाने लगते हैं कि लड़कियां भी कम नहीं है. अगर लड़कियां भी ऐसा करती हैं तो वे बिल्कुल अपराधी हैं, सजा की हकदार हैं. सब लड़के एक से नहीं होते ये भी मानती हूँ, पर कुछ भी कहने से पहले आंकड़ों पर एक नज़र जरुर डालिए. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • आज कुछ लड़कियों ने कुछ लड़कों की लगातार घूरने और पीछा करने की वही परंपरागत समस्या शेयर की. पेरेंट्स को इसलिए नहीं बता सकती क्योंकि पेरेंट्स को बतायेंगी तो घर से निकलना बंद या कम करवा देंगे. उन्हें जो समाधान सुझाना था वह तो सुझा दिया. पर कब से यही सोच रही हूँ कि ये घूरने वाले लड़कों की दुर्बुद्धि तो समझ आती है, पर ये उल्टी गंगा बहाकर ऐसे असामाजिक तत्वों को बढ़ावा देने वाले पेरेंट्स की समझ समझ नहीं आती. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • किसी के पति का किसी और महिला से अफेयर है तो खुद पत्नी द्वारा भी सबसे पहले दोष उस दूसरी महिला को दिया जाएगा. उसे डायन, कुल्टा और न जाने क्या-क्या कहा जाएगा. वह महिला बेशक गलत है, पर सबसे पहला और सबसे बड़ा अपराधी यहाँ पर खुद उसका पति है. इसी तरह जब शादी करके ससुराल में आई कोई लड़की अगर माँ-बेटे के रिश्तों में फूट डालने का काम करती है और इसमें कामयाब भी हो जाती है, तो यहाँ माँ द्वारा सारा दोष बहु को दिया जाता है, पर यहाँ भी बेटे की गलती ज्यादा है. मेरा मानना है कि अगर अपना ही सिक्का खोटा हो तो दूसरे को दोष देना व्यर्थ है...और अगर हम खुद बुराई को पोषित करने में भागीदार हैं तो हमें हक़ नहीं बुराइयों के खिलाफ़ आवाज़ उठाने का. ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यदि नारी वर्तमान के साथ भविष्य को भी अपने हाथ में ले ले तो वह अपनी शक्ति से बिजली की तड़क को भी लज्जित कर सकती है. ~ डॉ. रामकुमार वर्मा / Dr Ramkumar Verma
  • यह बहुत महत्वपूर्ण है कि महिलाएं अपने अन्दर का आत्मविश्वास पुरुषों में न ढूंढे. मुझे नहीं लगता है कि एक पुरुष किसी महिला को परिभाषित कर सकता है. महिला को यह काम खुद ही करना होगा. ~ जेसिका सिम्पसन / Jessica Simpson
  • जिस घर में सद्गुण सम्पन्ना नारी सुखपूर्वक निवास करती है, उस घर में लक्ष्मी निवास करती है, सैकड़ों देवता भी उस घर को नहीं छोड़ते हैं. ~ महर्षि गर्ग / Maharishi Garg 
  • यदि कहीं कठोर अत्याचार और अनाचार के बदले में भी स्नेह हो सकता है तो वह स्त्री में ही हो सकता है. ~ शरत चन्द्र / Sharat Chandra 
  • किसी भी राष्ट्र की स्त्रियों की उन्नति या अवनति पर ही उस राष्ट्र की उन्नति या अवनति निर्भर करती है ~ अरस्तु / Arastu
  • नारी की करुणा अंतर्जगत का उच्चतम विकास है, जिसके बल पर समस्त सदाचार ठहरे हुए हैं. ~ जयशंकर प्रसाद / Jaishankar Prasad
 
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